फतेहपुर :जिले भर के परिषदीय स्कूलों के सेवानिवृत्त हुए सवा दो सौ शिक्षकों का किया गया सम्मान

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गुरु देवो भव: की भावना पर डा.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर गुरुओं के प्रति असीम श्रद्घा के साथ शिक्षक दिवस मनाया गया। प्राथमिक शिक्षक संघ भिटौरा इकाई के तत्वावधान में जिले भर के परिषदीय स्कूलों के सेवानिवृत्त हुए सवा दो सौ शिक्षकों का सम्मान किया गया। एचएन बहुगुणा इण्टर कालेज हुसेनगंज में प्राथमिक शिक्षक संघ की भिटौरा इकाई के तत्वावधान में सवा दो सौ सेवानिवृत्त हुए परिषदीय शिक्षकों को शाल व रामायण भेंट कर सम्मानित किया गया।

की अध्यक्षता कर रहे किशनपुर क्षेत्र के विधायक मुरलीधर ने कहा कि गुरु शब्द ही महानता का प्रतीक है। जो व्यक्ति जिस स्थान पर है उस कामयाबी में गुरु का श्रेय है। मुख्य विकास अधिकारी सीपी त्रिपाठी ने कहा कि गुरुजन सभी के लिए सम्मान के पात्र है। बदले परिवेश में उन्हे यह चुनौती स्वीकारनी होगी कि चरित्र और राष्ट्र निर्माण की दिशा में पीढि़यों को तैयार करे। अपर जिलाधिकारी अच्छेलाल ने कहा कि आज उस महान व्यक्तित्व का जन्मदिन है जो साधारण परिवार से एक आदर्श शिक्षक बने और फिर देश की सर्वोच्च कुर्सी हासिल की।

बेसिक शिक्षा अधिकारी आरके पंडित ने सभी गुरुजनों को शिक्षक दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आज वह उनके अधिकारी जरूर बने है, लेकिन गुरुतर दायित्व वाले शिक्षकों का सम्मान करते है। इस मौके पर शिक्षक रामदुलारे, मुन्नीदेवी, शकुन्तला, शिवनारायण, प्रकाश नारायण, शिवप्रसाद, रमेश प्रसाद, कल्लू सिंह, महेन्द्र प्रताप सहित दो सौ तेईस शिक्षकों को अधिकारियों ने अंगवस्त्रम भेंट करने के साथ रामायण व माला देकर सम्मानित किया।

साढ़े चार सौ मास्टरों की स्कूलों में तैनाती का खाका तैयार

बीटीसी 2001 व विशिष्ट बीटीसी 2007 के साढ़े चार सौ अभ्यर्थियों की स्कूलों में तैनाती का खाका तैयार कर लिया गया है। जिलाधिकारी से अनुमति मिलने के साथ ही सोमवार को अभ्यर्थियों को बतौर शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने के लिये भेज दिया जायेगा। न्यूनतम मेरिट पर आरक्षण क्रम पर विद्यालयों का जो आवंटन किया गया उसमें मानक से कम शिक्षक वाले छ: ब्लाक संतृप्त किये गये हैं। बताते हैं कि पचास बंद स्कूलों में दो-दो शिक्षक व तीन सौ एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में दोहरे शिक्षकों की व्यवस्था की गयी है।

छात्र, शिक्षक अनुपात में फिसड्डी ब्लाकों को पहले चरण में लिया गया है। यूं तो जिले के नौ विकास खण्ड पिछड़े माने गये हैं, लेकिन छ: ऐसे ब्लाक हैं जहां छात्र और शिक्षक का मानक बहुत गिरा हुआ है। बीटीसी 2001 के बयासी व विशिष्ट बीटीसी 2007 के लगभग साढ़े तीन सौ अभ्यर्थियों को यूं तो दस फरवरी तक नियुक्ति पत्र देने के निर्देश थे, लेकिन आरक्षण क्रम व न्यूनतम मेरिट पर विद्यालय आवंटन के साथ दस्तावेजों की जांच में विलम्ब हो गया है। विभाग हर हाल में सोमवार तक नियुक्ति पत्र अभ्यर्थियों के हाथ में ही देने की तैयारी कर ली है। बताते हैं कि तैनाती का खाका बनकर तैयार हो गया है। जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के साथ ही नियुक्ति पत्र अभ्यर्थियों के हाथ में होगा। इधर नियुक्ति पत्र लेने के लिये अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा कार्यालय में चक्कर काट रहे हैं। इलाहाबाद, कानपुर, रायबरेली सहित अन्य कई जनपदों के ही बहुतायक अभ्यर्थी हैं ऐसे में वह ऐसे विद्यालय पर ही जाने की फिराक में हैं जहां से उन्हें महानगरों में जाने का साधन उपलब्ध हो जाये।

बेसिक शिक्षा विभाग ने तैनाती में अधिनियम का ही मानक अख्तियार किया है। विकलांगों को छोड़कर किसी को भी स्कूल आवंटन में वरीयता नहीं दी गयी है। पिछड़े नौ ब्लाकों में इस बार की तैनाती में केवल छ: ऐसे ब्लाक लिये गये हैं जहां छात्र और शिक्षक का मानक बहुत गिरा हुआ है। विकास खण्ड हंसवा, धाता, असोथर, हथगाम, ऐरायां व विजयीपुर में शिक्षकों की तैनाती की गयी है। इन विकास खण्डों के पचास बंद विद्यालयों में दो-दो शिक्षक तैनात किये गये हैं। इसके अलावा लगभग तीन सौ ऐसे स्कूलों में एक-एक शिक्षक तैनात किये गये हैं जो अभी तक एक शिक्षक के ही भरोसे चल रहे थे। दो-दो शिक्षा मित्रों के साथ विद्यालयों में अब चार-चार शिक्षकों की व्यवस्था हो जायेगी। विकास खण्ड खजुहा, अमौली, देवमई में भी शिक्षकों की भारी कमी के बाद भी यहां अभी तैनाती न होने से दो दर्जन से अधिक विद्यालयों में ताला लटक रहा है। बेसिक शिक्षा अधिकारी आरके पंडित ने कहा कि स्कूलों में तैनाती का खाका बनकर तैयार हो गया है। नई नियमावली के अनुसार ही न्यूनतम मेरिट पर पहले बंद फिर एकल विद्यालयों में तैनाती की गयी है। उन्होंने कहा कि सोमवार को सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र हर हाल में दे दिया जायेगा।

ऐसा पासा पलटा कि एक पखवारे में ही परीक्षा रिजल्ट के साथ अब नियुक्ति पत्र लेने का मौका

काश सोमवार जैसा दिन रोज आये तो हर किसी की जिन्दगी रोशन होने में देर नहीं लगेगी। डायट व बेसिक शिक्षा कार्यालय में हर तरफ खुशियां ही इतरा रहीं थीं। कोई नियुक्ति पत्र के लिये काउंसिलिंग की लाइन में खड़ा था तो कोई नौकरी की राह मिलने की खुशी में इतरा रहे थे। खासकर 2001 की सूची वाले अभ्यर्थियों के चेहरों में खुशी ही नहीं जिन्दगी का मकसद मिल जाने का रंगीन सपना तैर रहा था। आखिर तैरें क्यों न। शिक्षक बनने की उम्मीद ही खत्म हो गयी थी फिर ऐसा पासा पलटा कि एक पखवारे में ही परीक्षा रिजल्ट के साथ अब नियुक्ति पत्र लेने का मौका मिल गया।

हर चेहरे में तैरती खुशी का यह माहौल और कहीं नहीं डायट और बेसिक शिक्षा कार्यालय में देखा गया। यूं तो काउंसिलिंग के लिये सुबह दस बजे बुलाया गया था, लेकिन शैक्षणिक सहित अन्य दस्तावेज लेकर अभ्यर्थी नौ बजे से ही कार्यालय में डट गये। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मानें तो यह पहला मौका है जब एक साथ 2001, 2004 व 2007 के अभ्यर्थियों को एक साथ बुलाकर किसी को नौकरी तो किसी को नौकरी के प्रशिक्षण के लिये बुलाया गया है। डायट में 2004 की मेरिट सूची जारी कर एक सौ छियानबे अभ्यर्थियों के बीटीसी प्रशिक्षण के लिये तीन सौ बानवे अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। दो दिन तक चलने वाली इस काउंसिलिंग के पहले दिन तकरीबन डेढ़ सौ अभ्यर्थी आये। पांच साल पहले बीटीसी के लिये फार्म डाला था अब मेरिट भले ही दूना की जारी की गयी हो, लेकिन नाम आने की खुशी में अभ्यर्थी काउंसिलिंग में लाइन लगाये रहे। काउंसिलिंग में आये राकेश ने कहा कि अब तो उम्मीद ही नहीं थी कि 2004 के आवेदन पर बुलाया जायेगा। ऊपर वाले का शुक्र है कि मेरिट में नाम आ गया अब तो यह लग रहा है कि शिक्षक बनने का सपना पूरा हो जायेगा। यह पूछने पर कि कैसा लग रहा है कहा कि अकेले मैं नहीं बल्कि पूरे घर के लोग खुश हैं। प्रशिक्षण में नाम आने पर भगवान से मनौती भी मांगी है।

2004 की काउंसिलिंग के पहले दिन साठ फीसदी अभ्यर्थी नहीं आये। ऐसा माना जा रहा है कि दस फरवरी को होने वाली काउंसिलिंग में भी कुछ लोग आ सकते हैं। बीस फीसदी तो ऐसे अभ्यर्थी होंगे जो कहीं दूसरी नौकरी में लग गये होंगे। दूना मेरिट पर आये अभ्यर्थी यही मनाते रहे कि कम संख्या में लोग आवें तो मेरिट डाउन होगी और उनका नाम बीटीसी 2004 के प्रशिक्षण में आ जाये। उधर बेसिक शिक्षा कार्यालय में तो नौकरी मिलने की खुशियां तैर रही थीं। विशिष्ट बीटीसी के साढ़े तीन सौ व बीटीसी 2001 के लगभग बयासी अभ्यर्थियों को नौ व दस फरवरी को काउंसिलिंग के लिये बुलाया गया। पहले दिन अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति के अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग में शत-प्रतिशत अभ्यर्थी आये। बेसिक शिक्षा अधिकारी आरके पंडित सहयोगियों के साथ काउंसिलिंग में अभ्यर्थियों से शपथ पत्र के साथ अन्य आवश्यक दस्तावेज लेते रहे। मूल प्रमाण पत्रों से जांच के साथ अभ्यथियों को वापस कर दिया गया। बताते हैं कि स्कूल के आवंटन के साथ सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र पंद्रह फरवरी के पहले दे दिया जायेगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों में इस बात की खुशी रही कि लंबे समय से शिक्षकों की चल रही कमी से अब निजात मिल जायेगा। पंद्रह फरवरी के पहले जिले को चार सौ से अधिक शिक्षक मिल जायेंगे ऐसे में हर विद्यालय में दो शिक्षक का मानक पूरा हो जायेगा। उधर अभ्यर्थी काउंसिलिंग के साथ ही मनचाहे विद्यालय की जुगाड़ में लगे रहे।

अव्यवस्थाओं से जूझे अभ्यर्थी

काउंसिलिंग के लिये अभ्यर्थियों की भीड़ बढ़ गयी तो डायट व बीएसए कार्यालय की व्यवस्थायें भी बौनी पड़ गयीं। स्थिति यह रही कि काउंसिलिंग के लिये विशिष्ट बीटीसी 2007 के अभ्यर्थियों को बुला तो लिया गया था, लेकिन उन्हें उत्तीर्ण का अंकपत्र भी नहीं दिया गया था। ऐसे में वह दो बजे तक भटकते रहे इसके बाद ही काउंसिलिंग शुरू हुई जो देररात तक चलती रही।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने मुश्किल यह है कि राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद के निदेशक ने दस फरवरी तक बीटीसी 2001 व विशिष्ट बीटीसी 2007 के उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की तैनाती दस फरवरी तक करने के निर्देश दिये हैं। सैकड़ों अभ्यर्थियों की एक साथ भीड़ आ जाने से शिक्षा विभाग के कार्यालयों में मेला जैसा माहौल रहा। न तो कोई यह बताने वाला था कि काउंसिलिंग कब से शुरू होगी और न ही बीएसए कार्यालय में दो बजे तक काउंसिलिंग का काउन्टर लगाया गया। बेसिक शिक्षा अधिकारी आरके पंडित ने कहा कि मेरिट सूची डायट से विलम्ब से मिलने के कारण काउंसिलिंग देर से शुरू हो पायी है। उन्होंने कहा कि जो भी अभ्यर्थी आये हैं सभी की काउंसिलिंग आज ही कर ली जायेगी किसी को वापस नहीं किया जायेगा।

शिक्षक बनने की चाहत रखने वाले युवक व युवतियों के लिये यह साल सौगात लेकर आया

चार वर्ष बाद किसी के आवेदन खंगाले जायेंगे यह अभ्यर्थियों ने सोचा भी नहीं था। सरकार व न्यायालय के विवाद में वर्ष 2004 से उलझी इस प्रक्रिया की गुत्थी सुलझने के साथ ही शिक्षक बनने के लिये आवेदन किये अठारह हजार से अधिक स्नातक उत्तीर्ण अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गयी है। अलबत्ता यह जरूर है कि इसमें से बीस फीसदी से अधिक अभ्यर्थी या तो विशिष्ट बीटीसी करके शिक्षक बन गये हैं या फिर किसी दूसरी नौकरी को गले लगा लिये हैं। डायट में एक सौ छियानबे अभ्यर्थियों की मेरिट सूची जारी करने की तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हैं। अगले सप्ताह सूची जारी होने की संभावना है।

शिक्षक बनने की चाहत रखने वाले युवक व युवतियों के लिये यह साल सौगात लेकर आया है। डायट में इस समय वर्ष 2001, 2004, 2007 व 2008 की चयन प्रक्रिया के तहत दो हजार से अधिक अभ्यर्थियों को शिक्षक बनाने के लिये अलग-अलग कार्यवाही की जा रही है। एक साथ बोझा हो जाने से डायट के अधिकारी व कर्मचारी भी उलझे हुए हैं। वर्ष 2004 की विशिष्ट बीटीसी चयन प्रक्रिया में अठारह हजार दो सौ एक आवेदन हैं। दो सौ अभ्यर्थियों के चयन में चार अनुसूचित जनजाति का कोटा जिले में रिक्त कर दिया गया है ऐसे में एक सौ छियानबे की चयन प्रक्रिया की जा रही है। बताते हैं कि पिछली बार तय की गयी मेरिट पर ही इस बार नई चयन सूची जारी की जायेगी, लेकिन इसके पहले सभी अठारह हजार आवेदनों का वर्ग स्तर पर विभाजन कर लिया गया है और सभी का सत्यापन कराया जा रहा है।

डायट प्राचार्या विमल वर्मा ने यह स्वीकार किया कि 2004 की चयन प्रक्रिया का काम काफी हद तक पूरा हो गया है। अगले सप्ताह मेरिट सूची जारी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि डायट में वर्ष 2001 में बीटीसी का प्रशिक्षण ले चुके अभ्यर्थियों की पुन: परीक्षा कराने के लिये प्रवेश पत्र जारी किये जा रहे हैं। 2008 की चयन प्रक्रिया में चार सौ अट्ठाइस पदों के लिये आवेदन मांगे जा रहे हैं। बैकलाग के लगभग दो सौ पदों के लिये पहले ही आवेदन प्राप्त कर लिये गये हैं उनकी भी मेरिट सूची तैयार की जा रही है। बैकलाग में अनुसूचित जाति के एक सौ पैंसठ, अनुसूचित जनजाति के तेंतीस, पिछड़ी जाति के अड़तालीस पद सृजित हैं। वर्ष 2007 में एक हजार तीन सौ अरसठ पदों के लिये की गयी चयन प्रक्रिया में अब तक एक हजार एक सौ इकतीस अभ्यर्थियों का विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण के लिये चयन किया गया है इस तरह से 2007 की चयन प्रक्रिया के लगभग दो सौ पद अब भी रिक्त हैं। शासन ने इस चयन पर अब रोक लगाते हुए कहा है कि जो पद शेष रह गये हैं उन्हें 2008 की चयन प्रकिया में समायोजित कर दिया जाये। विशिष्ट बीटीसी के लगभग छ: सौ अभ्यर्थियों का इस समय फेरेवार प्रशिक्षण भी शुरू हो गया है। एक तरफ प्रशिक्षण और दूसरी तरफ एक नहीं तीन-तीन चयन प्रक्रिया की मेरिट तैयार करने से डायट में अफरातफरी का माहौल है। जिम्मेदारी को लेकर कर्मचारियों में ही उठापटक चल रही है।

एक हजार शिक्षक अब भी कम
बीटीसी, विशिष्ट बीटीसी चयन प्रक्रिया में दो हजार से अधिक पद भरने की चल रही कार्यवाही के बाद भी परिषदीय स्कूलों में एक हजार शिक्षकों के पद रिक्त रहेंगे। यह भर्ती वर्ष 2004 में रिक्त पदों के सापेक्ष हो रही है। चार वर्षो के दौरान नये स्कूल खुलने के साथ ही सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों की संख्या इतनी अधिक हो गयी कि दो हजार पद भरने के बाद भी तकरीबन एक हजार स्थान खाली रहेंगे।

फतेहपुरिया बने इलाहाबाद जोन के आईजी

फतेहपुर के निवासी , और एक प्राथमिक शिक्षक के पुत्र होने के नाते इलाहाबाद जोन के आईजी बनाये गए सूर्ये कुमार शुक्ला से मेरी एक मुलाकात के अनुभव से मैं उन्हें एक पुलिस अधिकारी से बेहतर एक शिक्षक मानता हूँ .

प्रस्तुत है उनके फतेहपुर आगमन से सम्बंधित जागरण रिपोर्ट -

इलाहाबाद जोन सूर्य कुमार शुक्ला ने शासन की मंशा को अमलीजामा देने के लिये आदर्श पुलिस व्यवस्था लागू कर दी है। दावा किया है कि इसका असर भी यहां की जनता को कुछ दिनों में ही दिखने लगेगा। आईजी रविवार को बांदा जाने से पहले मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुये अपनी बात शानदार तरीके से रखी।

रविवार को पुलिस लाइन के निरीक्षण भवन में प्रात: दस बजे आईजी ने सवालों के क्रम में कहा कि वर्दीधारियों को अब अपनी आदतों में सुधार करना होगा। अच्छे-बुरे लोगों की पहचान करनी होगी। निर्देश दिये कि थाना चौकियों पर बिना वजह कोई नहीं बैठेगा। थाने पर दलाल रजिस्टर बनाया जायेगा। जिसमें इनके नाम दर्ज हो। क्षेत्र के हर दरोगा सिपाही के कार्य का निर्धारण होगा।

आईजी ने सख्त तेवर दिखाते हुये कहा कि वर्दीधारी कोई भी अधिकारी कर्मचारी क्षेत्र के किसी के घर भोज पर नहीं जायेगा। इससे समाज पर गलत असर पड़ता है। समाज में सामान्यता का भाव रहे इसके लिये एसओ गैर बिरादरी के लोगों से अधिक मिलें। निर्देश दिये कि सिपाही से लेकर सीओ तक अपने क्षेत्र में सघन गश्त करके अपराधियों को सबक सिखायेंगे। यह भी निर्देश दे गये कि अपराध नियंत्रण में किसी का दबाव-प्रभाव नहीं मानेंगे। किसी के साथ सौतेला व्यवहार नहीं करेगे। थाने पर आये सज्जान व्यक्ति के साथ अपनत्तवपूर्ण व्यवहार करेंगे। लेकिन समाज में आतंक फैलाने वालों को ऐसा सबक सिखायेंगे की वह जिंदगी भर याद रखें। एक सवाल के जवाब में कहा कि गैर जिले से गुप्त टीमें भेजकर थानेवार बीस फीसदी विभाग के अच्छे बुरे कर्मियों को सूची बंद्ध करवाया जायेगा। इन्हे पर कार्रवाई इनाम भी दिया जायेगा। जिला बदर भी किये जायेंगे। आईजी ने जाते वक्त एसपी केएस पिपिल से यह भी कह गये कि जिले का होने की वजह से यदि कोई मेरा नाम लेकर लेकर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करे, तो उस पर कड़ी कार्रवाई करे। बाद में अपर पुलिस अधीक्षक माता प्रसाद समेत सभी सीओ से मिले। बताते चलें कि आईजी शनिवार को यहां गये थे जो दूसरे दिन रविवार को दोपहर बाद यहां से बांदा के लिये रवाना हुये।

देखते हैं की वह इस पद पर कितने दिन रह पाते हैं और जनपद के साथ साथ समाज की सेवा कर पाते हैं ? हमारी शुभकामनायें उनके साथ हैं ।

फतेहपुरिया बने इलाहाबाद जोन के आईजी

फतेहपुर के निवासी , और एक प्राथमिक शिक्षक के पुत्र होने के नाते इलाहाबाद जोन के आईजी बनाये गए सूर्ये कुमार शुक्ला से मेरी एक मुलाकात के अनुभव से मैं उन्हें एक पुलिस अधिकारी से बेहतर एक शिक्षक मानता हूँ .

प्रस्तुत है उनके फतेहपुर आगमन से सम्बंधित जागरण रिपोर्ट -

इलाहाबाद जोन सूर्य कुमार शुक्ला ने शासन की मंशा को अमलीजामा देने के लिये आदर्श पुलिस व्यवस्था लागू कर दी है। दावा किया है कि इसका असर भी यहां की जनता को कुछ दिनों में ही दिखने लगेगा। आईजी रविवार को बांदा जाने से पहले मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुये अपनी बात शानदार तरीके से रखी।

रविवार को पुलिस लाइन के निरीक्षण भवन में प्रात: दस बजे आईजी ने सवालों के क्रम में कहा कि वर्दीधारियों को अब अपनी आदतों में सुधार करना होगा। अच्छे-बुरे लोगों की पहचान करनी होगी। निर्देश दिये कि थाना चौकियों पर बिना वजह कोई नहीं बैठेगा। थाने पर दलाल रजिस्टर बनाया जायेगा। जिसमें इनके नाम दर्ज हो। क्षेत्र के हर दरोगा सिपाही के कार्य का निर्धारण होगा।

आईजी ने सख्त तेवर दिखाते हुये कहा कि वर्दीधारी कोई भी अधिकारी कर्मचारी क्षेत्र के किसी के घर भोज पर नहीं जायेगा। इससे समाज पर गलत असर पड़ता है। समाज में सामान्यता का भाव रहे इसके लिये एसओ गैर बिरादरी के लोगों से अधिक मिलें। निर्देश दिये कि सिपाही से लेकर सीओ तक अपने क्षेत्र में सघन गश्त करके अपराधियों को सबक सिखायेंगे। यह भी निर्देश दे गये कि अपराध नियंत्रण में किसी का दबाव-प्रभाव नहीं मानेंगे। किसी के साथ सौतेला व्यवहार नहीं करेगे। थाने पर आये सज्जान व्यक्ति के साथ अपनत्तवपूर्ण व्यवहार करेंगे। लेकिन समाज में आतंक फैलाने वालों को ऐसा सबक सिखायेंगे की वह जिंदगी भर याद रखें। एक सवाल के जवाब में कहा कि गैर जिले से गुप्त टीमें भेजकर थानेवार बीस फीसदी विभाग के अच्छे बुरे कर्मियों को सूची बंद्ध करवाया जायेगा। इन्हे पर कार्रवाई इनाम भी दिया जायेगा। जिला बदर भी किये जायेंगे। आईजी ने जाते वक्त एसपी केएस पिपिल से यह भी कह गये कि जिले का होने की वजह से यदि कोई मेरा नाम लेकर लेकर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करे, तो उस पर कड़ी कार्रवाई करे। बाद में अपर पुलिस अधीक्षक माता प्रसाद समेत सभी सीओ से मिले। बताते चलें कि आईजी शनिवार को यहां गये थे जो दूसरे दिन रविवार को दोपहर बाद यहां से बांदा के लिये रवाना हुये।

देखते हैं की वह इस पद पर कितने दिन रह पाते हैं और जनपद के साथ साथ समाज की सेवा कर पाते हैं ? हमारी शुभकामनायें उनके साथ हैं ।

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