“अन्ना!………फतेहपुर आपके साथ है।“
‘सीढ़ियां उनके लिए बनी हैं जो छत पर जाना चाहते हैं,
है आसमां पे जिनकी नजर, उन्हें रास्ता खुद बनाना है।’
बुधवार को नगर के दयानंद इंटर कालेज के प्रधानाचार्य ओम प्रकाश वाजपेई ने बुजुर्ग जब्बार को गांव से बुलवाकर प्रमाणपत्र दिया तो खुशी से उनकी आंखों में आंसू आ गए। बच्चों ने उनके जज्बे को सलाम करते हुए तालियों की ध्वनि से बधाई दी।
(समाचार साभार : अमर उजाला फतेहपुर )
भरी दोपहरी जब हर कोई अपने काम में व्यस्त था। अचानक एक जोरदार के धमाके ने सबको दहला दिया। ऐसा लगा जैसे बम फट गया हो। लोगों ने घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। मंजर देखा तो दिल दहल गया। कालका मेल के करीब दर्जन भर डिब्बे बुरी तरह से क्षतिग्रस्त थे। कुछ हवा में लटके थे तो कुछ पिचके थे। यात्रियों में कोहराम मचा था सभी जान बचाने की दुहाई दे रहे थे। हादसे की खबर पल भर में ही आसपास के दर्जनों गांवों में फैली तो ग्रामीणों ने घटनास्थल की ओर दौड़ लगा दी।
फतेहपुर के मलवां स्टेशन पर कालका मेल के क्षतिग्रस्त होने के बाद लगभग चार सौ से अधिक लोग फंसे थे। एसी कोच (ए1, ए2,बी1, बी 2 बी 3) समेत कुल 11 डिब्बों में मंजर दिल दहलाने वाला था। किसी का हाथ लटक रहा था तो किसी की केवल गर्दन दिखाई दे रही थी। कई यात्रियों का शरीर तो कुचल गया था। हादसे की खबर पाकर मलवां क्षेत्र के ओखरा कुंवरपुर, बेहटा, उमरगहना, मलवां, भग्गा का पुरवा चक्की गांवों के सैकड़ों लोग मौके पर पहुंच गये। ट्रैक्टर, वैन, पिकअप समेत वाहनों से पहुंचे ग्रामीणों ने पहुंचते ही राहत कार्य शुरू कर दिया। जिस बोगी से चीख पुकार मचती उसी ओर ग्रामीणों का जत्था पहुंचकर लोगों की जान बचाने में जुट जाता। प्रशासन के पहुंचने से पहले ही लगभग सौ लोगों को ट्रेन से सुरक्षित निकालकर लोगों ने घरों में शरण दी।
प्रशासन की टीम का राहत कार्य शुरू हुआ तो एएसपी निधि सारनाथ ने गांववालों को दूर जाने को कहा। इस पर कुछ युवकों की उनसे कहासुनी हो गयी। इस पर यात्रियों ने युवकों का समर्थन किया और कहा …..कि गांववाले न होते तो वे भी काल के गाल में समा चुके होते। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी बैकफुट हुए और गांववाले वायु सैनिकों के आने के बाद उनके साथ देर रात तक राहतकार्य में जीजान से जुटे रहे।
राहत कार्य में महिलाओं ने भी हाथ बंटाया। गंभीर रूप से घायल महिला यात्रियों को जब गांववालों ने अपने घरों में शरण दी तो घर की महिलाओं ने घायलों की अपने स्तर से मरहम पट्टी की। छोटे बच्चे यात्रियों का बैग कंधे पर टांगकर उन्हें सुरक्षित स्थान तक ले गये।
ट्रेन हादसे की खबर मिलते ही फतेहपुर की आधा दर्जन से अधिक फैक्ट्रियों में शाम की शिफ्ट शून्य घोषित कर दी। लक्ष्मी काटसिन के मैनेजर एसडी यादव ने करीब दो हजार कर्मचारियों को राहत कार्य के लिए रवाना कर दिया। राधे-राधे, सिग्मा शारदा स्टील एकता डेरी त्रिवेदी इंजीनियरिंग कालेज के सैकड़ों कर्मचारी देर रात तक राहत कार्य में जुटे रहे। स्कूलों की बसें भी राहत कार्य में जुटी। समाजसेवी एंबुलेंस के साथ सबसे पहले पहुंचने वालों में थे। कई चक्कर लगाकर घायलों को सदर अस्पताल पहुंचाया।
(समाचार साभार : दैनिक जागरण फतेहपुर डेस्क )
रेलवे ने हादसे से संबंधित जानकारी देने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं जो इस प्रकार हैं: –
शाम 6:00 मिली हादसे में मरने वालों की सूची-
जिला अस्पताल में भरती घायलों की सूची
साभार : स्थानीय विभिन्न मीडिया ब्यूरो , दैनिक जागरण , अमर उजाला , हिन्दुस्तान आदि |
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इसी तरह चौक चौराहे पर बजरंगियों दिग्विजय सिंह का पुतला आग के हवाले किया। और दोनो ही स्थानों पर इनके साथ्रा आम लोग भी खड़े दिखाई दिए। इसी क्रम में पटेल नगर चौराहे पर विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने केंद्र के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार करते हुए धरना प्रदर्शन किया। शाम तक लोगों के मन लावे की दहक रहे थे। लिहाजा शाम को सियासी दलों व शिक्षकों तथा अन्य लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर पटेल नगर चौराहे से पैदल मार्च निकाला। इसमें बड़े बड़ों के अलावा महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए। भारत माता की जय, नहीं चलेगा भ्रष्टाचार, बंद करो अब यह व्यापार, जै हिंद, वंदे मातरम के नारे लगाते हुए आगे बढ़े। इतना ही नहीं शाम को भाजपाइयों ने नहर कालोनी में धरना देकर बाबा और अनशन कर रहे लोगों पर की पुलिस की कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की। 


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फतेहपुर का पेज
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गुलामी सबसे अधिक भयावह तब होती है, जब वह स्वभाव बन जाती है। स्त्रियों के अंदर पराधीनता का बोध ही नहीं है, इसलिए स्त्री विमर्श का पहला काम है पराधीनता का बोध करना और दूसरा काम पराधीनता के कारणों का बोध कराना है। यह हो जाए तो पराधीनता के कारणों की खोज करना। इसके बाद इन्हें दूर करने का प्रयास करना। यह बात रविवार को फतेहपुर शहर में स्थित महात्मागांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित ‘समकालीन साहित्य एवं स्त्री विमर्श विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी’ में जेएनयू, नई दिल्ली के भारतीय भाषा केंद्र के प्रोफेसर व अध्यक्ष डा.मैनेजर पांडेय ने नारी सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कही।
स्त्रियों की दशा पहले भी वही थी जो आज है बस प्रताड़ना का रूप भर बदल गया है। स्त्री के कष्ट को कमरों में बैठ कर या उच्च वर्ग की महिलाओं को देखकर नहीं समझा जा सकता है उसे समझना है तो गाँव , गली की नारी से या मेहनत मजदूरी करने वाली औरत से अथवा सम्मान या अधिकार के लिए संघर्ष कर जी रही महिला से मिलना हौगा। स्त्री की गुलामी खतम हो इसके लिए उसकी सोच में बदलाव हो और सोच में बदलाव के लिए जरूरी है कि नारी शिक्षित हो।
महात्मा गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग द्वारा समकालीन साहित्य और स्त्री विमर्श विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन वक्ताओं ने उक्त विचार रखे। राष्ट्रीय संगोष्ठी का उदघाटन वरिष्ठ हिंदी आलोचना के स्तंभ जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में भारतीय भाषा केन्द्र के प्रोफेसर व अध्यक्ष डा. मैनेजर पांडेय व कालेज के प्राचार्य डा. अवधेश कुमार सिंह ने किया। माँ सरस्वती, महात्मा गांधी और महादेवी वर्मा के चित्रों पर माल्यार्पण कर संगोष्ठी की शुरूआत की गयी ।
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प्रमोद तिवारी
मुन्नवर राणा इधर पता चला है कि ‘फतेहपुर महोत्सव’ में आयोजित होने वाले कवि सम्मलेन के आयोजन के लिए न्योते जाने वाले कवियों के नाम फाइनल हो गये। 30 जनवरी को आईटीआई परिसर में देश के जाने माने कवियों का संगम होगा। महफिल को खास बनाने के लिए कवियों को आमन्त्रण भेजा जा चुका है। 30 जनवरी को महोत्सव में हास्य व्यंग्य व सांस्कृतिक रंगों के बीच कवियों का भी संगम होगा।
आने वाले कवियों में कोलकाता से मुनव्वर राणा, राजस्थान से अनामिका अंबर, सबीना अदीब, संदीप शर्मा, राजेन्द्र पंडित, अशोक साहिल, कमलेश शर्मा, सहारनपुर के नवाज देव बंदी, वाराणसी से अनिल चौबे, अशोक पंडित तथा कानपु के प्रमोद तिवारी आदि भी हैं। कवि सम्मलेन के मंच पर संचालन का भार संभालेंगे इमरान प्रतापगढ़ी।
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| मालिनी अवस्थी |
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| मनोज तिवारी |
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| अंकिता मिश्रा |
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| फतेहपुर महोत्सव |