>माटी से माटी का अभिनन्दन की तीसरी कड़ी : चित्रात्मक रिपोर्ट !

> अब तक आप  थोड़ी देर से पेश की गयी रिपोर्ट पढ़ चुके होंगे ! कुछ और चित्र और मिल सकें हैं ….उन्हें यहाँ चिपका रहा हूँ |

( जब  मैं कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा तो विवरण बैनर टंगा हुआ था और मंच पर पसरा था  सन्नाटा )

( कार्यक्रम के प्रारम्भ में खुश्वक्त राय आर्य शिक्षालय के बच्चियां सरस्वती वंदना प्रस्तुत करते हुए , बगल में फतेहपुर फोरम के उपाध्यक्ष महेश चन्द्र तिवारी और कार्यक्रम  की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए  साहित्यकार धनञ्जय अवस्थी और पूर्व विधायक प्रेमदत्त तिवारी  )

( उपस्थित सम्मानानीयों का स्वागत करती बच्चियां )

( दाहिने से ध्यानमग्न विशांत प्रकाश , संध्या सिंह , श्री सिन्हा  , कर्नल विभय मान सिंह , श्री तेज प्रकाश श्रीवास्तव , उत्तम  तिवारी , अजय सचान और अन्य )
( सम्मानित जनों के पारिवारिक गण )

(स्क्वाड्रन लीडर तेज प्रकाश श्रीवास्तव को प्रतीक चिन्ह और अंगवस्त्रम देकर सम्मानित करते हुए महेश कान्त त्रिपाठी , सुधाकर अवस्थी और अन्य )

( पुनः प्रारम्भ हुई सैनिक भर्ती जैसी उपलब्धि पर कर्नल विभय मान सिंह का पगड़ी पहना कर विशेष सम्मान किया गया )

(प्रताक चिन्ह और अंगवस्त्रम के साथ सम्मानित किये गए सिन्हा जी )

(कार्यकम के मध्य समारोह में सहभाग कर रहे सजे धजे बच्चे …..जो अपने गुजरे हुए कल और आने वाले कल को ध्यानमग्न होकर देखते हुए )

( न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रृद्धा त्रिपाठी को भी सम्मानित  किया गया )

( डा. प्रकाश चंद्र हितकारी को सम्मानित किया गया )

(जनमानस के समक्ष बैठे  बाहर से आये फतेहपुरिया )

((मंच पर बैठे  मनोज पटेल , पंकज सिंह , अजय सचान और अन्य ))

( स्नेहमयी  फूलों की डोरी में  बंधे गए आगंतुक ; अब बच कर ना जा पायेंगे| दाहिने से क्रमशः महेश चन्द्र तिवारी , शैलेन्द्र सिंह परिहार , कन्हैया लाल द्विवेदी , उत्तम तिवारी , विभय मान सिंह , तेज प्रकाश श्रीवास्तव , और स्वामी विज्ञानन्द जी महाराज ; पीछे दाहिने से रविकांत मिश्र , सुधाकर अवस्थी और अन्य )

( कार्यक्रम के समापन पर ओम घाट और कल कल करती गंगा की अविरल धारा की मनोहारी छटा )

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प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI   

 

>माटी से माटी का अभिनन्दन की तीसरी कड़ी में किया गया सम्मान : देर से पेश एक रिपोर्ट

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पिछले ५ दिसंबर २०१० को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने लायक था , जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिली  और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करती रहीं । खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा भी देते रहे।

(सम्मानित माटी के लाल)
जनपद के गौरवशाली व्यक्तित्व अलंकरण समारोह की तीसरी कड़ी में जनपद की उन महान विभूतियों का सम्मान किया गया जो जिले के बाहर रहकर यहां की माटी का मान बढ़ा रहे हैं। इनमें शासकीय सेवा, व्यवसाय, खेल, मीडिया व अन्य क्षेत्र में उल्लेखनीय मुकाम हासिल किये लोगों के नाम शामिल हैं। जिले की मिंट्टी में जन्में यह लोग बाहर रहकर भी यहां के लिये कुछ न कुछ करना चाहते हैं यही उनकी इच्छा है। भिटौरा के ओम्घाट-पंट्टी विट्ठलपुर सहिमापुर में हुए अलंकरण समारोह में आयी जनपद की इन हस्तियों ने एक दूसरे के हालचाल लिये। यह सभी एक मंच पर एकत्र होकर अपनी जन्म भूमि के प्रति दिल खोलकर कार्य करने की घोषणा की। अपनी जन्म भूमि की माटी से मिलने के लिए समारोह में आये उसके लाल एक दूसरे से मिले तो यादों में खो गये। कुछ तो पहली बार एक दूसरे से मिल रहे थे। कार्यक्रम में आयी विभूतियों ने कहा कि वह जितना हो सकेगा फतेहपुर जिले का नाम रोशन के लिए कुछ विशेष करते रहेंगे। 
(समानित जनो के साथ स्वामी विज्ञानन्द जी)
स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती जी की अगुवाई में आयोजित समारोह में सम्मान पाने वालों में सीईओ ग्रुप कैप्टन निम्स फ्लाइंग एकाडमी दिल्ली कर्नल तेज प्रकाश श्रीवास्तव, मध्य कमान भारतीय सेना लखनऊ कर्नल विभय मान सिंह, आईएएस दिल्ली पंकज कुमार, डिप्टी डायरेक्टर एनएसओ गवर्नमेंट आफ इंडिया दिल्ली संध्या सिंह, सहायक कमिश्नर कस्टम दिल्ली मनोज कुमार पटेल, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रद्धा त्रिपाठी, एडीजे आगरा सीएल वर्मा, एडीजे शाहजहांपुर दिनेश चंद्र सैनी, शैलेंन्द्र सिंह परिहार आईएएस, अरविन्द कुमार द्विवेदी डायरेक्टर हैंडीकैप्ड , अरुण देव सिंह गौतम आईजी छत्तीसगढ़ को प्रतीक चिह्न व शाल  ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा सम्मान पाने वालों में कन्हैयालाल द्विवेदी सेवानिवृत्त श्रमायुक्त,  डा. प्रकाश चंद्र हितकारी, टीएन शुक्ला, गोविन्द दुबे प्रभारी दैनिक जागरण बांदा, अंतर्राष्टीय टेनिस बाल क्रिकेट खिलाड़ी रविकांत आदि रहे। इस मौके पर समारोह की अध्यक्षता संयुक्त रूप से वरिष्ट साहित्यकार धनंजय अवस्थी एवं पूर्व विधायक  प्रेमदत्त तिवारी द्वारा की गयी।
इस मौके पर जिले में मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुकी ससुरखदेरी नदी को स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती की अगुवाई में जिले की हस्तियां नया जीवन देने का निर्णय लिया गया । भिटौरा में गंगा नदी के किनारे ओमघाट पर रविवार दिनांक ५ दिसंबर २०१०   को माटी से माटी का अभिनंदन समारोह में जिले की विभूतियों ने संकल्प लिया कि यह नदी फिर कलकल करती बहेगी। 
ससुर खदेरी नदी जनपद के सिठौरा गांव से निकलकर यमुना में मिलती थी। अब सिठौरा से लेकर बड़नपुर तक इसका अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। नदी की जमीन पर किसान कब्जा कर खेती कर रहे हैं। स्वामी जी ने कहा बड़नपुर के आगे नदी को जीवित रखने के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसमें नदी की खुदाई, किनारे पौधरोपण जैसे कार्य किये जायेंगे। इस कार्य के लिए स्वामी जी ने स्वयं दो ट्रैक्टर और एक छोटी जेसीबी मशीन देने की घोषणा की। साथ ही मंच पर विराजमान विभूतियों से भी सहयोग मांगा कि यदि सभी का थोड़ा-थोड़ा भी सहयोग मिलेगा तो हम अपने मिशन में कामयाब हो सकेंगे। दो उद्यमियों ने खुदाई में आर्थिक मदद की घोषणा मंच से की। इस अभियान की कमान स्वामी जी ने रामआसरे प्रजापति को सौंपी।
इसके अलावा स्वामी जी ने सम्मान समारोह का आयोजन करने वाले फतेहपुर  फोरम द्वारा  लिये गये एक और फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनपद के युवाओं की सुविधा के लिए सभी तेरह विकास खंडों में सैनिक प्रशिक्षण केंद्र खोला जायेगा। स्वामी जी की इस अपील पर वहां लोगों ने समर्थन करने के साथ आर्थिक सहयोग देने का वादा किया। 

>’माटी से माटी का अभिनन्दन’ – जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक किसको नहीं भाती?

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।। जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।
जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक आखिर किसको नहीं भाती है। आने वाले रविवार (५ दिसंबर) को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिलेंगी और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा देंगे।
अब तक कई बार जिले की माटी की सुगन्ध को देश के कोने-कोने तक फैला रही जनपदीय विभूतियों को हम वर्ष में एक बार एक जगह एकत्र हुआ देखते आ रहे  हैं।  लगातार चौथे साल भी यह अवसर आने वाली पांच दिसंबर को पड़ रहा है। गंगा किनारे ओउम् घाट पट्टी विट्ठलपुर सहिमापुर भिटौरा में पांच दिसंबर को जिले की महान विभूतियों का अलंकरण किया जाएगा। कार्यक्रम के प्रेरक व संयोजक स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती ने बताया कि यही एक ऐसा अवसर आता है जब जिले की विभूतियां एक जगह एकत्र होकर यहां की प्रगति व विकास की चिंता करते हैं। जिले के लिए इससे अधिक गौरव की बात और क्या होगी कि माटी के इन लालों ने दूर रहकर भी माटी का कर्ज उतारने के लिए फतेहपुर फोरम गठित कर यहां के युवाओं को बेहतर शिक्षा व रोजगार देने के प्रयासों की नींव रखी है ।
'माटी से माटी का अभिनन्दन'
इस अवसर में गौरवशाली व्यक्तित्व अलंकरण सूची में जनपद के इन कई महान हस्तियों को चुना गया है। इनमें खजुहा निवासी वर्तमान में दिल्ली में प्रोफेसर स्टेटिजिक मार्केटिंग मनमोहन शुक्ल, दपसौरा में जन्मी व दिल्ली में कमिश्नर कस्टम अर्चना तिवारी, शहर में जन्मे व सीईओ ग्रुप कैप्टन निम्स फ्लाइंग एकाडमी तेज प्रकाश श्रीवास्तव, किर्तीखेड़ा निवासी दिल्ली में आईआरएस ज्वाइंट कमिश्नर शिवदान सिंह भटौरिया हैं। इनके अलावा मोहम्मद अमीन ज्वाइंट डायरेक्टर इलेक्शन कमीशन आफ इंडिया, आरके सिंह डिप्टी कश्निर व्यापारकर कानपुर, एके द्विवेदी लखनऊ में लेबर कमिश्नर अवकाश प्राप्त, केएल द्विवेदी रिटायर्ड लेवर कमिश्नर गाजियाबाद, बसोहनी निवासी मनोज कुमार दिल्ली में सहायक कमिश्नर, कटरा नरैचा के पंकज कुमार दिल्ली में आईएएस, एसके सिन्हा एडवाइजर लीगल डीएलएफ लि. दिल्ली, खागा में जन्मी श्रीमती संध्या सिंह डिप्टी डायरेक्टर एनएसओ गवर्नमेंट आफ इंडिया आरकेपुरम दिल्ली, बिंदकी के एसएन गुप्ता डीआईजी वेस्ट बंगाल कोलकाता, बिंदकी के ही दिलीप कुमार आईआरएस कमिश्नर इनकम टैक्स मुंबई , समियाना निवासी गोविन्द दुबे दैनिक जागरण जिला प्रभारी बांदा, अभयपुर निवासी अनिल सिंह सेवायोजन अधिकारी मैनपुरी, शहर निवासी विभयमान सिंह मध्य कमान भारतीय सेना लखनऊ को भी अभिनंदन के लिए बुलाया गया है।

गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह संपन्न

भृगुधाम भिटौरा के ओम घाट में रविवार को रौनक देखते ही बनी। जिले में पैदा हुई और देश के कोने-कोने नाम रोशन कर रहीं विभूतियों का यहां जमघट लगा। स्वामी विज्ञानानंद महाराज और वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि धनंजय अवस्थी ने गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह की स्वयं कमान संभाली। संत और साहित्यकार दोनों की विभूतियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके बाद सभी 10 प्रतिभाओं को फूलमाला, शाल और प्रतीक चिन्ह भेंटकर अलंकृत किया गया।अलंकरण समारोह में शामिल होने के लिए आने और जाने वालों के लिए मुफ्त बस सेवा उपलब्ध रही। कई स्कूलों की आधा दर्जन बसों ने आने जाने वालों को यातायात सुविधा मुहैया कराई। अपरान्ह 11 बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में भारी भरकम पांडाल सजाया गया। आमंत्रित सभी 21 विभूतियों की नेम प्लेटें लगाई गईं। इस मौके पर स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि सम्मान के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि सम्मान भावनाओं का समर्पण है। इसके बाद अनंतदास महराज ने परमानंद महराज को गुलाब की माला पहनाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद 10 जिले की और एक विदेशी विभूतियों को एक माला से जोड़कर सम्मानित किया गया। इसके बाद साहित्यकार एवं कवि के अलावा सुधाकर अवस्थी, सुनील श्रीवास्तव, हरिओम रस्तोगी आदि ने बारी-बारी से प्रतीक चिन्ह, बुके, शाल देकर सम्मानित किया। बाद में स्वामी विज्ञानानंद ने सभी विभूतियों के ओम का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस दौरान समारोह में शामिल होने वालों के आने जाने का सिलसिला जारी रहा। आश्रम के पीछे नाश्ते और भोजन की व्यवस्था रही। सम्मानित होने वालों में स्वामी परमानंद महराज, राजेंद्र द्विवेदी, मिथलेश कुमार सविता, अरुण देव गौतम, डा. गिरीश कुमार शुक्ला, प्रो. मारिया, प्रदीप श्रीवास्तव, रमेश मिश्रा, डा. संकठा प्रसाद आदि रहे।

माटी में जन्मे और पढ़ लिखकर विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले माटी के लाल अपनों के ही सम्मान से गदगद हुये। देश के कोने-कोने में अपनी ख्याति अर्जित करने वाली इन हस्तियों ने यही कहा कि माटी का कर्ज चुकाने का यदि मौका मिला तो हम अपने को धन्य समझेंगे। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी की भावना को दर्शाते हुये महानुभावों ने यह संकल्प लिया कि युवा बच्चों के बीच कुछ करके हम जिले के पिछड़ेपन को दूर करना चाहते हैं। काम कहीं भी करें लेकिन माटी की सोंधी खुशबू मिटती नहीं है, यही सपना रहता है कि अपने गांव घर और जिले के लिये क्या कर दिखायें। सभी ने यही कहा कि यदि कुछ करने का प्लेटफार्म दिया तो निश्चित तौर पर कुछ कर दिखायेंगे।

हिंदी उर्दू साहित्य के क्षेत्र में देश विदेश में ख्याति अर्जित करने वाले फतेहपुर शहर के जन्मे असगर वजाहत कहते हैं कि अपनों के बीच जो खुशी होती है वह और कहीं नहीं मिलतीयहीं की माटी में पढ़े-बढ़े हैं, आखिर यहां के लिये कुछ करने का संकल्प तो बहुत पहले से था लेकिन ऐसा कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। इसके पूर्व भी माटी से माटी के वर्ष 2001 के समारोह में सबको एक साथ मिलने का मौका मिला था। पवित्र गंगा नदी के तट पर आयोजित यह समारोह हमारे उद्देश्य को पूरा करके दिखायेगा यह विश्वास है।

होम्योपैथी चिकित्सा में कानपुर में महानगर में स्थान बनाये असनी के लाल संकठा प्रसाद पांडेय कहते हैं कि नई पीढ़ी को बाहर बुलंदियों को छूने वाले माटी के लालों से जोड़ने की जरूरत है और उन्हें भी इस बात का जच्बा होना चाहिए कि वह अपने से बड़ों का मार्गदर्शन सीख लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि वह गंगा किनारे के असनी गांव के रहने वाले हैं। दोआबा की संस्कृति और संस्कार पूरे विश्व में कमाल दिखायें, यही मेरी शुभ कामना है।

शहर में ही जन्मे पुणे में आयकर निदेशक पद पर कार्यरत एजे खान कहते हैं कि घर परिवार में वर्षो से में यह चर्चा करता था कि अपनी माटी के लिये कुछ नहीं कर पा रहा हूं, पत्‍‌नी यही कहती थीं कि आप हमेशा कहते रहते हैं, कभी जाते नहीं। आखिर इस आयोजन से मेरा सपना पूरा हो गया है। अब हर वर्ष यहां आकर माटी के लिये कुछ करने के संकल्प को पूरा कर सकूंगा।

शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे इस समय दिल्ली में आईजी के पद पर कार्यरत प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि माटी से माटी का सम्मान यूं ही होता रहेगा तो कोई लाभ नहीं है। परिणाम क्या मिला, अगले वर्ष के समारोह में इसका जवाब चाहिए। एक वर्ष के दौरान इस माटी के लिये हस्तियों ने क्या किया है और क्या करना है, यह सब तय हो जाना चाहिए और यहां के लोगों को भी कुछ पाने के लिये अपने को तैयार होना पड़ेगा।

मलवां ब्लाक के आशा अभयपुर गांव में जन्मे छत्तीसगढ़ रायपुर में डीआईजी पद पर कार्यरत अरुण देव गौतम अपनों से मिलकर गर्व महसूस कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मैं तो साल में दो बार गांव आता हूं, जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर सुखद माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि जिले में कोई ऐसा मदद का प्लेटफार्म बन जाये तो वह यहां की युवा बच्चों को मार्गदर्शन के साथ हर तरह की मदद देने के लिये तैयार हैं।

गंगा किनारे आदमपुर गांव के डा. रमेशचंद्र मिश्र जो इस समय चंडीगढ़ हरियाणा में आईजी हैं, ने कहा कि बहुत से दिन ऐसा सोच रहे थे कि कोई ऐसा मंच मिले जिससे वह जिले के लोगों से जुड़ जायें। आखिर यह मौका मिल ही गया तो अब काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिये सबसे पहले हम सभी को शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में काम करना होगा तभी हम नई पीढ़ी के बच्चों को बुलंदियों तक पहुंचाने में कामयाब हो पायेंगे।

सार्वजनिक उद्यम के डायरेक्टर पर तैनात गिरीशचंद्र शुक्ला जो कि खजुहा कस्बे में जन्मे हैं, कहते हैं कि गांव मजरों में प्रतिभाएं छिपी हैं, बस निखारने की जरूरत है। वह तो साल में दो-तीन बार गांव अवश्य जाते हैं। सबसे पहला प्रयास तो खेती को व्यावसायिक बनाने का जिले में प्रयोग किया जा सकता है। संपन्नता और खुशहाली आयेगी तभी हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आगे बढ़ा पायेंगे।

साहित्य के क्षेत्र में ख्याति अर्जित करने वाले डा. गिरीशचंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि कर्मभूमि भले ही कानपुर महानगर है लेकिन जन्मभूमि का लगाव कभी कम नहीं हो सकता है। जन्मभूमि में भी कर्म का मौका मिल जाये तो हम लोग अपने भाग्य को धन्य समझेंगे।

कृषि विशेषज्ञ औरेई के राजेंद्र प्रसाद दुबे उर्फ बड़े मुन्नू कहते हैं कि कृषि को व्यावसायिक दर्जा देकर खुशहाली संपन्नता लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी यह चाहत है कि हर किसान खुशहाल और प्रगतिशील बने और इसके लिये वह बराबर आलू की खेती के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

विद्युत सुरक्षा के उपनिदेशक पद पर तैनात अल्लीपुर मौहार के प्रो. मिथलेश कुमार सविता कहते हैं कि नौकरी तो केवल जीविकोपार्जन के लिये कर रहे हैं लेकिन समाज के लिये कुछ करने की चाहत है। वह सप्ताह में दो दिन फतेहपुर में रहते हैं कि चाहते हैं कि नि:शुल्क कोचिंग करके प्रतिभाओं को आगे बढायें

गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह संपन्न

भृगुधाम भिटौरा के ओम घाट में रविवार को रौनक देखते ही बनी। जिले में पैदा हुई और देश के कोने-कोने नाम रोशन कर रहीं विभूतियों का यहां जमघट लगा। स्वामी विज्ञानानंद महाराज और वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि धनंजय अवस्थी ने गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह की स्वयं कमान संभाली। संत और साहित्यकार दोनों की विभूतियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके बाद सभी 10 प्रतिभाओं को फूलमाला, शाल और प्रतीक चिन्ह भेंटकर अलंकृत किया गया।अलंकरण समारोह में शामिल होने के लिए आने और जाने वालों के लिए मुफ्त बस सेवा उपलब्ध रही। कई स्कूलों की आधा दर्जन बसों ने आने जाने वालों को यातायात सुविधा मुहैया कराई। अपरान्ह 11 बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में भारी भरकम पांडाल सजाया गया। आमंत्रित सभी 21 विभूतियों की नेम प्लेटें लगाई गईं। इस मौके पर स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि सम्मान के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि सम्मान भावनाओं का समर्पण है। इसके बाद अनंतदास महराज ने परमानंद महराज को गुलाब की माला पहनाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद 10 जिले की और एक विदेशी विभूतियों को एक माला से जोड़कर सम्मानित किया गया। इसके बाद साहित्यकार एवं कवि के अलावा सुधाकर अवस्थी, सुनील श्रीवास्तव, हरिओम रस्तोगी आदि ने बारी-बारी से प्रतीक चिन्ह, बुके, शाल देकर सम्मानित किया। बाद में स्वामी विज्ञानानंद ने सभी विभूतियों के ओम का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस दौरान समारोह में शामिल होने वालों के आने जाने का सिलसिला जारी रहा। आश्रम के पीछे नाश्ते और भोजन की व्यवस्था रही। सम्मानित होने वालों में स्वामी परमानंद महराज, राजेंद्र द्विवेदी, मिथलेश कुमार सविता, अरुण देव गौतम, डा. गिरीश कुमार शुक्ला, प्रो. मारिया, प्रदीप श्रीवास्तव, रमेश मिश्रा, डा. संकठा प्रसाद आदि रहे।

माटी में जन्मे और पढ़ लिखकर विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले माटी के लाल अपनों के ही सम्मान से गदगद हुये। देश के कोने-कोने में अपनी ख्याति अर्जित करने वाली इन हस्तियों ने यही कहा कि माटी का कर्ज चुकाने का यदि मौका मिला तो हम अपने को धन्य समझेंगे। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी की भावना को दर्शाते हुये महानुभावों ने यह संकल्प लिया कि युवा बच्चों के बीच कुछ करके हम जिले के पिछड़ेपन को दूर करना चाहते हैं। काम कहीं भी करें लेकिन माटी की सोंधी खुशबू मिटती नहीं है, यही सपना रहता है कि अपने गांव घर और जिले के लिये क्या कर दिखायें। सभी ने यही कहा कि यदि कुछ करने का प्लेटफार्म दिया तो निश्चित तौर पर कुछ कर दिखायेंगे।

हिंदी उर्दू साहित्य के क्षेत्र में देश विदेश में ख्याति अर्जित करने वाले फतेहपुर शहर के जन्मे असगर वजाहत कहते हैं कि अपनों के बीच जो खुशी होती है वह और कहीं नहीं मिलतीयहीं की माटी में पढ़े-बढ़े हैं, आखिर यहां के लिये कुछ करने का संकल्प तो बहुत पहले से था लेकिन ऐसा कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। इसके पूर्व भी माटी से माटी के वर्ष 2001 के समारोह में सबको एक साथ मिलने का मौका मिला था। पवित्र गंगा नदी के तट पर आयोजित यह समारोह हमारे उद्देश्य को पूरा करके दिखायेगा यह विश्वास है।

होम्योपैथी चिकित्सा में कानपुर में महानगर में स्थान बनाये असनी के लाल संकठा प्रसाद पांडेय कहते हैं कि नई पीढ़ी को बाहर बुलंदियों को छूने वाले माटी के लालों से जोड़ने की जरूरत है और उन्हें भी इस बात का जच्बा होना चाहिए कि वह अपने से बड़ों का मार्गदर्शन सीख लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि वह गंगा किनारे के असनी गांव के रहने वाले हैं। दोआबा की संस्कृति और संस्कार पूरे विश्व में कमाल दिखायें, यही मेरी शुभ कामना है।

शहर में ही जन्मे पुणे में आयकर निदेशक पद पर कार्यरत एजे खान कहते हैं कि घर परिवार में वर्षो से में यह चर्चा करता था कि अपनी माटी के लिये कुछ नहीं कर पा रहा हूं, पत्‍‌नी यही कहती थीं कि आप हमेशा कहते रहते हैं, कभी जाते नहीं। आखिर इस आयोजन से मेरा सपना पूरा हो गया है। अब हर वर्ष यहां आकर माटी के लिये कुछ करने के संकल्प को पूरा कर सकूंगा।

शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे इस समय दिल्ली में आईजी के पद पर कार्यरत प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि माटी से माटी का सम्मान यूं ही होता रहेगा तो कोई लाभ नहीं है। परिणाम क्या मिला, अगले वर्ष के समारोह में इसका जवाब चाहिए। एक वर्ष के दौरान इस माटी के लिये हस्तियों ने क्या किया है और क्या करना है, यह सब तय हो जाना चाहिए और यहां के लोगों को भी कुछ पाने के लिये अपने को तैयार होना पड़ेगा।

मलवां ब्लाक के आशा अभयपुर गांव में जन्मे छत्तीसगढ़ रायपुर में डीआईजी पद पर कार्यरत अरुण देव गौतम अपनों से मिलकर गर्व महसूस कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मैं तो साल में दो बार गांव आता हूं, जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर सुखद माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि जिले में कोई ऐसा मदद का प्लेटफार्म बन जाये तो वह यहां की युवा बच्चों को मार्गदर्शन के साथ हर तरह की मदद देने के लिये तैयार हैं।

गंगा किनारे आदमपुर गांव के डा. रमेशचंद्र मिश्र जो इस समय चंडीगढ़ हरियाणा में आईजी हैं, ने कहा कि बहुत से दिन ऐसा सोच रहे थे कि कोई ऐसा मंच मिले जिससे वह जिले के लोगों से जुड़ जायें। आखिर यह मौका मिल ही गया तो अब काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिये सबसे पहले हम सभी को शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में काम करना होगा तभी हम नई पीढ़ी के बच्चों को बुलंदियों तक पहुंचाने में कामयाब हो पायेंगे।

सार्वजनिक उद्यम के डायरेक्टर पर तैनात गिरीशचंद्र शुक्ला जो कि खजुहा कस्बे में जन्मे हैं, कहते हैं कि गांव मजरों में प्रतिभाएं छिपी हैं, बस निखारने की जरूरत है। वह तो साल में दो-तीन बार गांव अवश्य जाते हैं। सबसे पहला प्रयास तो खेती को व्यावसायिक बनाने का जिले में प्रयोग किया जा सकता है। संपन्नता और खुशहाली आयेगी तभी हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आगे बढ़ा पायेंगे।

साहित्य के क्षेत्र में ख्याति अर्जित करने वाले डा. गिरीशचंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि कर्मभूमि भले ही कानपुर महानगर है लेकिन जन्मभूमि का लगाव कभी कम नहीं हो सकता है। जन्मभूमि में भी कर्म का मौका मिल जाये तो हम लोग अपने भाग्य को धन्य समझेंगे।

कृषि विशेषज्ञ औरेई के राजेंद्र प्रसाद दुबे उर्फ बड़े मुन्नू कहते हैं कि कृषि को व्यावसायिक दर्जा देकर खुशहाली संपन्नता लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी यह चाहत है कि हर किसान खुशहाल और प्रगतिशील बने और इसके लिये वह बराबर आलू की खेती के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

विद्युत सुरक्षा के उपनिदेशक पद पर तैनात अल्लीपुर मौहार के प्रो. मिथलेश कुमार सविता कहते हैं कि नौकरी तो केवल जीविकोपार्जन के लिये कर रहे हैं लेकिन समाज के लिये कुछ करने की चाहत है। वह सप्ताह में दो दिन फतेहपुर में रहते हैं कि चाहते हैं कि नि:शुल्क कोचिंग करके प्रतिभाओं को आगे बढायें

माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की तीसरी श्रंखला

।। जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।

जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक आखिर किसको नहीं भाती है। रविवार को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिलेंगी और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा देंगे।

स्वामी विज्ञानानन्द जी के मार्गदर्शन पर रविवार को भिटौरा के ओम घाट में हो रहे गौरवशाली प्रतिभाओं के सम्मान समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संयोजक मण्डल के धनंजय अवस्थी, आचार्य विष्णु शुक्ला, सुनील श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की यह तीसरी श्रंखला है। पतित पावनी उत्तरवाहिनी गंगा के ओम घाट के तट पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सुबह दस बजे विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाली अठारह विभूतियां भिटौरा घाट पहुंच जायेंगी जो हाईस्कूल व इण्टर के ग्रामीण बच्चों से रूबरू होंगे। नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को निखारने की यह अनूठी पहल माटी के ही लाल शुरू कर रहे हैं और वह माटी के ही लालों को अब आगे ले जायेंगे। बारह से अभिनंदन समारोह का कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें महामंडलेश्वर परमानंद जी महाराज जी का आशीर्वचन होगा। शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे प्रदीप श्रीवास्तव जो इस समय दिल्ली पुलिस में आईजी हैं ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली में जोनिहां निवासी विकास प्राधिकरण के उप निदेशक शैलेन्द्र सिंह परिहार के संयोजकत्व में फतेहपुर फोरम तैयार किया गया है। दिल्ली में स्थापित फतेहपुर फोरम के तार माटी से जोड़कर आगे बढ़ाने का काम किया जायेगा। अपने आप में हो रहे इस अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फतेहपुर के पिछड़ेपन को दूर कर किस तरह से विकास के पथ पर लाया जाये। विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के लिये माटी के ही लालों का सहयोग लेने की एक कार्ययोजना तय की जानी है।

माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की तीसरी श्रंखला

।। जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।

जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक आखिर किसको नहीं भाती है। रविवार को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिलेंगी और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा देंगे।

स्वामी विज्ञानानन्द जी के मार्गदर्शन पर रविवार को भिटौरा के ओम घाट में हो रहे गौरवशाली प्रतिभाओं के सम्मान समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संयोजक मण्डल के धनंजय अवस्थी, आचार्य विष्णु शुक्ला, सुनील श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की यह तीसरी श्रंखला है। पतित पावनी उत्तरवाहिनी गंगा के ओम घाट के तट पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सुबह दस बजे विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाली अठारह विभूतियां भिटौरा घाट पहुंच जायेंगी जो हाईस्कूल व इण्टर के ग्रामीण बच्चों से रूबरू होंगे। नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को निखारने की यह अनूठी पहल माटी के ही लाल शुरू कर रहे हैं और वह माटी के ही लालों को अब आगे ले जायेंगे। बारह से अभिनंदन समारोह का कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें महामंडलेश्वर परमानंद जी महाराज जी का आशीर्वचन होगा। शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे प्रदीप श्रीवास्तव जो इस समय दिल्ली पुलिस में आईजी हैं ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली में जोनिहां निवासी विकास प्राधिकरण के उप निदेशक शैलेन्द्र सिंह परिहार के संयोजकत्व में फतेहपुर फोरम तैयार किया गया है। दिल्ली में स्थापित फतेहपुर फोरम के तार माटी से जोड़कर आगे बढ़ाने का काम किया जायेगा। अपने आप में हो रहे इस अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फतेहपुर के पिछड़ेपन को दूर कर किस तरह से विकास के पथ पर लाया जाये। विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के लिये माटी के ही लालों का सहयोग लेने की एक कार्ययोजना तय की जानी है।

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