असोथर कस्बा शहर मुख्यालय से दक्षिण दिशा की ओर तीस किलोमीटर दूर स्थित है । गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वस्थामा ने महाभारत काल में ब्रम्हास्त्र पाने के लिए यहीं पर आकर तपस्या की थी , तभी से इस बस्ती का नाम असुफल हो गया जो कालान्तर में असोथर के नाम से जाने जाना लगा । खीची वंश के राजाओं में राजा भगवंत राय ने अश्वस्थामा का मन्दिर बनवाया । ऐसी मान्यता है कि अश्वस्थामा अमर है और अपनी तपोस्थली में आज भी आते हैं । तभी तो समूचे क्षेत्र को अश्वस्थामा का मन्दिर आस्था और विश्वास में समेटे हुए है ।
मार्च 22, 2009 को 9:13 अपराह्न पर
इसकी ऐतिहासिकता का कोईप्रमाण हो तो कृपया उसका उल्लेख अवश्य कर दें .धन्यवाद
मार्च 22, 2009 को 11:17 अपराह्न पर
भाई मास्टर साहिब जीबढ़िया जानकारी देने के लिए आभार.
मार्च 23, 2009 को 10:13 पूर्वाह्न पर
बहत अच्छी जानकारी दी है
मार्च 23, 2009 को 5:19 अपराह्न पर
जानकारी देने के लिए धन्यवाद
मार्च 23, 2009 को 8:16 अपराह्न पर
Thanks for giving this great info….I really proud to be a part of Fatehpur…..
दिसम्बर 11, 2010 को 1:45 पूर्वाह्न पर
VERY GOOD -PLEASE WRITE MORE ABOUT ASOTHAR
मार्च 5, 2011 को 1:41 पूर्वाह्न पर
Asothar has lot of archeological wonders …which I think need to be further explored. Keep up the good work !
मार्च 6, 2012 को 11:04 पूर्वाह्न पर
mera asothar ek pawan nagari hai kyoki yahan par mote mahadev baba ki jameen se nikali hai aur mera janm bhi yahi hua hai i am proud of asothar