गंगा के तट पर मोहन की बावरी मीरा ने अपने प्यारे कन्हैया की मूर्ति स्थापित की थी । शिवराजपुर के इस पावन स्थल पर कृष्ण भक्ति में लीन में मीरा काफी दिनों तक रुकी थी और अपने साथ लिए हुए गिरधर गोपाल की मूर्ति को उन्होंने रख दिया था । जब मीरा यहाँ से जाने लगी तो उन्होंने मूर्ति को साथ ले जाने का प्रयास किया , लेकिन जब मूर्ति अपने स्थान से नहीं उठी तो मीरा ने गंगा के इस तट पर गिरधर गोपाल की मूर्ति स्थापित कर कृष्ण – गान करते हुए चली गयी । गिरधर गोपाल का इस स्थान पर विशाल मन्दिर बना है और देश के कुछ शोधार्थी इस मूर्ति व स्थान पर शोध कर रहे हैं । प्रति वर्ष यहाँ सात दिनों तक चलने वाला मेला लगता है ।