आखिर कब पास होगा पप्पू???


नाम जब्बार हुसेन। उम्र साठ बरस। ख्वाहिश हाईस्कूल पास होने की.. यह किसी की जन्म कुडंली नहीं बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की प्रोफाइल है। जो हाईस्कूल पास करने के लिए 40 बार परीक्षा दे चुका है। हाईस्कूल परीक्षा पास करने के अपने जूनून के चलते कस्बे का यह बुजुर्ग इकतालिसवीं बार परीक्षा में बैठने के लिए पूरी शिद्दत के साथ तैयारियों में जुटा है।

देखना यह है अपने इस जज्बे के चलते लोगों के लिए कौतूहल बन चुका यह पप्पू आखिर कब पास होगा।तकरीबन चार दशक पहले जब्बार मियां जब पहली बार दसवीं की परीक्षा में बैठे थे। उस वक्त उनकी उम्र सोलह बरस थी। तब परीक्षाओं के कायदे कानून बडे़ सख्त हुआ करते थे। शायद इस वजह से वह परीक्षा पास नहीं कर पाए। उसके बाद परीक्षाओं में बैठने का दौर लगातार जारी रहा। चालीस बार परीक्षा में बैठने के बावजूद सफलता उनके हाथ नहीं लगी। खोटी किस्मत इस विद्यार्थी के साथ हर बार दगा दे गई। आज जब्बार 60 साल के हैं। लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका जज्बा उसी तरह बरकरार है। यही वजह है कि कस्बे का यह बुजुर्ग विद्यार्थी किसी नए परीक्षार्थी की भांति 41वीं बार दसवीं की परीक्षा में बैठने के लिए तैयारियों में पूरी शिद्दत से जुटा है। सफलता के लिए वह सिर्फ ट्यूशन पढ़ रहे हैं। बल्कि प्रधानाचार्य की अनुमति से नेहरू इंटर कालेज , बिन्दकी , फतेहपुर में कक्षाएं लेने भी जाते हैं। उन्होंने नेहरू कालेज से ही हाईस्कूल का फार्म भरा है। अपने इस जज्बे के बारे में जब्बार कहते हैं कि शिक्षा से बड़ा कोई धन नहीं है। घरेलू स्थिति सही होने की वजह से वह पढ़ाई में पूरा समय नहीं दे पाए। उन्होंने बताया कि यदि इस बार सफलता हाथ लगती है तो वह आगे की कक्षा में दाखिला लेंगे, अन्यथा पुन:दसवीं की परीक्षा देंगे।
तहसील के पास जूते-चप्पल की छोटी सी दुकान लगाकर गुजारा करने वाले जब्बार का परिवार पढ़ाई की वजह से ही टूट गया। सन 1960 में उसकी शादी कल्यानपुर थाना क्षेत्र के गुगौली की ननकी के साथ हुई। जो यह चाहती है कि जब्बार पढ़ाई छोड़कर रोजी कमाने में लग जाएं किन्तु ऐसा नहीं हुआ। इसे लेकर उसका पत्नी के साथ झगड़ा हुआ और उसने दूसरी शादी कर ली। तब से वह अकेले जीवन बिता रहे हैं। उन्होंने बताया कि रिश्ते नाते सब क्षणिक हैं

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