>फतेहपुर : रहिमाल बाबा आश्रम को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा

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पुर बुजुर्ग ,असोथर (फतेहपुर) में स्थित रहिमाल बाबा के आश्रम का शीघ्र कायाकल्प होगा। पुरातत्व विभाग इस प्राचीनतम आश्रम को अपने कब्जे में लेकर स्थलीय निरीक्षण करके राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया है।

असोथर थाना क्षेत्र की ग्रामसभा पुर बुजुर्ग के पश्चिम ससुरखदेरी नदी के किनारे करीब चालीस एकड़ भूखंड जो टीला के रूप में है। उसके मध्य एक प्राचीन मंदिर है। जो हजारों वर्ष पुराना बताया जाता है। यहां खंडित मूर्तियों के शिलाएं पड़ी हैं। मंदिर के अंदर विशाल शिव लिंग है जिसे स्वयंभू बताया जाता है। यहां की मूर्तियां बौद्धकालीन संस्कृति एवं कला मूर्तियों से मिलाप करती है। खजुराहो मंदिर जैसी सैकड़ों खंडित मूर्तियां पड़ी हैं।  हालांकि इस मंदिर में ग्रामीण एवं ग्राम प्रधान चंदन सिंह पाल द्वारा नया निर्माण करवाया गया था। ग्रामीण बताते हैं कि सावन माह में इस आश्रम में रोने की आवाज पहले आती है फिर शंखनाद होता है।

इस प्राचीन स्मारक में पुरातत्व विभाग लखनऊ की टीम आयी थी। टीम ने आश्रम का भौतिक सत्यापन करने के बाद विभाग का बोर्ड लगा दिया है और ग्राम प्रधान को भारत सरकार की नियमावली के प्रति देकर आगाह किया है कि यह आश्रम राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विभाग ने लिया है। इसका शीघ्र जीर्णोद्धार होगा तथा भूमि का सीमांकन करवाकर बाउंड्रीवाल बनाया जाएगा। पुरातत्व विभाग के अधीक्षक पीडी मिश्रा ने बताया कि स्मारक का चरणबद्ध तरीके से विकास विभाग करवाएगा। बिना अनुमति के अब कोई भी उस स्थान से छेड़छाड़ नहीं करेगा।

असोथर के पूर्व ब्लाक प्रमुख सुधीर त्रिपाठी ने पांच वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर अश्वस्थामा आश्रम, बलभद्रस्वामी का आश्रम, बौंडर, जागेश्वर धाम, वुधरामऊ, रहिमाल बाबा के आश्रम को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में लिए जाने का आग्रह किया था। वहीं पुर बुजुर्ग के प्रधान चंदन सिंह पाल ने बताया कि वर्षो की मेहनत के बाद यह सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि यहां का शिव लिंग स्वयंभू है। यहां अकूत संपत्ति दबी होने की चर्चा पूर्वज करते चले आये हैं। असोथर स्टेट से आश्रम तक सुरंग का जिक्र नागरिक करते हैं।

>फतेहपुर : हाई मेरिट वालों को ही मिलेगा बीटीसी में मौका

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बीटीसी की ट्रेनिंग करके अध्यापक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए यह खुशखबरी है। अपने ही जिले में ढाई सैकड़ा  हाई मेरिट वाले युवाओं को बीटीसी प्रशिक्षण का मौका मिलेगा। दो सौ युवाओं को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट ) ,फतेहपुर में  दो वर्षीय प्रशिक्षण मिलेगा जबकि पचास युवाओं को प्रशिक्षण एक निजी शिक्षण संस्था में दिया जाएगा। हालांकि अभी तक निजी विद्यालय का नाम नहीं स्पष्ट हो पाया है, लेकिन शिवपुरी महाविद्यालय के नाम का कयास लगाया जा रहा है।
दो दिन पहले लखनऊ से जिले में 250 बीटीसी की रिक्तियां प्रकाशित होते ही युवाओं की धड़कन तेज हो गई है। बीटीसी में स्थान पाने के लिए युवा डायट के चक्कर लगाने लगे हैं। हालांकि अभी तक डायट के पास बीटीसी से संबंधित कोई भी आदेश लिखत-पढत  में नहीं आया है। डायट प्राचार्य कुमारी विमल वर्मा के अनुसार  19 मई को लखनऊ में बैठक बुलाई गई है….. हो सकता है बैठक में कोई दिशा निर्देश जारी हो जाएं। 
बीटीसी का प्रशिक्षण देने के लिए डायट के पास 200 अभ्यर्थियों की क्षमता है। जबकि रिक्तियां 250 घोषित हुई हैं। ऐसी हालत में साफ है कि जिले में किसी एक निजी विद्यालय को बीटीसी की कक्षाएं संचालित करने के लिए मान्यता मिली है।
जिले में पिछले कई सालों से बीटीसी का चयन नहीं हुआ है। वर्ष 2004 डायट ने बीटीसी चयन प्रक्रिया शुरू की थी, मामला न्यायालय में चले जाने के कारण चयन का काम अधर में अटक गया था। अभी हाल ही में न्यायालय का फैसला आने पर यह चयन पूरा हो पाया है।
डायट के चयन प्रक्रिया प्रभारी  का कहना है कि अभी तक ऊपर से बीटीसी चयन प्रक्रिया से संबंधित कोई दिशा निर्देश नहीं प्राप्त हुए हैं। डायट में प्रशिक्षण देने की क्षमता 200 प्रशिक्षणार्थियों की है। ऐसी हालत में साफ है कि किसी एक विद्यालय को प्रशिक्षण दिए जाने के लिए मान्यता मिल चुकी है। विद्यालय कौन सा है इस संबंध में अभी तक जानकारी नहीं है। 
पूरी जानकारी राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् उत्तर-प्रदेश की वेबसाईट पर उपलब्ध है | सम्बंधित आवेदन पत्र इस लिंक पर उपलब्ध है | आवेदन की अंतिम तिथि  ८ जून २०१० है |

फतेहपुर : दूधी कगार महोत्सव की तैयारियां परवान चढ़ी

वार्षिक आयोजन का रूप ले चुके दूधी कगार महोत्सव की तैयारियां परवान चढ़ी हुई है। शोभन सरकार के आध्यात्मिक निर्देशन में मा गंगा की कगार में होने वाला यह वार्षिक उत्सव शुक्ल पक्ष एकादशी से आरंभ होकर पूर्णमासी को संपन्न होगा। दो वर्षो में ही आसपास के जनपदों तक प्रचारित प्रसारित यह महोत्सव दूधीकगार आश्रम की प्रांतीय पहचान बनता जा रहा है।
वर्ष 2008 के पहले बीहड़ में लगने वाली हाट के जैसा रहा यह मेला गांव दूधीकगार और गुनीर जैसे आसपास के गावों तक ही सीमित था। बीते बरस यह लघु मेला महोत्सव बन गया। यहां आसपास के गांवों की जनता ही नहीं दूर दूरंत से जनसैलाब उमड़ पड़ा था। संत कई चमत्कार कर दिखाते है, सिद्घ संत शोभन सरकार का सानिध्य मिलते ही दो शताब्दी से आबाद इस आश्रम में अपार आदमी जुट गये।
दूसरे वर्ष आयोजित होने जा रहे इस मेले में लाखों लोग जुटेंगे ऐसा आयोजन समिति का विश्वास है। पांच दिन के लिये आयोजित होने वाले इस महोत्सव के लिये एक माह पूर्व से तैयारियां चल रही है। दर्जन भर ट्रैक्टर और सैंकड़ों मजदूर रात दिन तैयारियों में लगे हुये है, श्रृद्घालु भी आश्रम की सेवा में अपना सहयोग समर्पित कर रहे है। जीटी रोड से तीन किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित इस आश्रम के आसपास के सैकड़ों बीघे क्षेत्रफल में आयोजित होने वाले इस मेले में कई तरह के आकर्षण होंगे
29 को उद्घाटन- श्री सतगुरू दंगल कमेटी के अध्यक्ष रामभवन सिंह मोटू के मुतामिक 20 अक्टूबर को सुबह दस बजे जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक महोत्सव की शुरूआत करेगे। इसी दिन श्री माता चंद्रिका मंदिर बक्सर से भवानी की भव्य बारात श्री सदगुरु आश्रम दूधी कगार में आयेगी जिसमें रथ पर सवार मां का विग्रह होगा। भक्त और श्रद्घालु गाजे बाजे के साथ समारोह पूर्वक बारात लायेंगे। शोभन सरकार पूरे महोत्सव के समय इसी आश्रम में रहेंगे।
यह है महोत्सव में- मेले में जहा एक ओर हर छोटी बड़ी जरूरत की चीज मिल रही होगी वहीं दूसरी ओर वहां के वातावरण में मंत्र और ऋचायें गूंज रहीं होंगी। जहां रहट की आवाजें उस कगार में कोलाहल उत्पन्न करेंगी वहीं यज्ञ शाला से उठता सुंगधित धूम्र मेले में मौजूद हर जन को आध्यात्मिक सुवास से सराबोर करता जायेगा। मेले मनपसंद चीज खरीदी खाई जा सकेगी तो पांच दिन भण्डारा भी बराबर चलता रहेगा जिसमें कोई भी जाकर प्रसाद ग्रहण कर सकेगा। प्रभु प्रेमियों के लिये जहां रामलीला का मंचन किया जायेगा| वहीं पहलवानी प्रेमियों के लिये नामी पहलवानों की जोर आजमाइस देखने को होगी।
 मेले में प्रतिदिन चलने वाले भण्डारे के लिये सबके सहयोग से अब तक सैंकड़ों कुंतल खाद्य सामग्री, घी, तेल, चीनी, मेवा, मसाले एकत्र हो चुके हैं। जो मेजबान जनपद के अलावा बांदा, हमीरपुर, कौशांबी, इलाहाबाद, रायबरेली, उन्नाव, कानपुर आदि जनपदों से आने वाले दर्शनार्थियों, श्रद्घालुओं, भक्तों के लिये होगा।

फतेहपुर:पालिका परिषद पहली जून से अपनी वेबसाइट शुरू करने जा रहा

नगर पालिका परिषद पहली जून से अपनी वेबसाइट शुरू करने जा रहा है। इंटरनेट पर एनपीपी फतेहपुर डाट इन (http://nppfatehpur.in) खोलकर कोई भी उपभोक्ता पालिका परिषद क्षेत्र के आवास संबंधित जानकारी हासिल कर सकेगा। इतना ही नहीं परिषद कर्मचारी भी अपनी सेवा से संबंधित जानकारी इंटरनेट पर देख सकेंगे।

इसके लिए परिषद प्रशासन वार्ड वार डाटा फीडिंग का काम तेजी के साथ पूरा कराने में जुटा है।मालूम हो कि ढाई साल पहले पालिका में कंप्यूटर कक्ष स्थापित करके इंटरनेट से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए शासन से 25 लाख का बजट अवमु1त किया गया था, जिससे आधा दर्जन छोटे कंप्यूटरों के अलावा एक मास्टर कंप्यूटर लगाए गए थे। खूबसूरत से केबिन में यह व्यवस्था करके दरवाजे में ताला बंद कर दिया गया था। दो साल तक ताला बंद रहने के बाद अधिशासी अधिकारी अरुण कुमार गुप्ता ने शासन को लिखकर अतिरिक्त बजट की मांग की। बजट मिलने पर डाटा फीडिंग का काम शुरू कराया गया, जो अब पूरा होने के करीब पहुंच गया है।

नगर पालिका परिषद के सभी 30 वार्ड के उपभो1ताओं के नाम, उनके भवन का क्षेत्रफल, करों की अदायगी और बकाया राजस्व से संबंधित ब्यौरा फीडिंग का काम लगभग पूरा हो चुका है। इतना ही नहीं परिषद कर्मचारियों की सेवा का ब्यौरा और शहरवासियों की जन्म मृत्यु के डाटा फीडिंग का काम पहले पूरा कर लिया गया था।

हालांकि अभी तक फीडिंग का काम ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है। काम पूरा होने के बाद ठेकेदार पूरी व्यवस्था नगर पालिका परिषद को हस्तांतरित कर देगा। इसके बाद परिषद कर्मचारी व्यवस्था संभालेंगे। अधिशासी अधिकारी अरुण कुमार गुप्ता का कहना है कि लोकसभा चुनाव के कारण इंटरनेट से जोड़ने में विलंब हुआ है। डाटा फींडिंग का काम हर हालत में 20 मई तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 30 मई तक इंटरनेट से जोडकर उपभोक्ताओं को यह सुविधा मुहैया करा दी जाएगी।

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फतेहपुर:बार-बार पूंछताछ कक्ष की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी

रेलवे स्टेशन में यात्रियों को अब अपनी गाड़ी की तात्कालिक स्थिति जानने के लिये बार-बार पूंछताछ कक्ष की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। प्लेटफार्मों में लगायी गयी डिस्प्ले स्क्रीन में सब कुछ लिखकर नजर आता रहेगा।

स्टेशन में सुविधाओं में बढ़ोत्तरी हो रही है। जब से स्टेशन की श्रेणी उच्चीकृत करने का फैसला हुआ है तब से सुविधाएं बढ़ रही हैं। डिस्प्ले स्क्रीन की सुविधा मिल जाने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। रेलवे सूत्रों ने बताया कि तीनों प्लेटफार्म और यात्री प्रतीक्षालय में यह सूचना पट्टिकाएं लगायी गयी हैं जिससे कि यात्री जहां खड़े हैं वहीं पर अपनी सवारी गाड़ी की तात्कालिक स्थिति जान सकें। इन सूचना पट्टिकाओं में उन सभी ट्रेनों की लोकेशन की जानकारी लगातार यात्रियों को दी जाती रहेगी।

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फतेहपुर का जिला अस्पताल आईपीएचएस योजना में शामिल

फतेहपुर के जिला अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालित इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैडर्ड (आईपीएचएस) योजना में शामिल कर लिया गया है। अब बहुत जल्द मरीजों को अस्पताल में और बेहतर चिकित्सीय सुविधायें मिलने लगेंगी। इस योजना के तहत चिकित्सालय में बने धोबी घाट को लांड्री में परिवर्तित किया जायेगा, इसके अलावा वाहन स्टैड, वाडरें में स्वास्थ्य संबंधी जिन उपकरणों की कमी है उनकी उपलब्धता करायी जायेगी। यह जानकारी देते हुये मुख्य चिकित्साधीक्षक डा.राकेश कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की मंशा है कि अस्पताल को सभी संसाधनों से लैस कर दिया जाये ताकि यहां मिलने वाली बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से मरीज लाभान्वित हो सके। बताया कि स्टीमेट बनाकर जल्द ही भेज दिया जायेगा।

ज्ञात हो कि सदर अस्पताल के पीछे बना धोबीघाट इन दिनों अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। यहां पुरानी तकनीकी से अस्पताल के कपड़ों की धुलाई की जाती है, जिससे कपड़ों के वैक्टीरिया पूरी तरह नष्ट नहीं हो पाते। इसके अलावा चद्दर आदि ठीक से साफ भी नहीं होते। बताते चलें कि 120 बेडों वाले अस्पताल में प्रतिदिन बेड सीट, तकिये के कवर के अलावा आपरेशन थियेटर व अन्य वस्त्रों की धुलायी की जाती है। पर्याप्त संसाधनों के अभाव में कपड़ों की कैसी धुलायी होती है इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। सीएमएस ने बताया कि प्रदेश के बीस जिलों में फतेहपुर के अस्पताल का चयन योजना में किया गया है।

(समाचार साभार- दैनिक जागरण)

फतेहपुर :हरियाली उस गति से नहीं बढ़ रही जितनी खत्म हो रही

जनपद में वनों के नाम पर बहुत ज्यादा हरियाली नहीं है कुल वन क्षेत्र में भी ऊसर प्रभावित क्षेत्र की ही बहुलता है। जिले का वन विभाग लाख हाथ पांव मारने के बाद भी हरियाली को बढ़ा पाने में नाकाम ही है साथ ही यह भी उल्लेखनीय है कि वन विस्तार के प्रति जिले की जनता में जागरूकता का अभाव है। विभाग द्वारा आयोजित की जाने वाली गोष्ठियों में आमजन की मौजूदगी का मानक पूरा नहीं हो पाता तो विभाग भी साल भर के अपने वृक्षारोपण के लक्ष्य के बड़े हिस्से को दूसरे विभागों या संस्थानों के नाम कर निश्चिंत हो लेता है। 
जिले के कुल क्षेत्र फल के विरूद्ध वन विस्तार नाम मात्र का है। इसके प्रमुख कारणों में एक महत्वपूर्ण घटक आम जन की रूचि वन विस्तार के प्रति नहीं हैं। वन विभाग के माध्यम से हुये वृक्षारोपण के संरक्षण के लिये जागरूकता का अभाव इस कदर है कि शहरी हो या ग्रामीण लोग अपने गांव, घर, गली या क्षेत्र में लगाई गयी पौध को नष्ट होते देखते रहते हैं किंतु उसकी सुरक्षा के लिये संवेदना किसी के दिल में नहीं पैदा होती है। जनपद के कुछ क्षेत्र में पिछले दशक में कई जगह के लोगों में व्यवसायिक दृष्टि से उपयोगी फलदार वृक्षारोपण किया है पर यह सीमित ही है। वन विभाग के क्षेत्र पर नजर डाली जाये तो एसडीओ बीके सिंह के मुताबिक हमारे पास 7112 हेक्टे. कुल वन क्षेत्र इसमें मानिकपुर गलाथा रेंज के 561 हेक्टे. क्षेत्र को छोड़ दिया जाये तो इसमें मानिकपुर गलाथा रेंज के 561 हेक्टे. क्षेत्र को छोड़ दिया जाये तो बाकी वन क्षेत्र ऊसर प्रभावित है जहां हर तरह के वृक्षारोपण में सफलता नहीं पाई जा सकती है। बड़ा वन क्षेत्र न होने की यह सच्चाई है तो यह भी एक हकीकत की वन विभाग को जो लक्ष्य वार्षिक वृक्षारोपण के तहत दिया जाता है उसे विभागीय लोग रेवड़ी की तरह बाटते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर शासन से जिले में वार्षिक लक्ष्य 40 लाख पौध लगाने का है तो इसमें यह खेल कर दिया जाता है जैसे कि लक्ष्य का कुछ हिस्सा ग्राम पंचायतों के नाम तो कुछ परिषदीय विद्यालयों के खाते में दर्ज हो जाता है। मिले काम में अब ग्राम पंचायतों में खेल होता है। प्रधान जी भी गांव में बिरवे न खोंसवा कर नर्सरी के साथ डील कर लेते हैं। अपना हिस्सा लेकर नर्सरी वाला रसीद दे देता है, लग गये पेड़। उसी तरह मास्टर साहब भी पौध स्कूल में न लगवा कर कई बार पढ़ने वालों के हाथों में थमा देते हैं तो कई बार कुछ और करते हैं। इसी तरह के कमाल उन विभागों या संस्थानों द्वारा भी किये जातें हैं जिन्हें वृक्षारोपण का लक्ष्य दिया जाता है। वन विभाग भी नोडल विभाग के तौर पर काम की उचित देख रेख नहीं करता है। 
प्रतिवर्ष शासन द्वारा जितना लक्ष्य दिया जाता है अगर उसे पूरा कर लिया जाये कुछ ही सालों में जिला हरा भरा हो जायेगा। पर दिक्कत यह है कि यह हरियाली अगर फैल जायेगी तो इस हरियाली के नाम पर हरे हो रहे व्यक्तियों, संस्थाओं की हरियाली सूख जायेगी। 
कठिनाई 
 जिले में जंगल नष्ट हो रहा है। हरियाली उस गति से नहीं बढ़ रही जितनी खत्म हो रही है। वन माफिया सक्रिय है। वन विभाग अपनी ड्यूटी को ठीक से अंजाम नहीं दे पा रहा है। पर इस विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के सामने भी मूलभूत कठिनाइयां हैं। जिनके बने रहते काम ठीक से अंजाम दे पाना संभव भी नहीं दिखता है। वन विभाग से अच्छे काम की दरकार है पर यहां स्टाफ तक महीनों से पूरा नहीं हो पा रहा है। विभागीय कर्मचारियों के पास वर्दी तक नहीं है। दूसरी कई अन्य दिक्कतों के वाहन की उपलब्धता न हो पाना भी मुश्किलें खड़ी कर देता है। 
चुनौती
वन विभाग के अधिकारियों के समक्ष जनपद के ऊसर प्रभावित क्षेत्र में हरियाली फैलाने की चुनौती है। विभाग के सामने वन सम्पदा की रक्षा करने की दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है। वन विभाग के अधिकारियों के पास वन सम्पदा को हानि पहुंचाने वाले के विरुद्ध कोई बड़ा अधिकार न होने से भी परेशानी खड़ी होती है। इसी के साथ अगर अधिकारी किसी वन माफिया को वन नष्ट करने के आरोप में कार्यवाही करे तो होने वाली सिफारिशों से पार पाने की भी चुनौती भी इनके सामने होती है। इन सभी चुनौतियों से जूझते हुए वन विभाग के सामने जनपद वासियों के अंदर वानिकी के प्रति उत्साह जागरुकता और रुचि उत्पन्न करने की है। 
यह रहा हासिल
वर्ष 2008-09 में निर्धारित 470 हे. लक्ष्य के विरुद्ध 793.18 हे. क्षेत्र में वृक्षारोपण किया गया। फरवरी 2009 तक विभिन्न योजनाओं ने 1.28 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित हुए। वर्ष 2008-09 हेतु राजस्व प्राप्ति के 44.25 लाख लक्ष्य के विरुद्ध फरवरी 2009 तक 76.00 लाख राजस्व अर्जित हुआ। वन विभाग ने पर्यावरण जागरुकता अभियान के अंतर्गत ब्लाक स्तर पर तेरह गोष्ठियां आयोजित कर ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के प्रति जागरुकता पैदा की। जिला स्तर पर वन विकास अभिकरण का गठन कर 49 ग्राम वन समितियों के माध्यम से वृक्षारोपण की पहल की जायेगी। 
आज तो यह करें
आज विश्व वानिकी दिवस है। सवेरे से यह खबर पढ़ते समय तक आपने कई काम किये होंगे। आज वानिकी दिवस के मौके पर एक काम ऐसा भी करें जो थोड़ी देर, थोड़ी संतुष्टि, थोड़ी प्राप्ति का न हो बल्कि यह काम ऐसा हो जो आपके कर देने के बाद, आपके बाद भी सुखद परिणाम देते रहने वाला हो .. आज एक ऐसा बीमा करें जो एक बार कर देने के बाद सदैव देते रहने वाला हो .. तो आज अपने प्यारे प्राइमरी के मास्टर के आग्रह, आह्वान, मनुहार पर एक काम यह करें कि एक पौधा रोप दें, आज एक पुण्य रोप दें जो आपके साथ इस समाज, इस पर्यावरण, प्रकृति के लिए भी स्वर्ग सा परिणामदायी है।

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मृतक आश्रितों को प्रशिक्षण में मिली छूट, वरिष्ठता का मिलेगा लाभ

मृतक आश्रित शिक्षकों के प्रशिक्षण के विवादित मुद्दे पर प्रमुख सचिव ने 31 दिसम्बर से 94 से 8 जनवरी 1999 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को प्रशिक्षण से मुक्ति प्रदान करते हुए कहा है कि उन्हें वरिष्ठता प्रोन्नति नियमितीकरण का लाभ दिया जाये। इसके बाद के नियुक्त शिक्षक जिनकी सेवा पांच वर्ष पूर्व हो गयी उन्हें प्रशिक्षण तो लेना पड़ेगा लेकिन सेवा सम्बंधी लाभ प्रदान किये जायेंगें।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने नार्वल स्कूल में बैठक कर प्रमुख सचिव के निर्देश पर खुशी जताते हुए कहा कि राज कर्मचारी संयुक्त परिषद शिक्षक कल्याण संघ के संयुक्त प्रयास से मृतक आश्रित शिक्षकों को यह लाभ मिला है। बैठक में शिक्षक नेताओं ने कहा मृतक आश्रितों को मिलने वाले लाभ अनुमन्य होंगें। साथ ही आठ जनवरी 1999 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा के पांच वर्ष पूरा होने की तिथि से ही वरिष्ठता, प्रोन्नति, नियमितीकरण होने से शिक्षकों समस्याओं का समाधान हो सकेगा। शिक्षक नेता हेमंत त्रिपाठी देवेश सिंह ने बताया कि प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया है कि उक्त सम्बंध में कार्यवाही शीघ्रता से आगे बढ़ाई जाये। बैठक में प्रमुख रूप से जगदीश यादव, अनुराग मिश्र, हेमा श्रीवास्तव, खुन्नूलाल, आदित्य, सुधीर, अखिलेश, कृष्णदत्त त्यागी, नागेश पांडेय, प्रभा देवी, किरण देवी, जितेंद्र, श्रीकृष्ण शुक्ला, राजेंद्र सैनी सहित सैकड़ों शिक्षक मौजूद रहे।

मृतक आश्रितों को प्रशिक्षण में मिली छूट, वरिष्ठता का मिलेगा लाभ

मृतक आश्रित शिक्षकों के प्रशिक्षण के विवादित मुद्दे पर प्रमुख सचिव ने 31 दिसम्बर से 94 से 8 जनवरी 1999 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को प्रशिक्षण से मुक्ति प्रदान करते हुए कहा है कि उन्हें वरिष्ठता प्रोन्नति नियमितीकरण का लाभ दिया जाये। इसके बाद के नियुक्त शिक्षक जिनकी सेवा पांच वर्ष पूर्व हो गयी उन्हें प्रशिक्षण तो लेना पड़ेगा लेकिन सेवा सम्बंधी लाभ प्रदान किये जायेंगें।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने नार्वल स्कूल में बैठक कर प्रमुख सचिव के निर्देश पर खुशी जताते हुए कहा कि राज कर्मचारी संयुक्त परिषद शिक्षक कल्याण संघ के संयुक्त प्रयास से मृतक आश्रित शिक्षकों को यह लाभ मिला है। बैठक में शिक्षक नेताओं ने कहा मृतक आश्रितों को मिलने वाले लाभ अनुमन्य होंगें। साथ ही आठ जनवरी 1999 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा के पांच वर्ष पूरा होने की तिथि से ही वरिष्ठता, प्रोन्नति, नियमितीकरण होने से शिक्षकों समस्याओं का समाधान हो सकेगा। शिक्षक नेता हेमंत त्रिपाठी देवेश सिंह ने बताया कि प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया है कि उक्त सम्बंध में कार्यवाही शीघ्रता से आगे बढ़ाई जाये। बैठक में प्रमुख रूप से जगदीश यादव, अनुराग मिश्र, हेमा श्रीवास्तव, खुन्नूलाल, आदित्य, सुधीर, अखिलेश, कृष्णदत्त त्यागी, नागेश पांडेय, प्रभा देवी, किरण देवी, जितेंद्र, श्रीकृष्ण शुक्ला, राजेंद्र सैनी सहित सैकड़ों शिक्षक मौजूद रहे।

ख़राब परिस्थितियों के बावजूद अमित बना वैज्ञानिक

ठनी ही रहती है मेरी सिरफिरी पागल हवाओं से,
मगर मैं रेत के टीले पे अपना घर बनाता हूं।



इरादे फौलादी हों, लक्ष्य अडिग हो और इच्छाशक्ति मजबूत हो तो कोई भी मुश्किल मंजिल को पाने से नहीं रोक सकती। इसे पुन: प्रमाणित किया है पिता रामकिशोर व माता सरस्वती देवी के होनहार पुत्र अमित ने। सोना आग में तपकर कुन्दन बनता है और जीवन की कठिनाइयों से दो-दो हाथ करके ही आदमी में निखार आता है। यह महज कह दी गयी बातें नहीं हैं विषम परिस्थितियों ने ही महान मानवों को जना है।

जरा गौर करें पिता आजीवन कारावास की सजा के अन्तर्गत जेल में घर में मात्र डेढ़ बीघा खेती दोनों जून रोटी के लाले अकेली मां के कमजोर कंधों पर बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी। हजारों मुश्किलें ऐसी कि हार मान लेना ही नियति बन जाये। पर जैसा नाम ठीक वैसा ही काम कर दिखाया अमित ने। अमित इस शब्द का तात्पर्य ही है अधिक जो कम न हो। यथा नाम तथा गुण को चरितार्थ करने वाले अमित की उपलब्धि ने इनके गांव चांदपुर के साथ सम्पूर्ण जनपद के माथे पर चार चांद लगा दिये हैं। अमित भाभा एटामिक रिसर्च सेन्टर कलपक्कम में ए ग्रेड वैज्ञानिक बन गये हैं। यह एक ऐसी उपलब्धि है जिसने सुना वही चमत्कृत रह गया। कारण कि तमाम तरह की सुख सुविधायें और अच्छी व्यवस्थायें देने के बावजूद बाहर पढ़ने गये नौनिहाल अक्सर लौट के बुद्धू घर को आये वाली कहावत चरितार्थ करते हैं।

बचपन में ही पिता रामकिशोर पटेल हत्या के मुकदमे में जेल चले गये थे। उन कठिन दिनों में भी अमित ने साहस नहीं खोया। वह खुद तो पढ़ते ही रहे साथ ही अपने छोटे-भाई बहनों को भी अध्ययन के लिये निरंतर प्रेरित करते रहे। बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि अमित ने अपनी पढ़ाई का खर्च खुद ही निकाला। पढ़ने के साथ पढ़ाना जिससे ज्ञान भी बढ़ा और खर्च भी चलता रहा। भौतिकी से प्रथम श्रेणी में परास्नातक अमित ने फरवरी 2008 में जब भाभा रिसर्च सेन्टर कलपक्कम में वैज्ञानिक पद हेतु परीक्षा दी थी उस वक्त उन्हें अपनी ऐसी सफलता की आशा नहीं थी। पर कहते हैं कि परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता सो यहां भी उन्होंने सफलता के उच्च आयाम स्थापित किये। उनका रिलज्ट आया तो वह ए ग्रेड के अन्तर्गत वैज्ञानिक बन चुके थे।

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