बताते चलें कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पौत्र विभाकर शास्त्री यहां से तीसरी बार लोकसभा का चुनाव कांग्रेस से लड़ रहे है। इन्हे पहली बार 1998 के लोकसभा के चुनाव में 24 हजार 688 मत मिले थे। वहीं दूसरी बार 1999 के लोकसभा चुनाव में इन्हें 94 हजार 32 वोट मिले थे। इस मरतबा विभाकर शास्त्री तीसरी बार पुन: भाग्य आजमा रहे है। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के पुत्र अजेय सिंह यहां से जनमोर्चा के टिकट पर चुनाव मैदान में आ डटे है। इनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री श्री सिंह यहां की सीट से वर्ष 1989 में पहली बार लोकसभा का चुनाव जीते थे और देश के प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 के लोकसभा चुनाव में यहां की जनता ने इन्हें फिर जीत का सेहरा बांधकर दिल्ली भेजा था। इस बार इनके पुत्र यहां से पिता की विरासत पर सियासत करके अपनी प्रतिष्ठा दाव पर लगाये है।
बसपा सुप्रीमो ने सांसद महेंद्र प्रसाद निषाद को ही पुन: लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है। इन्हे वर्ष 2002 के लोकसभा चुनाव में 1 लाख 63 हजार 356 वोट मिले थे और विजयी हुये थे। लेकिन इस बार इनसे पार्टी के कैडरबेस कार्यकर्ता उपेक्षित करने का आरोप लगाते हुये प्रत्याशी का विरोध कर इनकी राह में कांटे बिखेर हुये है। भाजपा ने पार्टी के सदर विधायक पूर्वमंत्री राधेश्याम गुप्ता को टिकट दिया है। वहीं सपा ने घाटमपुर के पूर्व विधायक राकेश सचान को लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है। इन तीनों के मध्य ही कांटे की जंग बतायी जा रही है। वैसे चुनाव मैदान में कूदें सभी दलीय प्रत्याशी एक-दूसरे के वोट बैंक में सेधमारी करके अपनी स्थिति को सुधारने में लगे हुये है। यहां से अपना दल से राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनेलाल पटेल एवं इंडियन जस्टिस पार्टी से उदित राज भी चुनाव मैदान में है।
नये परिसीमन पर इस बार यहां की लोकसभा सीट में छह विधान सीटें सदर,खागा, बिंदकी, किशुनपुर, अयाह-शाह, हुसेनगंज एवं जहानाबाद है। जबकि पिछली बार के लोकसभा चुनाव में विधानसभा की पांच ही सीटें थी। जिसमें यहां की जहानाबाद विधानसभा सीट घाटमपुर लोकसभा में, खागा चायल संसदीय सीट में एवं बांदा लोकसभा में जुड़ी तिंदवारी विधानसभा सीट फतेहपुर की लोकसभा सीट में शामिल थी।