ऐतिहासिक खजुहा मेले में होती है रावण की पूजा

खजुहा कस्बा ऐतिहासिक घटनाओं और स्थानों को समेटे हुए है। कस्बे के मुगल रोड में विशालकाय फाटक और सरांय स्थित है। जो कस्बे की पहचान बना हुआ है। वहीं कस्बे के स्वर्णिम  अतीत के वैभव की दास्तां बयां कर रहा है। मुगल रोड के उत्तर में रामजानकी मंदिर, तीन विशालकाय तालाब, बनारस की नगरी के समान प्रत्येक गली और कुँए  अपनी भव्यता की कहानी कह रही है।
इस छोटे से कस्बे में करीब एक सौ अठारह शिवालय हैं। इसी क्रम में दशहरा मेले में होने वाली रामलीला के आयोजन में रावण पूजा भी अलौकिक और अनोखी मानी जाती है। यहां की रामलीला को देखने के लिए प्रदेश के कोने-कोने से श्रृद्धालु  एकत्रित होते हैं।खजुहा कस्बे की रामलीला जिले में  ही नहीं पूरे प्रदेश में ख्याति  प्राप्त है।
यहां पर दशहरा मेले पर अन्य स्थानों की तरह रावण को जलाया नहीं जाता, बल्कि रावण को पूजनीय  मानकर हजारों दीपों की रोशनी के साथ पूजा अर्चना की जाती है। कस्बे के महिलाएं और बच्चे भी इस सामूहिक आरती और पूजन कार्य में हिस्सा लेते हैं। इस अजीब उत्सव को देखने के लिए दूरदराज से लोगों जमावड़ा लगता है। वहीं रावण के साथ अन्य पुतलों को नगर के मुख्य मार्गों  में भ्रमण कराया जाता है।
इस ऐतिहासिक मेले का शुभारम्भ भादो मास के शुक्ल  पक्ष की तृतीया (तीजा) के दिन तालाब से लाई गई मिट्टी एवं कांस से कुंभ निर्माण कर गणेश की प्रतिमा निर्माण कर दशहरा के दिन पूजा अर्चना की जाती है। खजुहा मेले में निर्मित होने वाले सभी स्वरूप नरई, पुआल आदि समान से बनाए जाते हैं। इन स्वरूपों के चेहरों की रंगाई का कार्य खजुहा के कुशल पेंटरों द्वारा किया जाता है। जबकि रावण का शीश तांबे से बनाया जाता है। दशमी के दिन से गणेश पूजन से शुरू होने वाली रामलीला परेवा द्वितीया के दिन राम रावण युद्ध के बाद इस ऐतिहासिक रामलीला की समाप्त हो जाती है।
खजुहा की रामलीला का विशेष महत्व है। जहां रावण को जलाने के स्थान पर इस की पूजा की जाने की परंपरा है। तांबे के शीश वाले रावण के पुतले को हजारों दीपों की रोशनी प्रज्वलित करके सजाया जाता है। इसके बाद ठाकुर जी के पुजारी द्वारा श्रीराम  के पहले रावण की पूजा की जाती है। जहां मेघनाथ का 25 फिट ऊंचा लकड़ी के पुतले की सवारी कस्बे के मुख्य मार्गों  में निकाली जाती है। वहीं 40 फुट लंबा कुंभकरण व अन्य के पुतले तैयार किए जाते हैं। 

खजुहा की रामलीला


फतेहपुर जिले के खजुहा कस्बे में रामनगर शैली में रामलीला तो होती ही है साथ ही रावण को उतना ही सम्मान दिया जाता है जितना कि दक्षिण भारत में। यहाँ पुतले को जलाने के स्थान पर उसकी आरती वंदना की जाती है। इस रामलीला की शुरुआत लगभग ४०० वर्ष पूर्व हुई थी जिसका उल्लेख “वंशावली” पुस्तक में मिलता है। लीला का प्रारंभ विजयादशमी से होता है। रावण के लगभग ५०-६० फ़िट लम्बे व २०-२५ फ़िट चौड़े आकृति की आरती हजार बत्तियों से की जाती है। प्रसाद एवं भोग सात्त्विक होता है। दिन में रावण-मन्दोदरी, मेघनाद, कुम्भकर्ण एवं विभीषण आदि ७ राक्षसों और बानरों तथा हाथी घोड़े आदि के विशालकाय पुतलों को नगर में घुमाया जाता है। रात्रि में खुले आसमान के नीचे रामलीला को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। दर्शनार्थियों की संख्या लाखों में होती है। इस प्रकार उत्तर भारत में रावण को सम्मान प्रदान करने वाली एक मात्र खजुहा की रामलीला ही है।

खजुहा की रामलीला


फतेहपुर जिले के खजुहा कस्बे में रामनगर शैली में रामलीला तो होती ही है साथ ही रावण को उतना ही सम्मान दिया जाता है जितना कि दक्षिण भारत में। यहाँ पुतले को जलाने के स्थान पर उसकी आरती वंदना की जाती है। इस रामलीला की शुरुआत लगभग ४०० वर्ष पूर्व हुई थी जिसका उल्लेख “वंशावली” पुस्तक में मिलता है। लीला का प्रारंभ विजयादशमी से होता है। रावण के लगभग ५०-६० फ़िट लम्बे व २०-२५ फ़िट चौड़े आकृति की आरती हजार बत्तियों से की जाती है। प्रसाद एवं भोग सात्त्विक होता है। दिन में रावण-मन्दोदरी, मेघनाद, कुम्भकर्ण एवं विभीषण आदि ७ राक्षसों और बानरों तथा हाथी घोड़े आदि के विशालकाय पुतलों को नगर में घुमाया जाता है। रात्रि में खुले आसमान के नीचे रामलीला को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। दर्शनार्थियों की संख्या लाखों में होती है। इस प्रकार उत्तर भारत में रावण को सम्मान प्रदान करने वाली एक मात्र खजुहा की रामलीला ही है।

फतेहपुर के प्रमुख पर्यटक व पुरातात्त्विक स्थल

फतेहपुर के प्रमुख पर्यटक व पुरातात्त्विक स्थलों में शिवराजपुर, रेंह , खजुहा, बिन्दकी, तेंदुली , बावनी इमली, भिटौरा और हथगाम आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं। इसके अतिरिक्त कई मस्जिद और मंदिर भी है जहां पर्यटन का मजा लिया जा सकता है। गंगा और यमुना नदी के तट पर स्थित फतेहपुर उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है।यह जिला चारो ओर से बड़े शहरों यथा कानपुर , इलाहबाद , रायबरेली ,लखनऊ , बांदा आदि से घिरा हुआ है ,शायद यह इसका सौभाग्य है या दुर्भाग्य , इसका निर्णय आपके हाथफतेहपुर जिले की स्थापना 10 नवम्बर 1826 ई. में हुई थी। धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह स्थान शहीद जोधा सिंह अटैया , शहीद दरियाव सिंह और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों तथा प्रसिद्ध हिन्दी राष्ट्र कवि सोहन लाल द्विवेदी की मातृभूमि है।कुछ प्रमुख स्थलों के बारे में विवरण निम्न लिखित है

खजुहा
खजुहा गांव मुगल रोड पर स्थित है। यह गांव काफी प्राचीन है। इसका वर्णन प्राचीन हिन्दू धर्मग्रन्थ ब्रह्मा पुराण में भी हुआ है, जो कि 5000 वर्ष पुराना था। 5 जनवरी 1659 ई. में मुगल शासक औरगंजेब का अपने भाई शाहशुजा के साथ भीषण युद्ध हुआ था। औरंगजेब ने शाहशुजा को इस जगह के समीप ही मारा था। अपनी जीत की खुशी में उन्होंने यहां एक विशाल और खूबसूरत उद्यान और सराय का निर्माण करवाया था। इस उद्यान को बादशाही बाग के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त इस सराय में 130 कमरें है।आज की स्थिति में यह अत्यन्त जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है

रेंह

यमुना नदी के तट पर स्थित रेंह बहुत ही प्राचीन गांव है। यह गांव फतेहपुर शहर के दक्षिण-पश्चिम से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माना जाता है कि इस जगह से 800 ई. पूर्व के पुरातात्त्विक महत्व से जुड़े लेख प्राप्त हुए थे। इसके अलावा मौर्य काल, कुषाण काल और गुप्त काल के कई सिक्के और मूर्तियां प्राप्त हुई थी। दो दशक पूर्व भवगान विष्णु की प्राचीन मूर्ति इस गांव से प्राप्त हुई थी। वर्तमान समय में यह मूर्ति कीर्तिखेडा गांव के मंदिर में स्‍थापित है।

बिन्दकी
फतेहपुर से 30 किलोमीटर की दूरी पर बिन्दकी क़स्बा है। यह एक प्राचीन शहर है। इस शहर का नाम यहां के शासक राजा वेणुकी के नाम पर रखा गया था। इस जगह की पृष्ठभूमि काफी धार्मिक और ऐतिहासिक है। बिन्दकी सेनानी जोधा सिंह अटैया और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों तथा प्रसिद्ध हिन्दी कवि राष्ट्र कवि सोहन लाल द्विवेदी की मातृभूमि है।

शिवराजपुर
गंगा नदी के तट पर शिवराजपुर गांव स्थित है। इस गांव में भगवान कृष्ण का प्राचीन मंदिर स्थित है। जिसे मीराबाई के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि मंदिर स्थित भगवान कृष्ण की मूर्ति की स्थापना मीराबाई ने की थी। वह भगवान कृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थी और मेवाड़ राज्य के शाही परिवार की सदस्य थी।

तेंदुली
यह गांव चौदहग्राम-बिन्दकी मार्ग पर स्थित है। इस गांव में बाबा झमदास का मंदिर स्थित है। माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को सांप या कुत्ता काट लेता है तो वह व्यक्ति मनो-विकार की समस्या से पीड़ित होता है। इस मंदिर में आकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। यंहा एक मन्दिर है , जिसे गुप्त कालीन बताया जाता हैआजकल यह अत्यन्त जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है

बावनी इमली
यह स्मारक स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का प्रतीक है। 28 अप्रैल 1858 में ब्रिटिश सेना द्वारा बावन स्वतंत्रता सेनानियों को एक इमली के पेड़ पर फांसी दी गई थी। जिस जगह पर यह इमली का पेड़ है, लोगो का मानना है कि इस घटना के बाद इस वृक्ष की विकास रूक गया है। यह जगह खजुहा शहर के निकट स्थित है। वैसे मूल पेड़ आज सूख चुका है ,लेकिन एक नई पेड़ की शाखा पनप चुकी है ,जो आज उसका अस्तित्व बनाये हुए है

भिटौरा

उत्तरवाहिनी पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित भिटौरा विकास खंड मुख्यालय के रूप में स्थित है है। यह वह स्थान है जहां संत भृगु ने काफी लम्बे समय तक तपस्या की थी। इसी कारण इस जगह को भृगु ठौर के नाम से भी जाता है। यहां गंगा नदी उत्तर दिशा से प्रवाहित हो रही है इसी कारन यंहा का पौराणिक महत्व के साथ -साथ धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है

हथगाम

यह स्थान महान स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री गणेश शंकर विद्यार्थी और प्रसिद्ध उर्दू कवि श्री इकबाल वर्मा की जन्मभूमि है।

आगे कोशिश करूंगा की आप सभी को और फतेहपुर के बारे में और परिचित करा सकूं

फतेहपुर का एक और साहित्यिक व्यक्तित्व – जीवन शुक्ल

जीवन शुक्ल


जन्म: 03 अप्रैल 1932


जन्म स्थान खजुहा, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश, भारत
कुछ प्रमुख
कृतियाँ
झाऊ की ओट में गुलाब, तरासी आत्मा, जीवन सृजन
विविध कविता, गीत, नवगीत आदि विधाओं में कृतियाँ
जीवनी जीवन शुक्ल / परिचय

फतेहपुर के प्रमुख पर्यटक व पुरातात्त्विक स्थल

फतेहपुर के प्रमुख पर्यटक व पुरातात्त्विक स्थलों में शिवराजपुर, रेंह , खजुहा, बिन्दकी, तेंदुली , बावनी इमली, भिटौरा और हथगाम आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं। इसके अतिरिक्त कई मस्जिद और मंदिर भी है जहां पर्यटन का मजा लिया जा सकता है। गंगा और यमुना नदी के तट पर स्थित फतेहपुर उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है।यह जिला चारो ओर से बड़े शहरों यथा कानपुर , इलाहबाद , रायबरेली ,लखनऊ , बांदा आदि से घिरा हुआ है ,शायद यह इसका सौभाग्य है या दुर्भाग्य , इसका निर्णय आपके हाथफतेहपुर जिले की स्थापना 10 नवम्बर 1826 ई. में हुई थी। धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह स्थान शहीद जोधा सिंह अटैया , शहीद दरियाव सिंह और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों तथा प्रसिद्ध हिन्दी राष्ट्र कवि सोहन लाल द्विवेदी की मातृभूमि है।कुछ प्रमुख स्थलों के बारे में विवरण निम्न लिखित है

खजुहा
खजुहा गांव मुगल रोड पर स्थित है। यह गांव काफी प्राचीन है। इसका वर्णन प्राचीन हिन्दू धर्मग्रन्थ ब्रह्मा पुराण में भी हुआ है, जो कि 5000 वर्ष पुराना था। 5 जनवरी 1659 ई. में मुगल शासक औरगंजेब का अपने भाई शाहशुजा के साथ भीषण युद्ध हुआ था। औरंगजेब ने शाहशुजा को इस जगह के समीप ही मारा था। अपनी जीत की खुशी में उन्होंने यहां एक विशाल और खूबसूरत उद्यान और सराय का निर्माण करवाया था। इस उद्यान को बादशाही बाग के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त इस सराय में 130 कमरें है।आज की स्थिति में यह अत्यन्त जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है

रेंह

यमुना नदी के तट पर स्थित रेंह बहुत ही प्राचीन गांव है। यह गांव फतेहपुर शहर के दक्षिण-पश्चिम से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माना जाता है कि इस जगह से 800 ई. पूर्व के पुरातात्त्विक महत्व से जुड़े लेख प्राप्त हुए थे। इसके अलावा मौर्य काल, कुषाण काल और गुप्त काल के कई सिक्के और मूर्तियां प्राप्त हुई थी। दो दशक पूर्व भवगान विष्णु की प्राचीन मूर्ति इस गांव से प्राप्त हुई थी। वर्तमान समय में यह मूर्ति कीर्तिखेडा गांव के मंदिर में स्‍थापित है।

बिन्दकी
फतेहपुर से 30 किलोमीटर की दूरी पर बिन्दकी क़स्बा है। यह एक प्राचीन शहर है। इस शहर का नाम यहां के शासक राजा वेणुकी के नाम पर रखा गया था। इस जगह की पृष्ठभूमि काफी धार्मिक और ऐतिहासिक है। बिन्दकी सेनानी जोधा सिंह अटैया और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों तथा प्रसिद्ध हिन्दी कवि राष्ट्र कवि सोहन लाल द्विवेदी की मातृभूमि है।

शिवराजपुर
गंगा नदी के तट पर शिवराजपुर गांव स्थित है। इस गांव में भगवान कृष्ण का प्राचीन मंदिर स्थित है। जिसे मीराबाई के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि मंदिर स्थित भगवान कृष्ण की मूर्ति की स्थापना मीराबाई ने की थी। वह भगवान कृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थी और मेवाड़ राज्य के शाही परिवार की सदस्य थी।

तेंदुली
यह गांव चौदहग्राम-बिन्दकी मार्ग पर स्थित है। इस गांव में बाबा झमदास का मंदिर स्थित है। माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को सांप या कुत्ता काट लेता है तो वह व्यक्ति मनो-विकार की समस्या से पीड़ित होता है। इस मंदिर में आकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। यंहा एक मन्दिर है , जिसे गुप्त कालीन बताया जाता हैआजकल यह अत्यन्त जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है

बावनी इमली
यह स्मारक स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का प्रतीक है। 28 अप्रैल 1858 में ब्रिटिश सेना द्वारा बावन स्वतंत्रता सेनानियों को एक इमली के पेड़ पर फांसी दी गई थी। जिस जगह पर यह इमली का पेड़ है, लोगो का मानना है कि इस घटना के बाद इस वृक्ष की विकास रूक गया है। यह जगह खजुहा शहर के निकट स्थित है। वैसे मूल पेड़ आज सूख चुका है ,लेकिन एक नई पेड़ की शाखा पनप चुकी है ,जो आज उसका अस्तित्व बनाये हुए है

भिटौरा

उत्तरवाहिनी पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित भिटौरा विकास खंड मुख्यालय के रूप में स्थित है है। यह वह स्थान है जहां संत भृगु ने काफी लम्बे समय तक तपस्या की थी। इसी कारण इस जगह को भृगु ठौर के नाम से भी जाता है। यहां गंगा नदी उत्तर दिशा से प्रवाहित हो रही है इसी कारन यंहा का पौराणिक महत्व के साथ -साथ धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है

हथगाम

यह स्थान महान स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री गणेश शंकर विद्यार्थी और प्रसिद्ध उर्दू कवि श्री इकबाल वर्मा की जन्मभूमि है।

आगे कोशिश करूंगा की आप सभी को और फतेहपुर के बारे में और परिचित करा सकूं

फतेहपुर का एक और साहित्यिक व्यक्तित्व – जीवन शुक्ल

जीवन शुक्ल


जन्म: 03 अप्रैल 1932


जन्म स्थान खजुहा, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश, भारत
कुछ प्रमुख
कृतियाँ
झाऊ की ओट में गुलाब, तरासी आत्मा, जीवन सृजन
विविध कविता, गीत, नवगीत आदि विधाओं में कृतियाँ
जीवनी जीवन शुक्ल / परिचय

फतेहपुर के साहित्यिक पहचान की नई उडान

ऐतिहासिक मुगलकालीन स्थल ‘खजुहा’ जिला-फतेहपुर उत्तर प्रदेश पर विशेष कार्य, स्वतंत्र आलेखन एवं वृत्तचित्र ‘अतीत की धरोहर’ के निर्माण में विशेष सहयोग करने वाले फतेहपुर के साहित्य जगत की एक नई कड़ी के रूप में प्रस्तुत है श्री चक्रधर शुक्ला जी का परिचय
चक्रधर शुक्ल

जन्मः 18 जनवरी 1957 खजुहा, जिला फतेहपुर (उ०प्र०) 212657
रचनाएँ-
हास्य व्यंग्य-

आधुनिकता छै छोटे व्यंग्
तीन छोटी कविताएँ (रामकथा से)
राजनीति- कुछ छोटी कविताएँ

क्षणिकाओं में-
रंगः चार क्षणिकाएँ
नेता एक : रंग अनेक

कविताओं मेँ-
आग का लगना
कविता
पिच का कमाल
समय

ज्यादा जानकारी के लिए यंहा चटकाएं

फतेहपुर के साहित्यिक पहचान की नई उडान

ऐतिहासिक मुगलकालीन स्थल ‘खजुहा’ जिला-फतेहपुर उत्तर प्रदेश पर विशेष कार्य, स्वतंत्र आलेखन एवं वृत्तचित्र ‘अतीत की धरोहर’ के निर्माण में विशेष सहयोग करने वाले फतेहपुर के साहित्य जगत की एक नई कड़ी के रूप में प्रस्तुत है श्री चक्रधर शुक्ला जी का परिचय
चक्रधर शुक्ल

जन्मः 18 जनवरी 1957 खजुहा, जिला फतेहपुर (उ०प्र०) 212657
रचनाएँ-
हास्य व्यंग्य-

आधुनिकता छै छोटे व्यंग्
तीन छोटी कविताएँ (रामकथा से)
राजनीति- कुछ छोटी कविताएँ

क्षणिकाओं में-
रंगः चार क्षणिकाएँ
नेता एक : रंग अनेक

कविताओं मेँ-
आग का लगना
कविता
पिच का कमाल
समय

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