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शिक्षक बनने की चाहत रखने वाले युवक व युवतियों के लिये यह साल सौगात लेकर आया है। डायट में इस समय वर्ष 2001, 2004, 2007 व 2008 की चयन प्रक्रिया के तहत दो हजार से अधिक अभ्यर्थियों को शिक्षक बनाने के लिये अलग-अलग कार्यवाही की जा रही है। एक साथ बोझा हो जाने से डायट के अधिकारी व कर्मचारी भी उलझे हुए हैं। वर्ष 2004 की विशिष्ट बीटीसी चयन प्रक्रिया में अठारह हजार दो सौ एक आवेदन हैं। दो सौ अभ्यर्थियों के चयन में चार अनुसूचित जनजाति का कोटा जिले में रिक्त कर दिया गया है ऐसे में एक सौ छियानबे की चयन प्रक्रिया की जा रही है। बताते हैं कि पिछली बार तय की गयी मेरिट पर ही इस बार नई चयन सूची जारी की जायेगी, लेकिन इसके पहले सभी अठारह हजार आवेदनों का वर्ग स्तर पर विभाजन कर लिया गया है और सभी का सत्यापन कराया जा रहा है।
डायट प्राचार्या विमल वर्मा ने यह स्वीकार किया कि 2004 की चयन प्रक्रिया का काम काफी हद तक पूरा हो गया है। अगले सप्ताह मेरिट सूची जारी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि डायट में वर्ष 2001 में बीटीसी का प्रशिक्षण ले चुके अभ्यर्थियों की पुन: परीक्षा कराने के लिये प्रवेश पत्र जारी किये जा रहे हैं। 2008 की चयन प्रक्रिया में चार सौ अट्ठाइस पदों के लिये आवेदन मांगे जा रहे हैं। बैकलाग के लगभग दो सौ पदों के लिये पहले ही आवेदन प्राप्त कर लिये गये हैं उनकी भी मेरिट सूची तैयार की जा रही है। बैकलाग में अनुसूचित जाति के एक सौ पैंसठ, अनुसूचित जनजाति के तेंतीस, पिछड़ी जाति के अड़तालीस पद सृजित हैं। वर्ष 2007 में एक हजार तीन सौ अरसठ पदों के लिये की गयी चयन प्रक्रिया में अब तक एक हजार एक सौ इकतीस अभ्यर्थियों का विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण के लिये चयन किया गया है इस तरह से 2007 की चयन प्रक्रिया के लगभग दो सौ पद अब भी रिक्त हैं। शासन ने इस चयन पर अब रोक लगाते हुए कहा है कि जो पद शेष रह गये हैं उन्हें 2008 की चयन प्रकिया में समायोजित कर दिया जाये। विशिष्ट बीटीसी के लगभग छ: सौ अभ्यर्थियों का इस समय फेरेवार प्रशिक्षण भी शुरू हो गया है। एक तरफ प्रशिक्षण और दूसरी तरफ एक नहीं तीन-तीन चयन प्रक्रिया की मेरिट तैयार करने से डायट में अफरातफरी का माहौल है। जिम्मेदारी को लेकर कर्मचारियों में ही उठापटक चल रही है।