>’माटी से माटी का अभिनन्दन’ – जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक किसको नहीं भाती?

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।। जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।
जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक आखिर किसको नहीं भाती है। आने वाले रविवार (५ दिसंबर) को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिलेंगी और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा देंगे।
अब तक कई बार जिले की माटी की सुगन्ध को देश के कोने-कोने तक फैला रही जनपदीय विभूतियों को हम वर्ष में एक बार एक जगह एकत्र हुआ देखते आ रहे  हैं।  लगातार चौथे साल भी यह अवसर आने वाली पांच दिसंबर को पड़ रहा है। गंगा किनारे ओउम् घाट पट्टी विट्ठलपुर सहिमापुर भिटौरा में पांच दिसंबर को जिले की महान विभूतियों का अलंकरण किया जाएगा। कार्यक्रम के प्रेरक व संयोजक स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती ने बताया कि यही एक ऐसा अवसर आता है जब जिले की विभूतियां एक जगह एकत्र होकर यहां की प्रगति व विकास की चिंता करते हैं। जिले के लिए इससे अधिक गौरव की बात और क्या होगी कि माटी के इन लालों ने दूर रहकर भी माटी का कर्ज उतारने के लिए फतेहपुर फोरम गठित कर यहां के युवाओं को बेहतर शिक्षा व रोजगार देने के प्रयासों की नींव रखी है ।
'माटी से माटी का अभिनन्दन'
इस अवसर में गौरवशाली व्यक्तित्व अलंकरण सूची में जनपद के इन कई महान हस्तियों को चुना गया है। इनमें खजुहा निवासी वर्तमान में दिल्ली में प्रोफेसर स्टेटिजिक मार्केटिंग मनमोहन शुक्ल, दपसौरा में जन्मी व दिल्ली में कमिश्नर कस्टम अर्चना तिवारी, शहर में जन्मे व सीईओ ग्रुप कैप्टन निम्स फ्लाइंग एकाडमी तेज प्रकाश श्रीवास्तव, किर्तीखेड़ा निवासी दिल्ली में आईआरएस ज्वाइंट कमिश्नर शिवदान सिंह भटौरिया हैं। इनके अलावा मोहम्मद अमीन ज्वाइंट डायरेक्टर इलेक्शन कमीशन आफ इंडिया, आरके सिंह डिप्टी कश्निर व्यापारकर कानपुर, एके द्विवेदी लखनऊ में लेबर कमिश्नर अवकाश प्राप्त, केएल द्विवेदी रिटायर्ड लेवर कमिश्नर गाजियाबाद, बसोहनी निवासी मनोज कुमार दिल्ली में सहायक कमिश्नर, कटरा नरैचा के पंकज कुमार दिल्ली में आईएएस, एसके सिन्हा एडवाइजर लीगल डीएलएफ लि. दिल्ली, खागा में जन्मी श्रीमती संध्या सिंह डिप्टी डायरेक्टर एनएसओ गवर्नमेंट आफ इंडिया आरकेपुरम दिल्ली, बिंदकी के एसएन गुप्ता डीआईजी वेस्ट बंगाल कोलकाता, बिंदकी के ही दिलीप कुमार आईआरएस कमिश्नर इनकम टैक्स मुंबई , समियाना निवासी गोविन्द दुबे दैनिक जागरण जिला प्रभारी बांदा, अभयपुर निवासी अनिल सिंह सेवायोजन अधिकारी मैनपुरी, शहर निवासी विभयमान सिंह मध्य कमान भारतीय सेना लखनऊ को भी अभिनंदन के लिए बुलाया गया है।

फतेहपुर :जिले भर के परिषदीय स्कूलों के सेवानिवृत्त हुए सवा दो सौ शिक्षकों का किया गया सम्मान

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गुरु देवो भव: की भावना पर डा.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर गुरुओं के प्रति असीम श्रद्घा के साथ शिक्षक दिवस मनाया गया। प्राथमिक शिक्षक संघ भिटौरा इकाई के तत्वावधान में जिले भर के परिषदीय स्कूलों के सेवानिवृत्त हुए सवा दो सौ शिक्षकों का सम्मान किया गया। एचएन बहुगुणा इण्टर कालेज हुसेनगंज में प्राथमिक शिक्षक संघ की भिटौरा इकाई के तत्वावधान में सवा दो सौ सेवानिवृत्त हुए परिषदीय शिक्षकों को शाल व रामायण भेंट कर सम्मानित किया गया।

की अध्यक्षता कर रहे किशनपुर क्षेत्र के विधायक मुरलीधर ने कहा कि गुरु शब्द ही महानता का प्रतीक है। जो व्यक्ति जिस स्थान पर है उस कामयाबी में गुरु का श्रेय है। मुख्य विकास अधिकारी सीपी त्रिपाठी ने कहा कि गुरुजन सभी के लिए सम्मान के पात्र है। बदले परिवेश में उन्हे यह चुनौती स्वीकारनी होगी कि चरित्र और राष्ट्र निर्माण की दिशा में पीढि़यों को तैयार करे। अपर जिलाधिकारी अच्छेलाल ने कहा कि आज उस महान व्यक्तित्व का जन्मदिन है जो साधारण परिवार से एक आदर्श शिक्षक बने और फिर देश की सर्वोच्च कुर्सी हासिल की।

बेसिक शिक्षा अधिकारी आरके पंडित ने सभी गुरुजनों को शिक्षक दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आज वह उनके अधिकारी जरूर बने है, लेकिन गुरुतर दायित्व वाले शिक्षकों का सम्मान करते है। इस मौके पर शिक्षक रामदुलारे, मुन्नीदेवी, शकुन्तला, शिवनारायण, प्रकाश नारायण, शिवप्रसाद, रमेश प्रसाद, कल्लू सिंह, महेन्द्र प्रताप सहित दो सौ तेईस शिक्षकों को अधिकारियों ने अंगवस्त्रम भेंट करने के साथ रामायण व माला देकर सम्मानित किया।

उत्तर वाहिनी गंगा पूरे भारतवर्ष में मात्र तीन जगह

शहर मुख्यालय से उत्तर दिशा में बारह किलोमीटर दूर उत्तरवाहिनी भागीरथी के तट पर महर्षि भृगु मुनि ने तपस्या की थी । पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भृगु मुनि की तपोस्थली में देवता भी परिक्रमा करने आए थे । पवित्र धाम गंगा महर्षि भृगु क्रोध में एक बार भगवान् विष्णु की छाती पर लात भी मारी थी । यहाँ पर अन्य आधा दर्जन मन्दिर बने हुए हैं ।

स्वामी विज्ञानानंद जी ने महर्षि भृगु की तपोस्थली में भगवान् शंकर की विशाल मूर्ति स्थापित कराई है , और नया पक्का घाट भी तैयार कराया है । भगवान् शंकर की मूर्ति पर ॐ नमः शिवाय का बारह वर्षों से अनवरत पाठ चल रहा है । उत्तर वाहिनी गंगा पूरे भारतवर्ष में मात्र तीन जगह है जिसमे हरिद्वार , काशी व भृगु धाम भिटौरा है

सरकार के प्रयास नाकाफी होने से मां गंगा का आंचल निर्मल नहीं

पुण्य सलिला मां गंगा का आंचल कब निर्मल व अविरल होगा यह देखने के लिये मां के भक्तों की आंखें तरस रही हैं। राष्ट्रीय नदी घोषित होने के बाद भी टेनरियों का गंदा पानी कल-कल बहने वाली अविरल धारा को मटमैला ही नहीं इतना विषैला कर दिया है कि मां की गोद पर अठखेलियां करने वाले जलजीव भी अब नहीं बच पा रहे हैं। सदियों से सबके पाप-ताप धोने वाली पतित पावनी की बेबस निगाहों से भक्तों में तो बदलाव आ गया है और वह अब मां गंगा को बचाने के लिये न तो उसमें निष्प्रयोज्य पूजन सामग्री डालते हैं और न ही गंदगी फैलाते हैं।

बसंत ऋतु में पहले कभी गंगा की अविरल धार कल-कल कर बहती थी अब वह मंद पड़ गयी है। पानी कम होने से जगह-जगह टापू निकल आये हैं और काले व हरे रंग का पानी इतना विषैला हो गया है कि मां गोद में अठखेलियां करने वाले जलजीवों की जान पर बन आयी है। गंगा किनारे के केवटों की मानें तो छोटी मछलियां तो इस समय तड़प-तड़प कर मर रही हैं। कछुवा भी पानी से निकलकर रेत में अपना बसेरा बना रहे हैं। उत्तरवाहिनी भृगुधाम भिटौरा के पक्के घाट व ओम घाट से गंगा की धार दो सौ मीटर दूर चली गयी है। पानी दो धाराओं पर इतने मंद गति से बह रहा है कि गंदगी बहने के बजाय घाट के किनारों पर जम गयी है।

पतित पावनी मां के निर्मल व अविरल स्वरूप को देखने के लिये भक्तों की आंखें तरस रही हैं। केन्द्र सरकार ने गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित कर दिया इससे लोगों में यह उल्लास बढ़ा था कि जल्द ही कुछ ऐसे प्रयास होंगे कि पतित पावनी की अविरल बहने वाली धार पहले की तरह दिखेगी। महानगरों की टेनरियों का गंगा में गिरने वाला पानी रोका जायेगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। तभी तो मां का आंचल और भी गंदा होता जा रहा है। समर्पित भक्त मां की इस स्थिति को देखकर दुखी हो रहे हैं। कहते हैं कि भक्त तो पतित पावनी को अविरल व निर्मल रखने के प्रयास कर रहे हैं वह न तो निष्प्रयोज्य पूजन सामग्री डाल रहे हैं और न ही शव प्रवाहित करते हैं। भिटौरा के श्मशान घाट में एक साल पहले आने वाले अस्सी फीसदी शव का जल प्रवाह होता था अब ठीक इससे उलट हो गया है। बमुश्किल दस फीसदी शवों का ही जल प्रवाह हो रहा है। नब्बे फीसदी शव जलाये जा रहे हैं। गंगा भक्त यही कहते हैं कि सरकार के प्रयास नाकाफी होने से मां का आंचल निर्मल नहीं हो रहा है।

हर-हर गंगे महादेव के जयकारों के साथ भक्तों ने पतित पावनी मां गंगा में डुबकी

माघ के चौथे पूर्णिमा के स्नान पर्व पर हर-हर गंगे महादेव के जयकारों के साथ भक्तों ने पतित पावनी मां गंगा में डुबकी लगायी। मौसम गुलाबी हो जाने के कारण घाटों में तड़के से ही स्नान करने वाले भक्तों की भीड़ पहुंचने लगी। उधर माघी पूर्णिमा पर कलेक्ट्रेट स्थित गौतम बुद्ध पार्क में बुद्ध समर्थकों ने भगवान बुद्ध को याद कर उनके आज ही के दिन आयु संस्कार के विसर्जन को याद करते हुए कहा कि जाति-पांति की दीवार ढहाकर मानव धर्म की सीख देने वाले भगवान बुद्ध मानवीय संस्कृति के विकास के द्योतक थे।

माघ के चौथे स्नान पर्व को लेकर भक्तों में खासा उल्लास रहा। पतित पावनी मां गंगा के भिटौरा स्थित ओम घाट, पक्का घाट, बलखंडेश्वर, असनी, नौबस्ता, आदमपुर, निंबुआ घाट, शिवराजपुर में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच गयी। हर-हर गंगे महादेव के जयकारों के बीच भक्तों ने मां गंगा में डुबकी लगायी और मां के गंदे हो रहे आंचल को पवित्र रखने का संकल्प लिया। गंगा घाट स्थित मंदिरों में पूजा, अर्चना के साथ भक्तों ने प्रसाद वितरण किया। भक्तों की भीड़ को देखते हुए भिटौरा सहित कई घाटों में मेला लगा जिसमें लोगों ने मनचाही वस्तुओं की खरीददारी की। गंगा घाट तक भक्तों को ले जाने के लिये जहां शहर से कई स्थानों से अलग-अलग वाहन स्टैण्ड बने हुए थे वहीं घाट में सुरक्षा के लिहाज से गोताखोर भी लगाये गये थे।

माघी पूर्णिमा को बौद्ध अनुयायियों ने महापर्व के रूप में मनाया। डा.बाबा साहब अंबेडकर मिशन शाखा के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट स्थित बुद्धा पार्क में बुद्ध जी की प्रतिमा के सामने मोमबत्ती जलाकर पुष्पांजलि दी। भन्ते गजानन एवं भन्ते विजयानन्द ने बुद्ध वन्दना, पंचशील के साथ पूजा, अर्चना की। मिशन के जिला सचेतक रमेश बौद्ध ने कहा कि माघी पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध ने वैशाली में संकल्प करके आयु संस्कार का विसर्जन किया था और अपने परम शिष्य आनन्द को यह रहस्य समझाकर प्रचार कार्य प्रारम्भ कराया था।

गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह संपन्न

भृगुधाम भिटौरा के ओम घाट में रविवार को रौनक देखते ही बनी। जिले में पैदा हुई और देश के कोने-कोने नाम रोशन कर रहीं विभूतियों का यहां जमघट लगा। स्वामी विज्ञानानंद महाराज और वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि धनंजय अवस्थी ने गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह की स्वयं कमान संभाली। संत और साहित्यकार दोनों की विभूतियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके बाद सभी 10 प्रतिभाओं को फूलमाला, शाल और प्रतीक चिन्ह भेंटकर अलंकृत किया गया।अलंकरण समारोह में शामिल होने के लिए आने और जाने वालों के लिए मुफ्त बस सेवा उपलब्ध रही। कई स्कूलों की आधा दर्जन बसों ने आने जाने वालों को यातायात सुविधा मुहैया कराई। अपरान्ह 11 बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में भारी भरकम पांडाल सजाया गया। आमंत्रित सभी 21 विभूतियों की नेम प्लेटें लगाई गईं। इस मौके पर स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि सम्मान के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि सम्मान भावनाओं का समर्पण है। इसके बाद अनंतदास महराज ने परमानंद महराज को गुलाब की माला पहनाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद 10 जिले की और एक विदेशी विभूतियों को एक माला से जोड़कर सम्मानित किया गया। इसके बाद साहित्यकार एवं कवि के अलावा सुधाकर अवस्थी, सुनील श्रीवास्तव, हरिओम रस्तोगी आदि ने बारी-बारी से प्रतीक चिन्ह, बुके, शाल देकर सम्मानित किया। बाद में स्वामी विज्ञानानंद ने सभी विभूतियों के ओम का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस दौरान समारोह में शामिल होने वालों के आने जाने का सिलसिला जारी रहा। आश्रम के पीछे नाश्ते और भोजन की व्यवस्था रही। सम्मानित होने वालों में स्वामी परमानंद महराज, राजेंद्र द्विवेदी, मिथलेश कुमार सविता, अरुण देव गौतम, डा. गिरीश कुमार शुक्ला, प्रो. मारिया, प्रदीप श्रीवास्तव, रमेश मिश्रा, डा. संकठा प्रसाद आदि रहे।

माटी में जन्मे और पढ़ लिखकर विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले माटी के लाल अपनों के ही सम्मान से गदगद हुये। देश के कोने-कोने में अपनी ख्याति अर्जित करने वाली इन हस्तियों ने यही कहा कि माटी का कर्ज चुकाने का यदि मौका मिला तो हम अपने को धन्य समझेंगे। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी की भावना को दर्शाते हुये महानुभावों ने यह संकल्प लिया कि युवा बच्चों के बीच कुछ करके हम जिले के पिछड़ेपन को दूर करना चाहते हैं। काम कहीं भी करें लेकिन माटी की सोंधी खुशबू मिटती नहीं है, यही सपना रहता है कि अपने गांव घर और जिले के लिये क्या कर दिखायें। सभी ने यही कहा कि यदि कुछ करने का प्लेटफार्म दिया तो निश्चित तौर पर कुछ कर दिखायेंगे।

हिंदी उर्दू साहित्य के क्षेत्र में देश विदेश में ख्याति अर्जित करने वाले फतेहपुर शहर के जन्मे असगर वजाहत कहते हैं कि अपनों के बीच जो खुशी होती है वह और कहीं नहीं मिलतीयहीं की माटी में पढ़े-बढ़े हैं, आखिर यहां के लिये कुछ करने का संकल्प तो बहुत पहले से था लेकिन ऐसा कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। इसके पूर्व भी माटी से माटी के वर्ष 2001 के समारोह में सबको एक साथ मिलने का मौका मिला था। पवित्र गंगा नदी के तट पर आयोजित यह समारोह हमारे उद्देश्य को पूरा करके दिखायेगा यह विश्वास है।

होम्योपैथी चिकित्सा में कानपुर में महानगर में स्थान बनाये असनी के लाल संकठा प्रसाद पांडेय कहते हैं कि नई पीढ़ी को बाहर बुलंदियों को छूने वाले माटी के लालों से जोड़ने की जरूरत है और उन्हें भी इस बात का जच्बा होना चाहिए कि वह अपने से बड़ों का मार्गदर्शन सीख लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि वह गंगा किनारे के असनी गांव के रहने वाले हैं। दोआबा की संस्कृति और संस्कार पूरे विश्व में कमाल दिखायें, यही मेरी शुभ कामना है।

शहर में ही जन्मे पुणे में आयकर निदेशक पद पर कार्यरत एजे खान कहते हैं कि घर परिवार में वर्षो से में यह चर्चा करता था कि अपनी माटी के लिये कुछ नहीं कर पा रहा हूं, पत्‍‌नी यही कहती थीं कि आप हमेशा कहते रहते हैं, कभी जाते नहीं। आखिर इस आयोजन से मेरा सपना पूरा हो गया है। अब हर वर्ष यहां आकर माटी के लिये कुछ करने के संकल्प को पूरा कर सकूंगा।

शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे इस समय दिल्ली में आईजी के पद पर कार्यरत प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि माटी से माटी का सम्मान यूं ही होता रहेगा तो कोई लाभ नहीं है। परिणाम क्या मिला, अगले वर्ष के समारोह में इसका जवाब चाहिए। एक वर्ष के दौरान इस माटी के लिये हस्तियों ने क्या किया है और क्या करना है, यह सब तय हो जाना चाहिए और यहां के लोगों को भी कुछ पाने के लिये अपने को तैयार होना पड़ेगा।

मलवां ब्लाक के आशा अभयपुर गांव में जन्मे छत्तीसगढ़ रायपुर में डीआईजी पद पर कार्यरत अरुण देव गौतम अपनों से मिलकर गर्व महसूस कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मैं तो साल में दो बार गांव आता हूं, जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर सुखद माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि जिले में कोई ऐसा मदद का प्लेटफार्म बन जाये तो वह यहां की युवा बच्चों को मार्गदर्शन के साथ हर तरह की मदद देने के लिये तैयार हैं।

गंगा किनारे आदमपुर गांव के डा. रमेशचंद्र मिश्र जो इस समय चंडीगढ़ हरियाणा में आईजी हैं, ने कहा कि बहुत से दिन ऐसा सोच रहे थे कि कोई ऐसा मंच मिले जिससे वह जिले के लोगों से जुड़ जायें। आखिर यह मौका मिल ही गया तो अब काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिये सबसे पहले हम सभी को शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में काम करना होगा तभी हम नई पीढ़ी के बच्चों को बुलंदियों तक पहुंचाने में कामयाब हो पायेंगे।

सार्वजनिक उद्यम के डायरेक्टर पर तैनात गिरीशचंद्र शुक्ला जो कि खजुहा कस्बे में जन्मे हैं, कहते हैं कि गांव मजरों में प्रतिभाएं छिपी हैं, बस निखारने की जरूरत है। वह तो साल में दो-तीन बार गांव अवश्य जाते हैं। सबसे पहला प्रयास तो खेती को व्यावसायिक बनाने का जिले में प्रयोग किया जा सकता है। संपन्नता और खुशहाली आयेगी तभी हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आगे बढ़ा पायेंगे।

साहित्य के क्षेत्र में ख्याति अर्जित करने वाले डा. गिरीशचंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि कर्मभूमि भले ही कानपुर महानगर है लेकिन जन्मभूमि का लगाव कभी कम नहीं हो सकता है। जन्मभूमि में भी कर्म का मौका मिल जाये तो हम लोग अपने भाग्य को धन्य समझेंगे।

कृषि विशेषज्ञ औरेई के राजेंद्र प्रसाद दुबे उर्फ बड़े मुन्नू कहते हैं कि कृषि को व्यावसायिक दर्जा देकर खुशहाली संपन्नता लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी यह चाहत है कि हर किसान खुशहाल और प्रगतिशील बने और इसके लिये वह बराबर आलू की खेती के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

विद्युत सुरक्षा के उपनिदेशक पद पर तैनात अल्लीपुर मौहार के प्रो. मिथलेश कुमार सविता कहते हैं कि नौकरी तो केवल जीविकोपार्जन के लिये कर रहे हैं लेकिन समाज के लिये कुछ करने की चाहत है। वह सप्ताह में दो दिन फतेहपुर में रहते हैं कि चाहते हैं कि नि:शुल्क कोचिंग करके प्रतिभाओं को आगे बढायें

गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह संपन्न

भृगुधाम भिटौरा के ओम घाट में रविवार को रौनक देखते ही बनी। जिले में पैदा हुई और देश के कोने-कोने नाम रोशन कर रहीं विभूतियों का यहां जमघट लगा। स्वामी विज्ञानानंद महाराज और वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि धनंजय अवस्थी ने गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह की स्वयं कमान संभाली। संत और साहित्यकार दोनों की विभूतियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके बाद सभी 10 प्रतिभाओं को फूलमाला, शाल और प्रतीक चिन्ह भेंटकर अलंकृत किया गया।अलंकरण समारोह में शामिल होने के लिए आने और जाने वालों के लिए मुफ्त बस सेवा उपलब्ध रही। कई स्कूलों की आधा दर्जन बसों ने आने जाने वालों को यातायात सुविधा मुहैया कराई। अपरान्ह 11 बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में भारी भरकम पांडाल सजाया गया। आमंत्रित सभी 21 विभूतियों की नेम प्लेटें लगाई गईं। इस मौके पर स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि सम्मान के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि सम्मान भावनाओं का समर्पण है। इसके बाद अनंतदास महराज ने परमानंद महराज को गुलाब की माला पहनाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद 10 जिले की और एक विदेशी विभूतियों को एक माला से जोड़कर सम्मानित किया गया। इसके बाद साहित्यकार एवं कवि के अलावा सुधाकर अवस्थी, सुनील श्रीवास्तव, हरिओम रस्तोगी आदि ने बारी-बारी से प्रतीक चिन्ह, बुके, शाल देकर सम्मानित किया। बाद में स्वामी विज्ञानानंद ने सभी विभूतियों के ओम का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस दौरान समारोह में शामिल होने वालों के आने जाने का सिलसिला जारी रहा। आश्रम के पीछे नाश्ते और भोजन की व्यवस्था रही। सम्मानित होने वालों में स्वामी परमानंद महराज, राजेंद्र द्विवेदी, मिथलेश कुमार सविता, अरुण देव गौतम, डा. गिरीश कुमार शुक्ला, प्रो. मारिया, प्रदीप श्रीवास्तव, रमेश मिश्रा, डा. संकठा प्रसाद आदि रहे।

माटी में जन्मे और पढ़ लिखकर विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले माटी के लाल अपनों के ही सम्मान से गदगद हुये। देश के कोने-कोने में अपनी ख्याति अर्जित करने वाली इन हस्तियों ने यही कहा कि माटी का कर्ज चुकाने का यदि मौका मिला तो हम अपने को धन्य समझेंगे। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी की भावना को दर्शाते हुये महानुभावों ने यह संकल्प लिया कि युवा बच्चों के बीच कुछ करके हम जिले के पिछड़ेपन को दूर करना चाहते हैं। काम कहीं भी करें लेकिन माटी की सोंधी खुशबू मिटती नहीं है, यही सपना रहता है कि अपने गांव घर और जिले के लिये क्या कर दिखायें। सभी ने यही कहा कि यदि कुछ करने का प्लेटफार्म दिया तो निश्चित तौर पर कुछ कर दिखायेंगे।

हिंदी उर्दू साहित्य के क्षेत्र में देश विदेश में ख्याति अर्जित करने वाले फतेहपुर शहर के जन्मे असगर वजाहत कहते हैं कि अपनों के बीच जो खुशी होती है वह और कहीं नहीं मिलतीयहीं की माटी में पढ़े-बढ़े हैं, आखिर यहां के लिये कुछ करने का संकल्प तो बहुत पहले से था लेकिन ऐसा कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। इसके पूर्व भी माटी से माटी के वर्ष 2001 के समारोह में सबको एक साथ मिलने का मौका मिला था। पवित्र गंगा नदी के तट पर आयोजित यह समारोह हमारे उद्देश्य को पूरा करके दिखायेगा यह विश्वास है।

होम्योपैथी चिकित्सा में कानपुर में महानगर में स्थान बनाये असनी के लाल संकठा प्रसाद पांडेय कहते हैं कि नई पीढ़ी को बाहर बुलंदियों को छूने वाले माटी के लालों से जोड़ने की जरूरत है और उन्हें भी इस बात का जच्बा होना चाहिए कि वह अपने से बड़ों का मार्गदर्शन सीख लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि वह गंगा किनारे के असनी गांव के रहने वाले हैं। दोआबा की संस्कृति और संस्कार पूरे विश्व में कमाल दिखायें, यही मेरी शुभ कामना है।

शहर में ही जन्मे पुणे में आयकर निदेशक पद पर कार्यरत एजे खान कहते हैं कि घर परिवार में वर्षो से में यह चर्चा करता था कि अपनी माटी के लिये कुछ नहीं कर पा रहा हूं, पत्‍‌नी यही कहती थीं कि आप हमेशा कहते रहते हैं, कभी जाते नहीं। आखिर इस आयोजन से मेरा सपना पूरा हो गया है। अब हर वर्ष यहां आकर माटी के लिये कुछ करने के संकल्प को पूरा कर सकूंगा।

शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे इस समय दिल्ली में आईजी के पद पर कार्यरत प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि माटी से माटी का सम्मान यूं ही होता रहेगा तो कोई लाभ नहीं है। परिणाम क्या मिला, अगले वर्ष के समारोह में इसका जवाब चाहिए। एक वर्ष के दौरान इस माटी के लिये हस्तियों ने क्या किया है और क्या करना है, यह सब तय हो जाना चाहिए और यहां के लोगों को भी कुछ पाने के लिये अपने को तैयार होना पड़ेगा।

मलवां ब्लाक के आशा अभयपुर गांव में जन्मे छत्तीसगढ़ रायपुर में डीआईजी पद पर कार्यरत अरुण देव गौतम अपनों से मिलकर गर्व महसूस कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मैं तो साल में दो बार गांव आता हूं, जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर सुखद माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि जिले में कोई ऐसा मदद का प्लेटफार्म बन जाये तो वह यहां की युवा बच्चों को मार्गदर्शन के साथ हर तरह की मदद देने के लिये तैयार हैं।

गंगा किनारे आदमपुर गांव के डा. रमेशचंद्र मिश्र जो इस समय चंडीगढ़ हरियाणा में आईजी हैं, ने कहा कि बहुत से दिन ऐसा सोच रहे थे कि कोई ऐसा मंच मिले जिससे वह जिले के लोगों से जुड़ जायें। आखिर यह मौका मिल ही गया तो अब काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिये सबसे पहले हम सभी को शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में काम करना होगा तभी हम नई पीढ़ी के बच्चों को बुलंदियों तक पहुंचाने में कामयाब हो पायेंगे।

सार्वजनिक उद्यम के डायरेक्टर पर तैनात गिरीशचंद्र शुक्ला जो कि खजुहा कस्बे में जन्मे हैं, कहते हैं कि गांव मजरों में प्रतिभाएं छिपी हैं, बस निखारने की जरूरत है। वह तो साल में दो-तीन बार गांव अवश्य जाते हैं। सबसे पहला प्रयास तो खेती को व्यावसायिक बनाने का जिले में प्रयोग किया जा सकता है। संपन्नता और खुशहाली आयेगी तभी हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आगे बढ़ा पायेंगे।

साहित्य के क्षेत्र में ख्याति अर्जित करने वाले डा. गिरीशचंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि कर्मभूमि भले ही कानपुर महानगर है लेकिन जन्मभूमि का लगाव कभी कम नहीं हो सकता है। जन्मभूमि में भी कर्म का मौका मिल जाये तो हम लोग अपने भाग्य को धन्य समझेंगे।

कृषि विशेषज्ञ औरेई के राजेंद्र प्रसाद दुबे उर्फ बड़े मुन्नू कहते हैं कि कृषि को व्यावसायिक दर्जा देकर खुशहाली संपन्नता लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी यह चाहत है कि हर किसान खुशहाल और प्रगतिशील बने और इसके लिये वह बराबर आलू की खेती के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

विद्युत सुरक्षा के उपनिदेशक पद पर तैनात अल्लीपुर मौहार के प्रो. मिथलेश कुमार सविता कहते हैं कि नौकरी तो केवल जीविकोपार्जन के लिये कर रहे हैं लेकिन समाज के लिये कुछ करने की चाहत है। वह सप्ताह में दो दिन फतेहपुर में रहते हैं कि चाहते हैं कि नि:शुल्क कोचिंग करके प्रतिभाओं को आगे बढायें

माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की तीसरी श्रंखला

।। जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।

जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक आखिर किसको नहीं भाती है। रविवार को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिलेंगी और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा देंगे।

स्वामी विज्ञानानन्द जी के मार्गदर्शन पर रविवार को भिटौरा के ओम घाट में हो रहे गौरवशाली प्रतिभाओं के सम्मान समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संयोजक मण्डल के धनंजय अवस्थी, आचार्य विष्णु शुक्ला, सुनील श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की यह तीसरी श्रंखला है। पतित पावनी उत्तरवाहिनी गंगा के ओम घाट के तट पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सुबह दस बजे विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाली अठारह विभूतियां भिटौरा घाट पहुंच जायेंगी जो हाईस्कूल व इण्टर के ग्रामीण बच्चों से रूबरू होंगे। नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को निखारने की यह अनूठी पहल माटी के ही लाल शुरू कर रहे हैं और वह माटी के ही लालों को अब आगे ले जायेंगे। बारह से अभिनंदन समारोह का कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें महामंडलेश्वर परमानंद जी महाराज जी का आशीर्वचन होगा। शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे प्रदीप श्रीवास्तव जो इस समय दिल्ली पुलिस में आईजी हैं ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली में जोनिहां निवासी विकास प्राधिकरण के उप निदेशक शैलेन्द्र सिंह परिहार के संयोजकत्व में फतेहपुर फोरम तैयार किया गया है। दिल्ली में स्थापित फतेहपुर फोरम के तार माटी से जोड़कर आगे बढ़ाने का काम किया जायेगा। अपने आप में हो रहे इस अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फतेहपुर के पिछड़ेपन को दूर कर किस तरह से विकास के पथ पर लाया जाये। विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के लिये माटी के ही लालों का सहयोग लेने की एक कार्ययोजना तय की जानी है।

माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की तीसरी श्रंखला

।। जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।

जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक आखिर किसको नहीं भाती है। रविवार को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिलेंगी और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा देंगे।

स्वामी विज्ञानानन्द जी के मार्गदर्शन पर रविवार को भिटौरा के ओम घाट में हो रहे गौरवशाली प्रतिभाओं के सम्मान समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संयोजक मण्डल के धनंजय अवस्थी, आचार्य विष्णु शुक्ला, सुनील श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की यह तीसरी श्रंखला है। पतित पावनी उत्तरवाहिनी गंगा के ओम घाट के तट पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सुबह दस बजे विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाली अठारह विभूतियां भिटौरा घाट पहुंच जायेंगी जो हाईस्कूल व इण्टर के ग्रामीण बच्चों से रूबरू होंगे। नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को निखारने की यह अनूठी पहल माटी के ही लाल शुरू कर रहे हैं और वह माटी के ही लालों को अब आगे ले जायेंगे। बारह से अभिनंदन समारोह का कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें महामंडलेश्वर परमानंद जी महाराज जी का आशीर्वचन होगा। शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे प्रदीप श्रीवास्तव जो इस समय दिल्ली पुलिस में आईजी हैं ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली में जोनिहां निवासी विकास प्राधिकरण के उप निदेशक शैलेन्द्र सिंह परिहार के संयोजकत्व में फतेहपुर फोरम तैयार किया गया है। दिल्ली में स्थापित फतेहपुर फोरम के तार माटी से जोड़कर आगे बढ़ाने का काम किया जायेगा। अपने आप में हो रहे इस अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फतेहपुर के पिछड़ेपन को दूर कर किस तरह से विकास के पथ पर लाया जाये। विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के लिये माटी के ही लालों का सहयोग लेने की एक कार्ययोजना तय की जानी है।

अभिनंदन एवं अलंकरण सम्मान समारोह 23 नवंबर को भृगुधाम भिटौरा में

जिले की माटी में जन्मे ऐसे लोग जो अपनी प्रतिभा एवं कर्मठता के बल पर जिले का मान बढ़ाया है। ऐसी कई नामचीन प्रतिभाओं का अभिनंदन एवं अलंकरण सम्मान समारोह 23 नवंबर को भृगुधाम भिटौरा में आयोजित किया गया है। जहां विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही बाइस प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। यह जानकारी आयोजक समिति के पदाधिकारियों ने एक वार्ता में दी।स्वामी विज्ञानानंद की प्रेरणा से पतित पावनी गंगा के तट पर स्थापित तपोवन आश्रम में आयोजित अलंकरण समारोह में

एजे खान निदेशक आयकर पुणे, शारदा प्रसाद आईएएस, प्रो. डीपी तिवारी पूर्व वाइस चांसलर मेरठ, आईपीएस रमेशचंद्र मिश्र, अशोक कुमार बाजपेई संयुक्त कमिश्नर वैट सीतापुर, सुभाष चंद्र पटेल आईएएस, अरुण देव गौतम आईपीएस, आरपी शुक्ल आईएएस, प्रो. असगर वजाहत साहित्यकार, प्रदीप श्रीवास्तव आईपीएस, गिरीशचंद्र शुक्ल पीसीएस, सूर्यकुमार आईपीएस के अलावा संकटा प्रसाद पांडेय, एके सिंह, दीनानाथ श्रीवास्तव, पुरुषोत्तमदास ओमर, शिवकुमार दीक्षित, राजेंद्र सिंह यादव, राजेंद्र द्विवेदी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एक मुकाम हासिल करने वाले गणमान्यों को सम्मानित किया जाएगा।

कार्यक्रम संयोजक धनंजय अवस्थी ने बताया कि जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में जन्मे इन व्यक्तित्वों को सम्मानित करने का मकसद लोगों को जनपद के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी उपलब्ध कराने का है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को कार्यक्रम में शिरकत करना चाहिए। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए वाहन की सुविधा पक्का तालाब से उपलब्ध रहेगी। स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि करेंगे। उन्होंने संबंधित गणमान्यों से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की है। जिससे कार्यक्रम को और रोचक बनाया जा सके। यह कार्यक्रम पूर्व में आयोजित किए गए माटी से माटी कार्यक्रम का नया रूप है, जिसके जरिए जिले की प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान किया जाता रहा है।

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