रेलवे चाहता है कि यात्रा करने के लिये आने वाले आगन्तुक जब स्टेशन आयें तो उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। घर से आ जाने और गाड़ी मिलने तक के बीच के समय को यात्री सुविधानुसार आराम से बिता सकें। समय बिताने और लाये गये सामान को सुव्यवस्थित ढंग से रखने व उठने बैठने के लिये प्रतीक्षालय बना है। किन्तु यहां आने वाला आगन्तुक उस वक्त हैरान रह जाता है जब उसे बैठने के लिये उपयुक्त स्थान तक नहीं दिखता है। साथ लाया सामान तो फर्श तो पर रखा जा सकता है पर खुद कहां बैठे उसे यह नहीं समझ में आता। अगर आगन्तुक के साथ कोई महिला, बच्चा, बूढ़ा या बीमार है तो उसकी मुश्किल उस वक्त और बढ़ जाती है कि उन्हें कहां बैठाये। दुर्भाग्य से गाड़ी अगर विलम्बित है तो समय चहलकदमी करते ही बीतेगा। जनपद मुख्यालय के इस स्टेशन में उपयुक्त प्रतीक्षालय तक नहीं है जो है उसमें केवल एक बेंच पड़ी है जिसमें आठ दस लोग बैठ सकते हैं।