फतेहपुर: बिन्दकी विधानसभा को परिसीमन में लाभ ही लाभ

बिन्दकी विधानसभा की बल्ले-बल्ले है। परिसीमन के बाद नये मुखौटे में विस क्षेत्र का दायरा बढ़ने के साथ मतदाताओं में भी साढ़े छब्बीस हजार का इजाफा हो गया। जहानाबाद और फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के एक सैकड़ा गांव व मजरे शामिल हो जाने से जातीय समीकरणों में भी भारी बदलाव आ गया है। अभी तक ब्राह्मण, ठाकुर बाहुल्य सीट मानी जाने वाली सीट हसवा का स्थान बिन्दकी ने ले लिया है। कुर्मी बाहुल्य क्षेत्र देवमई का बहुतायत हिस्सा जहानाबाद में शामिल कर दिया गया है जबकि जोनिहां व कांधी कानूनगो सर्किल के गांव बिन्दकी विधानसभा क्षेत्र में मिला दिये गये हैं।
लाभ और हानि की नजर में बिन्दकी विधानसभा को परिसीमन में लाभ ही लाभ मिला। अपने तो बहुत कम संख्या में पराये बने, लेकिन उससे दूना संख्या में पराये अपने हो गये हैं। दायरा बढ़ जाने से यह जरूर है कि प्रत्याशियों को अब मतदाताओं की चौखट तक पहुंचने के लिये परिक्रमा अधिक करनी पड़ेगी। समीप के गांव पड़ोसी जहानाबाद विधानसभा में चले गये और उसके बदले में शहर से जुड़े दो दर्जन से अधिक गांव बिन्दकी विधानसभा में शामिल कर दिये गये हैं। नये समीकरण में कुर्मी मतदाता तीसरे पायदान पर आ गया है। अब यहां ब्राह्मण और ठाकुर मतदाताओं का वर्चस्व है। देवमई ब्लाक जो पिछड़ी जाति की राजनीति करने वालों के लिये एक गढ़ था वह मतदाता अब पराये हो गये हैं। इतना ही नहीं बिन्दकी कस्बे से लगे खजुहा कानूनगो सर्किल के दो दर्जन गांव विस क्षेत्र से हटा दिये गये हैं।
विधानसभा क्षेत्र में अभी तक जहानाबाद विधानसभा के मतदाता रहे। जोनिहां कानूनगो सर्किल के अजमतपुर, कुम्हरवा, तपनी, दरियाबाद, हिम्मतपुर, उमरकोला, अकिलाबाद, बेनू, गजालापुर, बनियानी, रावतपुर, फरीदपुर, खांडेदेवर, नरैचा, सरांय, शिवरी, रघुराजखेड़ा, हुसनापुर, गौरी, शहबाजपुर, धानेमऊ, टिकरी, मनौटी, बेहटा, उदरौली, सरदारपुर, अमेना, नेवाजीपुर, छीछा, खूंटा, मड़रांव, चकहाता, चक औलिया, खेड़ा, कोरवां, कुसारा, इमौना, जोनिहां, बरदरा, समसपुर, शहजादीपुर, बिलौना, रघुवाखेड़ा, केवई, बरहट, खुर्माबाद, दरौटा, लालपुर, आलमगंज, मामूपुर, पिपौरी, कंसाखेड़ा, मऊ, मिस्सी, मेउली व चक जहानपुर को शामिल कर दिया गया है।
फतेहपुर तहसील व विधानसभा क्षेत्र के कांधी कानूनगो सर्किल के गांवों को भी बिन्दकी विधानसभा क्षेत्र का मतदाता बना दिया गया है। जिसमें सनगांव, कांधी, नउवाबाग, पहाड़ीपुर, सहिली, आजमपुर भैंसाही, असवार तारापुर, बादलपुर, उदयराजपुर, बैरमपुर, भरसवां, काकाबैरी, बरमतपुर, चीतपुर, अस्ता, बाजापुर, माधवपुर, झाऊमेदनी, उमरपुर, त्रिलोकीपुर, आदमपुर, ओझी खरगसेनपुर मय भदवा, मोहनखेड़ा, जखनी, कोराई, धारूपुर, केशवपुर, रावतपुर, ढोड़ियाही, धरहरा, कुरस्तीकला, हाजीपुर गंग, सेनीपुर, चितौरा, सरांय सहिजादा, चितौरा गांव शामिल किये गये हैं इसके अलावा बिन्दकी नगर पालिका क्षेत्र के पचीस वार्ड, मलवां कानून गो सर्किल के जो गांव पहले से शामिल थे वह विधानसभा क्षेत्र में बने हुए हैं।

सोहन लाल द्विवेदी पुस्तकालय एवं वाचनालय लंबे समय से साहित्य प्रेमियों को मुंह चिढ़ा रहा

राष्ट्रकवि पंडित सोहन लाल द्विवेदी पुस्तकालय एवं वाचनालय लंबे समय से साहित्य प्रेमियों को मुंह चिढ़ा रहा है। कारण भवन के उद्घाटन के पांच वर्ष से अधिक का समय गुजर चुका है। यहां साहित्य नहीं है। ऐसे में यहां के साहित्य प्रेमी मायूस है।

स्वतंत्रता के आंदोलन में अपनी कविताओं के माध्यम से क्रांतिकारियों में जोश भरने वाले राष्ट्रकवि पंडित सोहन लाल द्विवेदी की यादगार में नगर के तत्कालीन राज्यमंत्री राजेंद्र सिंह पटेल ने पुस्तकालय एवं वाचनालय का निर्माण कराया था। किंतु दुर्भाग्य भवन में साहित्य प्रेमियों के लिए यहां साहित्य नहीं है। ऐसे में यहां के साहित्य प्रेमियों को पीड़ा है। नगर के वरिष्ठ साहित्यकार बेदप्रकाश मिश्रा का कहना है कि साहित्य मुहैय्या कराने के लिए कई बार बैठकें हुई। किंतु बैठकें औचित्य हीन रहीं। परिणाम स्वरूप साहित्य क्रय नहीं किया जा सका है। जबकि नगर पालिका के पास इस मद की धनराशि भी है। इस पुस्तकालय समिति के सदस्य लोकनाथ पांडेय का कहना है कि चुनाव के बाद साहित्य हेतु बैठक पुन: होगी। जिसमें साहित्य को सूचीबद्ध कर खरीददारी करायी जायेगी।

आखिर कब पास होगा पप्पू???


नाम जब्बार हुसेन। उम्र साठ बरस। ख्वाहिश हाईस्कूल पास होने की.. यह किसी की जन्म कुडंली नहीं बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की प्रोफाइल है। जो हाईस्कूल पास करने के लिए 40 बार परीक्षा दे चुका है। हाईस्कूल परीक्षा पास करने के अपने जूनून के चलते कस्बे का यह बुजुर्ग इकतालिसवीं बार परीक्षा में बैठने के लिए पूरी शिद्दत के साथ तैयारियों में जुटा है।

देखना यह है अपने इस जज्बे के चलते लोगों के लिए कौतूहल बन चुका यह पप्पू आखिर कब पास होगा।तकरीबन चार दशक पहले जब्बार मियां जब पहली बार दसवीं की परीक्षा में बैठे थे। उस वक्त उनकी उम्र सोलह बरस थी। तब परीक्षाओं के कायदे कानून बडे़ सख्त हुआ करते थे। शायद इस वजह से वह परीक्षा पास नहीं कर पाए। उसके बाद परीक्षाओं में बैठने का दौर लगातार जारी रहा। चालीस बार परीक्षा में बैठने के बावजूद सफलता उनके हाथ नहीं लगी। खोटी किस्मत इस विद्यार्थी के साथ हर बार दगा दे गई। आज जब्बार 60 साल के हैं। लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका जज्बा उसी तरह बरकरार है। यही वजह है कि कस्बे का यह बुजुर्ग विद्यार्थी किसी नए परीक्षार्थी की भांति 41वीं बार दसवीं की परीक्षा में बैठने के लिए तैयारियों में पूरी शिद्दत से जुटा है। सफलता के लिए वह सिर्फ ट्यूशन पढ़ रहे हैं। बल्कि प्रधानाचार्य की अनुमति से नेहरू इंटर कालेज , बिन्दकी , फतेहपुर में कक्षाएं लेने भी जाते हैं। उन्होंने नेहरू कालेज से ही हाईस्कूल का फार्म भरा है। अपने इस जज्बे के बारे में जब्बार कहते हैं कि शिक्षा से बड़ा कोई धन नहीं है। घरेलू स्थिति सही होने की वजह से वह पढ़ाई में पूरा समय नहीं दे पाए। उन्होंने बताया कि यदि इस बार सफलता हाथ लगती है तो वह आगे की कक्षा में दाखिला लेंगे, अन्यथा पुन:दसवीं की परीक्षा देंगे।
तहसील के पास जूते-चप्पल की छोटी सी दुकान लगाकर गुजारा करने वाले जब्बार का परिवार पढ़ाई की वजह से ही टूट गया। सन 1960 में उसकी शादी कल्यानपुर थाना क्षेत्र के गुगौली की ननकी के साथ हुई। जो यह चाहती है कि जब्बार पढ़ाई छोड़कर रोजी कमाने में लग जाएं किन्तु ऐसा नहीं हुआ। इसे लेकर उसका पत्नी के साथ झगड़ा हुआ और उसने दूसरी शादी कर ली। तब से वह अकेले जीवन बिता रहे हैं। उन्होंने बताया कि रिश्ते नाते सब क्षणिक हैं

बावन शहीदों का मूक गवाह है इमली का बूढ़ा पेड़

बिन्दकी तहसील मुख्यालय से तीन किलोमीटर पश्चिम मुगल रोड स्थित शहीद स्मारक बावनी इमली स्वतंत्रता की जंग में अपना विशेष महत्व रखती है। शहीद स्थल में बूढ़े इमली के पेड़ में आज से डेढ़ सौ वर्ष अर्थात28 अप्रैल 1857 को रसूलपुर गांव के निवासी ठा। जोधा सिंह अटैया को उनके इक्यावन क्रांतिकारियों के साथ फांसी पर लटका दिया गया था इन्हीं बावन शहीदों की स्मृति में इस वृक्ष को

बावनी इमली कहा जाने लगा। चार फरवरी 1858 को ठा. जोधा सिंह अटैया पर ब्रिगेडियर करथ्यू ने असफल आक्रमण किया। साहसी जोधा सिंह अटैया को सरकारी कार्यालय लूटने एवं जलाये जाने के कारण अंग्रेजों ने उन्हें डकैत घोषित कर दिया। जोधा सिंह ने 27अक्टूबर 1857 को महमूदपुर गांव में एक दरोगा व एक अंग्रेज सिपाही को घेरकरमार डाला था। सात दिसंबर 1857 को गंगापार रानीपुर पुलिस चौकी पर हमला करएक अंग्रेज परस्त को भी मार डाला। इसी क्रांतिकारी गुट ने 9 दिसंबर को जहानाबाद में गदर काटी और छापा मारकर ढंग से तहसीलदार को बंदी बना लिया।जोधा सिंह ने दरियाव सिंह और शिवदयाल सिंह के साथ गोरिल्ला युद्ध कीशुरुआत की थी। जोधा सिंह को 28 अप्रैल 1858 को अपने इक्यावन साथियों के साथ लौट रहे थे तभी मुखबिर की सूचना पर कर्नल क्रिस्टाइल की सेना ने उन्हें सभी साथियों सहित बंदी बना लिया और सबको फांसी दे दी गयी। बर्बरता की चरम सीमा यह रही कि शवों को पेड़ से उतारा भी नहीं गया। कई दिनों तक यह शव इसी पेड़ पर झूलते रहे। चार जून की रात अपने सशस्त्र साथियों के साथ महराज सिंह बावनी इमली आये और शवों को उतारकर शिवराजपुर में इन नरकंकालोंकी अंत्येष्टि की।

बावन शहीदों का मूक गवाह है इमली का बूढ़ा पेड़

बिन्दकी तहसील मुख्यालय से तीन किलोमीटर पश्चिम मुगल रोड स्थित शहीद स्मारक बावनी इमली स्वतंत्रता की जंग में अपना विशेष महत्व रखती है। शहीद स्थल में बूढ़े इमली के पेड़ में आज से डेढ़ सौ वर्ष अर्थात28 अप्रैल 1857 को रसूलपुर गांव के निवासी ठा। जोधा सिंह अटैया को उनके इक्यावन क्रांतिकारियों के साथ फांसी पर लटका दिया गया था इन्हीं बावन शहीदों की स्मृति में इस वृक्ष को

बावनी इमली कहा जाने लगा। चार फरवरी 1858 को ठा. जोधा सिंह अटैया पर ब्रिगेडियर करथ्यू ने असफल आक्रमण किया। साहसी जोधा सिंह अटैया को सरकारी कार्यालय लूटने एवं जलाये जाने के कारण अंग्रेजों ने उन्हें डकैत घोषित कर दिया। जोधा सिंह ने 27अक्टूबर 1857 को महमूदपुर गांव में एक दरोगा व एक अंग्रेज सिपाही को घेरकरमार डाला था। सात दिसंबर 1857 को गंगापार रानीपुर पुलिस चौकी पर हमला करएक अंग्रेज परस्त को भी मार डाला। इसी क्रांतिकारी गुट ने 9 दिसंबर को जहानाबाद में गदर काटी और छापा मारकर ढंग से तहसीलदार को बंदी बना लिया।जोधा सिंह ने दरियाव सिंह और शिवदयाल सिंह के साथ गोरिल्ला युद्ध कीशुरुआत की थी। जोधा सिंह को 28 अप्रैल 1858 को अपने इक्यावन साथियों के साथ लौट रहे थे तभी मुखबिर की सूचना पर कर्नल क्रिस्टाइल की सेना ने उन्हें सभी साथियों सहित बंदी बना लिया और सबको फांसी दे दी गयी। बर्बरता की चरम सीमा यह रही कि शवों को पेड़ से उतारा भी नहीं गया। कई दिनों तक यह शव इसी पेड़ पर झूलते रहे। चार जून की रात अपने सशस्त्र साथियों के साथ महराज सिंह बावनी इमली आये और शवों को उतारकर शिवराजपुर में इन नरकंकालोंकी अंत्येष्टि की।

फतेहपुर के प्रमुख पर्यटक व पुरातात्त्विक स्थल

फतेहपुर के प्रमुख पर्यटक व पुरातात्त्विक स्थलों में शिवराजपुर, रेंह , खजुहा, बिन्दकी, तेंदुली , बावनी इमली, भिटौरा और हथगाम आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं। इसके अतिरिक्त कई मस्जिद और मंदिर भी है जहां पर्यटन का मजा लिया जा सकता है। गंगा और यमुना नदी के तट पर स्थित फतेहपुर उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है।यह जिला चारो ओर से बड़े शहरों यथा कानपुर , इलाहबाद , रायबरेली ,लखनऊ , बांदा आदि से घिरा हुआ है ,शायद यह इसका सौभाग्य है या दुर्भाग्य , इसका निर्णय आपके हाथफतेहपुर जिले की स्थापना 10 नवम्बर 1826 ई. में हुई थी। धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह स्थान शहीद जोधा सिंह अटैया , शहीद दरियाव सिंह और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों तथा प्रसिद्ध हिन्दी राष्ट्र कवि सोहन लाल द्विवेदी की मातृभूमि है।कुछ प्रमुख स्थलों के बारे में विवरण निम्न लिखित है

खजुहा
खजुहा गांव मुगल रोड पर स्थित है। यह गांव काफी प्राचीन है। इसका वर्णन प्राचीन हिन्दू धर्मग्रन्थ ब्रह्मा पुराण में भी हुआ है, जो कि 5000 वर्ष पुराना था। 5 जनवरी 1659 ई. में मुगल शासक औरगंजेब का अपने भाई शाहशुजा के साथ भीषण युद्ध हुआ था। औरंगजेब ने शाहशुजा को इस जगह के समीप ही मारा था। अपनी जीत की खुशी में उन्होंने यहां एक विशाल और खूबसूरत उद्यान और सराय का निर्माण करवाया था। इस उद्यान को बादशाही बाग के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त इस सराय में 130 कमरें है।आज की स्थिति में यह अत्यन्त जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है

रेंह

यमुना नदी के तट पर स्थित रेंह बहुत ही प्राचीन गांव है। यह गांव फतेहपुर शहर के दक्षिण-पश्चिम से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माना जाता है कि इस जगह से 800 ई. पूर्व के पुरातात्त्विक महत्व से जुड़े लेख प्राप्त हुए थे। इसके अलावा मौर्य काल, कुषाण काल और गुप्त काल के कई सिक्के और मूर्तियां प्राप्त हुई थी। दो दशक पूर्व भवगान विष्णु की प्राचीन मूर्ति इस गांव से प्राप्त हुई थी। वर्तमान समय में यह मूर्ति कीर्तिखेडा गांव के मंदिर में स्‍थापित है।

बिन्दकी
फतेहपुर से 30 किलोमीटर की दूरी पर बिन्दकी क़स्बा है। यह एक प्राचीन शहर है। इस शहर का नाम यहां के शासक राजा वेणुकी के नाम पर रखा गया था। इस जगह की पृष्ठभूमि काफी धार्मिक और ऐतिहासिक है। बिन्दकी सेनानी जोधा सिंह अटैया और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों तथा प्रसिद्ध हिन्दी कवि राष्ट्र कवि सोहन लाल द्विवेदी की मातृभूमि है।

शिवराजपुर
गंगा नदी के तट पर शिवराजपुर गांव स्थित है। इस गांव में भगवान कृष्ण का प्राचीन मंदिर स्थित है। जिसे मीराबाई के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि मंदिर स्थित भगवान कृष्ण की मूर्ति की स्थापना मीराबाई ने की थी। वह भगवान कृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थी और मेवाड़ राज्य के शाही परिवार की सदस्य थी।

तेंदुली
यह गांव चौदहग्राम-बिन्दकी मार्ग पर स्थित है। इस गांव में बाबा झमदास का मंदिर स्थित है। माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को सांप या कुत्ता काट लेता है तो वह व्यक्ति मनो-विकार की समस्या से पीड़ित होता है। इस मंदिर में आकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। यंहा एक मन्दिर है , जिसे गुप्त कालीन बताया जाता हैआजकल यह अत्यन्त जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है

बावनी इमली
यह स्मारक स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का प्रतीक है। 28 अप्रैल 1858 में ब्रिटिश सेना द्वारा बावन स्वतंत्रता सेनानियों को एक इमली के पेड़ पर फांसी दी गई थी। जिस जगह पर यह इमली का पेड़ है, लोगो का मानना है कि इस घटना के बाद इस वृक्ष की विकास रूक गया है। यह जगह खजुहा शहर के निकट स्थित है। वैसे मूल पेड़ आज सूख चुका है ,लेकिन एक नई पेड़ की शाखा पनप चुकी है ,जो आज उसका अस्तित्व बनाये हुए है

भिटौरा

उत्तरवाहिनी पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित भिटौरा विकास खंड मुख्यालय के रूप में स्थित है है। यह वह स्थान है जहां संत भृगु ने काफी लम्बे समय तक तपस्या की थी। इसी कारण इस जगह को भृगु ठौर के नाम से भी जाता है। यहां गंगा नदी उत्तर दिशा से प्रवाहित हो रही है इसी कारन यंहा का पौराणिक महत्व के साथ -साथ धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है

हथगाम

यह स्थान महान स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री गणेश शंकर विद्यार्थी और प्रसिद्ध उर्दू कवि श्री इकबाल वर्मा की जन्मभूमि है।

आगे कोशिश करूंगा की आप सभी को और फतेहपुर के बारे में और परिचित करा सकूं

फतेहपुर के प्रमुख पर्यटक व पुरातात्त्विक स्थल

फतेहपुर के प्रमुख पर्यटक व पुरातात्त्विक स्थलों में शिवराजपुर, रेंह , खजुहा, बिन्दकी, तेंदुली , बावनी इमली, भिटौरा और हथगाम आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं। इसके अतिरिक्त कई मस्जिद और मंदिर भी है जहां पर्यटन का मजा लिया जा सकता है। गंगा और यमुना नदी के तट पर स्थित फतेहपुर उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है।यह जिला चारो ओर से बड़े शहरों यथा कानपुर , इलाहबाद , रायबरेली ,लखनऊ , बांदा आदि से घिरा हुआ है ,शायद यह इसका सौभाग्य है या दुर्भाग्य , इसका निर्णय आपके हाथफतेहपुर जिले की स्थापना 10 नवम्बर 1826 ई. में हुई थी। धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह स्थान शहीद जोधा सिंह अटैया , शहीद दरियाव सिंह और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों तथा प्रसिद्ध हिन्दी राष्ट्र कवि सोहन लाल द्विवेदी की मातृभूमि है।कुछ प्रमुख स्थलों के बारे में विवरण निम्न लिखित है

खजुहा
खजुहा गांव मुगल रोड पर स्थित है। यह गांव काफी प्राचीन है। इसका वर्णन प्राचीन हिन्दू धर्मग्रन्थ ब्रह्मा पुराण में भी हुआ है, जो कि 5000 वर्ष पुराना था। 5 जनवरी 1659 ई. में मुगल शासक औरगंजेब का अपने भाई शाहशुजा के साथ भीषण युद्ध हुआ था। औरंगजेब ने शाहशुजा को इस जगह के समीप ही मारा था। अपनी जीत की खुशी में उन्होंने यहां एक विशाल और खूबसूरत उद्यान और सराय का निर्माण करवाया था। इस उद्यान को बादशाही बाग के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त इस सराय में 130 कमरें है।आज की स्थिति में यह अत्यन्त जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है

रेंह

यमुना नदी के तट पर स्थित रेंह बहुत ही प्राचीन गांव है। यह गांव फतेहपुर शहर के दक्षिण-पश्चिम से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माना जाता है कि इस जगह से 800 ई. पूर्व के पुरातात्त्विक महत्व से जुड़े लेख प्राप्त हुए थे। इसके अलावा मौर्य काल, कुषाण काल और गुप्त काल के कई सिक्के और मूर्तियां प्राप्त हुई थी। दो दशक पूर्व भवगान विष्णु की प्राचीन मूर्ति इस गांव से प्राप्त हुई थी। वर्तमान समय में यह मूर्ति कीर्तिखेडा गांव के मंदिर में स्‍थापित है।

बिन्दकी
फतेहपुर से 30 किलोमीटर की दूरी पर बिन्दकी क़स्बा है। यह एक प्राचीन शहर है। इस शहर का नाम यहां के शासक राजा वेणुकी के नाम पर रखा गया था। इस जगह की पृष्ठभूमि काफी धार्मिक और ऐतिहासिक है। बिन्दकी सेनानी जोधा सिंह अटैया और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों तथा प्रसिद्ध हिन्दी कवि राष्ट्र कवि सोहन लाल द्विवेदी की मातृभूमि है।

शिवराजपुर
गंगा नदी के तट पर शिवराजपुर गांव स्थित है। इस गांव में भगवान कृष्ण का प्राचीन मंदिर स्थित है। जिसे मीराबाई के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि मंदिर स्थित भगवान कृष्ण की मूर्ति की स्थापना मीराबाई ने की थी। वह भगवान कृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थी और मेवाड़ राज्य के शाही परिवार की सदस्य थी।

तेंदुली
यह गांव चौदहग्राम-बिन्दकी मार्ग पर स्थित है। इस गांव में बाबा झमदास का मंदिर स्थित है। माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को सांप या कुत्ता काट लेता है तो वह व्यक्ति मनो-विकार की समस्या से पीड़ित होता है। इस मंदिर में आकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। यंहा एक मन्दिर है , जिसे गुप्त कालीन बताया जाता हैआजकल यह अत्यन्त जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है

बावनी इमली
यह स्मारक स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का प्रतीक है। 28 अप्रैल 1858 में ब्रिटिश सेना द्वारा बावन स्वतंत्रता सेनानियों को एक इमली के पेड़ पर फांसी दी गई थी। जिस जगह पर यह इमली का पेड़ है, लोगो का मानना है कि इस घटना के बाद इस वृक्ष की विकास रूक गया है। यह जगह खजुहा शहर के निकट स्थित है। वैसे मूल पेड़ आज सूख चुका है ,लेकिन एक नई पेड़ की शाखा पनप चुकी है ,जो आज उसका अस्तित्व बनाये हुए है

भिटौरा

उत्तरवाहिनी पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित भिटौरा विकास खंड मुख्यालय के रूप में स्थित है है। यह वह स्थान है जहां संत भृगु ने काफी लम्बे समय तक तपस्या की थी। इसी कारण इस जगह को भृगु ठौर के नाम से भी जाता है। यहां गंगा नदी उत्तर दिशा से प्रवाहित हो रही है इसी कारन यंहा का पौराणिक महत्व के साथ -साथ धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है

हथगाम

यह स्थान महान स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री गणेश शंकर विद्यार्थी और प्रसिद्ध उर्दू कवि श्री इकबाल वर्मा की जन्मभूमि है।

आगे कोशिश करूंगा की आप सभी को और फतेहपुर के बारे में और परिचित करा सकूं

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