दूधीकगार का आंचल बृह्मबेला से ही आध्यात्मिक सुवास से सराबोर

देवोत्थानी एकादशी के शुभ मुहूर्त के मध्य श्रीबांके बिहारी जी और श्री शीतला माता की बारात धूमधाम के साथ निकली। शोभा यात्रा में अबला , वृद्घ, नर, नारी सभी सम्मिलित हुये। सुदूर ग्रामीणांचल से तो दर्शनार्थी और श्रद्घालु आये ही आसपास के जनपदों से लोग जुटे।
दूधीकगार का आंचल बृह्मबेला से ही आध्यात्मिक सुवास से सराबोर हो रहा था। गंगा के इस पार और उस पार दोनो ओर की चहल पहल भगवती भागीरथी के  दोनो किनारों के मध्य संवाद कायम कर रही थी। आज मां चंद्रिका जी उस पार से इस पार आ रही है इससे दोनो ही ओर उत्साह और उमंग गंगा की तरंग के मानिंद किल्लोल कर रही थीं।
प्रात: साढ़े सात बजे भक्तों के जयकारों के बीच मां का पूजन, वंदन, अर्चन और आरती के मध्य बारात  चली। पुष्पों अक्षत, गंध, अगरु, धूप, दीप से सुवासित आसन पर श्री बांके बिहारी, श्री चंद्रिका माता की मूर्तियों के साथ स्वामी श्री सतसंगानंद, स्वामी श्री परमानंद जी महाराज के विग्रहों के संग बारात चली। पतित पावनी की पूजा करने के लिये हजारों का हुजूम जुटा, जगह-जगह लोगों ने सेतु पूजन कर श्रद्घा का समर्पण निवेदित किया। ढोलक बजा कर मंगल गीत गाती महिलायें और ढोल, मृदंग, झांझ, मंजीरे की थापों के साथ रामनाम की धुन पर नाचता गाता पुरुष वर्ग समवेत रूप से भक्ति रस की वर्षा कर रहा था। सेतु के ऊपर झूमते श्रद्घालु और नीचे शांत, शीतल, निर्मल पतित पावनी का पावन प्रवाह पग-पग पर वीरान बीहड़ में आज आध्यात्मिकता की आंधी का आह्वान कर रहे थे।
बिना किसी बाहरी नियंत्रण के हजारों का हुजूम आत्मानुशासित हो चल रहा था। भांति भांति  की आकाशीय आतिशबाजी मन मोहने वाली थी तो पटाखे भी हवाओं में गूंज रहे थे। चार किलोमीटर का सफर लगभग चार घंटे में पूरा करके बारात आश्रम पहुंची जिसका स्वागत स्वनाम धन्य संत शोभन सरकार ने सबके साथ किया। इस समारोह के बाद सबको प्रसाद वितरण किया गया और आज से अनवरत चलने वाले भण्डारे में सबने हिस्सा लिया।
आध्यात्मिक आस्था का आंदोलन 
बृह्ममर्हूत से ही दूधीकगार का वातावरण गुंजरित हो रहे मंत्रों से ध्वनित हो रहा था। कार्तिक मास की शीतल समीर के झोंको के साथ यज्ञ वेदी से उठता सुगंधित धूम्र हर जन-मन को सुवासित करने वाला था। ध्वनि विस्तारक यंत्र से प्रसारित हो वेदपाठी बाह्मणों की वाणी महोत्सव मानने आये लोगों के यात्रा की थकान को तिरोहित कर दे रही थी। आसपास के जिलों से आये श्रद्घालु भी बीहड़ की बारात का आनंद ले रहे थे। चारो ओर प्रसारित हो रहे आध्यात्मिक आस्था के इस आंदोलन का अंग वहां उपस्थित हर आदमी स्वयं को अनुभव कर रहा है यह तथ्य सबकी बातों में तैर रहा था।
सब सरकार में समाया 
 महोत्सव में मौजूद हर कोई खुद को कुछ नहीं समझ रहा है जो कुछ है सब सरकार है जो हो रहा है जो होगा वह सब कुछ सरकार ही कर रहे है। मेला संचालन समिति के सदस्य हो या दुकानदार, यहीं के रहने वाले हों या बाहर से आये दर्शनार्थी सैकड़ों बीघे क्षेत्र में फैले मेले में मौजूद हर आदमी के लिये शोभन सरकार ही सब कुछ है सब कुछ उन्हीं में समाया है और सबको वही समायोजित कर संभाल रहे है। व्यवस्थापक, प्रबंधक, आदेशक और कार्यकर्ता भी वही है। यहां व्यवस्था संभाले स्वयंसेवक सब कुछ सरकार मय और सबको सरकार मय समझ कर सेवा कर रहे है। किसी से कुछ पूछने पर कोई कुछ नहीं बताता। ज्यादा पूछने पर सब सरकार या भगवान कर रहे है यह सुना देते हैं। इस समय स्वामी जी ही सबके सरकार और भगवान है।
(समाचार साभार-दैनिक जागरण)

फतेहपुर : दूधी कगार महोत्सव की तैयारियां परवान चढ़ी

वार्षिक आयोजन का रूप ले चुके दूधी कगार महोत्सव की तैयारियां परवान चढ़ी हुई है। शोभन सरकार के आध्यात्मिक निर्देशन में मा गंगा की कगार में होने वाला यह वार्षिक उत्सव शुक्ल पक्ष एकादशी से आरंभ होकर पूर्णमासी को संपन्न होगा। दो वर्षो में ही आसपास के जनपदों तक प्रचारित प्रसारित यह महोत्सव दूधीकगार आश्रम की प्रांतीय पहचान बनता जा रहा है।
वर्ष 2008 के पहले बीहड़ में लगने वाली हाट के जैसा रहा यह मेला गांव दूधीकगार और गुनीर जैसे आसपास के गावों तक ही सीमित था। बीते बरस यह लघु मेला महोत्सव बन गया। यहां आसपास के गांवों की जनता ही नहीं दूर दूरंत से जनसैलाब उमड़ पड़ा था। संत कई चमत्कार कर दिखाते है, सिद्घ संत शोभन सरकार का सानिध्य मिलते ही दो शताब्दी से आबाद इस आश्रम में अपार आदमी जुट गये।
दूसरे वर्ष आयोजित होने जा रहे इस मेले में लाखों लोग जुटेंगे ऐसा आयोजन समिति का विश्वास है। पांच दिन के लिये आयोजित होने वाले इस महोत्सव के लिये एक माह पूर्व से तैयारियां चल रही है। दर्जन भर ट्रैक्टर और सैंकड़ों मजदूर रात दिन तैयारियों में लगे हुये है, श्रृद्घालु भी आश्रम की सेवा में अपना सहयोग समर्पित कर रहे है। जीटी रोड से तीन किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित इस आश्रम के आसपास के सैकड़ों बीघे क्षेत्रफल में आयोजित होने वाले इस मेले में कई तरह के आकर्षण होंगे
29 को उद्घाटन- श्री सतगुरू दंगल कमेटी के अध्यक्ष रामभवन सिंह मोटू के मुतामिक 20 अक्टूबर को सुबह दस बजे जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक महोत्सव की शुरूआत करेगे। इसी दिन श्री माता चंद्रिका मंदिर बक्सर से भवानी की भव्य बारात श्री सदगुरु आश्रम दूधी कगार में आयेगी जिसमें रथ पर सवार मां का विग्रह होगा। भक्त और श्रद्घालु गाजे बाजे के साथ समारोह पूर्वक बारात लायेंगे। शोभन सरकार पूरे महोत्सव के समय इसी आश्रम में रहेंगे।
यह है महोत्सव में- मेले में जहा एक ओर हर छोटी बड़ी जरूरत की चीज मिल रही होगी वहीं दूसरी ओर वहां के वातावरण में मंत्र और ऋचायें गूंज रहीं होंगी। जहां रहट की आवाजें उस कगार में कोलाहल उत्पन्न करेंगी वहीं यज्ञ शाला से उठता सुंगधित धूम्र मेले में मौजूद हर जन को आध्यात्मिक सुवास से सराबोर करता जायेगा। मेले मनपसंद चीज खरीदी खाई जा सकेगी तो पांच दिन भण्डारा भी बराबर चलता रहेगा जिसमें कोई भी जाकर प्रसाद ग्रहण कर सकेगा। प्रभु प्रेमियों के लिये जहां रामलीला का मंचन किया जायेगा| वहीं पहलवानी प्रेमियों के लिये नामी पहलवानों की जोर आजमाइस देखने को होगी।
 मेले में प्रतिदिन चलने वाले भण्डारे के लिये सबके सहयोग से अब तक सैंकड़ों कुंतल खाद्य सामग्री, घी, तेल, चीनी, मेवा, मसाले एकत्र हो चुके हैं। जो मेजबान जनपद के अलावा बांदा, हमीरपुर, कौशांबी, इलाहाबाद, रायबरेली, उन्नाव, कानपुर आदि जनपदों से आने वाले दर्शनार्थियों, श्रद्घालुओं, भक्तों के लिये होगा।

श्री सतगुरु आश्रम में पांच द्विवसीय मेले का आयोजन

श्री सतगुरु आश्रम दूधी कगार में आयोजित पांच द्विवसीय समाज समारोह मेले का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक के.एस. पिपिल ने दीप प्रच्जवलन सतगुरु रथ की आरती पूजन करके किया। इस अवसर पर आश्रम में महाराज शोभन सरकार का आशीर्वाद पाने के लिए आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा।

गंगा किनारे स्थित श्री सतगुरु आश्रम में पांच द्विवसीय मेले का आयोजन किया गया है।जिसके तहत पांचों दिन यज्ञ, भंडारा तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम कराये जा रहे हैं। मेले में अंतिम दिन प्रादेशिक स्तर पर दंगल का भी आयोजन किया गया है। आज मेले का प्रथम दिन था। पुलिस अधीक्षक केएस पिपिल मेले का शुभारंभ करने के बाद आश्रम स्थित मंदिर में माथा टेका बाद में शोभन सरकार से आशीर्वाद लियाआयोजकों द्वारा सतगुरु आश्रम के मंदिर बलखंडेश्वर पहुंचकर शिव जी की पूजा अर्चना की।

उधर मेले में अलग एकांत बैठे शोभन सरकार के दर्शन हेतु सुबह से देर शाम तक दर्शनार्थियों की भीड़ लगी


( समाचार स्त्रोत – दैनिक जागरण )

श्री सतगुरु आश्रम में पांच द्विवसीय मेले का आयोजन

श्री सतगुरु आश्रम दूधी कगार में आयोजित पांच द्विवसीय समाज समारोह मेले का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक के.एस. पिपिल ने दीप प्रच्जवलन सतगुरु रथ की आरती पूजन करके किया। इस अवसर पर आश्रम में महाराज शोभन सरकार का आशीर्वाद पाने के लिए आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा।

गंगा किनारे स्थित श्री सतगुरु आश्रम में पांच द्विवसीय मेले का आयोजन किया गया है।जिसके तहत पांचों दिन यज्ञ, भंडारा तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम कराये जा रहे हैं। मेले में अंतिम दिन प्रादेशिक स्तर पर दंगल का भी आयोजन किया गया है। आज मेले का प्रथम दिन था। पुलिस अधीक्षक केएस पिपिल मेले का शुभारंभ करने के बाद आश्रम स्थित मंदिर में माथा टेका बाद में शोभन सरकार से आशीर्वाद लियाआयोजकों द्वारा सतगुरु आश्रम के मंदिर बलखंडेश्वर पहुंचकर शिव जी की पूजा अर्चना की।

उधर मेले में अलग एकांत बैठे शोभन सरकार के दर्शन हेतु सुबह से देर शाम तक दर्शनार्थियों की भीड़ लगी


( समाचार स्त्रोत – दैनिक जागरण )

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