फतेहपुर:जिले की मेधा को सम्मान

दैनिक जागरण व एयर इण्डिया के तत्वावधान में आयोजित प्रतिस्पर्धा प्रतियोगिता में महर्षि विद्या मंदिर की भूगोल की शिक्षिका बीना श्रीवास्तव को बोल्ट एवार्ड व कक्षा नौ के छात्र सिद्धांर्थ सिंह को रैंक एवार्ड में द्वितीय स्थान हासिल हुआ। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में मिली सफलता पर छात्रों व शिक्षकों ने खुशी जाहिर की है। प्राचार्य ने बधाई देते हुए कहा कि इससे विद्यालय ही नहीं बल्कि जिले की मेधा को सम्मान मिला है।

दैनिक जागरण व एयर इण्डिया के इन प्रयासों की सराहना करते हुए सम्मान से गदगद शिक्षिका व छात्र ने कहा कि इस तरह के प्रयासों से मेधा का उत्साहवर्धन होता है जो कि समाज और देश दोनों के लिये हितकर है। दोनों ने कहा कि निश्चित तौर पर इस तरह के प्रयास और निचले स्तर पर करने की जरूरत है जिससे गांव की प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का मौका मिल सके। उन्होंने कहा कि यह कभी सोचा भी नहीं था कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। सात सितम्बर 2008 को लखनऊ में आयोजित प्रतिस्पर्धा प्रतियोगिता में महर्षि विद्या मन्दिर की भूगोल की शिक्षिका श्रीमती बीना श्रीवास्तव को बोल्ट एवार्ड में द्वितीय स्थान व कक्षा नौ- अ के सिद्धार्थ सिंह को रैंक एवार्ड मिला है। शिक्षिका छात्र जीवन से मेधावी थीं। हाईस्कूल में मेरिट में स्थान मिला। 1976 में नेशनल मेरिट स्कालरशिप मिली। 1971 व 76 में सर्वोत्तम छात्रा का पुरस्कार मिला। शिक्षिका टेबिल टेनिस की प्रतिभावान खिलाड़ी भी हैं। छात्र सिद्धार्थ भी कक्षा में मेधावी छात्र रहे। प्राचार्य एके मिश्र ने सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि मेधा से और लोगों को भी कुछ सीखने का मौका मिलेगा।

विसर्जन तो पहले भी होता था …….

विसर्जन तो पहले भी होता था, लेकिन तब अलग-अलग लोग अपने घरों से गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां लाकर चुपचाप गंगा मां की गोद में डाल देते थे। जागरण की पहल पर पहली बार चेतना जागी तो गली-मुहल्लों में लोग घर-घर से मूर्तियों का संग्रह करने निकले। गंगा मैया के इन सपूतों ने बाकायदा भव्य यात्रा निकालकर संग्रहीत करीब 20 हजार मूर्तियों का गंगा तीरे भूविसर्जन किया तो मैया के आंचल को दूषित करने वाला एक और मिथक समाधिस्थ हो गया।

दैनिक जागरण के गंगा बचाओ अभियान का असर यह रहा कि पहली बार गंगा में प्रवाहित की जाने वाली लक्ष्मी, गणेश की मूर्तियों का भूमि विसर्जन कर एक मिसाल प्रस्तुत की गयी।

इन मूर्तियों का वजन बीस टन से अधिक था। गंदगी गंगा में पहुंचने से रोकी गयी। मूर्ति संकलन के अभियान में लगे कार्यकर्ताओं के चेहरे उस समय खुशी से खिल उठे जब पांच ट्राली मूर्तियां एक साथ एक बड़े गड्ढे में विसर्जित की गयीं। अविरल गंगा, निर्मल गंगा के जयकारों के बीच कार्यकर्ता एक-एक लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति को गड्ढे में सहेजते रहे। इस तरह से तकरीबन बीस हजार मूर्तियां एक बड़े क्षेत्रफल में तैयार किये गये गड्ढे में विसर्जित की गयीं। पहले मूर्तियों को संगम के जल से स्नान कराया गया फिर चंदन, अक्षत, फूल माला से पूजा, अर्चना करने के बाद आरती की गयी। स्वामी विज्ञानानन्द जी की मौजूदगी में ओम घाट में जहां पर दुर्गा प्रतिमाओं का भूमि विसर्जन किया गया था उसी के बगल में लक्ष्मी, गणेश की पुरानी मूर्तियों का भूमि विसर्जन हुआ। लक्ष्मी, गणेश की पुरानी मूर्तियों की महाविसर्जन यात्रा सुबह से ही शुरू हो गयी थी। आठ बजे से कार्यकर्ता संकलित स्थानों पर जा-जाकर मूर्तियां ट्रैक्टर की ट्राली में रखते रहे। दोपहर बारह बजे पांच ट्राली मूर्तियां जब संकलित हो गयीं तो अलग-अलग संगठनों के बैनर तले यात्रा निकाली गयी। जिस मार्ग से लक्ष्मी, गणेश कर रहे पुकार, मत रोको गंगा की धार, हम सबने यह ठाना है गंगा को बचाना है के जयकारों के साथ यात्रा निकली। महिलायें व बच्चे संकलित स्थानों पर आकर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते रहे और हाथ बंटाकर मूर्तियों को ट्रैक्टर ट्राली में रखवाने में सहयोग करते रहे। आगे पढने के लिए यहाँ क्लिक करें

विसर्जन तो पहले भी होता था …….

विसर्जन तो पहले भी होता था, लेकिन तब अलग-अलग लोग अपने घरों से गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां लाकर चुपचाप गंगा मां की गोद में डाल देते थे। जागरण की पहल पर पहली बार चेतना जागी तो गली-मुहल्लों में लोग घर-घर से मूर्तियों का संग्रह करने निकले। गंगा मैया के इन सपूतों ने बाकायदा भव्य यात्रा निकालकर संग्रहीत करीब 20 हजार मूर्तियों का गंगा तीरे भूविसर्जन किया तो मैया के आंचल को दूषित करने वाला एक और मिथक समाधिस्थ हो गया।

दैनिक जागरण के गंगा बचाओ अभियान का असर यह रहा कि पहली बार गंगा में प्रवाहित की जाने वाली लक्ष्मी, गणेश की मूर्तियों का भूमि विसर्जन कर एक मिसाल प्रस्तुत की गयी।

इन मूर्तियों का वजन बीस टन से अधिक था। गंदगी गंगा में पहुंचने से रोकी गयी। मूर्ति संकलन के अभियान में लगे कार्यकर्ताओं के चेहरे उस समय खुशी से खिल उठे जब पांच ट्राली मूर्तियां एक साथ एक बड़े गड्ढे में विसर्जित की गयीं। अविरल गंगा, निर्मल गंगा के जयकारों के बीच कार्यकर्ता एक-एक लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति को गड्ढे में सहेजते रहे। इस तरह से तकरीबन बीस हजार मूर्तियां एक बड़े क्षेत्रफल में तैयार किये गये गड्ढे में विसर्जित की गयीं। पहले मूर्तियों को संगम के जल से स्नान कराया गया फिर चंदन, अक्षत, फूल माला से पूजा, अर्चना करने के बाद आरती की गयी। स्वामी विज्ञानानन्द जी की मौजूदगी में ओम घाट में जहां पर दुर्गा प्रतिमाओं का भूमि विसर्जन किया गया था उसी के बगल में लक्ष्मी, गणेश की पुरानी मूर्तियों का भूमि विसर्जन हुआ। लक्ष्मी, गणेश की पुरानी मूर्तियों की महाविसर्जन यात्रा सुबह से ही शुरू हो गयी थी। आठ बजे से कार्यकर्ता संकलित स्थानों पर जा-जाकर मूर्तियां ट्रैक्टर की ट्राली में रखते रहे। दोपहर बारह बजे पांच ट्राली मूर्तियां जब संकलित हो गयीं तो अलग-अलग संगठनों के बैनर तले यात्रा निकाली गयी। जिस मार्ग से लक्ष्मी, गणेश कर रहे पुकार, मत रोको गंगा की धार, हम सबने यह ठाना है गंगा को बचाना है के जयकारों के साथ यात्रा निकली। महिलायें व बच्चे संकलित स्थानों पर आकर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते रहे और हाथ बंटाकर मूर्तियों को ट्रैक्टर ट्राली में रखवाने में सहयोग करते रहे। आगे पढने के लिए यहाँ क्लिक करें

बीस हजार पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां चिन्हित स्थानों पर पहुँची

नव उज्जवल जलधार हार हीरक सी सोहति, बिच-बिच छहरति बूंद मध्य मुक्तामनि सोहति। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की इन पंक्तियों में मां भागीरथी का जो स्वरूप दर्शाया गया उसे लाने के लिये भक्तों के कदम आगे बढ़ गये हैं। सदियों से करोड़ों लोगों को मोक्ष देने वाली मोक्षदायिनी को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिये युवा हों या महिलायें, बच्चे व बूढ़े भी सजग प्रहरी बनकर हाथ बढ़ा रहे हैं। पतित पावनी की उज्जवल धार मैली न हो इसके लिये लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का जलप्रवाह रोकने के दैनिक जागरण द्वारा चलाये जा रहे अभियान के छठे दिन तीन हजार से अधिक मूर्तियां संकलित की गयीं। अब तकबीस हजार पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां चिन्हित स्थानों पर पहुंच गयी हैं। गंगा को बचाना है। यह बात अब घर-घर पहुंच गयी है

तभी तो मूर्तियों के भू विसर्जन में महिलायें व बच्चे आगे आ रहे हैं। लक्ष्मी, गणेश की पुरानी मूर्तियों के पंद्रह नवंबर तक संकलन के अभियान में एक कड़ी उस समय और जुड़ गयी जब अहमद गंज की महिलायें जागरण की प्रेरणा से घर से निकलकर मूर्तियां संकलित करने में जुट गयीं। आगे पढने के लिए यहाँ क्लिक करें

बीस हजार पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां चिन्हित स्थानों पर पहुँची

नव उज्जवल जलधार हार हीरक सी सोहति, बिच-बिच छहरति बूंद मध्य मुक्तामनि सोहति। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की इन पंक्तियों में मां भागीरथी का जो स्वरूप दर्शाया गया उसे लाने के लिये भक्तों के कदम आगे बढ़ गये हैं। सदियों से करोड़ों लोगों को मोक्ष देने वाली मोक्षदायिनी को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिये युवा हों या महिलायें, बच्चे व बूढ़े भी सजग प्रहरी बनकर हाथ बढ़ा रहे हैं। पतित पावनी की उज्जवल धार मैली न हो इसके लिये लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का जलप्रवाह रोकने के दैनिक जागरण द्वारा चलाये जा रहे अभियान के छठे दिन तीन हजार से अधिक मूर्तियां संकलित की गयीं। अब तकबीस हजार पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां चिन्हित स्थानों पर पहुंच गयी हैं। गंगा को बचाना है। यह बात अब घर-घर पहुंच गयी है

तभी तो मूर्तियों के भू विसर्जन में महिलायें व बच्चे आगे आ रहे हैं। लक्ष्मी, गणेश की पुरानी मूर्तियों के पंद्रह नवंबर तक संकलन के अभियान में एक कड़ी उस समय और जुड़ गयी जब अहमद गंज की महिलायें जागरण की प्रेरणा से घर से निकलकर मूर्तियां संकलित करने में जुट गयीं। आगे पढने के लिए यहाँ क्लिक करें

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