>’माटी से माटी का अभिनन्दन’ – जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक किसको नहीं भाती?

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।। जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।
जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक आखिर किसको नहीं भाती है। आने वाले रविवार (५ दिसंबर) को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिलेंगी और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा देंगे।
अब तक कई बार जिले की माटी की सुगन्ध को देश के कोने-कोने तक फैला रही जनपदीय विभूतियों को हम वर्ष में एक बार एक जगह एकत्र हुआ देखते आ रहे  हैं।  लगातार चौथे साल भी यह अवसर आने वाली पांच दिसंबर को पड़ रहा है। गंगा किनारे ओउम् घाट पट्टी विट्ठलपुर सहिमापुर भिटौरा में पांच दिसंबर को जिले की महान विभूतियों का अलंकरण किया जाएगा। कार्यक्रम के प्रेरक व संयोजक स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती ने बताया कि यही एक ऐसा अवसर आता है जब जिले की विभूतियां एक जगह एकत्र होकर यहां की प्रगति व विकास की चिंता करते हैं। जिले के लिए इससे अधिक गौरव की बात और क्या होगी कि माटी के इन लालों ने दूर रहकर भी माटी का कर्ज उतारने के लिए फतेहपुर फोरम गठित कर यहां के युवाओं को बेहतर शिक्षा व रोजगार देने के प्रयासों की नींव रखी है ।
'माटी से माटी का अभिनन्दन'
इस अवसर में गौरवशाली व्यक्तित्व अलंकरण सूची में जनपद के इन कई महान हस्तियों को चुना गया है। इनमें खजुहा निवासी वर्तमान में दिल्ली में प्रोफेसर स्टेटिजिक मार्केटिंग मनमोहन शुक्ल, दपसौरा में जन्मी व दिल्ली में कमिश्नर कस्टम अर्चना तिवारी, शहर में जन्मे व सीईओ ग्रुप कैप्टन निम्स फ्लाइंग एकाडमी तेज प्रकाश श्रीवास्तव, किर्तीखेड़ा निवासी दिल्ली में आईआरएस ज्वाइंट कमिश्नर शिवदान सिंह भटौरिया हैं। इनके अलावा मोहम्मद अमीन ज्वाइंट डायरेक्टर इलेक्शन कमीशन आफ इंडिया, आरके सिंह डिप्टी कश्निर व्यापारकर कानपुर, एके द्विवेदी लखनऊ में लेबर कमिश्नर अवकाश प्राप्त, केएल द्विवेदी रिटायर्ड लेवर कमिश्नर गाजियाबाद, बसोहनी निवासी मनोज कुमार दिल्ली में सहायक कमिश्नर, कटरा नरैचा के पंकज कुमार दिल्ली में आईएएस, एसके सिन्हा एडवाइजर लीगल डीएलएफ लि. दिल्ली, खागा में जन्मी श्रीमती संध्या सिंह डिप्टी डायरेक्टर एनएसओ गवर्नमेंट आफ इंडिया आरकेपुरम दिल्ली, बिंदकी के एसएन गुप्ता डीआईजी वेस्ट बंगाल कोलकाता, बिंदकी के ही दिलीप कुमार आईआरएस कमिश्नर इनकम टैक्स मुंबई , समियाना निवासी गोविन्द दुबे दैनिक जागरण जिला प्रभारी बांदा, अभयपुर निवासी अनिल सिंह सेवायोजन अधिकारी मैनपुरी, शहर निवासी विभयमान सिंह मध्य कमान भारतीय सेना लखनऊ को भी अभिनंदन के लिए बुलाया गया है।

माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की तीसरी श्रंखला

।। जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।

जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक आखिर किसको नहीं भाती है। रविवार को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिलेंगी और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा देंगे।

स्वामी विज्ञानानन्द जी के मार्गदर्शन पर रविवार को भिटौरा के ओम घाट में हो रहे गौरवशाली प्रतिभाओं के सम्मान समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संयोजक मण्डल के धनंजय अवस्थी, आचार्य विष्णु शुक्ला, सुनील श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की यह तीसरी श्रंखला है। पतित पावनी उत्तरवाहिनी गंगा के ओम घाट के तट पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सुबह दस बजे विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाली अठारह विभूतियां भिटौरा घाट पहुंच जायेंगी जो हाईस्कूल व इण्टर के ग्रामीण बच्चों से रूबरू होंगे। नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को निखारने की यह अनूठी पहल माटी के ही लाल शुरू कर रहे हैं और वह माटी के ही लालों को अब आगे ले जायेंगे। बारह से अभिनंदन समारोह का कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें महामंडलेश्वर परमानंद जी महाराज जी का आशीर्वचन होगा। शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे प्रदीप श्रीवास्तव जो इस समय दिल्ली पुलिस में आईजी हैं ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली में जोनिहां निवासी विकास प्राधिकरण के उप निदेशक शैलेन्द्र सिंह परिहार के संयोजकत्व में फतेहपुर फोरम तैयार किया गया है। दिल्ली में स्थापित फतेहपुर फोरम के तार माटी से जोड़कर आगे बढ़ाने का काम किया जायेगा। अपने आप में हो रहे इस अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फतेहपुर के पिछड़ेपन को दूर कर किस तरह से विकास के पथ पर लाया जाये। विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के लिये माटी के ही लालों का सहयोग लेने की एक कार्ययोजना तय की जानी है।

माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की तीसरी श्रंखला

।। जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।

जन्मभूमि की सोंधी माटी की महक आखिर किसको नहीं भाती है। रविवार को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिलेंगी और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा देंगे।

स्वामी विज्ञानानन्द जी के मार्गदर्शन पर रविवार को भिटौरा के ओम घाट में हो रहे गौरवशाली प्रतिभाओं के सम्मान समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संयोजक मण्डल के धनंजय अवस्थी, आचार्य विष्णु शुक्ला, सुनील श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि माटी से माटी के अभिनंदन के कार्यक्रम की यह तीसरी श्रंखला है। पतित पावनी उत्तरवाहिनी गंगा के ओम घाट के तट पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सुबह दस बजे विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाली अठारह विभूतियां भिटौरा घाट पहुंच जायेंगी जो हाईस्कूल व इण्टर के ग्रामीण बच्चों से रूबरू होंगे। नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को निखारने की यह अनूठी पहल माटी के ही लाल शुरू कर रहे हैं और वह माटी के ही लालों को अब आगे ले जायेंगे। बारह से अभिनंदन समारोह का कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें महामंडलेश्वर परमानंद जी महाराज जी का आशीर्वचन होगा। शहर के चंदियाना मोहल्ले में जन्मे प्रदीप श्रीवास्तव जो इस समय दिल्ली पुलिस में आईजी हैं ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली में जोनिहां निवासी विकास प्राधिकरण के उप निदेशक शैलेन्द्र सिंह परिहार के संयोजकत्व में फतेहपुर फोरम तैयार किया गया है। दिल्ली में स्थापित फतेहपुर फोरम के तार माटी से जोड़कर आगे बढ़ाने का काम किया जायेगा। अपने आप में हो रहे इस अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फतेहपुर के पिछड़ेपन को दूर कर किस तरह से विकास के पथ पर लाया जाये। विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के लिये माटी के ही लालों का सहयोग लेने की एक कार्ययोजना तय की जानी है।

गंगा बचाओ अभियान नए मुकाम पर

एक माह पहले दैनिक जागरण द्वारा शुरू किये गये गंगा बचाओ अभियान बुधवार को ऐसे मुकाम पर पहुंच गया कि भक्तों का सैलाब श्मशान घाट की गंदगी को साफ कर गंगा को अविरल व निर्मल रखने का संकल्प लिया। हर-हर गंगे, जय-जय गंगे के गगनभेदी उद्घोष के सा भिटौरा के श्मशान घाट की सफाई के लिये संत हों या आमजन सबने हाथ बंटाया। शवों की गंदगी से कराह रहीं मोक्षदायिनी उस समय मुस्कुरा उठीं जब शवों के कपड़ों व गंदगी की सड़ांध को बाहर कर झाड़ू लगाकर श्मशान घाट को लकालक कर दिया गया। सदियों से सबको तार रहीं गंगा के प्रदूषण को दूर करने के लिये जिस तरह से लोगों में उमंग व उल्लास झलका उससे गांव के भी लोग आकर इस अभियान में हाथ बटाने लगे। हिन्दू महासभा ने शंख ध्वनि के साथ सफाई अभियान की शुरुआत की। बाद में तिराहे में जनसभा का गंगा को बचाने के लिये क्या करें इसकी सीख दी। इस पहल में संतों की भूमिका अग्रणी रही। तभी तो संत सफाई करने के साथ यह जयकारे लगा रहे थे कि संतों ने अब ठाना है गंगा को बचाना है।

कार्तिक पूर्णिमा के एक दिन पहले मोक्षदायिनी गंगा के श्मशान घाट में झाड़ू फावड़ा के साथ अखिल भारत हिन्दू महासभा के बैनर तले सैकड़ों गंगा भक्त पहुंच गये। ऐसे घाट में जहां हमेशा वीरानगी दिखती है शव के अग्निदाह व प्रवाह के अलावा घाट की तरफ कोई झांकता भी नहीं है वहां की गंदगी को साफ करने के लिये जैसे ही

महासभा के प्रदेश सचिव मनोज त्रिवेदी ने शंख ध्वनि की। संतों की टोली सहित कार्यकर्ता सफाई अभियान में लग गये। शव के कपड़ों, लकड़ी आदि की सड़ांध को कार्यकर्ता गंगा तट के बाहर एक जगह संकलित किया बाद में आग लगायी और इस कचरे को जमीन के नीचे गड्ढा कर दबा दिया। स्थिति यह थी कि श्मशान घाट में चार ट्राली से अधिक गंदगी इकट्ठा की गयी। पांच घंटे तक कार सेवा कर संत व हिन्दू महासभा के कार्यकर्ता व दैनिक जागरण स्टाफ के लोग घाट को लकालक कर दिया। चूने के छिड़काव के साथ गंगा के पाट में झाड़ू लगाकर गंगा बचाओ अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

पहली बार श्मशान घाट की इस तरह की सफाई देख वहां के गंगा पुत्र व गांव के लोग भी दांतों तले अंगुली दबा ली। आखिर शहर के लोगों के अन्दर गंगा को बचाने का इस तरह का जुनून आ गया है कि वह गंगा किनारे पड़ी हड्डियों, मानव अंगों को भी बिन-बिनकर साफ कर रहे हैं। पान मसाला की खाली पुलिया, पालीथीन, जली लकड़ी का कोयला, अधजली लकड़ियां, बांस, कुशा, कंडा, मटकी सहित अन्य गंदगी को गंगा भक्त ऐसे तलाशते रहे जैसे वह इस नेक कार्य में किसी तरह की भूल नहीं करना चाहते। अग्निदाह में गंगा तट पर बालू में गड़ी लकड़ियों को भी संतों ने अपने त्रिशूल की धार से खोदकर बाहर किया। उमंग व उल्लास का आलम यह रहा कि पसीना बहाते हुए काम भी कर रहे थे और सुरसरि का मुखड़ा झांककर हर-हर गंगे, जय-जय गंगे के उद्घोष भी कर रहे थे। तन्मयता के साथ गंगा मइया को बचाने का जो दृश्य भक्तों ने प्रस्तुत किया उसे देखकर शव दाह कार्यक्रम में आये लोग भी अपने को नहीं रोक पाये और वह भी अभियान में शामिल होकर आसपास की गंदगी को बाहर करने लगे। प्रदूषण से कराह रहीं गंगा भक्तों का समर्पण देख मुस्कराने लगीं। ऐसा लग रहा था कि मंद-मंद धार से हिलोरे ले रहीं गंगा उस स्थान पर रुक कर अपने पुत्रों की सेवा भाव को निहार रही हैं। तभी तो सफाई करने के साथ भक्त गंगा को निहारते और फिर जयकारे लगाकर यह कहते कि संतों ने भी अब यह ठाना है, गंगा को बचाना है। समर्पण और भक्ति में सेवा के झलकते भाव से गंगा प्रहरी अपने को धन्य मान रहे हैं कि इस पुण्य कार्य में कुछ तो हाथ बंटाने का मौका मिला। हिन्दू महासभा की वाहनों सहित गंगा बचाओ यात्रा शहर के आईटीआई रोड स्थित कार्यालय से निकली। गंगा मइया के उद्घोष के साथ यात्रा पटेलनगर से पथरकटा चौराहा होते हुए बिन्दकी बस स्टाप होते हुए बाकरगंज, पक्का तालाब से भिटौरा घाट पहुंची। श्मशान घाट में झाड़ू फावड़ा के साथ श्रमदान करने वाले संतों में स्वामी स्वरूप महाराज, रामआसरे आर्य, गया प्रसाद, सूरजबली, राकेश प्रसाद, हिन्दू महासभा के जिलाध्यक्ष रामगोपाल शुक्ला, जिला मंत्री करन सिंह पटेल, देवनाथ धाकड़े, उमाकांत तिवारी, गंगा प्रसाद साहू, प्रेमसागर मौर्य, कमलाकांत तिवारी, रमेश बाल्मीकि, रजोली पाल, जितेन्द्र पटेल आदि रहे।

दैनिक जागरण फतेहपुर कार्यालय के स्टाफ के लोगों ने भी श्रमदान कर गंगा किनारे प्रवाहित की गयी सड़ रही दुर्गा प्रतिमाओं को तट से बाहर किया और आग लगाकर गंदगी दूर की। मनोज मिश्रा की अगुवाई में कार्यालय के गोविन्द दुबे, जयगोपाल शुक्ला, योगेन्द्र पटेल, मनभावन अवस्थी, प्रशांत द्विवेदी, बबलू मौर्य, अनिल बाजपेयी, रवीन्द्र प्रताप सिंह, घनश्याम, विनय द्विवेदी, अजय दीक्षित, राजेन्द्र, जगपाल यादव आदि लोग लगे रहे।

शमशान घाट की सफाई के बाद भिटौरा में गंगा बचाओ की नुक्कड़ सभा में स्वामी विज्ञानानन्द जी ने कहा कि यह सोचना गलत है कि मूर्तियों व निष्प्रयोज्य पूजन सामग्री फेंकने से कितनी गंदगी होती है। बूंद-बूंद से घट भरने वाली बात गंगा प्रदूषण पर भी प्रभावी हो रही है। थोड़ी-थोड़ी गंदगी ने बड़ा रूप ले लिया है तभी तो अविरल और निर्मल रहने वाली गंगा की धार संकट में पड़ गयी है।

स्वामी जी ने गंगा भक्तों का आह्वान किया कि गंगा में जाने वाले नाले बंद कराये जायें। हिन्दू महासभा के प्रांतीय सचिव मनोज त्रिवेदी ने ऐलान किया कि अगले अभियान में अब गंगा में गिरने वाले नाले पाटे जायेंगे। उन्होंने कहा कि गांव का हो या फैक्ट्रियों का गंदा पानी भागीरथी की गोद में नहीं जाने पायेगा इसकी हम सब सौगन्ध खाते हैं। गंगा, गायत्री और गाय भारतीय संस्कृति की धरोहर हैं उनको भी यदि हम न बचा पाये तो हमारा जीवन ही निरर्थक है और देश की पहचान भी समाप्त हो जायेगी। अन्य संतों ने समाज का आहवान किया कि हम यह संकल्प लें कि मोक्षदायिनी गंगा का एक-एक बूंद अमृत के समान हैं और इस अमृतमयी पानी को हम प्रदूषित नहीं होने देंगे। गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाकर गंगा भक्तों को बताया जायेगा कि गंगा में डुबकी तो लगायें, लेकिन कपड़े न धोयें।

(समाचार स्त्रोत- दैनिक जागरण)

गंगा बचाओ अभियान नए मुकाम पर

एक माह पहले दैनिक जागरण द्वारा शुरू किये गये गंगा बचाओ अभियान बुधवार को ऐसे मुकाम पर पहुंच गया कि भक्तों का सैलाब श्मशान घाट की गंदगी को साफ कर गंगा को अविरल व निर्मल रखने का संकल्प लिया। हर-हर गंगे, जय-जय गंगे के गगनभेदी उद्घोष के सा भिटौरा के श्मशान घाट की सफाई के लिये संत हों या आमजन सबने हाथ बंटाया। शवों की गंदगी से कराह रहीं मोक्षदायिनी उस समय मुस्कुरा उठीं जब शवों के कपड़ों व गंदगी की सड़ांध को बाहर कर झाड़ू लगाकर श्मशान घाट को लकालक कर दिया गया। सदियों से सबको तार रहीं गंगा के प्रदूषण को दूर करने के लिये जिस तरह से लोगों में उमंग व उल्लास झलका उससे गांव के भी लोग आकर इस अभियान में हाथ बटाने लगे। हिन्दू महासभा ने शंख ध्वनि के साथ सफाई अभियान की शुरुआत की। बाद में तिराहे में जनसभा का गंगा को बचाने के लिये क्या करें इसकी सीख दी। इस पहल में संतों की भूमिका अग्रणी रही। तभी तो संत सफाई करने के साथ यह जयकारे लगा रहे थे कि संतों ने अब ठाना है गंगा को बचाना है।

कार्तिक पूर्णिमा के एक दिन पहले मोक्षदायिनी गंगा के श्मशान घाट में झाड़ू फावड़ा के साथ अखिल भारत हिन्दू महासभा के बैनर तले सैकड़ों गंगा भक्त पहुंच गये। ऐसे घाट में जहां हमेशा वीरानगी दिखती है शव के अग्निदाह व प्रवाह के अलावा घाट की तरफ कोई झांकता भी नहीं है वहां की गंदगी को साफ करने के लिये जैसे ही

महासभा के प्रदेश सचिव मनोज त्रिवेदी ने शंख ध्वनि की। संतों की टोली सहित कार्यकर्ता सफाई अभियान में लग गये। शव के कपड़ों, लकड़ी आदि की सड़ांध को कार्यकर्ता गंगा तट के बाहर एक जगह संकलित किया बाद में आग लगायी और इस कचरे को जमीन के नीचे गड्ढा कर दबा दिया। स्थिति यह थी कि श्मशान घाट में चार ट्राली से अधिक गंदगी इकट्ठा की गयी। पांच घंटे तक कार सेवा कर संत व हिन्दू महासभा के कार्यकर्ता व दैनिक जागरण स्टाफ के लोग घाट को लकालक कर दिया। चूने के छिड़काव के साथ गंगा के पाट में झाड़ू लगाकर गंगा बचाओ अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

पहली बार श्मशान घाट की इस तरह की सफाई देख वहां के गंगा पुत्र व गांव के लोग भी दांतों तले अंगुली दबा ली। आखिर शहर के लोगों के अन्दर गंगा को बचाने का इस तरह का जुनून आ गया है कि वह गंगा किनारे पड़ी हड्डियों, मानव अंगों को भी बिन-बिनकर साफ कर रहे हैं। पान मसाला की खाली पुलिया, पालीथीन, जली लकड़ी का कोयला, अधजली लकड़ियां, बांस, कुशा, कंडा, मटकी सहित अन्य गंदगी को गंगा भक्त ऐसे तलाशते रहे जैसे वह इस नेक कार्य में किसी तरह की भूल नहीं करना चाहते। अग्निदाह में गंगा तट पर बालू में गड़ी लकड़ियों को भी संतों ने अपने त्रिशूल की धार से खोदकर बाहर किया। उमंग व उल्लास का आलम यह रहा कि पसीना बहाते हुए काम भी कर रहे थे और सुरसरि का मुखड़ा झांककर हर-हर गंगे, जय-जय गंगे के उद्घोष भी कर रहे थे। तन्मयता के साथ गंगा मइया को बचाने का जो दृश्य भक्तों ने प्रस्तुत किया उसे देखकर शव दाह कार्यक्रम में आये लोग भी अपने को नहीं रोक पाये और वह भी अभियान में शामिल होकर आसपास की गंदगी को बाहर करने लगे। प्रदूषण से कराह रहीं गंगा भक्तों का समर्पण देख मुस्कराने लगीं। ऐसा लग रहा था कि मंद-मंद धार से हिलोरे ले रहीं गंगा उस स्थान पर रुक कर अपने पुत्रों की सेवा भाव को निहार रही हैं। तभी तो सफाई करने के साथ भक्त गंगा को निहारते और फिर जयकारे लगाकर यह कहते कि संतों ने भी अब यह ठाना है, गंगा को बचाना है। समर्पण और भक्ति में सेवा के झलकते भाव से गंगा प्रहरी अपने को धन्य मान रहे हैं कि इस पुण्य कार्य में कुछ तो हाथ बंटाने का मौका मिला। हिन्दू महासभा की वाहनों सहित गंगा बचाओ यात्रा शहर के आईटीआई रोड स्थित कार्यालय से निकली। गंगा मइया के उद्घोष के साथ यात्रा पटेलनगर से पथरकटा चौराहा होते हुए बिन्दकी बस स्टाप होते हुए बाकरगंज, पक्का तालाब से भिटौरा घाट पहुंची। श्मशान घाट में झाड़ू फावड़ा के साथ श्रमदान करने वाले संतों में स्वामी स्वरूप महाराज, रामआसरे आर्य, गया प्रसाद, सूरजबली, राकेश प्रसाद, हिन्दू महासभा के जिलाध्यक्ष रामगोपाल शुक्ला, जिला मंत्री करन सिंह पटेल, देवनाथ धाकड़े, उमाकांत तिवारी, गंगा प्रसाद साहू, प्रेमसागर मौर्य, कमलाकांत तिवारी, रमेश बाल्मीकि, रजोली पाल, जितेन्द्र पटेल आदि रहे।

दैनिक जागरण फतेहपुर कार्यालय के स्टाफ के लोगों ने भी श्रमदान कर गंगा किनारे प्रवाहित की गयी सड़ रही दुर्गा प्रतिमाओं को तट से बाहर किया और आग लगाकर गंदगी दूर की। मनोज मिश्रा की अगुवाई में कार्यालय के गोविन्द दुबे, जयगोपाल शुक्ला, योगेन्द्र पटेल, मनभावन अवस्थी, प्रशांत द्विवेदी, बबलू मौर्य, अनिल बाजपेयी, रवीन्द्र प्रताप सिंह, घनश्याम, विनय द्विवेदी, अजय दीक्षित, राजेन्द्र, जगपाल यादव आदि लोग लगे रहे।

शमशान घाट की सफाई के बाद भिटौरा में गंगा बचाओ की नुक्कड़ सभा में स्वामी विज्ञानानन्द जी ने कहा कि यह सोचना गलत है कि मूर्तियों व निष्प्रयोज्य पूजन सामग्री फेंकने से कितनी गंदगी होती है। बूंद-बूंद से घट भरने वाली बात गंगा प्रदूषण पर भी प्रभावी हो रही है। थोड़ी-थोड़ी गंदगी ने बड़ा रूप ले लिया है तभी तो अविरल और निर्मल रहने वाली गंगा की धार संकट में पड़ गयी है।

स्वामी जी ने गंगा भक्तों का आह्वान किया कि गंगा में जाने वाले नाले बंद कराये जायें। हिन्दू महासभा के प्रांतीय सचिव मनोज त्रिवेदी ने ऐलान किया कि अगले अभियान में अब गंगा में गिरने वाले नाले पाटे जायेंगे। उन्होंने कहा कि गांव का हो या फैक्ट्रियों का गंदा पानी भागीरथी की गोद में नहीं जाने पायेगा इसकी हम सब सौगन्ध खाते हैं। गंगा, गायत्री और गाय भारतीय संस्कृति की धरोहर हैं उनको भी यदि हम न बचा पाये तो हमारा जीवन ही निरर्थक है और देश की पहचान भी समाप्त हो जायेगी। अन्य संतों ने समाज का आहवान किया कि हम यह संकल्प लें कि मोक्षदायिनी गंगा का एक-एक बूंद अमृत के समान हैं और इस अमृतमयी पानी को हम प्रदूषित नहीं होने देंगे। गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाकर गंगा भक्तों को बताया जायेगा कि गंगा में डुबकी तो लगायें, लेकिन कपड़े न धोयें।

(समाचार स्त्रोत- दैनिक जागरण)

अब लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को समाधिस्थ करने की अनूठी पहल

पुरोहितों के साथ बैठक करके स्वामी विज्ञानानन्द जी ने गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिये पूजन सामग्री घरों की मूर्तियों को गंगा में विसर्जित करने की सलाह दी। आचार्यो की राय पर तय किया गया कि यजमानों को इस पवित्र कार्य के लिये प्रेरित करके यह संकल्प दिलाया जायेगा कि मूर्तियों को मिट्टी में समाधिस्थ करेंगे।

चंदियाना स्थित आश्रम में बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती ने कहा कि दीपावली के पवित्र पर्व पर हर घर में लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति पहुंचेगी। पुरानी मूर्तियों को गंगा जी में विसर्जित करने की परंपरा को इस बार समाप्त करना है। पुरोहित इस कार्य में बेहतर योगदान कर सकते हैं। उन्होंने यह कहा कि यजमानों को यह समझाया जाये कि मूर्तियां गंगा जी में प्रवाहित करने से प्रदूषण तो बढ़ता ही है साथ ही स्नान के समय यह मूर्तियों पैरों तले जाती हैं और उसमें पड़े लोहे के तार पैरों में घाव कर देते हैं। भूमि के अंदर मूर्ति यदि समाधिस्थ हो जायेगी तो वह पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी। साहित्यकार डा.ओम प्रकाश अवस्थी ने कहा कि गंगा की पवित्रता के लिये किसी भी तरह की पार्थिव मूर्तियों शवों का प्रवाह गंगा जी में किया जाये। आचार्य ज्ञान प्रकाश मिश्र, जुगुल किशोर, जगत नारायण द्विवेदी, ओमदत्त मिश्र, अवधेश कुमार सहित अन्य आचार्यो ने एकमत होकर कहा कि गृहस्थ जनों की घरों की मूर्तियों जमीन में समाधिस्थ करायेंगे या फिर पीपल वृक्ष के नीचे मंदिरों के पास किसी सुरक्षित स्थान पर इकट्ठा कर ली जायेंगी। भक्तों को यह भी सुविधा दी गयी है कि भिटौरा के ओम घाट में पीपल के नीचे एक स्थान तय किया गया है जिसमें मूर्तियां सुरक्षित रखी जा सकती हैं बाद में इन्हें आस्था भक्ति पूर्वक समाधिस्थ करने की व्यवस्था की जायेगी

( समाचार स्त्रोतजागरण )

अब लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को समाधिस्थ करने की अनूठी पहल

पुरोहितों के साथ बैठक करके स्वामी विज्ञानानन्द जी ने गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिये पूजन सामग्री घरों की मूर्तियों को गंगा में विसर्जित करने की सलाह दी। आचार्यो की राय पर तय किया गया कि यजमानों को इस पवित्र कार्य के लिये प्रेरित करके यह संकल्प दिलाया जायेगा कि मूर्तियों को मिट्टी में समाधिस्थ करेंगे।

चंदियाना स्थित आश्रम में बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती ने कहा कि दीपावली के पवित्र पर्व पर हर घर में लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति पहुंचेगी। पुरानी मूर्तियों को गंगा जी में विसर्जित करने की परंपरा को इस बार समाप्त करना है। पुरोहित इस कार्य में बेहतर योगदान कर सकते हैं। उन्होंने यह कहा कि यजमानों को यह समझाया जाये कि मूर्तियां गंगा जी में प्रवाहित करने से प्रदूषण तो बढ़ता ही है साथ ही स्नान के समय यह मूर्तियों पैरों तले जाती हैं और उसमें पड़े लोहे के तार पैरों में घाव कर देते हैं। भूमि के अंदर मूर्ति यदि समाधिस्थ हो जायेगी तो वह पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी। साहित्यकार डा.ओम प्रकाश अवस्थी ने कहा कि गंगा की पवित्रता के लिये किसी भी तरह की पार्थिव मूर्तियों शवों का प्रवाह गंगा जी में किया जाये। आचार्य ज्ञान प्रकाश मिश्र, जुगुल किशोर, जगत नारायण द्विवेदी, ओमदत्त मिश्र, अवधेश कुमार सहित अन्य आचार्यो ने एकमत होकर कहा कि गृहस्थ जनों की घरों की मूर्तियों जमीन में समाधिस्थ करायेंगे या फिर पीपल वृक्ष के नीचे मंदिरों के पास किसी सुरक्षित स्थान पर इकट्ठा कर ली जायेंगी। भक्तों को यह भी सुविधा दी गयी है कि भिटौरा के ओम घाट में पीपल के नीचे एक स्थान तय किया गया है जिसमें मूर्तियां सुरक्षित रखी जा सकती हैं बाद में इन्हें आस्था भक्ति पूर्वक समाधिस्थ करने की व्यवस्था की जायेगी

( समाचार स्त्रोतजागरण )

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