अन्ना !……फतेहपुर आपके साथ है !

 और कुछ नहीं …..बस इतना ही कि 

“अन्ना!………फतेहपुर आपके साथ है

फतेहपुर : 48वीं बार में जब्बार पास हो ही गए मैट्रिक

कहते हैं-

‘सीढ़ियां उनके लिए बनी हैं जो छत पर जाना चाहते हैं, 
है आसमां पे जिनकी नजर, उन्हें रास्ता खुद बनाना है।’ 

कुछ ऐसा ही जज्बा लिए जब्बार जब ने 48वीं बार हाईस्कूल की परीक्षा दी और ऊपर वाले ने भी पूरा करम बख्शा। आखिर 68 वर्ष की उम्र में उनका मैट्रिक पास होने का सपना पूरा हो गया। बुधवार को कालेज के प्रधानाचार्य ने उन्हें पास होने का प्रमाणपत्र लेने के लिए बुलवाया तो खुशी से उनकी आंखें छलक उठीं। वह जोश से कहते हैं कि कुछ आर्थिक मदद मिले तो वह आगे भी पढ़ना जारी रखेंगे।
डीघ गांव निवासी जब्बार बेहद गरीब हैं। फुटपाथ पर जूते-चप्पल बेचकर अपने परिवार की जीविका चलाते हैं। 15 वर्ष की अवस्था में उनका निकाह हुआ था। उस समय उनमें पढ़ने का जुनून था। कामकाज न करने के कारण पत्नी ने तलाक दे दिया। 20 वर्ष की उम्र में पहली बार वह हाईस्कूल की परीक्षा में बैठे। अपनी मेहनत और बिना नकल पास होने की हसरत लिए पिछले 48 साल से वह लगातार बोर्ड परीक्षा का फार्म भरते चले आ रहे थे। 48वीं बार उन्हें सफलता मिली।
जब्बार हुसेन ने वर्ष 1963 में नगर के नेहरू इंटर कालेज में विज्ञान वर्ग से संस्थागत परीक्षार्थी के रूप में पहली बार हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। तब वह हिंदी के अलावा सभी चार विषयों में फेल हो गये थे। इसके बाद से उन्होंने विज्ञान वर्ग छोड़कर कला वर्ग से व्यक्तिगत परीक्षा देना शुरू किया। दुर्भाग्य रहा कि तब से हर साल फेल होते आ रहे हैं। वर्ष 2010 की परीक्षा में हिंदी, सामाजिक विज्ञान व कला में पास हो गये थे। जबकि अंग्रेजी, प्रारंभिक गणित व विज्ञान में फेल हो गये थे। रिजल्ट अनुत्तीर्ण रहा था। इस वर्ष उन्होंने केवल अंग्रेजी, प्रारंभिक गणित व विज्ञान की परीक्षा दी थी। जब्बार का रिजल्ट विचाराधीन आया था। प्रमाण पत्र सह अंकपत्र आने पर विज्ञान में 35 अंक मिले हैं। प्रारंभिक गणित में 28 अंक हैं। इसमें 5 नंबर का ग्रेस मिल जाने पर इसमें उत्तीर्ण मान लिये गये। इसके बाद अंग्रेजी में केवल एक अंक मिला है। चूंकि एक विषय में फेल को पास माने जाने की व्यवस्था है। इसके तहत जब्बार उत्तीर्ण हो गये। प्रधानाचार्य ने बताया कि जब्बार रिगुलेशन 17(1) चैप्टर 12 के तहत हाईस्कूल परीक्षा 2011 में पास हो गये हैं। 

बुधवार को नगर के दयानंद इंटर कालेज के प्रधानाचार्य ओम प्रकाश वाजपेई ने बुजुर्ग जब्बार को गांव से बुलवाकर प्रमाणपत्र दिया तो खुशी से उनकी आंखों में आंसू आ गए। बच्चों ने उनके जज्बे को सलाम करते हुए तालियों की ध्वनि से बधाई दी।
(समाचार साभार : अमर उजाला फतेहपुर )

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दुनिया के करीब 50 करोड़ लोगों के दिलों पर राज करने वाली सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक पर भी अब 
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बन चुका है | 
फेसबुक की लोकप्रियता की वजह क्या है …….फेसबुक का वह पेज| फेसबुक के सार्वजनिक पृष्ठ (पब्लिक पेज) बनाना हाल के दिनों में काफी लोकप्रिय होता जा रहा है। 
आप सभी से अनुरोध है कि फेसबुक पर भी फतेहपुर से सम्बंधित ख़बरों , संस्कृति संबंधी सूचनाओं और आलेखों को एक दूसरे से बांटे ………जाहिर है यह सब हम इस फेसबुक के फतेहपुर पेज से जुडकर ही कर पायेंगे | इसके लिए आपको केवल फेसबुक पेज के ऊपर दिए गए Like बटन को दबाना होगा |
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>गुलामी सबसे अधिक भयावह तब होती है, जब वह स्वभाव बन जाती है।

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गुलामी सबसे अधिक भयावह तब होती है, जब वह स्वभाव बन जाती है। स्त्रियों के अंदर पराधीनता का बोध ही नहीं है, इसलिए स्त्री विमर्श का पहला काम है पराधीनता का बोध करना और दूसरा काम पराधीनता के कारणों का बोध कराना है। यह हो जाए तो पराधीनता के कारणों की खोज करना। इसके बाद इन्हें दूर करने का प्रयास करना। यह बात रविवार को फतेहपुर शहर में स्थित महात्मागांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित ‘समकालीन साहित्य एवं स्त्री विमर्श विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी’ में जेएनयू, नई दिल्ली के भारतीय भाषा केंद्र के प्रोफेसर व अध्यक्ष डा.मैनेजर पांडेय ने नारी सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कही।




स्त्रियों की दशा पहले भी वही थी जो आज है बस प्रताड़ना का रूप भर बदल गया है। स्त्री के कष्ट को कमरों में बैठ कर या उच्च वर्ग की महिलाओं को देखकर नहीं समझा जा सकता है उसे समझना है तो गाँव , गली की नारी से या मेहनत मजदूरी करने वाली औरत से अथवा सम्मान या अधिकार के लिए संघर्ष कर जी रही महिला से मिलना हौगा। स्त्री की गुलामी खतम हो इसके लिए उसकी सोच में बदलाव हो और सोच में बदलाव के लिए जरूरी है कि नारी शिक्षित हो।


महात्मा गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग द्वारा समकालीन साहित्य और स्त्री विमर्श विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन वक्ताओं ने उक्त विचार रखे। राष्ट्रीय संगोष्ठी का उदघाटन वरिष्ठ हिंदी आलोचना के स्तंभ जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में भारतीय भाषा केन्द्र के प्रोफेसर व अध्यक्ष डा. मैनेजर पांडेय व कालेज के प्राचार्य डा. अवधेश कुमार सिंह ने किया। माँ सरस्वती, महात्मा गांधी और महादेवी वर्मा के चित्रों पर माल्यार्पण कर संगोष्ठी की शुरूआत की गयी ।



विशिष्ट अतिथि डा. भीम राव आंबेडकर महाविद्यालय में हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. बालकृष्ण पांडेय ने स्त्री विमर्श के संबंध में कुछ प्रश्न और कुछ चिंताएं सदन के सामने रखे। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ज्ञानपुर के हिंदी विभाग अध्यक्ष डा.क्षमा शंकर पांडेय ने स्त्री विमर्श के महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया। संगोष्ठी का दूसरा सत्र अपरान्ह दो बजे से शुरू हुआ। बौद्धिक विमर्श के इस सत्र की अध्यक्षता आलोचक डा.ओम प्रकाश अवस्थी ने की। संयोजक प्रोफेसर अनूप शुक्ल ने संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता करते हुए कालेज के प्राचार्य डा.अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि स्त्रियों की दुर्दशा का अंदाजा अभिजात्य परिवारों की महिलाओं अथवा संचार माध्यमों की नारी छवि से नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए दूरस्थ अंचलों की ग्रामीण और श्रमिक महिलाओं के बीच जाना पड़ेगा।


सलौन डिग्री कालेज रायबरेली के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डा. सीबी सिंह, कान्यकुब्ज कालेज लखनऊ के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डा. अनिल त्रिपाठी, वीएसएसडी कालेज कानपुर के प्रोफेसर डा. आनंद शुक्ल और यहीं के वरिष्ठ प्राध्यापक डा. रंजन श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे। राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश प्रदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थाओं के शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी, साहित्यकार और सांस्कृतिक कर्मी मौजूद रहे।

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>फतेहपुर को स्पो‌र्ट्स कॉलेज का तोहफा

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अब वह दिन दूर नहीं जब उभरती खेलकूद प्रतिभाओं को हुनर के पंख लगाकर आसमान की ऊंचाइयां छूने का मौका मिलेगा। जिले में एक अरब से स्पो‌र्ट्स कॉलेज बनकर तैयार होगा, जिसमें न सिर्फ फतेहपुर बल्कि अन्य जिलों के होनहार खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। कुछ भी हो, जिले में बनकर तैयार होने के बाद स्पो‌र्ट्स कालेज फतेहपुर की शान बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।
खेलकूद विभाग के मुताबिक, स्पो‌र्ट्स कॉलेज निर्माण के लिए तेलियानी विकासखंड के गांव नेवलापुर में करीब 60 एकड़ की जमीन चयनित कर ली गई है। कॉलेज का निर्माण करनेवाली कार्यदायी संस्था सीएनडीएस ने भूमि पर मृदा परीक्षण का कार्य शुरू कर दिया है। 1 अरब बजट के सापेक्ष शासन ने कार्यदाई संस्था के पीएलए खाते में 5 करोड़ की पहली किस्त भी स्थानांतरित कर दी है। छात्रावास, हॉस्पिटल, लाइब्रेरी के साथ बननेवाले भव्य स्पो‌र्ट्स कॉलेज में खिलाड़ियों को सपने साकार करने का मौका मिलेगा। 
स्पोर्ट  कालेज  में 500 खिलाडि़यों की आवासीय क्षमता वाले छात्रावास के साथ अस्पताल व फिजियोथिरेपी सेंटर की भी सुविधा होगी। कालेजों में 11 क्रिकेट पिच, सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल मैदान, चार सिंथेटिक टेनिस कोर्ट तथा शूटिंग रेंज का भी निर्माण होगा। कहना होगा कि जिले को स्पो‌र्ट्स कॉलेज का तोहफा दिलाने का जो कार्य किया , वह बेहद सराहनीय है। खेल निदेशालय से कोच और पर्याप्त संसाधन मिलेंगे, जिससे खिलाड़ी प्रदेश व देश में अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे।  स्पो‌र्ट्स कॉलेज खुलने से खिलाड़ी ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स एशियाड एवं व‌र्ल्ड कप के लिए सही प्रशिक्षण के साथ मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे। बताते हैं  कि टेस्टिंग के बाद स्पो‌र्ट्स कॉलेज निर्माण का कार्य तेजी शुरू हो जाएगा।

>हुर्रे ! नए साल में होगा एक बार फिर फतेहपुर महोत्सव !

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नये साल 2011  के उपलक्ष्य में जनपदीय प्रशासन ने फतेहपुर जनपद वासियों को “फतेहपुर महोत्सव” का उपहार  दिया है। लगभग आठ साल बाद एक बार पुनः  “फतेहपुर महोत्सव” आयोजित होने जा रहा है। यह चार दिवसीय “फतेहपुर  महोत्सव” आईटीआई प्रांगण  में 28 जनवरी से शुरू होगा। कल शनिवार को जिलाधिकारी पी. गुरुप्रसाद ने  विकास भवन सभागार में मंत्रणा कर योजना को अंतिम रूप दिया।
संगीत, रंगकर्म या कला की किसी भी विधा में जिले में या जिले से बाहर फतेहपुर का गौरव बढ़ा रही शख्सियतों और माननीयों को महोत्सव में सादर आमंत्रित किया जायेगा। इसके अलावा एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन भी आयोजन होगा। हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव, लोक गायक मनोज तिवारी सहित अलग-अलग क्षेत्रों के कई  दिग्गज फतेहपुर महोत्सव की शान होंगे। 

31 जनवरी को समाप्त होने  वाले महोत्सव में दिन भर स्थानीय स्तर के कार्यक्रम होंगे। शाम छह बजे के बाद बड़े कार्यक्रमों का आयोजन होगा। महोत्सव की विशेषता यह होगी कि कार्यक्रमों का सीधा  प्रसारण भी शहर में होगा। स्मारिका तैयार कराये जाने के साथ पहचान के रूप में लोगो पर भी चिंतन  किया गया। एक विस्तृत पुस्तक मेला लगाये जाने पर भी चर्चा हुई। उधर क्रीड़ा स्टेडियम में कई खेल गतिविधियां भी आयोजित की जायेंगी ।

पूरे आयोजन को सुचारू और व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए अलग-अलग कमेटियां गठित की गयीं। यह कमेटियां व्यवस्था से लेकर मंच पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और उसके समय का नियमन और निर्धारण करेंगी। आयोजनों में स्थानीय स्कूल, स्थानीय कलाकारों को भी आमंत्रित किया जा रहा है, जो कि मंच पर अपने प्रदर्शन  का जलवा बिखेरेंगे। व्यवस्था की दृष्टि से मुख्य विकास अधिकारी  सीके पाण्डेय आयोजन समिति के अध्यक्ष होंगे। एडीएम अच्छेलाल, एसडीएम सदर रामचंद्र को गठित कमेटियों से वार्ता कर व्यवस्था को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी दी गयी। 
जल्द  ही फतेहपुर ब्लॉग पर भी इस सम्बन्ध में जानकारियाँ मिलते ही सूचना दी जाएगी।

>आचार्य हरनारायण जी महाराज :उठो जागो अपनी समीक्षा करो और विश्व कल्याण के लिए ध्वजा के वाहक बनो।

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प्रति-वर्ष होने वाले विशाल आयोजन का रूप ले चुके श्रीमद् भागवत प्रचार परिषद की ओर से हरि अमृत कथा का अष्टम आयोजन शनिवार दिनांक १८ दिसंबर २०१० से शहर के हाइडिल कालोनी मैदान में प्रारंभ हुआ। पिछले वर्षों की भांति इस बार भी समय निकाल कर मैं इस कथा में जाता रहा हूँ । कथा के पहले दिन आचार्य हरनारायण जी महाराज ने कहा कि प्रभु को अर्पित करने के लिए भक्त के पास अपना कुछ है ही नहीं जो कुछ है सब उसे परमेश्वर का ही तो दिया हुआ है। ऐसे में भक्त वंदना करते हुए कहता है कि हे भगवन तेरा तुझको अर्पण कर उसकी शरण में चला जाता है।
प्रभु और भगवान के बीच आस्था का सेतु होता है। इसी के द्वारा जीव ब्रह्म की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा के लिए पूजा दिखावटी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पवित्र मन हो छल कपट न हो नहीं तो आपके द्वारा की गयी पूजा व्यर्थ समझो। भगवत कथा का श्रवण करना ही सबसे बड़ा पुण्य कर्म है।

प्रभु की शरण तक पहुंचने के लिए भक्तों को आस्था के सेतु से होकर ही गुजरना होता है। भक्त के पास अपना ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे वह प्रभु के चरण कमलों में अर्पित कर सके। उन्होंने कहा कि भक्त वह है, जो समस्त प्राणियों का हितैषी है, जिसके मन में कभी यह भाव नहीं आता कि यह मेरा और तेरा है।
इसी प्रकार जो प्रत्येक प्राणी को सम्मान की दृष्टि से देखता है। किसी को छोटा या बड़ा नहीं समझता, सभी में ईश्वर के प्रकाश का अनुभव करता है, जो किसी से घृणा नहीं करता, ज्ञानी और शांतचित्त है, वही श्रेष्ठ भक्त है। जो मन, वाणी और अपने क्रियाकलापों द्वारा दूसरों को किसी प्रकार की पीड़ा नहीं पहुंचाता, जिसमें संग्रह का स्वभाव नहीं होता, जो सच्ची बात ग्रहण करने के लिए सदा तैयार रहता है, जिसकी बुद्धि सात्विक गुणों से युक्त है, वह सबसे उत्तम भक्त है।

जो माता-पिता की सेवा करता है, देवताओं की पूजा में लीन रहता है, अपने गुरुजनों को आदर देता है तथा असहाय, निर्धन और वृद्ध लोगों की सहायता करता है, वही सच्चा भक्त है। ज्ञानियों, संन्यासियों और सेवाभावियों की सेवा करता है और उन्हें आदर देता है, शत्रु और मित्र में समभाव रखता है, सर्वत्र गुणों को ग्रहण करता है, कभी भी अच्छे व्यवहार या किसी शुभ कार्य की न तो आलोचना करता है और न ही उसमें कोई बाधा उत्पन्न करता है, वह सर्वोत्तम भक्त है। सद्गुणी होना जिस व्यक्ति की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है, जो इस लोक में विनम्रता के साथ सेवा कार्य करता है, जो जीवों पर दया करता है और उत्तम कार्यों में सहयोगी बनता है, वह असली भक्त है।
भागवत कथा के पहले दिन आचार्य ने प्रभु व भक्त के बीच कैसे संपर्क बनता है विस्तृत रूप से कथा के माध्यम से बताया। कथा के पहले दिन ही भक्तों की काफी भीड़ रही। 
 
भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार दिनांक १९ दिसंबर २०१० को आचार्य ने भक्तों को विस्तृत रूप से कथा के माध्यम से बताया कि पहले अपने आपको देखो फिर कोई कदम उठाओ। दूसरे की ओर देखने से पहले अपने गिरहबान में झांक कर देखो। अपने अवगुण दूर करने के बाद ही दूसरे को नसीहत दो। अपने सुंदर आचरण से सामने वाले का दिल जीत लो।
आचार्य हरनारायण महाराज ने कहा कि हमारी मातृभूमि का अनुकरणीय इतिहास है। हमारे पूर्वजों ने अपने वचनों की रक्षा के लिए प्राणों तक का न्योछावर कर दिया है। आज जमाना बदल रहा है कथनी और करनी में अंतर आने लगा है।
मनुष्य को चाहिए कि वह स्वाध्याय में लगा रहे जिससे उसके चित्त में परिवर्तन आएगा। अध्ययन के बाद फिर स्वंय के आचरण की समीक्षा करें। इसके बाद आपके मन में सदगुण अवगुण स्पष्ट रुप से दिखने लगेंगे। आपका मार्ग स्वयं ही प्रशस्त होता जाएगा।जिनके जीवन में धर्म का प्रभाव है उनके जीवन में सारे सदगुण आ जाते हैं, उनका जीवन ऊँचा उठ जाता है, दूसरों के लिए उदाहरणस्वरुप बन जाता है ।

आप भी धर्म के अनुकूल आचरण करके अपना जीवन ऊँचा उठा सकते हो । फिर आपका जीवन भी दूसरों के लिए आदर्श बन जायेगा, जिससे प्रेरणा लेकर दूसरे भी अपना जीवन स्तर ऊँचा उठाने को उत्सुक हो जायेंगे । उठो जागो अपनी समीक्षा करो और विश्व कल्याण के लिए ध्वजा के वाहक बनो।

>कवि और साहित्यकार साहित्य भूषण पं. कृपा शंकर शुक्ल का निधन : एक परिचयात्मक श्रृद्धांजलि

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साहित्य भूषण से सम्मानित कवि और साहित्यकार ७८  वर्षीय पं. कृपा शंकर शुक्ल का निधन पिछले पखवारे हो  गया था । शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद साहित्यकार श्री शुक्ल ने 12 पुस्तकें लिखी  थी , जिसमें अन्त‌र्व्यथा, नारी, चालीस साल बाद, काशी की कविता, राष्ट्र के गीत, चुनल गीत प्रकाशित हुई।  श्री शुक्ल का निधन लखनऊ के ट्रामा सेंटर में दिल का दौरा पड़ जाने से पिछले शुक्रवार दिनांक ९ दिसंबर २०१० को सुबह हो गया था।

फतेहपुर  ब्लॉग परिवार की ओर से करबद्ध श्रृद्धांजलि !

 
भौतिक विज्ञान बढ़ा इतना कि  दौड़ मच गई पाने की, 
इच्छाऐं जागी जन जन में भौतिक सामान जुटाने की।
कैसी रीति यहां पर आई अपने को बड़ा दिखाने की…..
साठ बरस के बाद भी आजादी की करूण कहानी है…..
……आजादी के मूल्यों की मिटती जा रही निशानी है।

…… जैसी मर्मस्पर्शी पंक्तियां लिखने वाले साहित्यकार साहित्य भूषण कृपाशंकर शुक्ल का मानना था कि हमारे सामाजिक संबंधो में जो गिरावट आई वह हमारी संस्कृति और हमारे सामाजिक ढांचे की बुनियाद को खोखला कर रही है। आज साहित्य भी समाज में प्रखरता के साथ अपनी भूमिका निर्वाह नहीं कर पा रहा है। कारण कि साहित्य अपने संस्कार इसी समाज से ग्रहण करता है और समाज साहित्य का दर्पण है तो साहित्य वही दिखायेगा जो वहां घटित हो रहा है। हम पश्चिम की नकल करके अपने सामाजिक संबंधों की गरिमा और पारिवारिक परंपरा की महिमा को नहीं बचा पायेंगे। हम क्या थे और क्या हो गये। हमारी चेतना, जागरूकता और स्वाभिमान का स्तर यही रहा तो अभी और क्या होंगे। उनके मन में पुस्तक पठन के प्रति बढ़ रही अरूचि पर चिंता बहुत गहरे पैठी हुई थी उनका मानना था कि इससे संस्कार हीनता तो बढ़ ही रही है साथ ही समाज से न कुछ सीख पाते हैं न दे पाते है।

देश प्रेम के साथ समाज सेवा के लिये अपनी लेखनी चलाने वाले लेखक श्री शुक्ल का कहना था कि कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध आदि के माध्यम से अपनी अंर्तव्यथा को व्यक्त करता हूं। अपनी नव रचना “भारतीय समाज अतीत और वर्तमान” पुस्तक में उन्होंने हमारे समाज के बीते हुये समय और आज के समय को देख कर हुये बदलावों पर अपनी नजर डाली है। समाज की कमियों और भविष्य की संभावनाओं का सहज ही पता चलता है इस कृति को पढ़ते हुये। लेखक ने अपनी रचना में साहित्यक, शैक्षिक, वैज्ञानिक, तकनीकी, औद्योगिक और आर्थिक समृद्धि के प्राचीन राष्ट्रीय गौरव की अनेकानेक उपलब्धियों को उद्धृत करते हुये धीरे धीरे राष्ट्र के रसातल में पहुंचने और विचार शून्यता की स्थिति तक पहुंचने के हालातों तक नजर डाली है।

श्री कृपाशंकर शुक्ल जो कि एक अध्यापक रहे है और उसी गुरू दृष्टि से जब उन्होने इस देश समाज को देखा तो इसकी विद्रूपताओं से व्यथित हो उठे इसके बाद आकुल अंतर में जन्मी पीड़ा कलम से बह निकली। और जो कि साहित्य की लगभग हर विधा में बही। वह बताते है कि आकुल अंतर में जब-जब पीड़ा घनीभूत होती रही तभी कुछ न कुछ उमड़ पड़ा।

प्रदेश सरकार द्वारा साहित्य भूषण सम्मान से नवाजे जा चुके इस वरिष्ठं चिंतक ने, जिन्होने अध्यापन से अवकाश ग्रहण करने के बाद एक हिंदी पाक्षिक पत्रिका का संपादन, प्रकाशन कर भारत भारती की सेवा करते हुये साहित्य सृजन द्वारा समाज सेवा करने के साथ समाज को दिशा देने का कार्य स्वीकार कर अपने सरोकारों के प्रति अपनी लगन जताई। उन्होने ‘अंत‌र्व्यथा’, ‘नारी,काव्य संग्रह’ देने के साथ ‘काशी की कविता’, ‘राष्ट्र के प्रेम गीत’, ‘पूर्वाचल की माटी’, ‘चुनल गीत’ जिसमें भोजपुरी गीतों का संकलन है, आदि काव्य संकलनों का संपादन किया। ‘वैचारिकी’ नाम से निबंध संग्रह और ‘चालीस साल बाद’ नाम का लघु उपन्यास भी दिया। समाज के लिये सर्मपित ‘मैं और मेरा जीवन;’ जैसी रचनायें देकर साहित्य को समृद्घ किया है। 

>माटी से माटी का अभिनन्दन की तीसरी कड़ी : चित्रात्मक रिपोर्ट !

> अब तक आप  थोड़ी देर से पेश की गयी रिपोर्ट पढ़ चुके होंगे ! कुछ और चित्र और मिल सकें हैं ….उन्हें यहाँ चिपका रहा हूँ |

( जब  मैं कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा तो विवरण बैनर टंगा हुआ था और मंच पर पसरा था  सन्नाटा )

( कार्यक्रम के प्रारम्भ में खुश्वक्त राय आर्य शिक्षालय के बच्चियां सरस्वती वंदना प्रस्तुत करते हुए , बगल में फतेहपुर फोरम के उपाध्यक्ष महेश चन्द्र तिवारी और कार्यक्रम  की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए  साहित्यकार धनञ्जय अवस्थी और पूर्व विधायक प्रेमदत्त तिवारी  )

( उपस्थित सम्मानानीयों का स्वागत करती बच्चियां )

( दाहिने से ध्यानमग्न विशांत प्रकाश , संध्या सिंह , श्री सिन्हा  , कर्नल विभय मान सिंह , श्री तेज प्रकाश श्रीवास्तव , उत्तम  तिवारी , अजय सचान और अन्य )
( सम्मानित जनों के पारिवारिक गण )

(स्क्वाड्रन लीडर तेज प्रकाश श्रीवास्तव को प्रतीक चिन्ह और अंगवस्त्रम देकर सम्मानित करते हुए महेश कान्त त्रिपाठी , सुधाकर अवस्थी और अन्य )

( पुनः प्रारम्भ हुई सैनिक भर्ती जैसी उपलब्धि पर कर्नल विभय मान सिंह का पगड़ी पहना कर विशेष सम्मान किया गया )

(प्रताक चिन्ह और अंगवस्त्रम के साथ सम्मानित किये गए सिन्हा जी )

(कार्यकम के मध्य समारोह में सहभाग कर रहे सजे धजे बच्चे …..जो अपने गुजरे हुए कल और आने वाले कल को ध्यानमग्न होकर देखते हुए )

( न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रृद्धा त्रिपाठी को भी सम्मानित  किया गया )

( डा. प्रकाश चंद्र हितकारी को सम्मानित किया गया )

(जनमानस के समक्ष बैठे  बाहर से आये फतेहपुरिया )

((मंच पर बैठे  मनोज पटेल , पंकज सिंह , अजय सचान और अन्य ))

( स्नेहमयी  फूलों की डोरी में  बंधे गए आगंतुक ; अब बच कर ना जा पायेंगे| दाहिने से क्रमशः महेश चन्द्र तिवारी , शैलेन्द्र सिंह परिहार , कन्हैया लाल द्विवेदी , उत्तम तिवारी , विभय मान सिंह , तेज प्रकाश श्रीवास्तव , और स्वामी विज्ञानन्द जी महाराज ; पीछे दाहिने से रविकांत मिश्र , सुधाकर अवस्थी और अन्य )

( कार्यक्रम के समापन पर ओम घाट और कल कल करती गंगा की अविरल धारा की मनोहारी छटा )

अब दीजिए मुझको इजाजत !
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प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI   

 

>माटी से माटी का अभिनन्दन की तीसरी कड़ी में किया गया सम्मान : देर से पेश एक रिपोर्ट

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पिछले ५ दिसंबर २०१० को भिटौरा के ओम घाट में उस दृश्य का नजारा देखने लायक था , जिसमें इसी माटी में खेल व पढ़कर देश और दुनियां में नाम रोशन करने वाली विभूतियां अपने ही लोगों से मिली  और इस माटी का कर्ज कैसे चुकायें इस पर भी चर्चा करती रहीं । खास बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुलंदियों को छूने वाले यह महानुभाव नई पीढ़ी से रूबरू होकर उन्हें आगे बढ़ने की सीख ही नहीं बल्कि उनका हाथ थामकर कुछ कर दिखाने का जज्बा भी देते रहे।

(सम्मानित माटी के लाल)
जनपद के गौरवशाली व्यक्तित्व अलंकरण समारोह की तीसरी कड़ी में जनपद की उन महान विभूतियों का सम्मान किया गया जो जिले के बाहर रहकर यहां की माटी का मान बढ़ा रहे हैं। इनमें शासकीय सेवा, व्यवसाय, खेल, मीडिया व अन्य क्षेत्र में उल्लेखनीय मुकाम हासिल किये लोगों के नाम शामिल हैं। जिले की मिंट्टी में जन्में यह लोग बाहर रहकर भी यहां के लिये कुछ न कुछ करना चाहते हैं यही उनकी इच्छा है। भिटौरा के ओम्घाट-पंट्टी विट्ठलपुर सहिमापुर में हुए अलंकरण समारोह में आयी जनपद की इन हस्तियों ने एक दूसरे के हालचाल लिये। यह सभी एक मंच पर एकत्र होकर अपनी जन्म भूमि के प्रति दिल खोलकर कार्य करने की घोषणा की। अपनी जन्म भूमि की माटी से मिलने के लिए समारोह में आये उसके लाल एक दूसरे से मिले तो यादों में खो गये। कुछ तो पहली बार एक दूसरे से मिल रहे थे। कार्यक्रम में आयी विभूतियों ने कहा कि वह जितना हो सकेगा फतेहपुर जिले का नाम रोशन के लिए कुछ विशेष करते रहेंगे। 
(समानित जनो के साथ स्वामी विज्ञानन्द जी)
स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती जी की अगुवाई में आयोजित समारोह में सम्मान पाने वालों में सीईओ ग्रुप कैप्टन निम्स फ्लाइंग एकाडमी दिल्ली कर्नल तेज प्रकाश श्रीवास्तव, मध्य कमान भारतीय सेना लखनऊ कर्नल विभय मान सिंह, आईएएस दिल्ली पंकज कुमार, डिप्टी डायरेक्टर एनएसओ गवर्नमेंट आफ इंडिया दिल्ली संध्या सिंह, सहायक कमिश्नर कस्टम दिल्ली मनोज कुमार पटेल, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रद्धा त्रिपाठी, एडीजे आगरा सीएल वर्मा, एडीजे शाहजहांपुर दिनेश चंद्र सैनी, शैलेंन्द्र सिंह परिहार आईएएस, अरविन्द कुमार द्विवेदी डायरेक्टर हैंडीकैप्ड , अरुण देव सिंह गौतम आईजी छत्तीसगढ़ को प्रतीक चिह्न व शाल  ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा सम्मान पाने वालों में कन्हैयालाल द्विवेदी सेवानिवृत्त श्रमायुक्त,  डा. प्रकाश चंद्र हितकारी, टीएन शुक्ला, गोविन्द दुबे प्रभारी दैनिक जागरण बांदा, अंतर्राष्टीय टेनिस बाल क्रिकेट खिलाड़ी रविकांत आदि रहे। इस मौके पर समारोह की अध्यक्षता संयुक्त रूप से वरिष्ट साहित्यकार धनंजय अवस्थी एवं पूर्व विधायक  प्रेमदत्त तिवारी द्वारा की गयी।
इस मौके पर जिले में मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुकी ससुरखदेरी नदी को स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती की अगुवाई में जिले की हस्तियां नया जीवन देने का निर्णय लिया गया । भिटौरा में गंगा नदी के किनारे ओमघाट पर रविवार दिनांक ५ दिसंबर २०१०   को माटी से माटी का अभिनंदन समारोह में जिले की विभूतियों ने संकल्प लिया कि यह नदी फिर कलकल करती बहेगी। 
ससुर खदेरी नदी जनपद के सिठौरा गांव से निकलकर यमुना में मिलती थी। अब सिठौरा से लेकर बड़नपुर तक इसका अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। नदी की जमीन पर किसान कब्जा कर खेती कर रहे हैं। स्वामी जी ने कहा बड़नपुर के आगे नदी को जीवित रखने के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसमें नदी की खुदाई, किनारे पौधरोपण जैसे कार्य किये जायेंगे। इस कार्य के लिए स्वामी जी ने स्वयं दो ट्रैक्टर और एक छोटी जेसीबी मशीन देने की घोषणा की। साथ ही मंच पर विराजमान विभूतियों से भी सहयोग मांगा कि यदि सभी का थोड़ा-थोड़ा भी सहयोग मिलेगा तो हम अपने मिशन में कामयाब हो सकेंगे। दो उद्यमियों ने खुदाई में आर्थिक मदद की घोषणा मंच से की। इस अभियान की कमान स्वामी जी ने रामआसरे प्रजापति को सौंपी।
इसके अलावा स्वामी जी ने सम्मान समारोह का आयोजन करने वाले फतेहपुर  फोरम द्वारा  लिये गये एक और फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनपद के युवाओं की सुविधा के लिए सभी तेरह विकास खंडों में सैनिक प्रशिक्षण केंद्र खोला जायेगा। स्वामी जी की इस अपील पर वहां लोगों ने समर्थन करने के साथ आर्थिक सहयोग देने का वादा किया। 
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