UNISON – 2008 का आयोजन अब 30 अक्टूबर को

पिछली पोस्ट में अन्तिम रूप से घोषित UNISON – 2008 की आयोजन तिथि में पुनः एक बार परिवर्तन हुआ है , कुछ दिक्कतों के चलते अब UNISON2008 दिल्ली दरबार में तारीख ३० अक्टूबर 2008 को समय 12:00 दोपहर में आयोजित होगावास्तव में कोशिश यह होनी चाहिए की आयोजन की तिथियों में ज्यादा परिवर्तन फेरबदल हो , जिससे अधिक से अधिक लोग इस आयोज का हिस्सा बन सकेंमैं समझता हूँ कि कुछ ऐसी दिक्कतें अवश्य रही होंगी जिसके कारण यह परिवर्तन अपरिहार्य हुआ होगा चलतेचलते सभी को……..
दीपावली पर्व की हार्दिक बधाई!

UNISON – 2008 का आयोजन अब 30 अक्टूबर को

पिछली पोस्ट में अन्तिम रूप से घोषित UNISON – 2008 की आयोजन तिथि में पुनः एक बार परिवर्तन हुआ है , कुछ दिक्कतों के चलते अब UNISON2008 दिल्ली दरबार में तारीख ३० अक्टूबर 2008 को समय 12:00 दोपहर में आयोजित होगावास्तव में कोशिश यह होनी चाहिए की आयोजन की तिथियों में ज्यादा परिवर्तन फेरबदल हो , जिससे अधिक से अधिक लोग इस आयोज का हिस्सा बन सकेंमैं समझता हूँ कि कुछ ऐसी दिक्कतें अवश्य रही होंगी जिसके कारण यह परिवर्तन अपरिहार्य हुआ होगा चलतेचलते सभी को……..
दीपावली पर्व की हार्दिक बधाई!

फतेहपुर के थे लाल सोहन लाल द्विवेदी !

चल पड़े जिधर दो डग, मग में, चल पड़े कोटि पग उसी ओर
पड़ गई जिधर भी एक दृष्टि, पड़ गये कोटि दृग उसी ओर;
जिसके सिर पर निज धरा हाथ, उसके शिर-रक्षक कोटि हाथ
जिस पर निज मस्तक झुका दिया, झुक गये उसी पर कोटि माथ।


अगर आप को याद हो यह पंक्तिया; तो बताते चले की यह पंक्तिया हमारे रस्त्रकवि प.सोहन लाल द्विवेदी द्वारा रचित हैं । सोहनलाल द्विवेदी राष्ट्रीय नवजागरण के उत्प्रेरक ऐसे कवियों के नाम हैं, जिन्होंने अपने संकल्प और चिन्तन, त्याग और बलिदान के सहारे राष्ट्रीयता की अलख जगाकर, अपने पूरे युग को आन्दोलित किया था, गाँधी जी के पीछे देश की तरूणाई को खडा कर दिया था। सोहनलालजी उस श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी थे। डा. हरिवंशराय बच्चन ने एक बार लिखा था जहाँ तक मेरी स्मृति है, जिस कवि को राष्ट्रकवि के नाम से सर्वप्रथम अभिहित किया गया, वे सोहनलाल द्विवेदी थे। गाँधीजी पर केन्द्रित उनका गीत युगावतार या उनकी चर्चित कृति भैरवी की पंक्ति वन्दना के इन स्वरों में एक स्वर मेरा मिला लो, हो जहाँ बलि शीश अगणित एक सिर मेरा मिला लो में कैद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सबसे अधिक प्रेरणा गीत था।
फतेहपुर की मिटटी को हम सलाम करते हैं। ज्यादा जानने के लिए यंहा चटकाएं।

फतेहपुर के थे लाल सोहन लाल द्विवेदी !

चल पड़े जिधर दो डग, मग में, चल पड़े कोटि पग उसी ओर
पड़ गई जिधर भी एक दृष्टि, पड़ गये कोटि दृग उसी ओर;
जिसके सिर पर निज धरा हाथ, उसके शिर-रक्षक कोटि हाथ
जिस पर निज मस्तक झुका दिया, झुक गये उसी पर कोटि माथ।


अगर आप को याद हो यह पंक्तिया; तो बताते चले की यह पंक्तिया हमारे रस्त्रकवि प.सोहन लाल द्विवेदी द्वारा रचित हैं । सोहनलाल द्विवेदी राष्ट्रीय नवजागरण के उत्प्रेरक ऐसे कवियों के नाम हैं, जिन्होंने अपने संकल्प और चिन्तन, त्याग और बलिदान के सहारे राष्ट्रीयता की अलख जगाकर, अपने पूरे युग को आन्दोलित किया था, गाँधी जी के पीछे देश की तरूणाई को खडा कर दिया था। सोहनलालजी उस श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी थे। डा. हरिवंशराय बच्चन ने एक बार लिखा था जहाँ तक मेरी स्मृति है, जिस कवि को राष्ट्रकवि के नाम से सर्वप्रथम अभिहित किया गया, वे सोहनलाल द्विवेदी थे। गाँधीजी पर केन्द्रित उनका गीत युगावतार या उनकी चर्चित कृति भैरवी की पंक्ति वन्दना के इन स्वरों में एक स्वर मेरा मिला लो, हो जहाँ बलि शीश अगणित एक सिर मेरा मिला लो में कैद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सबसे अधिक प्रेरणा गीत था।
फतेहपुर की मिटटी को हम सलाम करते हैं। ज्यादा जानने के लिए यंहा चटकाएं।

फतेहपुर के रचनाकार कन्हैया लाल नंदन के बारे में

शयद आपको पता हो कि रचनाकार कन्हैया लाल नंदन अपने जनपद फतेहपुर के ही लाल हैं । अपनी रचनाओ से इन्होने साहित्य के साथ साथ अपने जनपद का भी नाम रोशन किया है । जाहिर है कि किसी न किसी तरह से वह हमारे लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं। आइये उनके बारे में जानने के लिए यंहा चटकते हैं । यंहा बताया गया है कि…………प्रमुख रचनाये -


कन्हैयालाल नंदन

जन्म: 1933

उपनाम
जन्म स्थान परसदेपुर, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश
कुछ प्रमुख
कृतियाँ
विविध
जीवनी कन्हैयालाल नंदन / परिचय
Kanahiyalal Nandan, Kanahaiya Lal

फतेहपुर – सरकारी वेबसाइट केनजर से

पिछली पोस्ट में आपने विकिपीडिया के नजरों से फतेहपुर को जानने की कोशिश की थी। आज फतेहपुर के बारे में सरकारी wesite के माध्यम से जानकारी के लिए यंहां चटकाए।
यंहा बताया गया है कि – District Fatehpur was setup on November 10th, 1826 A.d. as a separate district, taking fertile land lying in between river Ganga & river Yamuna. . Thus, this is among a few oldest districts in the state of Uttar Pradesh . Besides having a grand religious and historical background, this is motherland of Martyr Jodha Singh Ataiya, Martyr Dariyaw Singh and many other freedom fighters & renowned hindi poet Rashtrakavi Sohan Lal Dwivedi . In this site, we have tried our best to give you full introduction of this town & it’s heros……..

सार्वजानिक जगहों को चिन्हित करने की कोशिश करें

फतेहपुर में रहते हैं , और अभी तक अपने घर को सॅटॅलाइट की नजर से नहीं देखा तो देखने के लिए यंहा चटकाएं । कृपया कोशिश करें की पूरा फतेहपुर घेरने के बजाय वास्तविक रूप से अपने घर को ही दिखाएँ । विशेष रूप से सार्वजानिक जगहों को चिन्हित करने की कोशिश करें ।

फतेहपुर के रचनाकार कन्हैया लाल नंदन के बारे में

शयद आपको पता हो कि रचनाकार कन्हैया लाल नंदन अपने जनपद फतेहपुर के ही लाल हैं । अपनी रचनाओ से इन्होने साहित्य के साथ साथ अपने जनपद का भी नाम रोशन किया है । जाहिर है कि किसी न किसी तरह से वह हमारे लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं। आइये उनके बारे में जानने के लिए यंहा चटकते हैं । यंहा बताया गया है कि…………प्रमुख रचनाये -


कन्हैयालाल नंदन

जन्म: 1933

उपनाम
जन्म स्थान परसदेपुर, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश
कुछ प्रमुख
कृतियाँ
विविध
जीवनी कन्हैयालाल नंदन / परिचय
Kanahiyalal Nandan, Kanahaiya Lal

फतेहपुर – सरकारी वेबसाइट केनजर से

पिछली पोस्ट में आपने विकिपीडिया के नजरों से फतेहपुर को जानने की कोशिश की थी। आज फतेहपुर के बारे में सरकारी wesite के माध्यम से जानकारी के लिए यंहां चटकाए।
यंहा बताया गया है कि – District Fatehpur was setup on November 10th, 1826 A.d. as a separate district, taking fertile land lying in between river Ganga & river Yamuna. . Thus, this is among a few oldest districts in the state of Uttar Pradesh . Besides having a grand religious and historical background, this is motherland of Martyr Jodha Singh Ataiya, Martyr Dariyaw Singh and many other freedom fighters & renowned hindi poet Rashtrakavi Sohan Lal Dwivedi . In this site, we have tried our best to give you full introduction of this town & it’s heros……..

सार्वजानिक जगहों को चिन्हित करने की कोशिश करें

फतेहपुर में रहते हैं , और अभी तक अपने घर को सॅटॅलाइट की नजर से नहीं देखा तो देखने के लिए यंहा चटकाएं । कृपया कोशिश करें की पूरा फतेहपुर घेरने के बजाय वास्तविक रूप से अपने घर को ही दिखाएँ । विशेष रूप से सार्वजानिक जगहों को चिन्हित करने की कोशिश करें ।

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