>राष्ट्रकुल खेलों की बेटन रिले में जिले के दो खिलाड़ियों को हिस्सा लेने का मौका

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इसे फतेहपुर जिले का सौभाग्य ही कहेंगे कि राष्ट्रकुल खेलों की क्वींस बेटन रिले में जिले के दो होनहार खिलाड़ियों को बनारस में हिस्सा लेने का मौका मिला है। दोनों खिलाड़ियों को कामन वेल्थ यूथ गेम कार्यालय पुणे से बुलावा आया है। 

(खिलाड़ी रविकांत मिश्रा)
कामन वेल्थ यूथ गेम कार्यालय पुणे से शहर के सिविल लाइन निवासी अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी रविकांत मिश्रा और राष्ट्रीय खिलाड़ी विवेक कुमार कुशवाहा को लखनऊ, रायबरेली और बनारस में होने वाली बेटन रिले में किसी एक शहर में हिस्सा लेने का अवसर मिला है जिसमें दोनों खिलाड़ियों ने बनारस पहुंचकर जिले का नाम रोशन करने का निर्णय लिया है। बताते चलें कि 15 अगस्त 2008 में फतेहपुर में आयोजित कामन वेल्थ यूथ बैटन रिले में खिलाड़ी रविकांत मिश्रा ने बतौर डिस्ट्रिक कोआर्डिनेटर के रूप में हिस्सा लिया था। बेटन रिले में इन दो खिलाड़ियों का हिस्सा लेना बेहद गौरव की बात है।

उमस के बीच बदली आयी, सूर्य की रोशनी भी कुछ धीमी हुई, लेकिन बारिश नहीं हुई।

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उमस के बीच बदली आयी, सूर्य की रोशनी भी कुछ धीमी हुई, लेकिन बारिश नहीं हुई। दिनभर सभी की निगाहें इन्द्रदेव पर टिकी रहीं कि शायद रहम हो जाये और अषाढ़ की झमाझम बारिश हो जाये। शुक्रवार को भी उमसभरी गर्मी कम नहीं हुई। बेहाली के आलम के बीच स्थिति यह रही कि कुछ अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खुले और आग उगलती धूप में बच्चे पढ़ने गये।


बारिश के लिए अब एक-एक दिन का इंतजार वर्षो का लग रहा है। जैसा कि उम्मीद थी कि तीन दिन से जिस तरह की उमस है बारिश होगी। शुक्रवार को कुछ मौसम का मिजाज भी बदला। तेज धूप धुंधली हुई और बदली के भी कुछ आसार दिखे। चेहरों में कुछ खुशियां आयीं कि बारिश होगी, लेकिन शाम तक न तो बारिश हुई और न ही उमस कम हुई। बच्चों से बड़ों तक को रुलाने वाली गर्मी कब थमेगी अब सबके मुंह से यही निकल रहा है कि प्रकृति का कहर तो जीने नहीं दे रहा है। बड़े-बड़े जब गर्मी से बेहाल हैं ऐसे में कुछ अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोल दिये गये हैं। मासूम बच्चे उमस के बीच कक्षाओं में पढ़ाई की और जब छुट्टी हुई तो घर पहुंचने में उनके चेहरे लाल हो गये। अभिभावकों ने मांग किया कि इस तरह की गर्मी में स्कूल बन्द कर दिये जायें। स्कूल के रिक्शे से जाते बच्चों को देखकर लोग यही कहते रहे कि अरे मासूमों पर तो रहम करें। इस तरह में पढ़ाई क्या होगी। स्कूलों की नाटकबाजी है। जब जून माह ग्रीष्मावकाश का है तो बीच में स्कूल कैसे खोल दिये गये।

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फतेहपुर:बार-बार पूंछताछ कक्ष की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी

रेलवे स्टेशन में यात्रियों को अब अपनी गाड़ी की तात्कालिक स्थिति जानने के लिये बार-बार पूंछताछ कक्ष की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। प्लेटफार्मों में लगायी गयी डिस्प्ले स्क्रीन में सब कुछ लिखकर नजर आता रहेगा।

स्टेशन में सुविधाओं में बढ़ोत्तरी हो रही है। जब से स्टेशन की श्रेणी उच्चीकृत करने का फैसला हुआ है तब से सुविधाएं बढ़ रही हैं। डिस्प्ले स्क्रीन की सुविधा मिल जाने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। रेलवे सूत्रों ने बताया कि तीनों प्लेटफार्म और यात्री प्रतीक्षालय में यह सूचना पट्टिकाएं लगायी गयी हैं जिससे कि यात्री जहां खड़े हैं वहीं पर अपनी सवारी गाड़ी की तात्कालिक स्थिति जान सकें। इन सूचना पट्टिकाओं में उन सभी ट्रेनों की लोकेशन की जानकारी लगातार यात्रियों को दी जाती रहेगी।

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आर्थिक तंगी के बीच प्रशासनिक सेवा में 561वीं रैंक हासिल

मेधा किसी की मोहताज नहीं है। बसोहनी के मनोज कुमार ने यही करके दिखाया। आर्थिक तंगी के बीच बड़े किसान भाई ने इनके हौसले को बनाये रखा तभी तो वर्ष 1999 में लोवर पीसीएस, 2002 में पीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। आईएएस बनने का हौसला बना रहा और नौकरी के दौरान ही पढ़ाई करके 2008 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में 561वीं रैंक हासिल किया।

फतेहपुर मुख्यालय से पंद्रह किमी दूर दिशा में बसोहनी गांव के मनोज कुमार ने कक्षा पांच तक की शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से हासिल किया। जूनियर तक की शिक्षा एचएन बहुगुणा इण्टर कालेज हुसेनगंज से प्राप्त की। इसके बाद एएस इण्टर कालेज फतेहपुर से हाईस्कूल, अशोक इण्टर कालेज शाखा से इण्टर (कृषि) उत्तीर्ण किया। चन्द्रशेखर कृषि विश्वविद्यालय कानपुर से स्नातक व परास्नातक की डिग्री हासिल की। साधारण कृषक परिवार में जन्मे मनोज कुमार को शुरू से ही शिक्षण कार्य में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। 1999 बैच में लोवर पीसीएस में चयन हो गया और 2002 में सचिवालय लखनऊ में समीक्षा अधिकारी के पद पर नियुक्ति हो गयी। नौकरी के दौरान ही मनोज कुमार ने लगन और मेहनत से पढ़ाई की। 2002 में पीसीएस में चयन हो गया जिसमें सेल टैक्स अधिकारी बांदा व चित्रकूट कार्यालय में कार्यरत रहे। वर्तमान में प्रशिक्षण केन्द्र लखनऊ में तैनात हैं।

भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन पर खुशी जाहिर करते हुए मनोज कुमार कहते हैं कि बसोहनी के ही सुभाष कुमार के आईएएस में आने के बाद परिवार व रिश्तेदार सभी उसे भी आईएएस बनने के लिए प्रेरित करने लगे और यही हौसला उसकी सफलता का आधार बन गया। मनोज कहते हैं कि भारतीय प्रशासनिक सेवा जैसे पद में जनता की सेवा का मौका मिलता है।

(समाचार साभारदैनिक जागरण)

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