अन्ना !……फतेहपुर आपके साथ है !

 और कुछ नहीं …..बस इतना ही कि 

“अन्ना!………फतेहपुर आपके साथ है

फतेहपुर : 48वीं बार में जब्बार पास हो ही गए मैट्रिक

कहते हैं-

‘सीढ़ियां उनके लिए बनी हैं जो छत पर जाना चाहते हैं, 
है आसमां पे जिनकी नजर, उन्हें रास्ता खुद बनाना है।’ 

कुछ ऐसा ही जज्बा लिए जब्बार जब ने 48वीं बार हाईस्कूल की परीक्षा दी और ऊपर वाले ने भी पूरा करम बख्शा। आखिर 68 वर्ष की उम्र में उनका मैट्रिक पास होने का सपना पूरा हो गया। बुधवार को कालेज के प्रधानाचार्य ने उन्हें पास होने का प्रमाणपत्र लेने के लिए बुलवाया तो खुशी से उनकी आंखें छलक उठीं। वह जोश से कहते हैं कि कुछ आर्थिक मदद मिले तो वह आगे भी पढ़ना जारी रखेंगे।
डीघ गांव निवासी जब्बार बेहद गरीब हैं। फुटपाथ पर जूते-चप्पल बेचकर अपने परिवार की जीविका चलाते हैं। 15 वर्ष की अवस्था में उनका निकाह हुआ था। उस समय उनमें पढ़ने का जुनून था। कामकाज न करने के कारण पत्नी ने तलाक दे दिया। 20 वर्ष की उम्र में पहली बार वह हाईस्कूल की परीक्षा में बैठे। अपनी मेहनत और बिना नकल पास होने की हसरत लिए पिछले 48 साल से वह लगातार बोर्ड परीक्षा का फार्म भरते चले आ रहे थे। 48वीं बार उन्हें सफलता मिली।
जब्बार हुसेन ने वर्ष 1963 में नगर के नेहरू इंटर कालेज में विज्ञान वर्ग से संस्थागत परीक्षार्थी के रूप में पहली बार हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। तब वह हिंदी के अलावा सभी चार विषयों में फेल हो गये थे। इसके बाद से उन्होंने विज्ञान वर्ग छोड़कर कला वर्ग से व्यक्तिगत परीक्षा देना शुरू किया। दुर्भाग्य रहा कि तब से हर साल फेल होते आ रहे हैं। वर्ष 2010 की परीक्षा में हिंदी, सामाजिक विज्ञान व कला में पास हो गये थे। जबकि अंग्रेजी, प्रारंभिक गणित व विज्ञान में फेल हो गये थे। रिजल्ट अनुत्तीर्ण रहा था। इस वर्ष उन्होंने केवल अंग्रेजी, प्रारंभिक गणित व विज्ञान की परीक्षा दी थी। जब्बार का रिजल्ट विचाराधीन आया था। प्रमाण पत्र सह अंकपत्र आने पर विज्ञान में 35 अंक मिले हैं। प्रारंभिक गणित में 28 अंक हैं। इसमें 5 नंबर का ग्रेस मिल जाने पर इसमें उत्तीर्ण मान लिये गये। इसके बाद अंग्रेजी में केवल एक अंक मिला है। चूंकि एक विषय में फेल को पास माने जाने की व्यवस्था है। इसके तहत जब्बार उत्तीर्ण हो गये। प्रधानाचार्य ने बताया कि जब्बार रिगुलेशन 17(1) चैप्टर 12 के तहत हाईस्कूल परीक्षा 2011 में पास हो गये हैं। 

बुधवार को नगर के दयानंद इंटर कालेज के प्रधानाचार्य ओम प्रकाश वाजपेई ने बुजुर्ग जब्बार को गांव से बुलवाकर प्रमाणपत्र दिया तो खुशी से उनकी आंखों में आंसू आ गए। बच्चों ने उनके जज्बे को सलाम करते हुए तालियों की ध्वनि से बधाई दी।
(समाचार साभार : अमर उजाला फतेहपुर )

फतेहपुर : सैकड़ों यात्रियों के लिए भगवान बन गये ग्रामीण

भरी दोपहरी जब हर कोई अपने काम में व्यस्त  था। अचानक एक जोरदार के  धमाके ने सबको दहला दिया। ऐसा लगा जैसे बम फट गया हो। लोगों ने घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। मंजर देखा तो दिल दहल गया। कालका मेल के करीब दर्जन भर डिब्बे बुरी तरह से क्षतिग्रस्त थे। कुछ हवा में लटके थे तो कुछ पिचके थे। यात्रियों में कोहराम मचा था सभी जान बचाने की दुहाई दे रहे थे। हादसे की खबर पल भर में ही आसपास के दर्जनों गांवों में फैली तो ग्रामीणों ने घटनास्थल की ओर दौड़ लगा दी।
फतेहपुर के मलवां स्टेशन पर कालका मेल के क्षतिग्रस्त होने के बाद लगभग चार सौ से अधिक लोग फंसे थे। एसी कोच (ए1, ए2,बी1, बी 2 बी 3) समेत कुल 11 डिब्बों में मंजर दिल दहलाने वाला था। किसी का हाथ लटक रहा था तो किसी की केवल गर्दन दिखाई दे रही थी। कई यात्रियों का शरीर तो कुचल गया था। हादसे की खबर पाकर मलवां क्षेत्र के ओखरा कुंवरपुर, बेहटा, उमरगहना, मलवां, भग्गा का पुरवा चक्की गांवों के सैकड़ों लोग मौके पर पहुंच गये। ट्रैक्टर, वैन, पिकअप समेत वाहनों से पहुंचे ग्रामीणों ने पहुंचते ही राहत कार्य शुरू कर दिया। जिस बोगी से चीख पुकार मचती उसी ओर ग्रामीणों का जत्था पहुंचकर लोगों की जान बचाने में जुट जाता। प्रशासन के पहुंचने से पहले ही लगभग सौ लोगों को ट्रेन से सुरक्षित निकालकर लोगों ने घरों में शरण दी।

प्रशासन की टीम का राहत कार्य शुरू हुआ तो एएसपी निधि सारनाथ ने गांववालों को दूर जाने को कहा। इस पर कुछ युवकों की उनसे कहासुनी हो गयी। इस पर यात्रियों ने युवकों का समर्थन किया और कहा …..कि गांववाले न होते तो वे भी काल के गाल में समा चुके होते। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी बैकफुट हुए और गांववाले वायु सैनिकों के आने के बाद उनके साथ देर रात तक राहतकार्य में जीजान से जुटे रहे।

मलवां स्टेशन पर कालका मेल में हादसे के शिकार हुए लोगों के परिजन फतेहपुर स्टेशन मुख्यालय में भटकते नजर आये। हादसे में मरे एवं जख्मी लोगों का पता लगाने पहुंचे थे लेकिन अव्यवस्था इस कदर रही कि रेलवे प्रशासन द्वारा कंट्रोल रूम तक की व्यवस्था नहीं की गयी थी। हादसे में शिकार लोगों के परिजनों को जैसे ही घटना की खबर मिली, लोग परिजन का पता लगाने के लिए फतेहपुर मुख्यालय आये तथा मृतक और घायलों की सूची तलाशते रहे।
महिलाओं ने भी बंटाया हाथ

राहत कार्य में महिलाओं ने भी हाथ बंटाया। गंभीर रूप से घायल महिला यात्रियों को जब गांववालों ने अपने घरों में शरण दी तो घर की महिलाओं ने घायलों की अपने स्तर से मरहम पट्टी की। छोटे बच्चे यात्रियों का बैग कंधे पर टांगकर उन्हें सुरक्षित स्थान तक ले गये।

औद्योगिक क्षेत्र के मजदूरों ने भी किया काम

ट्रेन हादसे की खबर मिलते ही फतेहपुर की आधा दर्जन से अधिक फैक्ट्रियों में शाम की शिफ्ट शून्य घोषित कर दी। लक्ष्मी काटसिन के मैनेजर एसडी यादव ने करीब दो हजार कर्मचारियों को राहत कार्य के लिए रवाना कर दिया। राधे-राधे, सिग्मा शारदा स्टील एकता डेरी त्रिवेदी इंजीनियरिंग कालेज के सैकड़ों कर्मचारी देर रात तक राहत कार्य में जुटे रहे। स्कूलों की बसें भी राहत कार्य में जुटी। समाजसेवी एंबुलेंस के साथ सबसे पहले पहुंचने वालों में थे। कई चक्कर लगाकर घायलों को सदर अस्पताल पहुंचाया।

(समाचार साभार : दैनिक जागरण फतेहपुर डेस्क )

फतेहपुर जिले में ट्रेन हादसे की सबसे बड़ी घटना : मलवां में कालका एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त

आज सुबह मैं संतोष त्रिवेदी  जी से मिलने उनके गाँव गया हुआ था। फतेहपुर जिले में हुई इस साल की सबसे बड़ी रेल दुर्घटना में फतेहपुर का नाम  होने से मित्रों के फोन आने पर मुझे जानकारी हुई । हालांकि शुरू में मैंने इसे केवल बोगी के पटरी से उतर जाने जैसा ही साधारण समझा था। क्योंकि बताते चलें कि खागा स्टेशन के समीप डेढ़ माह पहले संगम एक्सप्रेस की 8 बोगी पटरी क्षतिग्रस्त हो जाने से पलट गयी थी लेकिन कोई भी यात्री जख्मी नहीं हुआ था। मलवां स्टेशन के समीप 6 माह पहले भी 4 बोगी पलटी थी लेकिन कोई जख्मी नही हुआ था। जाहिर है भगवान को मेरी यह समझ स्वीकार ना थी।  वहाँ से मैं लौटकर फतेहपुर पहुंचा तो एक मित्र के साथ मलवां गया तो हक्का बक्का रह गया। रुक कर देखने , बात करने , उपस्थित  मीडिया मित्रों से प्राप्त जानकारी पर यह पोस्ट कुछ चित्रों के साथ हाजिर है |  दर्द-विदारक  चित्र जानबूझ कर यहाँ नहीं लगाए गए हैं।

अपने पेड़े के लिए प्रसिद्द मलवां को आज यह दिन भी देखना था। मलवां स्टेशन फतेहपुर से 17 किमी व कानपुर से 60 किमी दूर स्थित है। फतेहपुर  के  मलवां स्टेशन पर कालका मेल  के पलटने और लगभग 5 दर्जन से अधिक यात्रियों के मरने एवं 300 से अधिक के जख्मी होने की घटना अब तक की जिले की ट्रेन हादसे की सबसे बड़ी घटना है। घटना से लोगों का दिल  दहल गया, जिसने भी सुना वह या तो घटनास्थल की ओर कूच कर गया या फिर सदर अस्पताल में भर्ती यात्रियों को देखने पहुंचा। हर किसी के मुंह से यहीं बात निकलती कि अरे यह कैसे हुआ?

हादसा इतना बड़ा है  कि देर रात्रि तक फंसे यात्रियों को बोगियों से निकाला नही जा सका है । प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में पुलिस जवान, प्रशासनिक कर्मी एवं समाजसेवी राहत एवं बचाव कार्य के लिए लगे हुए हैं। इसके बावजूद लोग फंसे थे। जख्मी लोग कराह रहे थे, कुछ महिलाए एवं बच्चों की चीख सुनते नहीं बन रही है । हादसे के बारे में सुनकर लोगों के रोंगटे खडे़ हो जाते हैं। हालात इतने गंभीर दिख रहे हैं  कि राहत कार्य सेना के हवाले करना पड़ा। इसके लिए सेना के जवान हेलीकाप्टर से मौके तक पहुंचाये गए। 

उपस्थित  लोगों का यात्रिओं से प्राप्त सूचना के अनुसार कहना था कि कालका एक्सप्रेस का प्वाइंट ठीक न मिलने के कारण इंजन पटरी से उतर गया। कहा यह भी जा रहा है कि इंजन का एक्सल टूटने के कारण चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाया और भीषण हादसा हो गया। मौके पर मौजूद एक यात्री से स्वयं मेरी बात हुई तो उन्होंने  बताया कि बड़ी जल्दी जल्दी तीन झटके लगे और फिर अचानक क्या हुआ , कि उन्हें सोचने और संभालने तक का मौक़ा ना मिल सका। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घटना के दस-ग्यारह  घंटे बाद भी  घायलों व मृतकों को बोगियों से निकाला नहीं जा सका है। कुछ बोगियां तो एक-दूसरे में इस कदर घुस गयी हैं  कि उन्हें निकालना संभव नहीं हो पा रहा है। कालका मेल में दर्जनों यात्रियों ने राहत कार्य के दौरान लोगों के सामने दम तोड़ा।

हादसे के बाद सबसे पहले आसपास के गांव के सैकड़ों लोग दौड़कर मौके पर आए और पलट गए डिब्बों में फंसे लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। बताते हैं कि दुर्घटना का भीषण स्वरूप देख स्थानीय व रेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गये। इस पर सेना की मदद की पुकार करनी पडी। वायुसेना को मेडिकल व रेस्क्यू टीम (चिकित्सा व राहत दल) हेलीकाप्टरों से भेजनी पड़ी।  लगभग दो सौ से अधिक लोग लोग फतेहपुर के जिला अस्पताल में भर्ती हैं। इसके अलावा  कानपुर के हैलट, उर्सला, केपीएम अस्पतालों में भी मरीज भर्ती हुए हैं। कानपुर व फतेहपुर के नर्सिग होम्स में भी घायलों के इलाज की सूचना है। बताते हैं कि दुर्घटना में स्वीडन के  एक  नागरिक की भी मौत हो गयी है।

रेल हादसा……….आँखों देखी

(बड़ा कर देखने के लिए क्लिक करें)






कुछ तथ्य
  • आस-पास के ग्रामीण यदि मौके पर ना होते मृतक संख्या और भी बढ़ सकती थी
  • सरकारी सहायता हादसे के तीन  घंटे बाद ही सक्रिय हो सकी
  • मौके पर जुटाए गए गैस-क़टर आदि के काम नहीं कर पाने से जन -आक्रोश  बढ़ता ही जा रहा था । बहुत से लोग इसके बारे में न्यूज चैनल्स के संवाददाताओं से इसकी शिकायत करते देखे गए
  • एक बार फिर साबित हुआ कि फतेहपुर  जैसे शहरों में आपदा प्रबंधन के नाम पर तैयारी शून्य है
  •  लोगों के हुजूम में हरएक के मन में मलाल था कि लोग किसी की मदद नहीं कर पा रहे हैं
  • पुलिस  प्रशासन के लोगों से कई बार राहत-कार्य में लगे गाँव वालों से मुंहाचाही हुई
  •  अपने जोश और जिजीविषा के चलते कई फतेहपुरी लोग स्वयं  गैस कटर लेकर वहाँ पहुंचे थे
  • फतेहपुर  से लेकर बिन्दकी तक के लोग  वहाँ दुर्घटना स्थल पर बहुत अधिक मात्रा में पहुँच जाने से प्रशासन भीड़ को नियंत्रित करने में  ही हलाकान रहा
  •  सदर अस्पताल में लोग हर संभव मदद के लिए तैयार खड़े थे ….कुछ लोग तो आग्रह पूर्वक खून देने आदि की जरुरत पर  स्वयं तैयार दिख रहे थे

 हेल्पलाइन नंबर

रेलवे ने हादसे से संबंधित जानकारी देने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं जो इस प्रकार हैं: –

  • कानपुर सैंट्रल हेल्पलाइन: 0521 2323015, 0521 2323016 ,0521 2323018
  • फतेहपुर पुलिस : 9454403359
  • फतेहपुर डीजी : 9454402508
  • इलाहबाद हेल्पलाइन : 0532-2207353
  • चंडीगढ़ : 0172-2658924
  • कालका एक्सप्रेस : 01733-221109
  • अंबाला :0171-2631275
  • कोलकाता : 033-26413660
  • चुनार : 05443- 222137, 222487
  • मिर्जापुर : 05442- 222095. 220096, 220097

मृतक सूची

शाम 6:00 मिली हादसे में मरने वालों की सूची-

  1. दिलीप सिंह ————मीरपुर छावनी, कानपुर
  2. कल्लोदेवी पत्नी दिलीप सिंह————मीरपुर छावनी, कानपुर
  3. शबनम पत्नी शैराज————कोलकाता
  4. जावेद आलम पुत्र वली ——मकरीखोह कटरा, मिर्जापुर
  5. राजेश सिंह पुत्र निरंजन सिंह——मुरैना, मध्य प्रदेश
  6. सुफलचंद्र पुत्र बालचंद——हुबली कोलकाता
  7. एमएस करमाकर(गेल डीजीएम)——दिबियापुर, औरैया
  8. कमला करमाकर————दिबियापुर, औरैया
  9. अनूप कुमार——————धूमनगंज, इलाहाबाद
  10. लोतिका————————इकबालपुर, कोलकाता
  11. अंगन——————————(पता नहीं)
  12. समरजीत सिंह————————जयरामनगर फतेहपुर
  13.  

घायलों की सूची

जिला अस्पताल में भरती घायलों की सूची

  1. नाम——उम——निवासी
  2. सतीश——35—–बागपत, हरियाणा
  3. मंशारामचंद—28——बाकुड़ा, पश्चिम बंगाल
  4. पप्पू——-20——गया, बिहार
  5. इंदल कुमार——25——गया, बिहार
  6. आनंद——18——गया, बिहार
  7. शिवकुमार प्रधान ——54——सड़तिया, कोलकाता
  8. शहाबुद्दीन——22——अमरोहा, यूपी
  9. नीरज कुमार——16——चितरा केदलीखुर्द झारखंड
  10. भगवान प्रजापति——32——चितरा केदलीखुर्द झारखंड
  11. रजनीश प्रसाद गुप्त——32——गोरखपुर यूपी
  12. मोहन भोलासेख——54——मुस्तफी पश्चिम बंगाल
  13. राघवेंद्र शुक्ल——19——आमघाट मिर्जापुर यूपी
  14. डा.सुकुमार बागची——45——मिर्जापुर यूपी
  15. मृत्युंजय——14——मिर्जापुर यूपी
  16. राजेंद——25——गजोघाटोला गया बिहार
  17. अजीत सिंह——45——अटलपुर मेरठ यूपी
  18. मजीत——60——हयातनगर कालोनी मिर्जापुर यूपी
  19. मुकेश——39——झूसी इलाहाबाद यूपी
  20. रीना कुमारी——22——भगवानपुर बिहार चंडीगढ़
  21. खुशीकुमारी——8——भगवानपुर बिहार चंडीगढ़
  22. अरुशि कुमारी——5——भगवानपुर बिहार चंडीगढ़
  23. अस्मत अली——37——जुगराजपुर पश्चिम बंगाल
  24. सादिक अली खान——40——जुगराजपुर पश्चिम बंगाल
  25. मो. इरफान——35——समस्तीपुर बिहार
  26. शिवकुमार यादव——28——विलासपुर छत्तीसगढ़ आरपीएफ जवान
  27. एसकांती—— 55——180 ए मुखर्जी रोड कोलकाता
  28. शाहजहां बेगम——50——ताजपुर पतारा गाजीपुर यूपी
  29. अबजित मंडल——36——खड़गरामपुर पश्चिम बंगाल
  30. गुलाबगुल हक——23——जिगरागुल पश्चिम बंगाल
  31. नीवेश वैद्य——48——खजुरबेड़िया पश्चिम बंगाल
  32. अर्जुन सिंह——50——इलाहाबाद यूपी
  33. सुधीर वर्मा——42——152 शैलपुत्री अपार्टमेंट लक्ष्मीशकरपुर नई दिल्ली
  34. कौशेंद——36——वर्धमान कोलकाता
  35. आशमा खातून——45——काशीपुर श्यामबाजार छपरा बिहार
  36. मुकेश पांडेय——40——मिर्जापुर यूपी
  37. अमित बाल्मीकि——12——सिक्कावान मेरठ यूपी
  38. नरेंद्र प्रसाद शर्मा——32——64/200 गड़रिया मोहाल, कानपुर
  39. सुनैना वर्मा——40——नई दिल्ली
  40. सुप्रिया वर्मा ——15——नई दिल्ली
  41. सरजू भारती——22——केदलीखुर्द चतरा झारखंड
  42. जगतपाल——25——भरसोला थरियांव फतेहपुर यूपी
  43. सुभाष प्रजापित——32——सकरैल थाना के समीप कोलकाता
  44. राजेश कुमार गुर्जर——31—— बोन राजस्थान
  45. इंदर सिंह——31——टिकरिया राजस्थान
  46. इकबाल अंसारी——35——मुराइन टोला फतेहपुर यूपी
  47. रामजी ——22——सिकट्ठनपुर कानपुर यूपी
  48. संदीपन घोष ——33——कुडुन्ना हार पश्चिम बंगाल
  49. अर्जुन राम——50——आरा बिहार
  50. निजामुद्दीन——18—— कश्मीरी गेट फिरोजाबाद यूपी
  51. आमना बेगम——40 ——कश्मीरी गेट फिरोजाबाद यूपी
  52. मोहनी कलमाड़ी——42—— 115 एमजी रोड कोलकाता
  53. निशा कलमाड़ी——18 —— 115 एमजी रोड कोलकाता
  54. रानू घोष——50—— कैलाश नगर पुरानी दिल्ली
  55. मोहम्मद बैतुल्ला खान——61 कसपेपुर रोड कोलकाता
  56. जुगेश ——30——रांची झारखंड
  57. एमडी गुलजार ——36——दरभंगा बिहार
  58. बेबी ——28——रांची झारखंड
  59. पिंटू कुमार शाह——25——प्रेमनगर नई दिल्ली
  60. शशि ——24——जहानाबाद बिहार
  61. अनिरबन प्रधान——22——मेदनीपुर पश्चिम बंगाल
  62. धनंजय यादव——21——कठवारा गाजीपुर फतेहपुर यूपी
  63. अमित सिंह——35——शुकलहा मिर्जापुर यूपी
  64. राजेश महतो ——30—— बिटोल झारखंड
  65. गजमती देवी——28——बिटोल झारखंड
  66. ब्यूटी चौधरी ——65——कोल्लानी कोलकाता
  67. बीरेंद्र यादव ——40——छुमिलर नई दिल्ली
  68. अभिजित राज ——35——66/26 पीरोड कोलकाता
  69. सरोज कुमार ——24——धनगई औरंगाबाद बिहार
  70. विजय——37 —— मिसौढ़ हरियाणा
  71. मायादेवी——45——1844 मउली जागरा कांप्लेक्स चंडीगढ़
  72. प्रोटोस——30——नादिया पश्चिम बंगाल
  73. जीतेंद्र कुमार——23——आजाद नगर मुली धनबाद झारखंड
  74. संजीत पाल——38——हावड़ा कोलकाता
  75. अनीमिष पाल——32——हावड़ा कोलकाता
  76. सुमित मंडल——32——डल्लावीर भूमि पश्चिम बंगाल
  77. विश्वजीत मंडल——32——डल्लावीर भूमि पश्चिम बंगाल
  78. कार्तिक कुंड——40——डल्लावीर भूमि पश्चिम बंगाल
  79. मुन्निरा देवी——40——कानपूर पश्चिम बंगाल
  80. मानस डे——47——कानपूर पश्चिम बंगाल
  81. मीना हलधर——33——कानपूर पश्चिम बंगाल
  82. मोहसिन हलधर——40——चौबीस पूर पश्चिम बंगाल
  83. रुक्मणी देवी——15——चौबीस पूर पश्चिम बंगाल  

घटनाक्रम : मिनट दर मिनट

  1. 12:18 बजे दोपहर- मलवां स्टेशन पर जोरदार धमाके के साथ कालका मेल पलटी।
  2. 12:30- स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे, राहत कार्य शुरू किया।
  3. 1.00 बजे: एसपी व प्रभारी डीएम राहत टीम के साथ पहुंचे
  4. 2:30- पहली राहत गाड़ी कानपुर से आई, बचाव कार्य शुरू
  5. 3:30 – दूसरी राहत गाड़ी मौके पर पहुंची ।
  6. 3:32- सेना के जवान पहुंचे, राहत कार्य शुरू किया।
  7. 3:42- कमिश्नर व आईजी पहुंचे, राहत कार्य का जायजा लिया।
  8. शाम 4:33- आसमान में पहला हेलीकॉप्टर दिखाई दिया।
  9. शाम 4:38-वायुसेना के जवानों ने राहत कार्य शुरू किया।
  10. शाम 5:00- प्रमुख सचिव अनूप मिश्र, पंचायतीराज मंत्री स्वामीप्रसाद मौर्य पहुंचे।
  11. शाम 5:10 – केंद्रीय कोयला मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल घटनास्थल पर पहुंचे, राहतराशि की घोषणा।
  12. 5.30 बजे: यात्रियों को लेने कानपुर से आयी ट्रेन
  13. 6.00 बजे: इंजन से लगे एसएलआर बोगी में लगी आग, फायर ब्रिगेड ने बुझायी
  14. 7.00 बजे: राहत कार्य जारी रखने के लिए रोशनी की वैकल्पिक व्यवस्था
  15. रात 10:00- रेलवे की क्रेन ने पहली बोगी को घटनास्थल से हटाया।

साभार : स्थानीय विभिन्न मीडिया ब्यूरो , दैनिक जागरण , अमर उजाला  , हिन्दुस्तान आदि |

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    >गुलामी सबसे अधिक भयावह तब होती है, जब वह स्वभाव बन जाती है।

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    गुलामी सबसे अधिक भयावह तब होती है, जब वह स्वभाव बन जाती है। स्त्रियों के अंदर पराधीनता का बोध ही नहीं है, इसलिए स्त्री विमर्श का पहला काम है पराधीनता का बोध करना और दूसरा काम पराधीनता के कारणों का बोध कराना है। यह हो जाए तो पराधीनता के कारणों की खोज करना। इसके बाद इन्हें दूर करने का प्रयास करना। यह बात रविवार को फतेहपुर शहर में स्थित महात्मागांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित ‘समकालीन साहित्य एवं स्त्री विमर्श विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी’ में जेएनयू, नई दिल्ली के भारतीय भाषा केंद्र के प्रोफेसर व अध्यक्ष डा.मैनेजर पांडेय ने नारी सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कही।




    स्त्रियों की दशा पहले भी वही थी जो आज है बस प्रताड़ना का रूप भर बदल गया है। स्त्री के कष्ट को कमरों में बैठ कर या उच्च वर्ग की महिलाओं को देखकर नहीं समझा जा सकता है उसे समझना है तो गाँव , गली की नारी से या मेहनत मजदूरी करने वाली औरत से अथवा सम्मान या अधिकार के लिए संघर्ष कर जी रही महिला से मिलना हौगा। स्त्री की गुलामी खतम हो इसके लिए उसकी सोच में बदलाव हो और सोच में बदलाव के लिए जरूरी है कि नारी शिक्षित हो।


    महात्मा गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग द्वारा समकालीन साहित्य और स्त्री विमर्श विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन वक्ताओं ने उक्त विचार रखे। राष्ट्रीय संगोष्ठी का उदघाटन वरिष्ठ हिंदी आलोचना के स्तंभ जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में भारतीय भाषा केन्द्र के प्रोफेसर व अध्यक्ष डा. मैनेजर पांडेय व कालेज के प्राचार्य डा. अवधेश कुमार सिंह ने किया। माँ सरस्वती, महात्मा गांधी और महादेवी वर्मा के चित्रों पर माल्यार्पण कर संगोष्ठी की शुरूआत की गयी ।



    विशिष्ट अतिथि डा. भीम राव आंबेडकर महाविद्यालय में हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. बालकृष्ण पांडेय ने स्त्री विमर्श के संबंध में कुछ प्रश्न और कुछ चिंताएं सदन के सामने रखे। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ज्ञानपुर के हिंदी विभाग अध्यक्ष डा.क्षमा शंकर पांडेय ने स्त्री विमर्श के महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया। संगोष्ठी का दूसरा सत्र अपरान्ह दो बजे से शुरू हुआ। बौद्धिक विमर्श के इस सत्र की अध्यक्षता आलोचक डा.ओम प्रकाश अवस्थी ने की। संयोजक प्रोफेसर अनूप शुक्ल ने संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता करते हुए कालेज के प्राचार्य डा.अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि स्त्रियों की दुर्दशा का अंदाजा अभिजात्य परिवारों की महिलाओं अथवा संचार माध्यमों की नारी छवि से नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए दूरस्थ अंचलों की ग्रामीण और श्रमिक महिलाओं के बीच जाना पड़ेगा।


    सलौन डिग्री कालेज रायबरेली के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डा. सीबी सिंह, कान्यकुब्ज कालेज लखनऊ के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डा. अनिल त्रिपाठी, वीएसएसडी कालेज कानपुर के प्रोफेसर डा. आनंद शुक्ल और यहीं के वरिष्ठ प्राध्यापक डा. रंजन श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे। राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश प्रदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थाओं के शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी, साहित्यकार और सांस्कृतिक कर्मी मौजूद रहे।

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    >फतेहपुर को स्पो‌र्ट्स कॉलेज का तोहफा

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    अब वह दिन दूर नहीं जब उभरती खेलकूद प्रतिभाओं को हुनर के पंख लगाकर आसमान की ऊंचाइयां छूने का मौका मिलेगा। जिले में एक अरब से स्पो‌र्ट्स कॉलेज बनकर तैयार होगा, जिसमें न सिर्फ फतेहपुर बल्कि अन्य जिलों के होनहार खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। कुछ भी हो, जिले में बनकर तैयार होने के बाद स्पो‌र्ट्स कालेज फतेहपुर की शान बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।
    खेलकूद विभाग के मुताबिक, स्पो‌र्ट्स कॉलेज निर्माण के लिए तेलियानी विकासखंड के गांव नेवलापुर में करीब 60 एकड़ की जमीन चयनित कर ली गई है। कॉलेज का निर्माण करनेवाली कार्यदायी संस्था सीएनडीएस ने भूमि पर मृदा परीक्षण का कार्य शुरू कर दिया है। 1 अरब बजट के सापेक्ष शासन ने कार्यदाई संस्था के पीएलए खाते में 5 करोड़ की पहली किस्त भी स्थानांतरित कर दी है। छात्रावास, हॉस्पिटल, लाइब्रेरी के साथ बननेवाले भव्य स्पो‌र्ट्स कॉलेज में खिलाड़ियों को सपने साकार करने का मौका मिलेगा। 
    स्पोर्ट  कालेज  में 500 खिलाडि़यों की आवासीय क्षमता वाले छात्रावास के साथ अस्पताल व फिजियोथिरेपी सेंटर की भी सुविधा होगी। कालेजों में 11 क्रिकेट पिच, सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल मैदान, चार सिंथेटिक टेनिस कोर्ट तथा शूटिंग रेंज का भी निर्माण होगा। कहना होगा कि जिले को स्पो‌र्ट्स कॉलेज का तोहफा दिलाने का जो कार्य किया , वह बेहद सराहनीय है। खेल निदेशालय से कोच और पर्याप्त संसाधन मिलेंगे, जिससे खिलाड़ी प्रदेश व देश में अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे।  स्पो‌र्ट्स कॉलेज खुलने से खिलाड़ी ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स एशियाड एवं व‌र्ल्ड कप के लिए सही प्रशिक्षण के साथ मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे। बताते हैं  कि टेस्टिंग के बाद स्पो‌र्ट्स कॉलेज निर्माण का कार्य तेजी शुरू हो जाएगा।

    >हुर्रे ! नए साल में होगा एक बार फिर फतेहपुर महोत्सव !

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    नये साल 2011  के उपलक्ष्य में जनपदीय प्रशासन ने फतेहपुर जनपद वासियों को “फतेहपुर महोत्सव” का उपहार  दिया है। लगभग आठ साल बाद एक बार पुनः  “फतेहपुर महोत्सव” आयोजित होने जा रहा है। यह चार दिवसीय “फतेहपुर  महोत्सव” आईटीआई प्रांगण  में 28 जनवरी से शुरू होगा। कल शनिवार को जिलाधिकारी पी. गुरुप्रसाद ने  विकास भवन सभागार में मंत्रणा कर योजना को अंतिम रूप दिया।
    संगीत, रंगकर्म या कला की किसी भी विधा में जिले में या जिले से बाहर फतेहपुर का गौरव बढ़ा रही शख्सियतों और माननीयों को महोत्सव में सादर आमंत्रित किया जायेगा। इसके अलावा एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन भी आयोजन होगा। हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव, लोक गायक मनोज तिवारी सहित अलग-अलग क्षेत्रों के कई  दिग्गज फतेहपुर महोत्सव की शान होंगे। 

    31 जनवरी को समाप्त होने  वाले महोत्सव में दिन भर स्थानीय स्तर के कार्यक्रम होंगे। शाम छह बजे के बाद बड़े कार्यक्रमों का आयोजन होगा। महोत्सव की विशेषता यह होगी कि कार्यक्रमों का सीधा  प्रसारण भी शहर में होगा। स्मारिका तैयार कराये जाने के साथ पहचान के रूप में लोगो पर भी चिंतन  किया गया। एक विस्तृत पुस्तक मेला लगाये जाने पर भी चर्चा हुई। उधर क्रीड़ा स्टेडियम में कई खेल गतिविधियां भी आयोजित की जायेंगी ।

    पूरे आयोजन को सुचारू और व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए अलग-अलग कमेटियां गठित की गयीं। यह कमेटियां व्यवस्था से लेकर मंच पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और उसके समय का नियमन और निर्धारण करेंगी। आयोजनों में स्थानीय स्कूल, स्थानीय कलाकारों को भी आमंत्रित किया जा रहा है, जो कि मंच पर अपने प्रदर्शन  का जलवा बिखेरेंगे। व्यवस्था की दृष्टि से मुख्य विकास अधिकारी  सीके पाण्डेय आयोजन समिति के अध्यक्ष होंगे। एडीएम अच्छेलाल, एसडीएम सदर रामचंद्र को गठित कमेटियों से वार्ता कर व्यवस्था को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी दी गयी। 
    जल्द  ही फतेहपुर ब्लॉग पर भी इस सम्बन्ध में जानकारियाँ मिलते ही सूचना दी जाएगी।

    >आचार्य हरनारायण जी महाराज :उठो जागो अपनी समीक्षा करो और विश्व कल्याण के लिए ध्वजा के वाहक बनो।

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    प्रति-वर्ष होने वाले विशाल आयोजन का रूप ले चुके श्रीमद् भागवत प्रचार परिषद की ओर से हरि अमृत कथा का अष्टम आयोजन शनिवार दिनांक १८ दिसंबर २०१० से शहर के हाइडिल कालोनी मैदान में प्रारंभ हुआ। पिछले वर्षों की भांति इस बार भी समय निकाल कर मैं इस कथा में जाता रहा हूँ । कथा के पहले दिन आचार्य हरनारायण जी महाराज ने कहा कि प्रभु को अर्पित करने के लिए भक्त के पास अपना कुछ है ही नहीं जो कुछ है सब उसे परमेश्वर का ही तो दिया हुआ है। ऐसे में भक्त वंदना करते हुए कहता है कि हे भगवन तेरा तुझको अर्पण कर उसकी शरण में चला जाता है।
    प्रभु और भगवान के बीच आस्था का सेतु होता है। इसी के द्वारा जीव ब्रह्म की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा के लिए पूजा दिखावटी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पवित्र मन हो छल कपट न हो नहीं तो आपके द्वारा की गयी पूजा व्यर्थ समझो। भगवत कथा का श्रवण करना ही सबसे बड़ा पुण्य कर्म है।

    प्रभु की शरण तक पहुंचने के लिए भक्तों को आस्था के सेतु से होकर ही गुजरना होता है। भक्त के पास अपना ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे वह प्रभु के चरण कमलों में अर्पित कर सके। उन्होंने कहा कि भक्त वह है, जो समस्त प्राणियों का हितैषी है, जिसके मन में कभी यह भाव नहीं आता कि यह मेरा और तेरा है।
    इसी प्रकार जो प्रत्येक प्राणी को सम्मान की दृष्टि से देखता है। किसी को छोटा या बड़ा नहीं समझता, सभी में ईश्वर के प्रकाश का अनुभव करता है, जो किसी से घृणा नहीं करता, ज्ञानी और शांतचित्त है, वही श्रेष्ठ भक्त है। जो मन, वाणी और अपने क्रियाकलापों द्वारा दूसरों को किसी प्रकार की पीड़ा नहीं पहुंचाता, जिसमें संग्रह का स्वभाव नहीं होता, जो सच्ची बात ग्रहण करने के लिए सदा तैयार रहता है, जिसकी बुद्धि सात्विक गुणों से युक्त है, वह सबसे उत्तम भक्त है।

    जो माता-पिता की सेवा करता है, देवताओं की पूजा में लीन रहता है, अपने गुरुजनों को आदर देता है तथा असहाय, निर्धन और वृद्ध लोगों की सहायता करता है, वही सच्चा भक्त है। ज्ञानियों, संन्यासियों और सेवाभावियों की सेवा करता है और उन्हें आदर देता है, शत्रु और मित्र में समभाव रखता है, सर्वत्र गुणों को ग्रहण करता है, कभी भी अच्छे व्यवहार या किसी शुभ कार्य की न तो आलोचना करता है और न ही उसमें कोई बाधा उत्पन्न करता है, वह सर्वोत्तम भक्त है। सद्गुणी होना जिस व्यक्ति की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है, जो इस लोक में विनम्रता के साथ सेवा कार्य करता है, जो जीवों पर दया करता है और उत्तम कार्यों में सहयोगी बनता है, वह असली भक्त है।
    भागवत कथा के पहले दिन आचार्य ने प्रभु व भक्त के बीच कैसे संपर्क बनता है विस्तृत रूप से कथा के माध्यम से बताया। कथा के पहले दिन ही भक्तों की काफी भीड़ रही। 
     
    भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार दिनांक १९ दिसंबर २०१० को आचार्य ने भक्तों को विस्तृत रूप से कथा के माध्यम से बताया कि पहले अपने आपको देखो फिर कोई कदम उठाओ। दूसरे की ओर देखने से पहले अपने गिरहबान में झांक कर देखो। अपने अवगुण दूर करने के बाद ही दूसरे को नसीहत दो। अपने सुंदर आचरण से सामने वाले का दिल जीत लो।
    आचार्य हरनारायण महाराज ने कहा कि हमारी मातृभूमि का अनुकरणीय इतिहास है। हमारे पूर्वजों ने अपने वचनों की रक्षा के लिए प्राणों तक का न्योछावर कर दिया है। आज जमाना बदल रहा है कथनी और करनी में अंतर आने लगा है।
    मनुष्य को चाहिए कि वह स्वाध्याय में लगा रहे जिससे उसके चित्त में परिवर्तन आएगा। अध्ययन के बाद फिर स्वंय के आचरण की समीक्षा करें। इसके बाद आपके मन में सदगुण अवगुण स्पष्ट रुप से दिखने लगेंगे। आपका मार्ग स्वयं ही प्रशस्त होता जाएगा।जिनके जीवन में धर्म का प्रभाव है उनके जीवन में सारे सदगुण आ जाते हैं, उनका जीवन ऊँचा उठ जाता है, दूसरों के लिए उदाहरणस्वरुप बन जाता है ।

    आप भी धर्म के अनुकूल आचरण करके अपना जीवन ऊँचा उठा सकते हो । फिर आपका जीवन भी दूसरों के लिए आदर्श बन जायेगा, जिससे प्रेरणा लेकर दूसरे भी अपना जीवन स्तर ऊँचा उठाने को उत्सुक हो जायेंगे । उठो जागो अपनी समीक्षा करो और विश्व कल्याण के लिए ध्वजा के वाहक बनो।

    >कवि और साहित्यकार साहित्य भूषण पं. कृपा शंकर शुक्ल का निधन : एक परिचयात्मक श्रृद्धांजलि

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    साहित्य भूषण से सम्मानित कवि और साहित्यकार ७८  वर्षीय पं. कृपा शंकर शुक्ल का निधन पिछले पखवारे हो  गया था । शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद साहित्यकार श्री शुक्ल ने 12 पुस्तकें लिखी  थी , जिसमें अन्त‌र्व्यथा, नारी, चालीस साल बाद, काशी की कविता, राष्ट्र के गीत, चुनल गीत प्रकाशित हुई।  श्री शुक्ल का निधन लखनऊ के ट्रामा सेंटर में दिल का दौरा पड़ जाने से पिछले शुक्रवार दिनांक ९ दिसंबर २०१० को सुबह हो गया था।

    फतेहपुर  ब्लॉग परिवार की ओर से करबद्ध श्रृद्धांजलि !

     
    भौतिक विज्ञान बढ़ा इतना कि  दौड़ मच गई पाने की, 
    इच्छाऐं जागी जन जन में भौतिक सामान जुटाने की।
    कैसी रीति यहां पर आई अपने को बड़ा दिखाने की…..
    साठ बरस के बाद भी आजादी की करूण कहानी है…..
    ……आजादी के मूल्यों की मिटती जा रही निशानी है।

    …… जैसी मर्मस्पर्शी पंक्तियां लिखने वाले साहित्यकार साहित्य भूषण कृपाशंकर शुक्ल का मानना था कि हमारे सामाजिक संबंधो में जो गिरावट आई वह हमारी संस्कृति और हमारे सामाजिक ढांचे की बुनियाद को खोखला कर रही है। आज साहित्य भी समाज में प्रखरता के साथ अपनी भूमिका निर्वाह नहीं कर पा रहा है। कारण कि साहित्य अपने संस्कार इसी समाज से ग्रहण करता है और समाज साहित्य का दर्पण है तो साहित्य वही दिखायेगा जो वहां घटित हो रहा है। हम पश्चिम की नकल करके अपने सामाजिक संबंधों की गरिमा और पारिवारिक परंपरा की महिमा को नहीं बचा पायेंगे। हम क्या थे और क्या हो गये। हमारी चेतना, जागरूकता और स्वाभिमान का स्तर यही रहा तो अभी और क्या होंगे। उनके मन में पुस्तक पठन के प्रति बढ़ रही अरूचि पर चिंता बहुत गहरे पैठी हुई थी उनका मानना था कि इससे संस्कार हीनता तो बढ़ ही रही है साथ ही समाज से न कुछ सीख पाते हैं न दे पाते है।

    देश प्रेम के साथ समाज सेवा के लिये अपनी लेखनी चलाने वाले लेखक श्री शुक्ल का कहना था कि कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध आदि के माध्यम से अपनी अंर्तव्यथा को व्यक्त करता हूं। अपनी नव रचना “भारतीय समाज अतीत और वर्तमान” पुस्तक में उन्होंने हमारे समाज के बीते हुये समय और आज के समय को देख कर हुये बदलावों पर अपनी नजर डाली है। समाज की कमियों और भविष्य की संभावनाओं का सहज ही पता चलता है इस कृति को पढ़ते हुये। लेखक ने अपनी रचना में साहित्यक, शैक्षिक, वैज्ञानिक, तकनीकी, औद्योगिक और आर्थिक समृद्धि के प्राचीन राष्ट्रीय गौरव की अनेकानेक उपलब्धियों को उद्धृत करते हुये धीरे धीरे राष्ट्र के रसातल में पहुंचने और विचार शून्यता की स्थिति तक पहुंचने के हालातों तक नजर डाली है।

    श्री कृपाशंकर शुक्ल जो कि एक अध्यापक रहे है और उसी गुरू दृष्टि से जब उन्होने इस देश समाज को देखा तो इसकी विद्रूपताओं से व्यथित हो उठे इसके बाद आकुल अंतर में जन्मी पीड़ा कलम से बह निकली। और जो कि साहित्य की लगभग हर विधा में बही। वह बताते है कि आकुल अंतर में जब-जब पीड़ा घनीभूत होती रही तभी कुछ न कुछ उमड़ पड़ा।

    प्रदेश सरकार द्वारा साहित्य भूषण सम्मान से नवाजे जा चुके इस वरिष्ठं चिंतक ने, जिन्होने अध्यापन से अवकाश ग्रहण करने के बाद एक हिंदी पाक्षिक पत्रिका का संपादन, प्रकाशन कर भारत भारती की सेवा करते हुये साहित्य सृजन द्वारा समाज सेवा करने के साथ समाज को दिशा देने का कार्य स्वीकार कर अपने सरोकारों के प्रति अपनी लगन जताई। उन्होने ‘अंत‌र्व्यथा’, ‘नारी,काव्य संग्रह’ देने के साथ ‘काशी की कविता’, ‘राष्ट्र के प्रेम गीत’, ‘पूर्वाचल की माटी’, ‘चुनल गीत’ जिसमें भोजपुरी गीतों का संकलन है, आदि काव्य संकलनों का संपादन किया। ‘वैचारिकी’ नाम से निबंध संग्रह और ‘चालीस साल बाद’ नाम का लघु उपन्यास भी दिया। समाज के लिये सर्मपित ‘मैं और मेरा जीवन;’ जैसी रचनायें देकर साहित्य को समृद्घ किया है। 

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