आज अमृत कथा का अन्तिम दिन !!

श्रीमदभागवत अमृत कथा में आचार्य हरनारायण जी ने कहा कि आतंक अत्याचारों में हो रही वृद्धि से आम जनमानस मानसिक पीड़ा में है। उन्होंने कहा कि ऐसी कराह जब एक साथ उठती है तभी धरा में परमात्मा का अवतार होता है।

हाय्डिल कालोनी में चल रही भागवत कथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य जी ने कहा कि जब-जब धर्म की वर्जनायें शिथिल हो जाती हैं, आतंक व अत्याचार में वृद्धि हो जाती है। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण मानवता के प्रतिनिधि के रूप में गुरु विश्वामित्र अयोध्या जाकर प्राणों से प्रिय राम को माता-पिता की गोद से जन कल्याण के लिये प्राप्त करते हैं और उन्हीं की मदद से राक्षसों का संहार करवाते हैं। इसके माध्यम से वह विश्व को यह संदेश देते हैं कि अभय रहो, धैर्य धारण करो राम अवतार हो चुका है। विश्व के मित्र जो हों वह आज भी मानवता को आश्वस्त करने का कार्य करते हैं। अखिल विश्व के मित्र को ही विश्वामित्र की संज्ञा प्राप्त होती है। आज भी कोई व्यक्ति विश्व मित्र बन सकता है इसके लिये उन्हें सतपथ पर चलकर विश्व कल्याण में सहयोगी भाव से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि यह जग सुन्दर से सुन्दरतम हो जायेगा। महान आत्मायें क्रोध भी सृजन करती हैं। आम मनुष्य क्रोध में विध्वंस करता है यही महान और साधारण में अंतर है। उन्होंने कहा कि अपने से श्रेष्ठ और बुजुर्गो की बात मानकर जो कार्य किया जाता है वह कल्याणकारी होता है। राजा दशरथ ने अपने से श्रेष्ठों की बात मानकर ही भगवान राम को गुरु विश्वामित्र के साथ भेजा। उन्होंने कहा कि पृथ्वी में यदि कोई भी साक्षात देवता है तो वह है माता, पिता और गुरु। इन तीनों से अच्छी सीख ही मिलती है और यह अपने बच्चे व शिशु को अपने से भी अधिक ऊंचाइयों पर देखकर खुश होते हैं।

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