फतेहपुर : गंगा की दशा और दिशा के लिए प्रयास और उनका परिणाम



जिले की सौ किलोमीटर की धरती को छूती हुई पतित पावनी मां गंगा की धार बह रही है। दो दर्जन से अधिक घाट व दो सैकड़ा कस्बा व गांवों को खुशहाली का सन्देश देने वाली गंगा आज प्रदूषण से कराह रही हैं। जीवनदायिनी नदी जो हजारों लोगों की जीविका का साधन थीं आज उसका पानी इतना विषैला हो गया है कि तटवर्ती गांवों के लोग गंगा के पानी का उपयोग नहीं कर रहे हैं।

पतित पावनी गंगा जिले में औंग के पास से प्रवेश करती हैं। शिवराजपुर पहला घाट है इसके बाद देवमई, गुनीर, कंसपुर, ब्रम्हशिला, आदमपुर, खुशरूपुर, भिटौरा, असनी, देवरी, कोटला, नौबस्ता मुख्य घाट हैं। दो सैकड़ा से अधिक गांव जीवनदायिनी नदी से जुड़े हुए हैं। इन घाटों में अमावस्या, पूर्णिमा, सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण सहित अन्य धार्मिक पर्वो में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर डुबकी लगाते हैं।

शिवराजपुर में कार्तिक का ऐतिहासिक मेला लगता है जहां जिले ही नहीं कई जनपदों के श्रद्धालु आकर इस प्राचीन धार्मिक नगरी में मोक्षदायिनी पर डुबकी लगाने के बाद मीराबाई द्वारा स्थापित किये गये बिहारी जी के मंदिर के दर्शन करते हैं। शिवराजपुर में गंगा तट पर आधा दर्जन प्राचीन मंदिर उसकी ऐतिहासिकता के मूक गवाह हैं।

 
 
काशी, हरिद्वार के बाद भृगुधाम भिटौरा वह पवित्र घाट है जहां उत्तरवाहिनी गंगा हैं। पौराणिक ग्रन्थों में भी उत्तर वाहिनी गंगा के महात्म्य को दर्शाया गया है। भिटौरा के बारे में यह इतिहास है कि यहां भगवान विष्णु को लात मारने वाले भृगु मुनि ने तपस्या की थी। इनकी तपस्थली का प्रतीक एक मड़फी आज भी बनी हुई है। भिटौरा में पुराने पक्के घाट के साथ स्वामी विज्ञानानंद जी ने करोड़ों की लागत पर एक नया ओमघाट विकसित किया है।
  • जिले में पतित पावनी गंगा को प्रदूषित करने का मुख्य कारक शव प्रवाह है।
  • गंगा किनारे के गांव के लोग मरे जानवर भी नदी में डालकर प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं।
  • किसी भी श्मशान घाट पर इलेक्ट्रानिक शवदाह की व्यवस्था नहीं है। भिटौरा में लकड़ी का शवदाह गृह बनाया गया है, लेकिन उसमें शवों का दाह संस्कार इक्का-दुक्का ही हो पा रहे हैं। श्मशान घाट में जो अग्निदाह भी किये जाते हैं उसमें अधजली लकड़ी व अन्य गंदगी लोग गंगा जी में ही फेंक देते हैं।
  • शहर का सीवर लाइन तो गंगा में नहीं जा रहा है, लेकिन गंगा किनारे के जो गांव हैं उनका गंदा पानी नदी में ही पहुंच रहा है।
  • चौडगरा व मलवां की आधा दर्जन फैक्ट्रियों का गंदा पानी सीधे तो नहीं, लेकिन पाण्डु नदी के माध्यम से गंगा नदी में पहुंच रहा है।
  • शहरी सीवेज का गंगा को गंदा करने से कोई सरोकार नहीं है। शहरी सीवेज का पानी ससुर खरेदी नदी पर गिराया जा रहा है।
  • गंगा एक्शन प्लान के दौरान जिले में कोई भी काम नहीं कराया गया। सर्वे के बाद ही इस प्लान की इति श्री हो गयी।
  • गंगा एक्शन प्लान में जिले में कुछ भी खर्च नहीं हुआ न ही निर्माण कार्य कराया गया।
  • पतित पावनी मां गंगा के किनारे शिवराजपुर, भृगु मुनि की तपोस्थली भिटौरा, अश्रि्वनी कुमारों की नगरी असनी व नौबस्ता प्रमुख घाट हैं जो कि जिले के श्रद्धालुओं के लिए तीर्थ स्थल हैं। इन घाटों में बांदा, हमीरपुर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
  • पौराणिक इतिहास को समेटे गंगा किनारे के मुख्य गांवों के विकास के लिए कोई भी कार्य नहीं कराया गया। शिवराजपुर को पर्यटक स्थल बनाने के लिए कार्य योजना बनायी गयी थी, लेकिन शासन से स्वीकृति न मिलने से वह भी धरी की धरी रह गयी। भिटौरा में सरकारी स्तर पर तो कोई प्रयास नहीं किये गये। स्वामी विज्ञानानंद ने जरूर करोड़ों की लागत पर ओमघाट को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया है। 
  • गंगा किनारे के हर गांव में श्मशान घाट बने हैं जहां कटरी ही नहीं दो तिहाई आबादी के शवों का दाह संस्कार किया जाता है। मुख्य रूप से भिटौरा के श्मशान घाट में प्रतिदिन पंद्रह से बीस शव आते हैं। इसके अलावा नौबस्ता व शिवराजपुर में भी अधिक संख्या में शवों का संस्कार होता है। किसी भी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए पाण्डु नदी से गंगा को कचरा ही दान मिल रहा है। कानपुर व फतेहपुर के डेढ़ सौ से अधिक गांवों का गन्दा पानी व आधा दर्जन फैक्ट्रियों का कचरा इस नदी के माध्यम से गंगा में पहुंच रहा है। लोगों का मानना है कि बारिश में तो कोई बात नहीं अन्य महीनों में पाण्डु नदी में पानी नहीं गंदगी बहती है जो कि छिवली नदी से पांच किमी दूर गंगा में समाहित हो जाती है।
  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का न तो जिले में कार्यालय है और न ही गंगा के प्रदूषण को रोकने में इस बोर्ड का कोई सहयोग रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हर वर्ष लाखों डकारने वाली संस्थाओं को जीवनदायिनी का प्रदूषण नजर नहीं आ रहा है। अलबत्ता यह जरूर है कि पिछले दो वर्षो से दैनिक जागरण की मुहिम से कई सामाजिक संगठन इस कार्य में आगे आये और प्रदेश का शायद यह पहला जनपद होगा जहां पिछले वर्ष शारदीय नवरात्र के बाद देवी प्रतिमाओं का भूविसर्जन कर निर्मल गंगा, अविरल गंगा की हुंकार भरी गयी। इस वर्ष तो नब्बे फीसदी देवी प्रतिमायें भू विसर्जित की गयीं।

ऐसा माना जा रहा है कि देवी प्रतिमाओं का जल विसर्जन रुकने से गंगा में जाने वाली लगभग पंद्रह सौ टन गंदगी बच गयी। इस कार्य में स्वामी विज्ञानानंद भागीरथ बनकर आगे आये। उन्होंने संतों की टोली के साथ गांव-गांव में भ्रमण कर शवों का विसर्जन रोकने व निष्प्रयोज्य पूजन सामग्री गंगा में न डालने का आहवान किया। भिटौरा में लकड़ी का शवदाह गृह बनवाया। नौबस्ता सहित अन्य घाटों में भी शव प्रवाह रुके इसके लिए वह शवदाह बनवाने की कार्ययोजना बनायी है। इस कार्य में अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद, हिन्दू महासभा, बजरंग दल, ब्राम्हण चेतना मंच का सहयोग रहा।

(साभार – दैनिक जागरण)

उत्तर वाहिनी गंगा पूरे भारतवर्ष में मात्र तीन जगह

शहर मुख्यालय से उत्तर दिशा में बारह किलोमीटर दूर उत्तरवाहिनी भागीरथी के तट पर महर्षि भृगु मुनि ने तपस्या की थी । पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भृगु मुनि की तपोस्थली में देवता भी परिक्रमा करने आए थे । पवित्र धाम गंगा महर्षि भृगु क्रोध में एक बार भगवान् विष्णु की छाती पर लात भी मारी थी । यहाँ पर अन्य आधा दर्जन मन्दिर बने हुए हैं ।

स्वामी विज्ञानानंद जी ने महर्षि भृगु की तपोस्थली में भगवान् शंकर की विशाल मूर्ति स्थापित कराई है , और नया पक्का घाट भी तैयार कराया है । भगवान् शंकर की मूर्ति पर ॐ नमः शिवाय का बारह वर्षों से अनवरत पाठ चल रहा है । उत्तर वाहिनी गंगा पूरे भारतवर्ष में मात्र तीन जगह है जिसमे हरिद्वार , काशी व भृगु धाम भिटौरा है

सरकार के प्रयास नाकाफी होने से मां गंगा का आंचल निर्मल नहीं

पुण्य सलिला मां गंगा का आंचल कब निर्मल व अविरल होगा यह देखने के लिये मां के भक्तों की आंखें तरस रही हैं। राष्ट्रीय नदी घोषित होने के बाद भी टेनरियों का गंदा पानी कल-कल बहने वाली अविरल धारा को मटमैला ही नहीं इतना विषैला कर दिया है कि मां की गोद पर अठखेलियां करने वाले जलजीव भी अब नहीं बच पा रहे हैं। सदियों से सबके पाप-ताप धोने वाली पतित पावनी की बेबस निगाहों से भक्तों में तो बदलाव आ गया है और वह अब मां गंगा को बचाने के लिये न तो उसमें निष्प्रयोज्य पूजन सामग्री डालते हैं और न ही गंदगी फैलाते हैं।

बसंत ऋतु में पहले कभी गंगा की अविरल धार कल-कल कर बहती थी अब वह मंद पड़ गयी है। पानी कम होने से जगह-जगह टापू निकल आये हैं और काले व हरे रंग का पानी इतना विषैला हो गया है कि मां गोद में अठखेलियां करने वाले जलजीवों की जान पर बन आयी है। गंगा किनारे के केवटों की मानें तो छोटी मछलियां तो इस समय तड़प-तड़प कर मर रही हैं। कछुवा भी पानी से निकलकर रेत में अपना बसेरा बना रहे हैं। उत्तरवाहिनी भृगुधाम भिटौरा के पक्के घाट व ओम घाट से गंगा की धार दो सौ मीटर दूर चली गयी है। पानी दो धाराओं पर इतने मंद गति से बह रहा है कि गंदगी बहने के बजाय घाट के किनारों पर जम गयी है।

पतित पावनी मां के निर्मल व अविरल स्वरूप को देखने के लिये भक्तों की आंखें तरस रही हैं। केन्द्र सरकार ने गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित कर दिया इससे लोगों में यह उल्लास बढ़ा था कि जल्द ही कुछ ऐसे प्रयास होंगे कि पतित पावनी की अविरल बहने वाली धार पहले की तरह दिखेगी। महानगरों की टेनरियों का गंगा में गिरने वाला पानी रोका जायेगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। तभी तो मां का आंचल और भी गंदा होता जा रहा है। समर्पित भक्त मां की इस स्थिति को देखकर दुखी हो रहे हैं। कहते हैं कि भक्त तो पतित पावनी को अविरल व निर्मल रखने के प्रयास कर रहे हैं वह न तो निष्प्रयोज्य पूजन सामग्री डाल रहे हैं और न ही शव प्रवाहित करते हैं। भिटौरा के श्मशान घाट में एक साल पहले आने वाले अस्सी फीसदी शव का जल प्रवाह होता था अब ठीक इससे उलट हो गया है। बमुश्किल दस फीसदी शवों का ही जल प्रवाह हो रहा है। नब्बे फीसदी शव जलाये जा रहे हैं। गंगा भक्त यही कहते हैं कि सरकार के प्रयास नाकाफी होने से मां का आंचल निर्मल नहीं हो रहा है।

हर-हर गंगे महादेव के जयकारों के साथ भक्तों ने पतित पावनी मां गंगा में डुबकी

माघ के चौथे पूर्णिमा के स्नान पर्व पर हर-हर गंगे महादेव के जयकारों के साथ भक्तों ने पतित पावनी मां गंगा में डुबकी लगायी। मौसम गुलाबी हो जाने के कारण घाटों में तड़के से ही स्नान करने वाले भक्तों की भीड़ पहुंचने लगी। उधर माघी पूर्णिमा पर कलेक्ट्रेट स्थित गौतम बुद्ध पार्क में बुद्ध समर्थकों ने भगवान बुद्ध को याद कर उनके आज ही के दिन आयु संस्कार के विसर्जन को याद करते हुए कहा कि जाति-पांति की दीवार ढहाकर मानव धर्म की सीख देने वाले भगवान बुद्ध मानवीय संस्कृति के विकास के द्योतक थे।

माघ के चौथे स्नान पर्व को लेकर भक्तों में खासा उल्लास रहा। पतित पावनी मां गंगा के भिटौरा स्थित ओम घाट, पक्का घाट, बलखंडेश्वर, असनी, नौबस्ता, आदमपुर, निंबुआ घाट, शिवराजपुर में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच गयी। हर-हर गंगे महादेव के जयकारों के बीच भक्तों ने मां गंगा में डुबकी लगायी और मां के गंदे हो रहे आंचल को पवित्र रखने का संकल्प लिया। गंगा घाट स्थित मंदिरों में पूजा, अर्चना के साथ भक्तों ने प्रसाद वितरण किया। भक्तों की भीड़ को देखते हुए भिटौरा सहित कई घाटों में मेला लगा जिसमें लोगों ने मनचाही वस्तुओं की खरीददारी की। गंगा घाट तक भक्तों को ले जाने के लिये जहां शहर से कई स्थानों से अलग-अलग वाहन स्टैण्ड बने हुए थे वहीं घाट में सुरक्षा के लिहाज से गोताखोर भी लगाये गये थे।

माघी पूर्णिमा को बौद्ध अनुयायियों ने महापर्व के रूप में मनाया। डा.बाबा साहब अंबेडकर मिशन शाखा के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट स्थित बुद्धा पार्क में बुद्ध जी की प्रतिमा के सामने मोमबत्ती जलाकर पुष्पांजलि दी। भन्ते गजानन एवं भन्ते विजयानन्द ने बुद्ध वन्दना, पंचशील के साथ पूजा, अर्चना की। मिशन के जिला सचेतक रमेश बौद्ध ने कहा कि माघी पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध ने वैशाली में संकल्प करके आयु संस्कार का विसर्जन किया था और अपने परम शिष्य आनन्द को यह रहस्य समझाकर प्रचार कार्य प्रारम्भ कराया था।

गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह संपन्न

भृगुधाम भिटौरा के ओम घाट में रविवार को रौनक देखते ही बनी। जिले में पैदा हुई और देश के कोने-कोने नाम रोशन कर रहीं विभूतियों का यहां जमघट लगा। स्वामी विज्ञानानंद महाराज और वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि धनंजय अवस्थी ने गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह की स्वयं कमान संभाली। संत और साहित्यकार दोनों की विभूतियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके बाद सभी 10 प्रतिभाओं को फूलमाला, शाल और प्रतीक चिन्ह भेंटकर अलंकृत किया गया।अलंकरण समारोह में शामिल होने के लिए आने और जाने वालों के लिए मुफ्त बस सेवा उपलब्ध रही। कई स्कूलों की आधा दर्जन बसों ने आने जाने वालों को यातायात सुविधा मुहैया कराई। अपरान्ह 11 बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में भारी भरकम पांडाल सजाया गया। आमंत्रित सभी 21 विभूतियों की नेम प्लेटें लगाई गईं। इस मौके पर स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि सम्मान के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि सम्मान भावनाओं का समर्पण है। इसके बाद अनंतदास महराज ने परमानंद महराज को गुलाब की माला पहनाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद 10 जिले की और एक विदेशी विभूतियों को एक माला से जोड़कर सम्मानित किया गया। इसके बाद साहित्यकार एवं कवि के अलावा सुधाकर अवस्थी, सुनील श्रीवास्तव, हरिओम रस्तोगी आदि ने बारी-बारी से प्रतीक चिन्ह, बुके, शाल देकर सम्मानित किया। बाद में स्वामी विज्ञानानंद ने सभी विभूतियों के ओम का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस दौरान समारोह में शामिल होने वालों के आने जाने का सिलसिला जारी रहा। आश्रम के पीछे नाश्ते और भोजन की व्यवस्था रही। सम्मानित होने वालों में स्वामी परमानंद महराज, राजेंद्र द्विवेदी, मिथलेश कुमार सविता, अरुण देव गौतम, डा. गिरीश कुमार शुक्ला, प्रो. मारिया, प्रदीप श्रीवास्तव, रमेश मिश्रा, डा. संकठा प्रसाद आदि रहे।

माटी में जन्मे और पढ़ लिखकर विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले माटी के लाल अपनों के ही सम्मान से गदगद हुये। देश के कोने-कोने में अपनी ख्याति अर्जित करने वाली इन हस्तियों ने यही कहा कि माटी का कर्ज चुकाने का यदि मौका मिला तो हम अपने को धन्य समझेंगे। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी की भावना को दर्शाते हुये महानुभावों ने यह संकल्प लिया कि युवा बच्चों के बीच कुछ करके हम जिले के पिछड़ेपन को दूर करना चाहते हैं। काम कहीं भी करें लेकिन माटी की सोंधी खुशबू मिटती नहीं है, यही सपना रहता है कि अपने गांव घर और जिले के लिये क्या कर दिखायें। सभी ने यही कहा कि यदि कुछ करने का प्लेटफार्म दिया तो निश्चित तौर पर कुछ कर दिखायेंगे।

हिंदी उर्दू साहित्य के क्षेत्र में देश विदेश में ख्याति अर्जित करने वाले फतेहपुर शहर के जन्मे असगर वजाहत कहते हैं कि अपनों के बीच जो खुशी होती है वह और कहीं नहीं मिलतीयहीं की माटी में पढ़े-बढ़े हैं, आखिर यहां के लिये कुछ करने का संकल्प तो बहुत पहले से था लेकिन ऐसा कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। इसके पूर्व भी माटी से माटी के वर्ष 2001 के समारोह में सबको एक साथ मिलने का मौका मिला था। पवित्र गंगा नदी के तट पर आयोजित यह समारोह हमारे उद्देश्य को पूरा करके दिखायेगा यह विश्वास है।

होम्योपैथी चिकित्सा में कानपुर में महानगर में स्थान बनाये असनी के लाल संकठा प्रसाद पांडेय कहते हैं कि नई पीढ़ी को बाहर बुलंदियों को छूने वाले माटी के लालों से जोड़ने की जरूरत है और उन्हें भी इस बात का जच्बा होना चाहिए कि वह अपने से बड़ों का मार्गदर्शन सीख लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि वह गंगा किनारे के असनी गांव के रहने वाले हैं। दोआबा की संस्कृति और संस्कार पूरे विश्व में कमाल दिखायें, यही मेरी शुभ कामना है।

शहर में ही जन्मे पुणे में आयकर निदेशक पद पर कार्यरत एजे खान कहते हैं कि घर परिवार में वर्षो से में यह चर्चा करता था कि अपनी माटी के लिये कुछ नहीं कर पा रहा हूं, पत्‍‌नी यही कहती थीं कि आप हमेशा कहते रहते हैं, कभी जाते नहीं। आखिर इस आयोजन से मेरा सपना पूरा हो गया है। अब हर वर्ष यहां आकर माटी के लिये कुछ करने के संकल्प को पूरा कर सकूंगा।

शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे इस समय दिल्ली में आईजी के पद पर कार्यरत प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि माटी से माटी का सम्मान यूं ही होता रहेगा तो कोई लाभ नहीं है। परिणाम क्या मिला, अगले वर्ष के समारोह में इसका जवाब चाहिए। एक वर्ष के दौरान इस माटी के लिये हस्तियों ने क्या किया है और क्या करना है, यह सब तय हो जाना चाहिए और यहां के लोगों को भी कुछ पाने के लिये अपने को तैयार होना पड़ेगा।

मलवां ब्लाक के आशा अभयपुर गांव में जन्मे छत्तीसगढ़ रायपुर में डीआईजी पद पर कार्यरत अरुण देव गौतम अपनों से मिलकर गर्व महसूस कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मैं तो साल में दो बार गांव आता हूं, जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर सुखद माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि जिले में कोई ऐसा मदद का प्लेटफार्म बन जाये तो वह यहां की युवा बच्चों को मार्गदर्शन के साथ हर तरह की मदद देने के लिये तैयार हैं।

गंगा किनारे आदमपुर गांव के डा. रमेशचंद्र मिश्र जो इस समय चंडीगढ़ हरियाणा में आईजी हैं, ने कहा कि बहुत से दिन ऐसा सोच रहे थे कि कोई ऐसा मंच मिले जिससे वह जिले के लोगों से जुड़ जायें। आखिर यह मौका मिल ही गया तो अब काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिये सबसे पहले हम सभी को शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में काम करना होगा तभी हम नई पीढ़ी के बच्चों को बुलंदियों तक पहुंचाने में कामयाब हो पायेंगे।

सार्वजनिक उद्यम के डायरेक्टर पर तैनात गिरीशचंद्र शुक्ला जो कि खजुहा कस्बे में जन्मे हैं, कहते हैं कि गांव मजरों में प्रतिभाएं छिपी हैं, बस निखारने की जरूरत है। वह तो साल में दो-तीन बार गांव अवश्य जाते हैं। सबसे पहला प्रयास तो खेती को व्यावसायिक बनाने का जिले में प्रयोग किया जा सकता है। संपन्नता और खुशहाली आयेगी तभी हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आगे बढ़ा पायेंगे।

साहित्य के क्षेत्र में ख्याति अर्जित करने वाले डा. गिरीशचंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि कर्मभूमि भले ही कानपुर महानगर है लेकिन जन्मभूमि का लगाव कभी कम नहीं हो सकता है। जन्मभूमि में भी कर्म का मौका मिल जाये तो हम लोग अपने भाग्य को धन्य समझेंगे।

कृषि विशेषज्ञ औरेई के राजेंद्र प्रसाद दुबे उर्फ बड़े मुन्नू कहते हैं कि कृषि को व्यावसायिक दर्जा देकर खुशहाली संपन्नता लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी यह चाहत है कि हर किसान खुशहाल और प्रगतिशील बने और इसके लिये वह बराबर आलू की खेती के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

विद्युत सुरक्षा के उपनिदेशक पद पर तैनात अल्लीपुर मौहार के प्रो. मिथलेश कुमार सविता कहते हैं कि नौकरी तो केवल जीविकोपार्जन के लिये कर रहे हैं लेकिन समाज के लिये कुछ करने की चाहत है। वह सप्ताह में दो दिन फतेहपुर में रहते हैं कि चाहते हैं कि नि:शुल्क कोचिंग करके प्रतिभाओं को आगे बढायें

गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह संपन्न

भृगुधाम भिटौरा के ओम घाट में रविवार को रौनक देखते ही बनी। जिले में पैदा हुई और देश के कोने-कोने नाम रोशन कर रहीं विभूतियों का यहां जमघट लगा। स्वामी विज्ञानानंद महाराज और वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि धनंजय अवस्थी ने गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह की स्वयं कमान संभाली। संत और साहित्यकार दोनों की विभूतियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके बाद सभी 10 प्रतिभाओं को फूलमाला, शाल और प्रतीक चिन्ह भेंटकर अलंकृत किया गया।अलंकरण समारोह में शामिल होने के लिए आने और जाने वालों के लिए मुफ्त बस सेवा उपलब्ध रही। कई स्कूलों की आधा दर्जन बसों ने आने जाने वालों को यातायात सुविधा मुहैया कराई। अपरान्ह 11 बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में भारी भरकम पांडाल सजाया गया। आमंत्रित सभी 21 विभूतियों की नेम प्लेटें लगाई गईं। इस मौके पर स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि सम्मान के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि सम्मान भावनाओं का समर्पण है। इसके बाद अनंतदास महराज ने परमानंद महराज को गुलाब की माला पहनाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद 10 जिले की और एक विदेशी विभूतियों को एक माला से जोड़कर सम्मानित किया गया। इसके बाद साहित्यकार एवं कवि के अलावा सुधाकर अवस्थी, सुनील श्रीवास्तव, हरिओम रस्तोगी आदि ने बारी-बारी से प्रतीक चिन्ह, बुके, शाल देकर सम्मानित किया। बाद में स्वामी विज्ञानानंद ने सभी विभूतियों के ओम का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस दौरान समारोह में शामिल होने वालों के आने जाने का सिलसिला जारी रहा। आश्रम के पीछे नाश्ते और भोजन की व्यवस्था रही। सम्मानित होने वालों में स्वामी परमानंद महराज, राजेंद्र द्विवेदी, मिथलेश कुमार सविता, अरुण देव गौतम, डा. गिरीश कुमार शुक्ला, प्रो. मारिया, प्रदीप श्रीवास्तव, रमेश मिश्रा, डा. संकठा प्रसाद आदि रहे।

माटी में जन्मे और पढ़ लिखकर विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले माटी के लाल अपनों के ही सम्मान से गदगद हुये। देश के कोने-कोने में अपनी ख्याति अर्जित करने वाली इन हस्तियों ने यही कहा कि माटी का कर्ज चुकाने का यदि मौका मिला तो हम अपने को धन्य समझेंगे। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी की भावना को दर्शाते हुये महानुभावों ने यह संकल्प लिया कि युवा बच्चों के बीच कुछ करके हम जिले के पिछड़ेपन को दूर करना चाहते हैं। काम कहीं भी करें लेकिन माटी की सोंधी खुशबू मिटती नहीं है, यही सपना रहता है कि अपने गांव घर और जिले के लिये क्या कर दिखायें। सभी ने यही कहा कि यदि कुछ करने का प्लेटफार्म दिया तो निश्चित तौर पर कुछ कर दिखायेंगे।

हिंदी उर्दू साहित्य के क्षेत्र में देश विदेश में ख्याति अर्जित करने वाले फतेहपुर शहर के जन्मे असगर वजाहत कहते हैं कि अपनों के बीच जो खुशी होती है वह और कहीं नहीं मिलतीयहीं की माटी में पढ़े-बढ़े हैं, आखिर यहां के लिये कुछ करने का संकल्प तो बहुत पहले से था लेकिन ऐसा कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। इसके पूर्व भी माटी से माटी के वर्ष 2001 के समारोह में सबको एक साथ मिलने का मौका मिला था। पवित्र गंगा नदी के तट पर आयोजित यह समारोह हमारे उद्देश्य को पूरा करके दिखायेगा यह विश्वास है।

होम्योपैथी चिकित्सा में कानपुर में महानगर में स्थान बनाये असनी के लाल संकठा प्रसाद पांडेय कहते हैं कि नई पीढ़ी को बाहर बुलंदियों को छूने वाले माटी के लालों से जोड़ने की जरूरत है और उन्हें भी इस बात का जच्बा होना चाहिए कि वह अपने से बड़ों का मार्गदर्शन सीख लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि वह गंगा किनारे के असनी गांव के रहने वाले हैं। दोआबा की संस्कृति और संस्कार पूरे विश्व में कमाल दिखायें, यही मेरी शुभ कामना है।

शहर में ही जन्मे पुणे में आयकर निदेशक पद पर कार्यरत एजे खान कहते हैं कि घर परिवार में वर्षो से में यह चर्चा करता था कि अपनी माटी के लिये कुछ नहीं कर पा रहा हूं, पत्‍‌नी यही कहती थीं कि आप हमेशा कहते रहते हैं, कभी जाते नहीं। आखिर इस आयोजन से मेरा सपना पूरा हो गया है। अब हर वर्ष यहां आकर माटी के लिये कुछ करने के संकल्प को पूरा कर सकूंगा।

शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे इस समय दिल्ली में आईजी के पद पर कार्यरत प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि माटी से माटी का सम्मान यूं ही होता रहेगा तो कोई लाभ नहीं है। परिणाम क्या मिला, अगले वर्ष के समारोह में इसका जवाब चाहिए। एक वर्ष के दौरान इस माटी के लिये हस्तियों ने क्या किया है और क्या करना है, यह सब तय हो जाना चाहिए और यहां के लोगों को भी कुछ पाने के लिये अपने को तैयार होना पड़ेगा।

मलवां ब्लाक के आशा अभयपुर गांव में जन्मे छत्तीसगढ़ रायपुर में डीआईजी पद पर कार्यरत अरुण देव गौतम अपनों से मिलकर गर्व महसूस कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मैं तो साल में दो बार गांव आता हूं, जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर सुखद माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि जिले में कोई ऐसा मदद का प्लेटफार्म बन जाये तो वह यहां की युवा बच्चों को मार्गदर्शन के साथ हर तरह की मदद देने के लिये तैयार हैं।

गंगा किनारे आदमपुर गांव के डा. रमेशचंद्र मिश्र जो इस समय चंडीगढ़ हरियाणा में आईजी हैं, ने कहा कि बहुत से दिन ऐसा सोच रहे थे कि कोई ऐसा मंच मिले जिससे वह जिले के लोगों से जुड़ जायें। आखिर यह मौका मिल ही गया तो अब काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिये सबसे पहले हम सभी को शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में काम करना होगा तभी हम नई पीढ़ी के बच्चों को बुलंदियों तक पहुंचाने में कामयाब हो पायेंगे।

सार्वजनिक उद्यम के डायरेक्टर पर तैनात गिरीशचंद्र शुक्ला जो कि खजुहा कस्बे में जन्मे हैं, कहते हैं कि गांव मजरों में प्रतिभाएं छिपी हैं, बस निखारने की जरूरत है। वह तो साल में दो-तीन बार गांव अवश्य जाते हैं। सबसे पहला प्रयास तो खेती को व्यावसायिक बनाने का जिले में प्रयोग किया जा सकता है। संपन्नता और खुशहाली आयेगी तभी हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आगे बढ़ा पायेंगे।

साहित्य के क्षेत्र में ख्याति अर्जित करने वाले डा. गिरीशचंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि कर्मभूमि भले ही कानपुर महानगर है लेकिन जन्मभूमि का लगाव कभी कम नहीं हो सकता है। जन्मभूमि में भी कर्म का मौका मिल जाये तो हम लोग अपने भाग्य को धन्य समझेंगे।

कृषि विशेषज्ञ औरेई के राजेंद्र प्रसाद दुबे उर्फ बड़े मुन्नू कहते हैं कि कृषि को व्यावसायिक दर्जा देकर खुशहाली संपन्नता लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी यह चाहत है कि हर किसान खुशहाल और प्रगतिशील बने और इसके लिये वह बराबर आलू की खेती के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

विद्युत सुरक्षा के उपनिदेशक पद पर तैनात अल्लीपुर मौहार के प्रो. मिथलेश कुमार सविता कहते हैं कि नौकरी तो केवल जीविकोपार्जन के लिये कर रहे हैं लेकिन समाज के लिये कुछ करने की चाहत है। वह सप्ताह में दो दिन फतेहपुर में रहते हैं कि चाहते हैं कि नि:शुल्क कोचिंग करके प्रतिभाओं को आगे बढायें

माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की तीसरी श्रंखला

।। जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।

जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक आखिर किसको नहीं भाती है। रविवार को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिलेंगी और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा देंगे।

स्वामी विज्ञानानन्द जी के मार्गदर्शन पर रविवार को भिटौरा के ओम घाट में हो रहे गौरवशाली प्रतिभाओं के सम्मान समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संयोजक मण्डल के धनंजय अवस्थी, आचार्य विष्णु शुक्ला, सुनील श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की यह तीसरी श्रंखला है। पतित पावनी उत्तरवाहिनी गंगा के ओम घाट के तट पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सुबह दस बजे विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाली अठारह विभूतियां भिटौरा घाट पहुंच जायेंगी जो हाईस्कूल व इण्टर के ग्रामीण बच्चों से रूबरू होंगे। नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को निखारने की यह अनूठी पहल माटी के ही लाल शुरू कर रहे हैं और वह माटी के ही लालों को अब आगे ले जायेंगे। बारह से अभिनंदन समारोह का कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें महामंडलेश्वर परमानंद जी महाराज जी का आशीर्वचन होगा। शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे प्रदीप श्रीवास्तव जो इस समय दिल्ली पुलिस में आईजी हैं ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली में जोनिहां निवासी विकास प्राधिकरण के उप निदेशक शैलेन्द्र सिंह परिहार के संयोजकत्व में फतेहपुर फोरम तैयार किया गया है। दिल्ली में स्थापित फतेहपुर फोरम के तार माटी से जोड़कर आगे बढ़ाने का काम किया जायेगा। अपने आप में हो रहे इस अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फतेहपुर के पिछड़ेपन को दूर कर किस तरह से विकास के पथ पर लाया जाये। विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के लिये माटी के ही लालों का सहयोग लेने की एक कार्ययोजना तय की जानी है।

माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की तीसरी श्रंखला

।। जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।

जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक आखिर किसको नहीं भाती है। रविवार को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिलेंगी और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा देंगे।

स्वामी विज्ञानानन्द जी के मार्गदर्शन पर रविवार को भिटौरा के ओम घाट में हो रहे गौरवशाली प्रतिभाओं के सम्मान समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संयोजक मण्डल के धनंजय अवस्थी, आचार्य विष्णु शुक्ला, सुनील श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की यह तीसरी श्रंखला है। पतित पावनी उत्तरवाहिनी गंगा के ओम घाट के तट पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सुबह दस बजे विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाली अठारह विभूतियां भिटौरा घाट पहुंच जायेंगी जो हाईस्कूल व इण्टर के ग्रामीण बच्चों से रूबरू होंगे। नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को निखारने की यह अनूठी पहल माटी के ही लाल शुरू कर रहे हैं और वह माटी के ही लालों को अब आगे ले जायेंगे। बारह से अभिनंदन समारोह का कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें महामंडलेश्वर परमानंद जी महाराज जी का आशीर्वचन होगा। शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे प्रदीप श्रीवास्तव जो इस समय दिल्ली पुलिस में आईजी हैं ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली में जोनिहां निवासी विकास प्राधिकरण के उप निदेशक शैलेन्द्र सिंह परिहार के संयोजकत्व में फतेहपुर फोरम तैयार किया गया है। दिल्ली में स्थापित फतेहपुर फोरम के तार माटी से जोड़कर आगे बढ़ाने का काम किया जायेगा। अपने आप में हो रहे इस अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फतेहपुर के पिछड़ेपन को दूर कर किस तरह से विकास के पथ पर लाया जाये। विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के लिये माटी के ही लालों का सहयोग लेने की एक कार्ययोजना तय की जानी है।

बीस हजार पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां चिन्हित स्थानों पर पहुँची

नव उज्जवल जलधार हार हीरक सी सोहति, बिच-बिच छहरति बूंद मध्य मुक्तामनि सोहति। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की इन पंक्तियों में मां भागीरथी का जो स्वरूप दर्शाया गया उसे लाने के लिये भक्तों के कदम आगे बढ़ गये हैं। सदियों से करोड़ों लोगों को मोक्ष देने वाली मोक्षदायिनी को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिये युवा हों या महिलायें, बच्चे व बूढ़े भी सजग प्रहरी बनकर हाथ बढ़ा रहे हैं। पतित पावनी की उज्जवल धार मैली न हो इसके लिये लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का जलप्रवाह रोकने के दैनिक जागरण द्वारा चलाये जा रहे अभियान के छठे दिन तीन हजार से अधिक मूर्तियां संकलित की गयीं। अब तकबीस हजार पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां चिन्हित स्थानों पर पहुंच गयी हैं। गंगा को बचाना है। यह बात अब घर-घर पहुंच गयी है

तभी तो मूर्तियों के भू विसर्जन में महिलायें व बच्चे आगे आ रहे हैं। लक्ष्मी, गणेश की पुरानी मूर्तियों के पंद्रह नवंबर तक संकलन के अभियान में एक कड़ी उस समय और जुड़ गयी जब अहमद गंज की महिलायें जागरण की प्रेरणा से घर से निकलकर मूर्तियां संकलित करने में जुट गयीं। आगे पढने के लिए यहाँ क्लिक करें

गंगा बचाओ अभियान नए मुकाम पर

एक माह पहले दैनिक जागरण द्वारा शुरू किये गये गंगा बचाओ अभियान बुधवार को ऐसे मुकाम पर पहुंच गया कि भक्तों का सैलाब श्मशान घाट की गंदगी को साफ कर गंगा को अविरल व निर्मल रखने का संकल्प लिया। हर-हर गंगे, जय-जय गंगे के गगनभेदी उद्घोष के सा भिटौरा के श्मशान घाट की सफाई के लिये संत हों या आमजन सबने हाथ बंटाया। शवों की गंदगी से कराह रहीं मोक्षदायिनी उस समय मुस्कुरा उठीं जब शवों के कपड़ों व गंदगी की सड़ांध को बाहर कर झाड़ू लगाकर श्मशान घाट को लकालक कर दिया गया। सदियों से सबको तार रहीं गंगा के प्रदूषण को दूर करने के लिये जिस तरह से लोगों में उमंग व उल्लास झलका उससे गांव के भी लोग आकर इस अभियान में हाथ बटाने लगे। हिन्दू महासभा ने शंख ध्वनि के साथ सफाई अभियान की शुरुआत की। बाद में तिराहे में जनसभा का गंगा को बचाने के लिये क्या करें इसकी सीख दी। इस पहल में संतों की भूमिका अग्रणी रही। तभी तो संत सफाई करने के साथ यह जयकारे लगा रहे थे कि संतों ने अब ठाना है गंगा को बचाना है।

कार्तिक पूर्णिमा के एक दिन पहले मोक्षदायिनी गंगा के श्मशान घाट में झाड़ू फावड़ा के साथ अखिल भारत हिन्दू महासभा के बैनर तले सैकड़ों गंगा भक्त पहुंच गये। ऐसे घाट में जहां हमेशा वीरानगी दिखती है शव के अग्निदाह व प्रवाह के अलावा घाट की तरफ कोई झांकता भी नहीं है वहां की गंदगी को साफ करने के लिये जैसे ही

महासभा के प्रदेश सचिव मनोज त्रिवेदी ने शंख ध्वनि की। संतों की टोली सहित कार्यकर्ता सफाई अभियान में लग गये। शव के कपड़ों, लकड़ी आदि की सड़ांध को कार्यकर्ता गंगा तट के बाहर एक जगह संकलित किया बाद में आग लगायी और इस कचरे को जमीन के नीचे गड्ढा कर दबा दिया। स्थिति यह थी कि श्मशान घाट में चार ट्राली से अधिक गंदगी इकट्ठा की गयी। पांच घंटे तक कार सेवा कर संत व हिन्दू महासभा के कार्यकर्ता व दैनिक जागरण स्टाफ के लोग घाट को लकालक कर दिया। चूने के छिड़काव के साथ गंगा के पाट में झाड़ू लगाकर गंगा बचाओ अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

पहली बार श्मशान घाट की इस तरह की सफाई देख वहां के गंगा पुत्र व गांव के लोग भी दांतों तले अंगुली दबा ली। आखिर शहर के लोगों के अन्दर गंगा को बचाने का इस तरह का जुनून आ गया है कि वह गंगा किनारे पड़ी हड्डियों, मानव अंगों को भी बिन-बिनकर साफ कर रहे हैं। पान मसाला की खाली पुलिया, पालीथीन, जली लकड़ी का कोयला, अधजली लकड़ियां, बांस, कुशा, कंडा, मटकी सहित अन्य गंदगी को गंगा भक्त ऐसे तलाशते रहे जैसे वह इस नेक कार्य में किसी तरह की भूल नहीं करना चाहते। अग्निदाह में गंगा तट पर बालू में गड़ी लकड़ियों को भी संतों ने अपने त्रिशूल की धार से खोदकर बाहर किया। उमंग व उल्लास का आलम यह रहा कि पसीना बहाते हुए काम भी कर रहे थे और सुरसरि का मुखड़ा झांककर हर-हर गंगे, जय-जय गंगे के उद्घोष भी कर रहे थे। तन्मयता के साथ गंगा मइया को बचाने का जो दृश्य भक्तों ने प्रस्तुत किया उसे देखकर शव दाह कार्यक्रम में आये लोग भी अपने को नहीं रोक पाये और वह भी अभियान में शामिल होकर आसपास की गंदगी को बाहर करने लगे। प्रदूषण से कराह रहीं गंगा भक्तों का समर्पण देख मुस्कराने लगीं। ऐसा लग रहा था कि मंद-मंद धार से हिलोरे ले रहीं गंगा उस स्थान पर रुक कर अपने पुत्रों की सेवा भाव को निहार रही हैं। तभी तो सफाई करने के साथ भक्त गंगा को निहारते और फिर जयकारे लगाकर यह कहते कि संतों ने भी अब यह ठाना है, गंगा को बचाना है। समर्पण और भक्ति में सेवा के झलकते भाव से गंगा प्रहरी अपने को धन्य मान रहे हैं कि इस पुण्य कार्य में कुछ तो हाथ बंटाने का मौका मिला। हिन्दू महासभा की वाहनों सहित गंगा बचाओ यात्रा शहर के आईटीआई रोड स्थित कार्यालय से निकली। गंगा मइया के उद्घोष के साथ यात्रा पटेलनगर से पथरकटा चौराहा होते हुए बिन्दकी बस स्टाप होते हुए बाकरगंज, पक्का तालाब से भिटौरा घाट पहुंची। श्मशान घाट में झाड़ू फावड़ा के साथ श्रमदान करने वाले संतों में स्वामी स्वरूप महाराज, रामआसरे आर्य, गया प्रसाद, सूरजबली, राकेश प्रसाद, हिन्दू महासभा के जिलाध्यक्ष रामगोपाल शुक्ला, जिला मंत्री करन सिंह पटेल, देवनाथ धाकड़े, उमाकांत तिवारी, गंगा प्रसाद साहू, प्रेमसागर मौर्य, कमलाकांत तिवारी, रमेश बाल्मीकि, रजोली पाल, जितेन्द्र पटेल आदि रहे।

दैनिक जागरण फतेहपुर कार्यालय के स्टाफ के लोगों ने भी श्रमदान कर गंगा किनारे प्रवाहित की गयी सड़ रही दुर्गा प्रतिमाओं को तट से बाहर किया और आग लगाकर गंदगी दूर की। मनोज मिश्रा की अगुवाई में कार्यालय के गोविन्द दुबे, जयगोपाल शुक्ला, योगेन्द्र पटेल, मनभावन अवस्थी, प्रशांत द्विवेदी, बबलू मौर्य, अनिल बाजपेयी, रवीन्द्र प्रताप सिंह, घनश्याम, विनय द्विवेदी, अजय दीक्षित, राजेन्द्र, जगपाल यादव आदि लोग लगे रहे।

शमशान घाट की सफाई के बाद भिटौरा में गंगा बचाओ की नुक्कड़ सभा में स्वामी विज्ञानानन्द जी ने कहा कि यह सोचना गलत है कि मूर्तियों व निष्प्रयोज्य पूजन सामग्री फेंकने से कितनी गंदगी होती है। बूंद-बूंद से घट भरने वाली बात गंगा प्रदूषण पर भी प्रभावी हो रही है। थोड़ी-थोड़ी गंदगी ने बड़ा रूप ले लिया है तभी तो अविरल और निर्मल रहने वाली गंगा की धार संकट में पड़ गयी है।

स्वामी जी ने गंगा भक्तों का आह्वान किया कि गंगा में जाने वाले नाले बंद कराये जायें। हिन्दू महासभा के प्रांतीय सचिव मनोज त्रिवेदी ने ऐलान किया कि अगले अभियान में अब गंगा में गिरने वाले नाले पाटे जायेंगे। उन्होंने कहा कि गांव का हो या फैक्ट्रियों का गंदा पानी भागीरथी की गोद में नहीं जाने पायेगा इसकी हम सब सौगन्ध खाते हैं। गंगा, गायत्री और गाय भारतीय संस्कृति की धरोहर हैं उनको भी यदि हम न बचा पाये तो हमारा जीवन ही निरर्थक है और देश की पहचान भी समाप्त हो जायेगी। अन्य संतों ने समाज का आहवान किया कि हम यह संकल्प लें कि मोक्षदायिनी गंगा का एक-एक बूंद अमृत के समान हैं और इस अमृतमयी पानी को हम प्रदूषित नहीं होने देंगे। गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाकर गंगा भक्तों को बताया जायेगा कि गंगा में डुबकी तो लगायें, लेकिन कपड़े न धोयें।

(समाचार स्त्रोत- दैनिक जागरण)

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