हममें है दम, हम बनायेंगे सांसद

युवा ही इस चुनाव के भाग्य विधाता होंगे। साढ़े सात लाख से अधिक युवाओं के मजबूत हाथ जिधर चाहेंगे चुनाव का रुख उधर ही मुड़ेगा। यह कहा जाये कि युवाओं की पसंदगी वाला प्रत्याशी ही संसद पहुंचेगा तो गलत नहीं होगा। आखिर पंद्रह लाख इकतालीस हजार मतदाताओं वाले इस संसदीय क्षेत्र में अठारह से उनतीस वर्ष के युवाओं की संख्या साढ़े तीन लाख से अधिक पहुंच रही है। उनतालीस वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं को मिला दिया जाये तो संख्या चार लाख और बढ़ जायेगी।

कहते हैं कि युवा ही देश की ताकत हैं और यह ही कल के भविष्य ही नहीं बल्कि खेवनहार हैं। हमें देखना यह है कि इस चुनाव में युवा अपनी स्पष्ट भूमिका की ओर बढ़ पा रहा है या नहीं। जागरुकता यदि ऐसी हो जाये कि हमें स्वच्छ छवि का ईमानदार व निष्ठावान सांसद चाहिए तो निश्चित तौर पर युवा किसी को भी देश की सर्वोच्च पंचायत में पहुंचाने की दमखम रखते हैं। मतदाता सूची के आयु वर्ग के आंकड़े चौकाने वाले हैं। पंद्रह लाख इकतालीस हजार मतदाताओं में से चालीस वर्ष से कम मतदाताओं की संख्या साढ़े सात लाख पहुंच रही है। अस्सी वर्ष से अधिक के मतदाता तो मात्र तेईस हजार की संख्या में बचे हैं। ऐसा माना जाता है कि इसमें से बीस फीसदी मतदाता ही वोट डालने पहुंचते हैं। सत्तर से उन्यासी वर्ष के बीच में मतदाताओं की संख्या तिहत्तर हजार पांच सौ सरसठ है।

साठ से उनहत्तर वर्ष के बीच एक लाख उनतालीस हजार मतदाता हैं। पचास से उनसठ वर्ष के बीच के मतदाताओं की संख्या दो लाख तेरह हजार है। यह कहा जाये कि दादा, बाबा के मतदाताओं से नहीं बच्चा के वोटों से ही प्रत्याशी संसद पहुंचेंगे तो गलत नहीं होगा। युवा वर्ग की भारी संख्या से सभी दलों के प्रत्याशियों ने भी अपना चुनावी रुख युवाओं की ओर मोड़ दिया है।

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

आप सभी देशवसियों को हिंदू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !
नया वर्ष आपके लिये सुख और सम्मृधि से भरपूर हो!
नव वर्ष संवत २०६६ – हिन्दी नव वर्ष २००९

फतेहपुर :शिखर बंध मन्दिर – शहर का एकलौता जैन मन्दिर

रेलवे स्टेशन के समीप जैन धर्मावलम्बियों ने वर्ष 1940 में जैन मन्दिर की स्थापना कीइस मन्दिर में भगवान् नेमिनाथ महावीर स्वामी सहित चौबीस तीर्थंकर भगवानो की मूर्तियाँ स्थापित की गईरेलवे के ठेकेदार बाबूलाल जैन ने शहर में बसे तीन दर्जन जैन परिवारों की मदद से शिखर बंध मन्दिर धर्मशाला का निर्माण करायाइस मन्दिर की देखरेख इस समय प्रबंधक नरेन्द्र चंद्र जैन , अजय कुमार आनंद कुमार सहित एक दर्जन लोग संभाले हुए हैंपंचायती दिगंबर जैन मन्दिर एवं धर्मशाला के नाम से बने हुए जनपद के एकलौते मन्दिर में एक दर्जन से अधिल कमरे और दो बड़े हाल हैंजैन धर्म की सांस्कृतिक विरासत को संजोये इस मन्दिर में प्रतिदिन सुबह शाम भगवान् महावीर स्वामी सहित अन्य स्थापित मूर्तियों की पूजा अर्चना होती है और वर्ष में तीन समारोह भी आयोजित किए जाते हैं , जिसमे इस शहर के सभी धर्मों के लोग आदर के साथ पहुचते हैं

फतेहपुर:दिन में तीन बार शिवलिंग का रंग परिवर्तित होता है यहाँ

गंगा और यमुना के मध्य में स्थित मझिल्गावं का शिव मन्दिर पौराणिक महत्व का हैऐसी मान्यता है कि रावण ने इस स्थान पर अपने हाथों से भगवान् शिव का लिंग स्थापित किया था । विलक्षण एक मुखी शिवलिंग के मस्तक भाग पर जटाजूट तथा पूर्ण खुली हुई गोल आँखे हैं , शिवमुख के मध्य भाग पर अंकित है । ब्राम्ही लिपि में लिखा पत्थर इसके नागवंशी काल में स्थापित होने का संकेत देता है । दिन में तीन बार शिवलिंग का रंग परिवर्तित होता है । ऐसी मान्यता है कि एक नाग शिवलिंग के प्रतिदिन दर्शन करने आता है , जिसे देखने की कोशिश जिस साधू ने की वह जीवित न रह सका ।

फतेहपुर:सूर्य पुत्र अश्वनी कुमारो की नगरी असनी कभी छोटी काशी के रूप में विख्यात थी

सूर्य पुत्र अश्वनी कुमारो की नगरी असनी कभी छोटी काशी के रूप में विख्यात थीभागीरथी तट पर बसे इस नगर में अनगिनत मंदिरों के अवशेष गौरवशाली अतीत के मूक गवाह हैंअश्वनी कुमारों का बस्ती के बीच बना मन्दिर लोगों में भक्ति और आस्था का केन्द्र हैऐसी भी मान्यता है की भारत वर्ष के प्रतापी राजा सुहौत्र का का यह क्षेत्र है , उनके पुत्र जुन्हु हुए जिनोहने कान्यकुब्ज राज्य की स्थापना की थी ……जिसकी राजधानी असनी थीमंदिरों की एक लम्बी श्रंखला से इसे छोटी काशी के रूप में भी इसे जाना जाता थागंगा तट में बसी असनी संत महात्माओं की तपोस्थली रही हैपरमहंस महात्माओं की कुटियाएँ भी यहाँ बनी हुई हैं , जिनमे आज भी महात्मा ठहर कर पूजा अर्चना में लीं रहते हैं

फतेहपुर: उजाड़ गाँव आज स्वामी परमानन्द जी की कृपा से पावन धाम बन गया

यमुना के स्वामी परमानन्द जी बसा मवई गाँव आज अनन्त विभूति युग पुरूष स्वामी परमानन्द जी महाराज की कृपा पर मवई धाम बन गया है । देश ही नहीं वरन विश्व में भारतीय अध्यात्म एवं संस्कृति की अलख जगाने वाले स्वामी परमानन्द जी महाराज ने यमुना किनारे की इसी माटी पर जन्म लिया था ।

(स्वामी परमानन्द जी अशोक सिंघल , आचार्य विष्णुकांत शास्त्री मुरली मनोहर जोशी के साथ)

ईश्वर के प्रति बालपन में ही उपजे प्रेम के वशीभूत हो उन्होंने घर बार त्याग संन्यास धारण कर लिया । वर्ष 1995 के आस पास जब स्वामी परमानन्द जी महाराज ने इस पावन भूमि पर अपने पग धरे तो कटीले बबूलों व उबड़ खाबड़ रास्तों वाला मवई गाँव मवई धाम बनकर लाखों की आस्था का केन्द्र बन गया । कई देशों में मवई धाम के पूजने वाले हैं । इस पूरे बीहड़ इलाके को अशिक्षा के अन्धकार से शिक्षा रुपी प्रकाश की ओर ले जाने वाले स्वामी जी ने विशाल युगपुरुष धाम मन्दिर का निर्माण कराया है । यमुना की कल कल ध्वनि के मध्य यहाँ का वातावरण भक्तिमय बना रहता है

(स्वामी परमानन्द जी शिष्या साध्वी ऋतंभरा के साथ)

स्वामी जी की शिष्याएं साध्वी ऋतंभरा , साध्वी निरंजन ज्योति आदि ने गुरु की पुण्य भूमि को तीर्थस्थल के रूप में परिवर्तित करने का संकल्प लिया है । जहाँ कभी लोग जाने से घबराते थे आज वही पवन तीर्थ बनती जा रही है । हरिद्वार , दिल्ली सहित देश के आधा दर्जन स्थानों में स्वामी जी आश्रमों में हजारों भक्त ईश्वर आस्था में जीवन के सच्चे मार्ग पाने के लिए लगे हुए हैं ।

Job in Visual बेसिक एंड foxpro

About Us: The journey began with incorporation of Magna Infotech Ltd।, in the year 1995 in Connecticut, USA। Keeping in view the business opportunities available in India, Magna Infotech was established in the year 1997 at Hyderabad. Today, we are recognized as one of the fastest growing IT consulting and Software Services Company in India. We have been providing high quality services and solutions to Fortune 500 clientele and 2000+ Employees. Our People, drive for excellence and die-hard commitment to all our clients have been major contributors for our growth. Our core services include Staff Augmentation, Software Services and e-Learning. Corporate Office in Hyderabad and other locations are Bangalore, Gurgaon, Kolkata, Pune, Mumbai, and Chennai. www.magna.in About Our Client: A Reputed MNC. About the Requirement: Job Description: Candidates with experience of around 2+years in Visual Basic and FoxPro. Location Needed: पुणे
Job Type: Pay roll of Magna Infotech and premises of our client। Immediate Joining will be preferred। If you are Interested in the above Opening Please revert us back immediately with the following details। 1) Name of Candidate – 2) DOB – 3) Phone no। / Mobile No। – 4) E-Mail ID – 5) Location – 6) Relevant Experience – 7) Total Experience – 8) Current Company working – 9) Current Salary – 10) Expected Salary – 11) Skills – 12) Notice Period- With Regards, Arpita Gupta, Magna Infotech Pvt Ltd। garpita@magna.in 9331410366.

शिवराजपुर :मीराबाई द्वारा स्थापित गिरधर गोपाल का विशाल मन्दिर स्थित

गंगा के तट पर मोहन की बावरी मीरा ने अपने प्यारे कन्हैया की मूर्ति स्थापित की थी शिवराजपुर के इस पावन स्थल पर कृष्ण भक्ति में लीन में मीरा काफी दिनों तक रुकी थी और अपने साथ लिए हुए गिरधर गोपाल की मूर्ति को उन्होंने रख दिया था जब मीरा यहाँ से जाने लगी तो उन्होंने मूर्ति को साथ ले जाने का प्रयास किया , लेकिन जब मूर्ति अपने स्थान से नहीं उठी तो मीरा ने गंगा के इस तट पर गिरधर गोपाल की मूर्ति स्थापित कर कृष्णगान करते हुए चली गयी गिरधर गोपाल का इस स्थान पर विशाल मन्दिर बना है और देश के कुछ शोधार्थी इस मूर्ति स्थान पर शोध कर रहे हैं प्रति वर्ष यहाँ सात दिनों तक चलने वाला मेला लगता है

फतेहपुर: दरगाह ऐ शाह जमालुद्दीन औलिया

हजरत शाह जमालुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह अलैह का जन्म चार सौ वर्ष पूर्व कस्बा कोडा जहानाबाद के मोहल्ला मियां टोला में हुआ थावह हिन्दुस्तान के बहुत बड़े आलिम थेहजरत निजामुद्दीन औलिया , दिल्ली और शाह कबीरुल औलिया की तरह ही शाह जमालुद्दीन औलिया की मुस्लिम समाज में बड़ी मान्यता है

औरंगजेब के उस्ताद के उस्ताद मुल्ला जीवन और मुल्ला लुतफुल्ला दोनों इनके शागिर्द थेबिहार प्रान्त के फुलवारी शरीफ के बुजुर्ग जावेद शानी के उस्ताद हजरत जमालुद्दीन औलिया के शिष्य थेउन्होंने जरूरतमंदों को रूहानी ताकत के जरिये फैज पहुचाई

रमजान माह के उन्तीसवें रोजे को इनकी दरगाह में दो दिवसीय उर्स होता हैहर माह के नौचंदी जुमेरात को बड़ी अकीदत के साथ मजार में गुलपोशी चादर चढाने लोग आते हैंइस दरगाह में देश के कोने कोने से अकीदत मंद लोग बराबर आते रहते हैंशाह जमालुद्दीन औलिया की औलादें आज भी आबाद हैं और वही लोग दरगाह की देखभाल करते हैं

फतेहपुर:असोथर है अश्वस्थामा की नगरी

असोथर कस्बा शहर मुख्यालय से दक्षिण दिशा की ओर तीस किलोमीटर दूर स्थित है गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वस्थामा ने महाभारत काल में ब्रम्हास्त्र पाने के लिए यहीं पर आकर तपस्या की थी , तभी से इस बस्ती का नाम असुफल हो गया जो कालान्तर में असोथर के नाम से जाने जाना लगा खीची वंश के राजाओं में राजा भगवंत राय ने अश्वस्थामा का मन्दिर बनवाया ऐसी मान्यता है कि अश्वस्थामा अमर है और अपनी तपोस्थली में आज भी आते हैं तभी तो समूचे क्षेत्र को अश्वस्थामा का मन्दिर आस्था और विश्वास में समेटे हुए है
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