फतेहपुर : दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के वारिसों की प्रतिष्ठा दाव पर

जिले की 49 लोकसभा सीट पर देश के दो प्रधानमंत्री के वारिसों की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है। वहीं बसपा सांसद, भाजपा के पूर्वमंत्री एवं सपा के पूर्व विधायक के मध्य जंग है। इस सीट पर दलीय मिलाकर अठारह प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। वहीं नये परसीमन पर 15 लाख, 41 हजार 572 मतदाता है जो तीस अप्रैल को अपने मताधिकार का प्रयोग करेगे।

बताते चलें कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पौत्र विभाकर शास्त्री यहां से तीसरी बार लोकसभा का चुनाव कांग्रेस से लड़ रहे है। इन्हे पहली बार 1998 के लोकसभा के चुनाव में 24 हजार 688 मत मिले थे। वहीं दूसरी बार 1999 के लोकसभा चुनाव में इन्हें 94 हजार 32 वोट मिले थे। इस मरतबा विभाकर शास्त्री तीसरी बार पुन: भाग्य आजमा रहे है। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के पुत्र अजेय सिंह यहां से जनमोर्चा के टिकट पर चुनाव मैदान में डटे है। इनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री श्री सिंह यहां की सीट से वर्ष 1989 में पहली बार लोकसभा का चुनाव जीते थे और देश के प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 के लोकसभा चुनाव में यहां की जनता ने इन्हें फिर जीत का सेहरा बांधकर दिल्ली भेजा था। इस बार इनके पुत्र यहां से पिता की विरासत पर सियासत करके अपनी प्रतिष्ठा दाव पर लगाये है।

बसपा सुप्रीमो ने सांसद महेंद्र प्रसाद निषाद को ही पुन: लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है। इन्हे वर्ष 2002 के लोकसभा चुनाव में 1 लाख 63 हजार 356 वोट मिले थे और विजयी हुये थे। लेकिन इस बार इनसे पार्टी के कैडरबेस कार्यकर्ता उपेक्षित करने का आरोप लगाते हुये प्रत्याशी का विरोध कर इनकी राह में कांटे बिखेर हुये है। भाजपा ने पार्टी के सदर विधायक पूर्वमंत्री राधेश्याम गुप्ता को टिकट दिया है। वहीं सपा ने घाटमपुर के पूर्व विधायक राकेश सचान को लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है। इन तीनों के मध्य ही कांटे की जंग बतायी जा रही है। वैसे चुनाव मैदान में कूदें सभी दलीय प्रत्याशी एक-दूसरे के वोट बैंक में सेधमारी करके अपनी स्थिति को सुधारने में लगे हुये है। यहां से अपना दल से राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनेलाल पटेल एवं इंडियन जस्टिस पार्टी से उदित राज भी चुनाव मैदान में है।

नये परिसीमन पर इस बार यहां की लोकसभा सीट में छह विधान सीटें सदर,खागा, बिंदकी, किशुनपुर, अयाह-शाह, हुसेनगंज एवं जहानाबाद है। जबकि पिछली बार के लोकसभा चुनाव में विधानसभा की पांच ही सीटें थी। जिसमें यहां की जहानाबाद विधानसभा सीट घाटमपुर लोकसभा में, खागा चायल संसदीय सीट में एवं बांदा लोकसभा में जुड़ी तिंदवारी विधानसभा सीट फतेहपुर की लोकसभा सीट में शामिल थी।

सीवर लाइन का प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेजा

नगर पालिका परिषद जलनिकासी समस्या के स्थाई निराकरण के लिए गंभीर है। इसके तहत परिषद प्रशासन अभी हाल ही में 163.71 लाख का सीवर लाइन का प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेजा है। अधिशासी अधिकारी अरुण कुमार गुप्ता का कहना है कि अच्छी पहल करके इस बार सीवर लाइन निर्माण के लिए बजट अवमुक्त करा लिया जाएगा।मालूम हो कि शहर की जलनिकासी समस्या का फिलहाल कोई पुरसाहाल नहीं है। घरों का गंदा पानी निकलने की व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़कों में गंदा पानी भरता रहता है जिससे सड़कें बर्बाद हो जाती है। इतना ही नहीं बारिश में भीषण बरसात के कारण जलभराव से निपटने के लिए नगर पालिका परिषद को लाखों के वारे न्यारे करने पड़े। लगातार महीनेभर से अधिक समय तक दो दर्जन डीजल पंपिंग सेट और मोटर पंप लगाकर जल निकासी करना पड़ा। ऐसी स्थिति में इस बार परिषद ने जलनिकासी की समस्या को गंभीरता से लिया है।
वैसे तो शहर में सीवर लाइन निर्माण के प्रस्ताव कई बार शासन को भेजे जा चुके हैं। एक बार तो निर्माण को हरी झंडी भी मिल चुकी है, लेकिन ……

तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का तख्ता पलट होने के साथ सीवर लाइन निर्माण का काम अधर में अटक गया था। खास बात तो यह रही कि कुछ दिन बाद निर्माण कराने के लिए आया बजट भी वापस चला गया था। ऐसी हालत में एक बार फिर चेयरमैन अजय अवस्थी ने प्रस्ताव तैयार कराकर शासन स्तर पर पहले करने की जिम्मेदारी ईओ अरुण कुमार गुप्ता को सौंपी है। ईओ ने बताया कि प्रस्ताव शासन में पहुंच गया है। उन्हें विश्वास है कि इस बार सीवर लाइन निर्माण के लिए बजट अवश्य आवंटित हो जाएगा।

सीवर लाइन का प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेजा

नगर पालिका परिषद जलनिकासी समस्या के स्थाई निराकरण के लिए गंभीर है। इसके तहत परिषद प्रशासन अभी हाल ही में 163.71 लाख का सीवर लाइन का प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेजा है। अधिशासी अधिकारी अरुण कुमार गुप्ता का कहना है कि अच्छी पहल करके इस बार सीवर लाइन निर्माण के लिए बजट अवमुक्त करा लिया जाएगा।मालूम हो कि शहर की जलनिकासी समस्या का फिलहाल कोई पुरसाहाल नहीं है। घरों का गंदा पानी निकलने की व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़कों में गंदा पानी भरता रहता है जिससे सड़कें बर्बाद हो जाती है। इतना ही नहीं बारिश में भीषण बरसात के कारण जलभराव से निपटने के लिए नगर पालिका परिषद को लाखों के वारे न्यारे करने पड़े। लगातार महीनेभर से अधिक समय तक दो दर्जन डीजल पंपिंग सेट और मोटर पंप लगाकर जल निकासी करना पड़ा। ऐसी स्थिति में इस बार परिषद ने जलनिकासी की समस्या को गंभीरता से लिया है।
वैसे तो शहर में सीवर लाइन निर्माण के प्रस्ताव कई बार शासन को भेजे जा चुके हैं। एक बार तो निर्माण को हरी झंडी भी मिल चुकी है, लेकिन ……

तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का तख्ता पलट होने के साथ सीवर लाइन निर्माण का काम अधर में अटक गया था। खास बात तो यह रही कि कुछ दिन बाद निर्माण कराने के लिए आया बजट भी वापस चला गया था। ऐसी हालत में एक बार फिर चेयरमैन अजय अवस्थी ने प्रस्ताव तैयार कराकर शासन स्तर पर पहले करने की जिम्मेदारी ईओ अरुण कुमार गुप्ता को सौंपी है। ईओ ने बताया कि प्रस्ताव शासन में पहुंच गया है। उन्हें विश्वास है कि इस बार सीवर लाइन निर्माण के लिए बजट अवश्य आवंटित हो जाएगा।

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