गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह संपन्न

भृगुधाम भिटौरा के ओम घाट में रविवार को रौनक देखते ही बनी। जिले में पैदा हुई और देश के कोने-कोने नाम रोशन कर रहीं विभूतियों का यहां जमघट लगा। स्वामी विज्ञानानंद महाराज और वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि धनंजय अवस्थी ने गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह की स्वयं कमान संभाली। संत और साहित्यकार दोनों की विभूतियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके बाद सभी 10 प्रतिभाओं को फूलमाला, शाल और प्रतीक चिन्ह भेंटकर अलंकृत किया गया।अलंकरण समारोह में शामिल होने के लिए आने और जाने वालों के लिए मुफ्त बस सेवा उपलब्ध रही। कई स्कूलों की आधा दर्जन बसों ने आने जाने वालों को यातायात सुविधा मुहैया कराई। अपरान्ह 11 बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में भारी भरकम पांडाल सजाया गया। आमंत्रित सभी 21 विभूतियों की नेम प्लेटें लगाई गईं। इस मौके पर स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि सम्मान के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि सम्मान भावनाओं का समर्पण है। इसके बाद अनंतदास महराज ने परमानंद महराज को गुलाब की माला पहनाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद 10 जिले की और एक विदेशी विभूतियों को एक माला से जोड़कर सम्मानित किया गया। इसके बाद साहित्यकार एवं कवि के अलावा सुधाकर अवस्थी, सुनील श्रीवास्तव, हरिओम रस्तोगी आदि ने बारी-बारी से प्रतीक चिन्ह, बुके, शाल देकर सम्मानित किया। बाद में स्वामी विज्ञानानंद ने सभी विभूतियों के ओम का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस दौरान समारोह में शामिल होने वालों के आने जाने का सिलसिला जारी रहा। आश्रम के पीछे नाश्ते और भोजन की व्यवस्था रही। सम्मानित होने वालों में स्वामी परमानंद महराज, राजेंद्र द्विवेदी, मिथलेश कुमार सविता, अरुण देव गौतम, डा. गिरीश कुमार शुक्ला, प्रो. मारिया, प्रदीप श्रीवास्तव, रमेश मिश्रा, डा. संकठा प्रसाद आदि रहे।

माटी में जन्मे और पढ़ लिखकर विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले माटी के लाल अपनों के ही सम्मान से गदगद हुये। देश के कोने-कोने में अपनी ख्याति अर्जित करने वाली इन हस्तियों ने यही कहा कि माटी का कर्ज चुकाने का यदि मौका मिला तो हम अपने को धन्य समझेंगे। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी की भावना को दर्शाते हुये महानुभावों ने यह संकल्प लिया कि युवा बच्चों के बीच कुछ करके हम जिले के पिछड़ेपन को दूर करना चाहते हैं। काम कहीं भी करें लेकिन माटी की सोंधी खुशबू मिटती नहीं है, यही सपना रहता है कि अपने गांव घर और जिले के लिये क्या कर दिखायें। सभी ने यही कहा कि यदि कुछ करने का प्लेटफार्म दिया तो निश्चित तौर पर कुछ कर दिखायेंगे।

हिंदी उर्दू साहित्य के क्षेत्र में देश विदेश में ख्याति अर्जित करने वाले फतेहपुर शहर के जन्मे असगर वजाहत कहते हैं कि अपनों के बीच जो खुशी होती है वह और कहीं नहीं मिलतीयहीं की माटी में पढ़े-बढ़े हैं, आखिर यहां के लिये कुछ करने का संकल्प तो बहुत पहले से था लेकिन ऐसा कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। इसके पूर्व भी माटी से माटी के वर्ष 2001 के समारोह में सबको एक साथ मिलने का मौका मिला था। पवित्र गंगा नदी के तट पर आयोजित यह समारोह हमारे उद्देश्य को पूरा करके दिखायेगा यह विश्वास है।

होम्योपैथी चिकित्सा में कानपुर में महानगर में स्थान बनाये असनी के लाल संकठा प्रसाद पांडेय कहते हैं कि नई पीढ़ी को बाहर बुलंदियों को छूने वाले माटी के लालों से जोड़ने की जरूरत है और उन्हें भी इस बात का जच्बा होना चाहिए कि वह अपने से बड़ों का मार्गदर्शन सीख लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि वह गंगा किनारे के असनी गांव के रहने वाले हैं। दोआबा की संस्कृति और संस्कार पूरे विश्व में कमाल दिखायें, यही मेरी शुभ कामना है।

शहर में ही जन्मे पुणे में आयकर निदेशक पद पर कार्यरत एजे खान कहते हैं कि घर परिवार में वर्षो से में यह चर्चा करता था कि अपनी माटी के लिये कुछ नहीं कर पा रहा हूं, पत्‍‌नी यही कहती थीं कि आप हमेशा कहते रहते हैं, कभी जाते नहीं। आखिर इस आयोजन से मेरा सपना पूरा हो गया है। अब हर वर्ष यहां आकर माटी के लिये कुछ करने के संकल्प को पूरा कर सकूंगा।

शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे इस समय दिल्ली में आईजी के पद पर कार्यरत प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि माटी से माटी का सम्मान यूं ही होता रहेगा तो कोई लाभ नहीं है। परिणाम क्या मिला, अगले वर्ष के समारोह में इसका जवाब चाहिए। एक वर्ष के दौरान इस माटी के लिये हस्तियों ने क्या किया है और क्या करना है, यह सब तय हो जाना चाहिए और यहां के लोगों को भी कुछ पाने के लिये अपने को तैयार होना पड़ेगा।

मलवां ब्लाक के आशा अभयपुर गांव में जन्मे छत्तीसगढ़ रायपुर में डीआईजी पद पर कार्यरत अरुण देव गौतम अपनों से मिलकर गर्व महसूस कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मैं तो साल में दो बार गांव आता हूं, जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर सुखद माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि जिले में कोई ऐसा मदद का प्लेटफार्म बन जाये तो वह यहां की युवा बच्चों को मार्गदर्शन के साथ हर तरह की मदद देने के लिये तैयार हैं।

गंगा किनारे आदमपुर गांव के डा. रमेशचंद्र मिश्र जो इस समय चंडीगढ़ हरियाणा में आईजी हैं, ने कहा कि बहुत से दिन ऐसा सोच रहे थे कि कोई ऐसा मंच मिले जिससे वह जिले के लोगों से जुड़ जायें। आखिर यह मौका मिल ही गया तो अब काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिये सबसे पहले हम सभी को शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में काम करना होगा तभी हम नई पीढ़ी के बच्चों को बुलंदियों तक पहुंचाने में कामयाब हो पायेंगे।

सार्वजनिक उद्यम के डायरेक्टर पर तैनात गिरीशचंद्र शुक्ला जो कि खजुहा कस्बे में जन्मे हैं, कहते हैं कि गांव मजरों में प्रतिभाएं छिपी हैं, बस निखारने की जरूरत है। वह तो साल में दो-तीन बार गांव अवश्य जाते हैं। सबसे पहला प्रयास तो खेती को व्यावसायिक बनाने का जिले में प्रयोग किया जा सकता है। संपन्नता और खुशहाली आयेगी तभी हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आगे बढ़ा पायेंगे।

साहित्य के क्षेत्र में ख्याति अर्जित करने वाले डा. गिरीशचंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि कर्मभूमि भले ही कानपुर महानगर है लेकिन जन्मभूमि का लगाव कभी कम नहीं हो सकता है। जन्मभूमि में भी कर्म का मौका मिल जाये तो हम लोग अपने भाग्य को धन्य समझेंगे।

कृषि विशेषज्ञ औरेई के राजेंद्र प्रसाद दुबे उर्फ बड़े मुन्नू कहते हैं कि कृषि को व्यावसायिक दर्जा देकर खुशहाली संपन्नता लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी यह चाहत है कि हर किसान खुशहाल और प्रगतिशील बने और इसके लिये वह बराबर आलू की खेती के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

विद्युत सुरक्षा के उपनिदेशक पद पर तैनात अल्लीपुर मौहार के प्रो. मिथलेश कुमार सविता कहते हैं कि नौकरी तो केवल जीविकोपार्जन के लिये कर रहे हैं लेकिन समाज के लिये कुछ करने की चाहत है। वह सप्ताह में दो दिन फतेहपुर में रहते हैं कि चाहते हैं कि नि:शुल्क कोचिंग करके प्रतिभाओं को आगे बढायें

गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह संपन्न

भृगुधाम भिटौरा के ओम घाट में रविवार को रौनक देखते ही बनी। जिले में पैदा हुई और देश के कोने-कोने नाम रोशन कर रहीं विभूतियों का यहां जमघट लगा। स्वामी विज्ञानानंद महाराज और वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि धनंजय अवस्थी ने गौरवशाली प्रतिभा अलंकरण समारोह की स्वयं कमान संभाली। संत और साहित्यकार दोनों की विभूतियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके बाद सभी 10 प्रतिभाओं को फूलमाला, शाल और प्रतीक चिन्ह भेंटकर अलंकृत किया गया।अलंकरण समारोह में शामिल होने के लिए आने और जाने वालों के लिए मुफ्त बस सेवा उपलब्ध रही। कई स्कूलों की आधा दर्जन बसों ने आने जाने वालों को यातायात सुविधा मुहैया कराई। अपरान्ह 11 बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में भारी भरकम पांडाल सजाया गया। आमंत्रित सभी 21 विभूतियों की नेम प्लेटें लगाई गईं। इस मौके पर स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि सम्मान के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि सम्मान भावनाओं का समर्पण है। इसके बाद अनंतदास महराज ने परमानंद महराज को गुलाब की माला पहनाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद 10 जिले की और एक विदेशी विभूतियों को एक माला से जोड़कर सम्मानित किया गया। इसके बाद साहित्यकार एवं कवि के अलावा सुधाकर अवस्थी, सुनील श्रीवास्तव, हरिओम रस्तोगी आदि ने बारी-बारी से प्रतीक चिन्ह, बुके, शाल देकर सम्मानित किया। बाद में स्वामी विज्ञानानंद ने सभी विभूतियों के ओम का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस दौरान समारोह में शामिल होने वालों के आने जाने का सिलसिला जारी रहा। आश्रम के पीछे नाश्ते और भोजन की व्यवस्था रही। सम्मानित होने वालों में स्वामी परमानंद महराज, राजेंद्र द्विवेदी, मिथलेश कुमार सविता, अरुण देव गौतम, डा. गिरीश कुमार शुक्ला, प्रो. मारिया, प्रदीप श्रीवास्तव, रमेश मिश्रा, डा. संकठा प्रसाद आदि रहे।

माटी में जन्मे और पढ़ लिखकर विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले माटी के लाल अपनों के ही सम्मान से गदगद हुये। देश के कोने-कोने में अपनी ख्याति अर्जित करने वाली इन हस्तियों ने यही कहा कि माटी का कर्ज चुकाने का यदि मौका मिला तो हम अपने को धन्य समझेंगे। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी की भावना को दर्शाते हुये महानुभावों ने यह संकल्प लिया कि युवा बच्चों के बीच कुछ करके हम जिले के पिछड़ेपन को दूर करना चाहते हैं। काम कहीं भी करें लेकिन माटी की सोंधी खुशबू मिटती नहीं है, यही सपना रहता है कि अपने गांव घर और जिले के लिये क्या कर दिखायें। सभी ने यही कहा कि यदि कुछ करने का प्लेटफार्म दिया तो निश्चित तौर पर कुछ कर दिखायेंगे।

हिंदी उर्दू साहित्य के क्षेत्र में देश विदेश में ख्याति अर्जित करने वाले फतेहपुर शहर के जन्मे असगर वजाहत कहते हैं कि अपनों के बीच जो खुशी होती है वह और कहीं नहीं मिलतीयहीं की माटी में पढ़े-बढ़े हैं, आखिर यहां के लिये कुछ करने का संकल्प तो बहुत पहले से था लेकिन ऐसा कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। इसके पूर्व भी माटी से माटी के वर्ष 2001 के समारोह में सबको एक साथ मिलने का मौका मिला था। पवित्र गंगा नदी के तट पर आयोजित यह समारोह हमारे उद्देश्य को पूरा करके दिखायेगा यह विश्वास है।

होम्योपैथी चिकित्सा में कानपुर में महानगर में स्थान बनाये असनी के लाल संकठा प्रसाद पांडेय कहते हैं कि नई पीढ़ी को बाहर बुलंदियों को छूने वाले माटी के लालों से जोड़ने की जरूरत है और उन्हें भी इस बात का जच्बा होना चाहिए कि वह अपने से बड़ों का मार्गदर्शन सीख लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि वह गंगा किनारे के असनी गांव के रहने वाले हैं। दोआबा की संस्कृति और संस्कार पूरे विश्व में कमाल दिखायें, यही मेरी शुभ कामना है।

शहर में ही जन्मे पुणे में आयकर निदेशक पद पर कार्यरत एजे खान कहते हैं कि घर परिवार में वर्षो से में यह चर्चा करता था कि अपनी माटी के लिये कुछ नहीं कर पा रहा हूं, पत्‍‌नी यही कहती थीं कि आप हमेशा कहते रहते हैं, कभी जाते नहीं। आखिर इस आयोजन से मेरा सपना पूरा हो गया है। अब हर वर्ष यहां आकर माटी के लिये कुछ करने के संकल्प को पूरा कर सकूंगा।

शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे इस समय दिल्ली में आईजी के पद पर कार्यरत प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि माटी से माटी का सम्मान यूं ही होता रहेगा तो कोई लाभ नहीं है। परिणाम क्या मिला, अगले वर्ष के समारोह में इसका जवाब चाहिए। एक वर्ष के दौरान इस माटी के लिये हस्तियों ने क्या किया है और क्या करना है, यह सब तय हो जाना चाहिए और यहां के लोगों को भी कुछ पाने के लिये अपने को तैयार होना पड़ेगा।

मलवां ब्लाक के आशा अभयपुर गांव में जन्मे छत्तीसगढ़ रायपुर में डीआईजी पद पर कार्यरत अरुण देव गौतम अपनों से मिलकर गर्व महसूस कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मैं तो साल में दो बार गांव आता हूं, जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर सुखद माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि जिले में कोई ऐसा मदद का प्लेटफार्म बन जाये तो वह यहां की युवा बच्चों को मार्गदर्शन के साथ हर तरह की मदद देने के लिये तैयार हैं।

गंगा किनारे आदमपुर गांव के डा. रमेशचंद्र मिश्र जो इस समय चंडीगढ़ हरियाणा में आईजी हैं, ने कहा कि बहुत से दिन ऐसा सोच रहे थे कि कोई ऐसा मंच मिले जिससे वह जिले के लोगों से जुड़ जायें। आखिर यह मौका मिल ही गया तो अब काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिये सबसे पहले हम सभी को शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में काम करना होगा तभी हम नई पीढ़ी के बच्चों को बुलंदियों तक पहुंचाने में कामयाब हो पायेंगे।

सार्वजनिक उद्यम के डायरेक्टर पर तैनात गिरीशचंद्र शुक्ला जो कि खजुहा कस्बे में जन्मे हैं, कहते हैं कि गांव मजरों में प्रतिभाएं छिपी हैं, बस निखारने की जरूरत है। वह तो साल में दो-तीन बार गांव अवश्य जाते हैं। सबसे पहला प्रयास तो खेती को व्यावसायिक बनाने का जिले में प्रयोग किया जा सकता है। संपन्नता और खुशहाली आयेगी तभी हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आगे बढ़ा पायेंगे।

साहित्य के क्षेत्र में ख्याति अर्जित करने वाले डा. गिरीशचंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि कर्मभूमि भले ही कानपुर महानगर है लेकिन जन्मभूमि का लगाव कभी कम नहीं हो सकता है। जन्मभूमि में भी कर्म का मौका मिल जाये तो हम लोग अपने भाग्य को धन्य समझेंगे।

कृषि विशेषज्ञ औरेई के राजेंद्र प्रसाद दुबे उर्फ बड़े मुन्नू कहते हैं कि कृषि को व्यावसायिक दर्जा देकर खुशहाली संपन्नता लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी यह चाहत है कि हर किसान खुशहाल और प्रगतिशील बने और इसके लिये वह बराबर आलू की खेती के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

विद्युत सुरक्षा के उपनिदेशक पद पर तैनात अल्लीपुर मौहार के प्रो. मिथलेश कुमार सविता कहते हैं कि नौकरी तो केवल जीविकोपार्जन के लिये कर रहे हैं लेकिन समाज के लिये कुछ करने की चाहत है। वह सप्ताह में दो दिन फतेहपुर में रहते हैं कि चाहते हैं कि नि:शुल्क कोचिंग करके प्रतिभाओं को आगे बढायें

अभिनंदन एवं अलंकरण सम्मान समारोह 23 नवंबर को भृगुधाम भिटौरा में

जिले की माटी में जन्मे ऐसे लोग जो अपनी प्रतिभा एवं कर्मठता के बल पर जिले का मान बढ़ाया है। ऐसी कई नामचीन प्रतिभाओं का अभिनंदन एवं अलंकरण सम्मान समारोह 23 नवंबर को भृगुधाम भिटौरा में आयोजित किया गया है। जहां विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही बाइस प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। यह जानकारी आयोजक समिति के पदाधिकारियों ने एक वार्ता में दी।स्वामी विज्ञानानंद की प्रेरणा से पतित पावनी गंगा के तट पर स्थापित तपोवन आश्रम में आयोजित अलंकरण समारोह में

एजे खान निदेशक आयकर पुणे, शारदा प्रसाद आईएएस, प्रो. डीपी तिवारी पूर्व वाइस चांसलर मेरठ, आईपीएस रमेशचंद्र मिश्र, अशोक कुमार बाजपेई संयुक्त कमिश्नर वैट सीतापुर, सुभाष चंद्र पटेल आईएएस, अरुण देव गौतम आईपीएस, आरपी शुक्ल आईएएस, प्रो. असगर वजाहत साहित्यकार, प्रदीप श्रीवास्तव आईपीएस, गिरीशचंद्र शुक्ल पीसीएस, सूर्यकुमार आईपीएस के अलावा संकटा प्रसाद पांडेय, एके सिंह, दीनानाथ श्रीवास्तव, पुरुषोत्तमदास ओमर, शिवकुमार दीक्षित, राजेंद्र सिंह यादव, राजेंद्र द्विवेदी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एक मुकाम हासिल करने वाले गणमान्यों को सम्मानित किया जाएगा।

कार्यक्रम संयोजक धनंजय अवस्थी ने बताया कि जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में जन्मे इन व्यक्तित्वों को सम्मानित करने का मकसद लोगों को जनपद के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी उपलब्ध कराने का है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को कार्यक्रम में शिरकत करना चाहिए। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए वाहन की सुविधा पक्का तालाब से उपलब्ध रहेगी। स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि करेंगे। उन्होंने संबंधित गणमान्यों से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की है। जिससे कार्यक्रम को और रोचक बनाया जा सके। यह कार्यक्रम पूर्व में आयोजित किए गए माटी से माटी कार्यक्रम का नया रूप है, जिसके जरिए जिले की प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान किया जाता रहा है।

अभिनंदन एवं अलंकरण सम्मान समारोह 23 नवंबर को भृगुधाम भिटौरा में

जिले की माटी में जन्मे ऐसे लोग जो अपनी प्रतिभा एवं कर्मठता के बल पर जिले का मान बढ़ाया है। ऐसी कई नामचीन प्रतिभाओं का अभिनंदन एवं अलंकरण सम्मान समारोह 23 नवंबर को भृगुधाम भिटौरा में आयोजित किया गया है। जहां विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही बाइस प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। यह जानकारी आयोजक समिति के पदाधिकारियों ने एक वार्ता में दी।स्वामी विज्ञानानंद की प्रेरणा से पतित पावनी गंगा के तट पर स्थापित तपोवन आश्रम में आयोजित अलंकरण समारोह में

एजे खान निदेशक आयकर पुणे, शारदा प्रसाद आईएएस, प्रो. डीपी तिवारी पूर्व वाइस चांसलर मेरठ, आईपीएस रमेशचंद्र मिश्र, अशोक कुमार बाजपेई संयुक्त कमिश्नर वैट सीतापुर, सुभाष चंद्र पटेल आईएएस, अरुण देव गौतम आईपीएस, आरपी शुक्ल आईएएस, प्रो. असगर वजाहत साहित्यकार, प्रदीप श्रीवास्तव आईपीएस, गिरीशचंद्र शुक्ल पीसीएस, सूर्यकुमार आईपीएस के अलावा संकटा प्रसाद पांडेय, एके सिंह, दीनानाथ श्रीवास्तव, पुरुषोत्तमदास ओमर, शिवकुमार दीक्षित, राजेंद्र सिंह यादव, राजेंद्र द्विवेदी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एक मुकाम हासिल करने वाले गणमान्यों को सम्मानित किया जाएगा।

कार्यक्रम संयोजक धनंजय अवस्थी ने बताया कि जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में जन्मे इन व्यक्तित्वों को सम्मानित करने का मकसद लोगों को जनपद के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी उपलब्ध कराने का है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को कार्यक्रम में शिरकत करना चाहिए। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए वाहन की सुविधा पक्का तालाब से उपलब्ध रहेगी। स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि करेंगे। उन्होंने संबंधित गणमान्यों से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की है। जिससे कार्यक्रम को और रोचक बनाया जा सके। यह कार्यक्रम पूर्व में आयोजित किए गए माटी से माटी कार्यक्रम का नया रूप है, जिसके जरिए जिले की प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान किया जाता रहा है।

आइये इस नवरात्र में हम भी यह संकल्प लें!

पतित पावनी तो पूज्य हैं साथ ही जिन्हें हम पूजते हैं, श्रद्धा के फूल चढ़ाते हैं उन्हीं मूर्तियों, पूज्य देव स्वरूपों को गंगा को और मैली करने के लिये उनकी गोदी में सौंप देते हैं। क्या यही हमारी भावना और भक्ति है कि पहले से ही बहायी जाने वाली लाशों गन्दे नालों के पानी से कराह रही भागीरथी को और भी कष्ट और प्रदूषण में डालें। गंगा मैली और प्रदूषित तो पहले से ही हैं। गंगा बचाओ अभियान में आदि शक्ति मां जगदंबा की जनपद में स्थापित की जाने वाली हजारों मूर्तियों का गंगा में विसर्जन यदि रोक दिया जाये तो लाखों टन गंदगी से मां सुरसरि को बचाया जा सकता है।जरा गौर करें मूर्तियों प्रतिमायें मिट्टी, चूना, लकड़ी, बांस, पुआल, रासायनिक पेंट, प्लास्टर आफ पेरिस आदि सामग्री से तैयार की जाती हैं इसके साथ ही मूर्तियों की साज-सज्जा में कपड़े, प्लास्टिक रेडीमेड गहनें, फूल-माला, हवन सामग्री सहित पूजन की कुंतलों निष्प्रयोज्य सामग्री मूर्तियों के साथ ही गंगा को सौंप दी जाती हैं। आस्था और भक्ति के साथ हम देवी प्रतिमाओं का विसर्जन पवित्र गंगा में करते हैं उस समय यह नहीं सोचते कि जीवनदायिनी के जीवन को ही हम संकट में डाल रहे हैं। जनपद में तकरीबन एक हजार दुर्गा पंडाल सजाये जाते हैं जिनमें अन्य देवी देवताओं की सब मूर्तियों को यदि जोड़ लिया जाये तो संख्या पांच हजार से अधिक पहुंच जाती है। एक मूर्ति का वजन लगभग पचास किलो होता है इस तरह से आठ सौ टन मूर्तियां और उसके साथ लगभग इतनी ही निष्प्रयोज्य पूजन सामग्री यानि सोलह सौ टन प्रदूषण गंगा में विसर्जित करना कहां की आस्था मानी जायेगी।निर्मल धवल गंगा हमारे जीवन खुशहाली का प्रतीक है। इसे यदि हम नहीं बचा पाये तो जीवन का अस्तित्व ही संकट में हो जायेगा। संत समाज में मां गंगा को निर्मल अविरल करने का जो बीड़ा उठाया है उसमें जन-जन का सहयोग जरूरी है। डुबकी लगाकर मोक्ष और भक्ति की कामना करने के साथ ही हम गंगा को मां के रूप में पूजते हैं। यह देखना है कि कहीं हमारी आस्था से ही लिपट कर प्रदूषण तो मां के आंचल में तो नहीं पहुंच रहा। जिस तरह से अपने अस्तित्व के लिये भागीरथी को आज जूझना पड़ रहा है उसमें टेनरियों का गंदा पानी तो मुख्य कारक है ही शवों के प्रवाह के साथ मूर्तियों का विसर्जन भी एक बहुत बड़ा कारण माना जा रहा है। संतों का कहना है कि मूर्तियों का विसर्जन यदि रोक दिया जाये तो मां गंगा के प्रदूषण को ज्यादा नहीं तो पचीस फीसदी कम ही किया जा सकता है। यह कार्य आस्थावान लोगों को ही सोचना होगा। बताते हैं कि मूर्तियों का केमिकल जब पानी में घुलता है तो वह जलजीवों के लिये भी संकट बन जाता है। छोटी मछलियां अन्य जीव बड़ी संख्या में मर जाते हैं। संतों का यह भी कहना है कि आस्था के लिहाज से मूर्तियों का विसर्जन इसलिए भी उचित नहीं है कि गंगा का पानी जब कम हो जाता है तो तमाम मूर्तियां पानी में घुल नहीं पातीं और फिर लोगों के पैरों तले कुचलती हैं। मूर्तियों के विसर्जन से जलजीवों के संकट के साथ गंगा का पानी सड़ांध से महकने लगता है। प्लास्टर आफ पेरिस इतना नुकसान देय होता है कि पानी में घुलने के साथ ही यह विषाक्त हो जाता है। गंगा जल पीने से स्वास्थ्य के लिये भी नुकसानदेय हो सकता है। तीस सितंबर से दुर्गा पूजा महोत्सव शुरू हो रहा है। दशहरा के एक दिन पहले से मूर्तियों का विसर्जन शुरू हो जाता है जो लगातार तीन दिनों तक चलता है। इसके पूर्व गणेश पूजा महोत्सव में एक दर्जन से अधिक मूर्तियों का विसर्जन गंगा जी में किया गया। घर-घर पूजे जाने वाले लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, देवी-देवताओं के चित्र घरों में अन्य देवताओं की चीनी मिट्टी, प्लास्टर आफ पेरिस मिट्टी की बनी मूर्तियों को भी सभी लोग गंगा जी में प्रवाह करते हैं। सच्चे मन से यदि गंगा को पवित्र करने का संकल्प है तो इस वर्ष मूर्तियों के गंगा जी में विसर्जन को रोककर हम सभी पवित्र गंगा को निर्मल अविरल करने में सहायक हो सकते हैं।
भस्म डालें खेत में, गंगा तट पर जमीन के अंदर करें मूर्तियों का विसर्जन
देवी-देवताओं की पूज्य स्वरूपा मूर्तियों के विसर्जन में शास्त्रों के मत को यदि लें तो जमीन के अंदर विसर्जित करना सबसे उत्तम है। संत कहते हैं कि भगवान जगन्नाथ की बारह वर्ष बाद निकलने वाली शोभायात्रा में भी मूर्ति को समुद्र किनारे जमीन के अंदर ही विसर्जित किया जाता है। मूर्ति को समुद्र नदी में नहीं विसर्जित किया जाता। हवन की भस्म पूजन सामग्री को खेतों में यदि डाल देंगे तो वह सबसे उत्तम है। भस्म खेत में पड़ जाने से अच्छी पैदावार के साथ अन्न खाने से मन शुद्ध हो जाता है।

मां गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के अभियान में लगे स्वामी विज्ञानानन्द जी कहना है कि मूर्तियों का विसर्जन यदि गंगा जी से रोक दिया जाये तो एक चौथाई प्रदूषण कम हो जायेगा। उन्होंने कहा कि मूर्तियों को वैदिक मंत्रों के साथ जमीन के अंदर गड्ढा खोदकर विसर्जित करना सबसे उत्तम है। यदि गंगा की पवित्र माटी में ही लाने की इच्छा भक्तों में बलवती हो तो वह गंगा तट पर बालू के नीचे भी मूर्तियों को विसर्जित कर सकते हैं। चार से पांच फिट गहरायी पर मूर्तियों का विसर्जन मंत्रों के साथ करें। मूर्तियों के विसर्जन से यदि मां भागीरथी का आंचल गंदा होगा तो मां जगदम्बा की भक्ति नहीं मिल सकती है।

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