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बारिश के लिए अब एक-एक दिन का इंतजार वर्षो का लग रहा है। जैसा कि उम्मीद थी कि तीन दिन से जिस तरह की उमस है बारिश होगी। शुक्रवार को कुछ मौसम का मिजाज भी बदला। तेज धूप धुंधली हुई और बदली के भी कुछ आसार दिखे। चेहरों में कुछ खुशियां आयीं कि बारिश होगी, लेकिन शाम तक न तो बारिश हुई और न ही उमस कम हुई। बच्चों से बड़ों तक को रुलाने वाली गर्मी कब थमेगी अब सबके मुंह से यही निकल रहा है कि प्रकृति का कहर तो जीने नहीं दे रहा है। बड़े-बड़े जब गर्मी से बेहाल हैं ऐसे में कुछ अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोल दिये गये हैं। मासूम बच्चे उमस के बीच कक्षाओं में पढ़ाई की और जब छुट्टी हुई तो घर पहुंचने में उनके चेहरे लाल हो गये। अभिभावकों ने मांग किया कि इस तरह की गर्मी में स्कूल बन्द कर दिये जायें। स्कूल के रिक्शे से जाते बच्चों को देखकर लोग यही कहते रहे कि अरे मासूमों पर तो रहम करें। इस तरह में पढ़ाई क्या होगी। स्कूलों की नाटकबाजी है। जब जून माह ग्रीष्मावकाश का है तो बीच में स्कूल कैसे खोल दिये गये।
स्टेशन में सुविधाओं में बढ़ोत्तरी हो रही है। जब से स्टेशन की श्रेणी उच्चीकृत करने का फैसला हुआ है तब से सुविधाएं बढ़ रही हैं। डिस्प्ले स्क्रीन की सुविधा मिल जाने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। रेलवे सूत्रों ने बताया कि तीनों प्लेटफार्म और यात्री प्रतीक्षालय में यह सूचना पट्टिकाएं लगायी गयी हैं जिससे कि यात्री जहां खड़े हैं वहीं पर अपनी सवारी गाड़ी की तात्कालिक स्थिति जान सकें। इन सूचना पट्टिकाओं में उन सभी ट्रेनों की लोकेशन की जानकारी लगातार यात्रियों को दी जाती रहेगी।
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फतेहपुर मुख्यालय से पंद्रह किमी दूर दिशा में बसोहनी गांव के मनोज कुमार ने कक्षा पांच तक की शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से हासिल किया। जूनियर तक की शिक्षा एचएन बहुगुणा इण्टर कालेज हुसेनगंज से प्राप्त की। इसके बाद एएस इण्टर कालेज फतेहपुर से हाईस्कूल, अशोक इण्टर कालेज शाखा से इण्टर (कृषि) उत्तीर्ण किया। चन्द्रशेखर कृषि विश्वविद्यालय कानपुर से स्नातक व परास्नातक की डिग्री हासिल की। साधारण कृषक परिवार में जन्मे मनोज कुमार को शुरू से ही शिक्षण कार्य में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। 1999 बैच में लोवर पीसीएस में चयन हो गया और 2002 में सचिवालय लखनऊ में समीक्षा अधिकारी के पद पर नियुक्ति हो गयी। नौकरी के दौरान ही मनोज कुमार ने लगन और मेहनत से पढ़ाई की। 2002 में पीसीएस में चयन हो गया जिसमें सेल टैक्स अधिकारी बांदा व चित्रकूट कार्यालय में कार्यरत रहे। वर्तमान में प्रशिक्षण केन्द्र लखनऊ में तैनात हैं।
भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन पर खुशी जाहिर करते हुए मनोज कुमार कहते हैं कि बसोहनी के ही सुभाष कुमार के आईएएस में आने के बाद परिवार व रिश्तेदार सभी उसे भी आईएएस बनने के लिए प्रेरित करने लगे और यही हौसला उसकी सफलता का आधार बन गया। मनोज कहते हैं कि भारतीय प्रशासनिक सेवा जैसे पद में जनता की सेवा का मौका मिलता है।
(समाचार साभार – दैनिक जागरण)