>संसदीय इतिहास में 78 के उप चुनाव की तस्वीर जब राष्ट्रकवि भी हो गये थे जिला बदर

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चार दिन तक जिले में टिककर छत्तीस जनसभायें कर चुनावी माहौल का रुख मोड़ने में और कोई नहीं पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने वर्ष 1978 के उप चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। संसदीय क्षेत्र के इतिहास में 78 के उप चुनाव की तस्वीर को कोई भूल नहीं सकता। इस चुनाव में जिले में पूरे देश की राजनीति केन्द्रित हो गयी थी। इन्दिरा गांधी की जनसभाओं को मात देने के लिये विपक्ष से सुषमा स्वराज लगी हुई थीं। स्थिति यह थी कि कांग्रेस के राष्ट्रीय व प्रान्तीय नेता बूथों में बस्ते लगाकर बैठे थे। एक साल बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के विरुद्ध जनाक्रोश की ज्वाला तो भड़क रही थी। कुछ तो ठंडी हुई, लेकिन एकजुट विपक्ष के सामने सीट कांग्रेस की झोली में जाते-जाते रुक गयी।

जनता पार्टी के सांसद वशीर अहमद की आकस्मिक मौत हो जाने के कारण संसदीय क्षेत्र में वर्ष 1978 में उपचुनाव घोषित किया गया। इस चुनाव में कांग्रेस ने वरिष्ठ कांग्रेसी पूर्व विधायक प्रेमदत्त तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा। पार्टी पहले बाहरी को ही प्रत्याशी बनाना चाहती थी, लेकिन दोनों गुटों के कांग्रेसियों की मांग पर जिले के आधा दर्जन दावेदारों में श्री तिवारी के नाम पर इन्दिरा गांधी ने मोहर लगा दी। लोकदल जिसे सभी विपक्षियों का समर्थन प्राप्त था से लियाकत हुसेन को प्रत्याशी बनाया गया।

दिलचस्प पहलू यह था कि चुनाव में कांग्रेस हो या विपक्ष देश व प्रदेश के सभी नेताओं की निगाहें इस सीट पर लगी हुई थीं। कांग्रेस से पूर्व गृहमंत्री उमाशंकर दीक्षित, मोहसिना किदवई, नारायण दत्त तिवारी, राजेन्द्र कुमारी बाजपेयी सहित कर्नाटक के मुख्यमंत्री देवराज अर्ग कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवकांत बरुआ सहित आधा सैकड़ा से अधिक राष्ट्रीय व प्रान्तीय नेता डेरा डाले रहे। कांग्रेस की मुखिया स्व.इन्दिरा गांधी चार दिन तक जिले में टिककर छत्तीय जनसभायें कीं। खखरेरू की जनसभा में विपक्षियों की लामबंदी से पूर्व प्रधानमंत्री की गाड़ी पर पथराव हुआ। नारेबाजी के साथ कई जगह विरोध के स्वर मुखर हुए इसके बाद भी पूर्व प्रधानमंत्री ने जगह-जगह जनसभायें कर बदलाव का विगुल फूंक दिया। प्रदेश की वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री राजेन्द्र कुमारी बाजपेयी, प्रेमवती तिवारी, स्वरूपरानी बख्शी, मोहसिना किदवई के साथ जिले की महिला टीम का नेतृत्व श्रीमती शारदा मिश्रा, मालती श्रीवास्तव आदि ने किया। जनता पार्टी की सत्ता की हनक कम नहीं रही। जानकार लोगों ने बताया कि उस समय सत्ता की हनक के चलते पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी को टिकने के लिये डाकबंगले तक उपलब्ध नहीं हो पाये थे। पार्टी ने सभी बंगलों को अधिगृहीत कर लिया था। अंतत: इन्दिरा गांधी को नगर पालिका के बिना हस्तांतरित हुए नवनिर्मित डाक बंगले में टिकाया गया। राष्ट्रीय व प्रान्तीय नेता गली-कूचों में न केवल घूमे बल्कि मतदान के दिन बस्ते लगाकर भी बैठे।

ऐसे में जब कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी हो तो सत्ता की हनक रखने वाला विपक्ष क्यों पीछे रहे। लोकदल से लियाकत हुसेन को प्रत्याशी बनाया गया था। जनसंघ सहित अन्य विपक्षियों का समर्थन हासिल किये प्रत्याशी को जिताने के लिये अटल बिहारी बाजपेयी, जार्ज फर्नाडीज, राजनारायण, चौ.चरण सिंह, कांग्रेस से अलग हुए एचएन बहुगुणा जैसे कई दिग्गज नेताओं ने जगह-जगह जनसभायें कीं। सुषमा स्वराज तो कई दिनों तक जिले में डेरा डाले रहीं। इन्दिरा गांधी की जनसभायें जहां पर होती थीं उसी के इर्द-गिर्द श्रीमती स्वराज दहाड़कर लियाकत के लिये वोट मांग रही थीं। कांग्रेसियों का कहना है कि शासन और प्रशासन सत्ता पक्ष की हनक पर काम कर रहा था। चूंकि 1977 के चुनाव में आपातकाल, परिवार नियोजन जैसे मुद्दों का घाव जनता में भरा नहीं था इसलिए पार्टी की झोली में सीट तो नहीं आ पायी, लेकिन दिग्गज नेताओं के प्रयास से एक साल में ही वोट बैंक दूना पहुंच गया।

सतहत्तर के चुनाव में कांग्रेस को उखाड़ फेंकने का जो जुनून था वह उपचुनाव में नहीं देखा गया तभी तो अड़तालीस फीसदी की जगह उप चुनाव में मतदान चालीस फीसदी में ही सिमट गया। छ: लाख छियालीस हजार मतदाताओं में से दो लाख उन्यासी हजार मतदाताओं ने वोट डाले। लोकदल प्रत्याशी लियाकत हुसेन एक लाख तीस हजार छ: सौ इक्कीस मत पाकर सीट को बरकरार रखी। कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमदत्त तिवारी को एक लाख पांच हजार वोट मिले। इस चुनाव में डमी उम्मीदवारों की भी खासी भीड़ थी। प्रियदर्शन यादव बारह हजार वोट समेटकर कांग्रेस को पराजित करने में विपक्ष का साथ दिया। इसी प्रकार अनुसूचित जाति के कई प्रत्याशियों ने पांच हजार से अधिक मत बटोरे।

राष्ट्रकवि भी हो गये थे जिला बदर

उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी प्रेमदत्त तिवारी अपने संस्मरण बताते हुए कहा कि उस समय न तो चुनाव आयोग का डंडा था। सत्ता की हनक काम कर रही थी। उस समय कांग्रेस का वोट बैंक कहे जाने वाले ब्राह्मणों को जिला बदर की सूची में डालकर मतदान से बाहर कर दिया गया था। राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी, पूर्व ब्लाक प्रमुख सोमदत्त द्विवेदी जो उनके चचेरे भाई थे सहित कई रिश्तेदारों व करीबियों को जिला बदर की सूची में डाला गया था। उस समय इन्दिरा गांधी भी यह कार्यवाही देखकर दंग रह गयीं और उन्होंने यह कहा कि इस पर पिटीशन कर दें

(दैनिक जागरण से साभार)

फतेहपुर:सूर्य पुत्र अश्वनी कुमारो की नगरी असनी कभी छोटी काशी के रूप में विख्यात थी

सूर्य पुत्र अश्वनी कुमारो की नगरी असनी कभी छोटी काशी के रूप में विख्यात थीभागीरथी तट पर बसे इस नगर में अनगिनत मंदिरों के अवशेष गौरवशाली अतीत के मूक गवाह हैंअश्वनी कुमारों का बस्ती के बीच बना मन्दिर लोगों में भक्ति और आस्था का केन्द्र हैऐसी भी मान्यता है की भारत वर्ष के प्रतापी राजा सुहौत्र का का यह क्षेत्र है , उनके पुत्र जुन्हु हुए जिनोहने कान्यकुब्ज राज्य की स्थापना की थी ……जिसकी राजधानी असनी थीमंदिरों की एक लम्बी श्रंखला से इसे छोटी काशी के रूप में भी इसे जाना जाता थागंगा तट में बसी असनी संत महात्माओं की तपोस्थली रही हैपरमहंस महात्माओं की कुटियाएँ भी यहाँ बनी हुई हैं , जिनमे आज भी महात्मा ठहर कर पूजा अर्चना में लीं रहते हैं

फतेहपुर:दिन में तीन बार शिवलिंग का रंग परिवर्तित होता है यहाँ

गंगा और यमुना के मध्य में स्थित मझिल्गावं का शिव मन्दिर पौराणिक महत्व का हैऐसी मान्यता है कि रावण ने इस स्थान पर अपने हाथों से भगवान् शिव का लिंग स्थापित किया था । विलक्षण एक मुखी शिवलिंग के मस्तक भाग पर जटाजूट तथा पूर्ण खुली हुई गोल आँखे हैं , शिवमुख के मध्य भाग पर अंकित है । ब्राम्ही लिपि में लिखा पत्थर इसके नागवंशी काल में स्थापित होने का संकेत देता है । दिन में तीन बार शिवलिंग का रंग परिवर्तित होता है । ऐसी मान्यता है कि एक नाग शिवलिंग के प्रतिदिन दर्शन करने आता है , जिसे देखने की कोशिश जिस साधू ने की वह जीवित न रह सका ।

फतेहपुर :शिखर बंध मन्दिर – शहर का एकलौता जैन मन्दिर

रेलवे स्टेशन के समीप जैन धर्मावलम्बियों ने वर्ष 1940 में जैन मन्दिर की स्थापना कीइस मन्दिर में भगवान् नेमिनाथ महावीर स्वामी सहित चौबीस तीर्थंकर भगवानो की मूर्तियाँ स्थापित की गईरेलवे के ठेकेदार बाबूलाल जैन ने शहर में बसे तीन दर्जन जैन परिवारों की मदद से शिखर बंध मन्दिर धर्मशाला का निर्माण करायाइस मन्दिर की देखरेख इस समय प्रबंधक नरेन्द्र चंद्र जैन , अजय कुमार आनंद कुमार सहित एक दर्जन लोग संभाले हुए हैंपंचायती दिगंबर जैन मन्दिर एवं धर्मशाला के नाम से बने हुए जनपद के एकलौते मन्दिर में एक दर्जन से अधिल कमरे और दो बड़े हाल हैंजैन धर्म की सांस्कृतिक विरासत को संजोये इस मन्दिर में प्रतिदिन सुबह शाम भगवान् महावीर स्वामी सहित अन्य स्थापित मूर्तियों की पूजा अर्चना होती है और वर्ष में तीन समारोह भी आयोजित किए जाते हैं , जिसमे इस शहर के सभी धर्मों के लोग आदर के साथ पहुचते हैं

शिवराजपुर :मीराबाई द्वारा स्थापित गिरधर गोपाल का विशाल मन्दिर स्थित

गंगा के तट पर मोहन की बावरी मीरा ने अपने प्यारे कन्हैया की मूर्ति स्थापित की थी शिवराजपुर के इस पावन स्थल पर कृष्ण भक्ति में लीन में मीरा काफी दिनों तक रुकी थी और अपने साथ लिए हुए गिरधर गोपाल की मूर्ति को उन्होंने रख दिया था जब मीरा यहाँ से जाने लगी तो उन्होंने मूर्ति को साथ ले जाने का प्रयास किया , लेकिन जब मूर्ति अपने स्थान से नहीं उठी तो मीरा ने गंगा के इस तट पर गिरधर गोपाल की मूर्ति स्थापित कर कृष्णगान करते हुए चली गयी गिरधर गोपाल का इस स्थान पर विशाल मन्दिर बना है और देश के कुछ शोधार्थी इस मूर्ति स्थान पर शोध कर रहे हैं प्रति वर्ष यहाँ सात दिनों तक चलने वाला मेला लगता है

फतेहपुर: दरगाह ऐ शाह जमालुद्दीन औलिया

हजरत शाह जमालुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह अलैह का जन्म चार सौ वर्ष पूर्व कस्बा कोडा जहानाबाद के मोहल्ला मियां टोला में हुआ थावह हिन्दुस्तान के बहुत बड़े आलिम थेहजरत निजामुद्दीन औलिया , दिल्ली और शाह कबीरुल औलिया की तरह ही शाह जमालुद्दीन औलिया की मुस्लिम समाज में बड़ी मान्यता है

औरंगजेब के उस्ताद के उस्ताद मुल्ला जीवन और मुल्ला लुतफुल्ला दोनों इनके शागिर्द थेबिहार प्रान्त के फुलवारी शरीफ के बुजुर्ग जावेद शानी के उस्ताद हजरत जमालुद्दीन औलिया के शिष्य थेउन्होंने जरूरतमंदों को रूहानी ताकत के जरिये फैज पहुचाई

रमजान माह के उन्तीसवें रोजे को इनकी दरगाह में दो दिवसीय उर्स होता हैहर माह के नौचंदी जुमेरात को बड़ी अकीदत के साथ मजार में गुलपोशी चादर चढाने लोग आते हैंइस दरगाह में देश के कोने कोने से अकीदत मंद लोग बराबर आते रहते हैंशाह जमालुद्दीन औलिया की औलादें आज भी आबाद हैं और वही लोग दरगाह की देखभाल करते हैं

फतेहपुर:असोथर है अश्वस्थामा की नगरी

असोथर कस्बा शहर मुख्यालय से दक्षिण दिशा की ओर तीस किलोमीटर दूर स्थित है गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वस्थामा ने महाभारत काल में ब्रम्हास्त्र पाने के लिए यहीं पर आकर तपस्या की थी , तभी से इस बस्ती का नाम असुफल हो गया जो कालान्तर में असोथर के नाम से जाने जाना लगा खीची वंश के राजाओं में राजा भगवंत राय ने अश्वस्थामा का मन्दिर बनवाया ऐसी मान्यता है कि अश्वस्थामा अमर है और अपनी तपोस्थली में आज भी आते हैं तभी तो समूचे क्षेत्र को अश्वस्थामा का मन्दिर आस्था और विश्वास में समेटे हुए है

फतेहपुर परिक्रमा – एक नजर !!!

दोआबा की इस पवित्र माटी में गंगायमुनी संस्कृति की अक्षुण विरासत आज भी कायम हैहजारों वर्ष पुराने इतिहास की मूक गवाह स्थल और खंडहर हमारे गौरव को बढ़ा रहे हैं

उत्तर गंगा जी बहती हैं दक्षिण यमुना धरा ,
पूर्व प्रयाग कानपुर पश्चिम , यह है जिला हमारा
अंतर्वेद इसे कहते हैं यही पुरातन गाथा ,
स्वतन्त्रता के संग्रामो में इसका ऊँचा माथा।।

अलकनंदा कालिंदी के इस पौराणिक ऐतिहासिक भू-भाग में साहित्य और संस्कृति की अनेकानेक विभूतियों ने जन्म लिया हैस्वामी चंद दास जी , मुन्नू बाबा मझटेनी , मूलानंद जी महाराज रुरेश्वर आश्रम चुरियानी , स्वामी विज्ञानानंद जी महाराज , त्यागी जी महाराज , और परम पूज्य परमानंदजी महाराज जैसी आध्यात्मिक विभूतियाँ इस धारा की धरोहर हैसाहित्यिक पुरोधाओं में हथगाम की माटी से जुड़े गणेश शंकर विद्यार्थी ,बिन्दकी के . सोहन लाल द्विवेदी , असनी के अशोक बाजपेयी , लालीपुर के रमानाथ अवस्थी ,परसदेपुर के कन्हैया लाल नंदन , बकर गंज के असगर वजाहत , कलक्टरगंज के धनजय अवस्थी आदि ने अपनी रचनाओं से सामजिक क्रांती का विगुल फूंकाइसके आलावा अकबर के नौ रत्नों में शामिल रहे बीरबल का ननिहाल यमुना के किनारे एकड्ला में हैबिन्दकी तहशील में स्थित अरगल स्टेट का मुग़ल काल में प्रयाग से लेकर कन्नौज तक एक क्षत्र राज्य चलता थाबिजौली में चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय की स्वर्ण मुद्राएँ असनी के खंडहर की ईंटे गुप्तकालीन इतिहास की मूक गवाह हैंआजादी के समय लगान का विरोध कर नोनारा अंग्रेजों की आँख की किरकरी बन गया थालगान वसूलने गए एक अंग्रेज अफसर की ज्यादती पर ग्रामीणों ने उसे मौत के घाट उतार दिया था और उसके बाद अंगरेजी तांडव आज भी नोनारा की वीरता को बयां कर रहा है

फतेहपुर के इतिहास सन्दर्भ – फेड्रिक सालमन ग्राउस

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