>परचून की दुकान चलाने वाले का बेटा यूपी टॉपर

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उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इन्टरमीडिएट 2010 का परीक्षाफल गुरुवार को घोषित कर दिया। इस परीक्षा में कुल 80.54 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण घोषित किये गये हैं। परीक्षा में फतेहपुर के नवदीप कुमार ने 93.40 प्रतिशत अंक अर्जित कर नया इतिहास रच दिया। नवदीप ने प्रदेश भर में अव्वल रह सर्वोच्च स्थान हासिल किया।
परिषद ने इस साल परीक्षा व मूल्यांकन प्रणाली में कई बदलाव किये थे। सीबीएसई व आईसीएसई के मुकाबले उप्र बोर्ड के छात्र प्राप्तांकों में मुकाबला कर सकें, इसके लिए इस बार स्टेप मार्किग लागू की गई थी। माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने खुद मोर्चा संभाला था। इसका असर परीक्षा परिणाम पर देखने को मिला।
इस बार प्रदेश भर में सर्वोच्च स्थान हासिल करने वाले फतेहपुर के नवदीप कुमार को 93.40 प्रतिशत (466/500) अंक मिले हैं। यह पिछले वर्ष प्रदेश में टाप करने वाले छात्र के मुकाबले चार प्रतिशत अधिक है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पिछले साल की तरह इस बार भी मेरिट सूची जारी नहीं की है।
परचून की दुकान चलाने वाले का बेटा यूपी टॉपर
इसे कहते हैं इतिहास रचना। निरक्षर मां और परचून की दुकान चलाने वाले पिता का बेटा नवदीप गुप्ता मेधा के आसमान पर सितारा बन चमक उठा। यूपी बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में 93.4 प्रतिशत अंक हासिल कर उसने उत्तार प्रदेश टॉप किया है। 
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फतेहपुर के राधानगर मोहल्ले में परचून की दुकान लगाने वाले पिता कैलाश चंद्र गुप्त और माता मिथलेश कुमारी के त्याग को महत्वपूर्ण मानने वाले इस प्रतिभाशाली छात्र ने कहा कि कंप्यूटर ने मेरी रैंक बढ़ा दी। अब तमन्ना है कि इसी विषय के साथ इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करूं। नवदीप का बीटेक करने के बाद कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर आइएएस बनने का इरादा है। प्रतिदिन कुल तीन चार घंटे घर में पढ़ाई करना और क्रिकेट देखने के इस शौकीन नवदीप का मानना है कि स्वस्थ मनोरंजन होते रहने से नई उर्जा मिलती है। देश में भ्रष्टाचार को विकास की सबसे बड़ी बाधा मानने वाले इस मेधावी ने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में युवाओं को आगे आना चाहिये।
शिक्षकों ने गले लगाया
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में गुरुवार को खुशी का माहौल देखते ही बना। नवदीप को सभी शिक्षक और प्रबंध कमेटी के पदाधिकारी गले लगाए रहे। प्रदेश में टापर बनने की सूचना जैसे ही टीवी चैनलों में प्रसारित हुई, वैसे ही सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में भीड़ एकत्र होने लगी। देखते ही देखते एक-एक करके सभी जमा हो गए। इसके बाद कालेज के हीरो नवदीप को लाने के लिए एसी कार भेजी गई। नवदीप अपने दोस्तों के साथ कालेज पहुंचा। इसके बाद मिठाई खाने-खिलाने का सिलसिला शुरू हुआ। 
इस मौके पर प्रबंध समिति के अध्यक्ष ने डा. देवाशीष चौधरी ने खुशी से गदगद होकर टापर छात्र को पुरस्कार देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बच्चे को पढ़ने वाले आचार्यगणों को भी चिह्नित करके पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना की।  नवदीप के अलावा अन्य कुछ बच्चों ने भी अपनी मेधा का प्रदर्शन किया है।

>फतेहपुर :शादीपुर चौराहे तक बढ़गी रेलवे प्लेटफार्म नंबर एक की लंबाई

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फतेहपुर के रेलवे स्टेशन में सोमवार को मुख्य परिचालन प्रबंधक (सीओएम) यूके सिंह ने रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। उन्होंने स्टेशन में यात्री सुविधाएं बढाए  जाने पर जोर दिया और कहा अब प्लेटफार्म नंबर एक की लंबाई भी शादीपुर चौराहे तक प्लेटफार्म संख्या दो के बराबर की जाएगी। काम में हीलाहवाली के चलते कई अधिकारियों को डांट  खानी पड़। उन्होंने कहा कि स्टेशन को आकर्षक और स्वच्छ बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोडी  जाएगी।

अधिकारियों ने  प्लेटफार्म एक पर निर्माणाधीन प्रतीक्षालय के औचित्य पर सवालिया निशान उठाए। कहा कि एकांत में प्रतीक्षालय यात्रियों के लिए सुलभ नहीं रहेगा। प्लेटफार्म एक की लंबाई बढ़ने के लिए तत्काल कार्रवाई शुरु करने का निर्देश दिया। अभी प्लेटफार्म एक की लंबाई पूर्वी दिशा में तो हरिहरगंज क्रासिंग तक है लेकिन पश्चिम में आरपीएफ चौकी तक ही निर्मित है। 
इसी के साथ  मुख्य गेट के बगल में लगे एसबीआई(SBI) के एटीएम को  हटा कर साइड में करने का आदेश दिया। कई महीने से ध्वस्त पडी  सड़क को लेकर एईएन से निर्माण में देरी की वजह जानी। इसके अलावा प्लेटफार्म की ऊंचाई बढाने , ट्रैक पर बनी नाली की जाली हटाने समेत केलिए भी दिशा निर्देश दिए। निरीक्षण से संतुष्ट दिखे सीएमओ ने कहा कि थोड़ बहुत मिली खामियों को अविलंब दूर कर लिया जाएगा। 

>….अब तो सब रिवाल्वर ही मांग कर रहे हैं। …फ़ुरसतिया जी की माया है

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फतेहपुर जिले का हर तीसरा व्यक्ति संगीनों के साये में रहना चाहता है। तभी तो समस्याओं की कम शस्त्र लाइसेंस चाहिए इसके ज्यादा आवेदन जमा हो रहे हैं। सिफारिशें भी कम नहीं मंत्री हों विधायक या फिर नौकरशाह कहीं न कहीं से जुगाड़ लगाकर असलहा हो जाये इसके लिए उन्हें माध्यम बनाया जाता है।

 

gun001डीएम साहब विकास कार्य कर रहे हैं या नहीं इससे किसी का वास्ता नहीं रहता बस यही पता करते रहते हैं कि लाइसेंस कर रहे हैं या नहीं। यूं तो जिले में पिछले दो वर्षो से लाइसेंसों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ है।

ऐसे जिलाधिकारी आये कि जिन्होंने इस सोच पर काम किया कि असलहों की संख्या बाइस हजार जिले की आबादी को देखते हुए कम नहीं है। ऐसा नहीं है कि इधर आये जिलाधिकारियों ने एक भी लाइसेंस न किया हो।

 

gun002 शस्त्र लाइसेंस में बंदूक, रायफल का रिवाज खत्म हो गया है अब तो सब रिवाल्वर की ही मांग कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यह सब फ़ुरसतिया जी के द्वारा इतने अच्छे बनाए रिवाल्वर के कारण ही हो रहा है |

जिस तरह से शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र लाइसेंस के लिए आवेदक आते हैं उससे यह साबित होता है कि शस्त्र लाइसेंस सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि स्टेटस सिम्बल व समाज में हनक बनाने के लिए लिया जा रहा है। मुझे लगता है कि फतेहपुर के विकास के लिए समर्पित फतेहपुर फोरम  से जुड़े हुए लोगों के लिए भी यह कम बड़ी चुनौती ना होगी |

मेरे प्यारे-प्यारे-प्यारे-प्यारे और बेहद प्यारे दोस्तों………

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मैं भूत बोल रहा हूँ……….!!
मेरे प्यारे-प्यारे-प्यारे-प्यारे और बेहद प्यारे दोस्तों………
आप सबको इस भूतनाथ का बेहद ह्रदय भरा प्रेम………दोस्तों पिछले समय में मुझे मिले कईयों आमंत्रणों में में मैंने कुछ आमंत्रणों को स्वीकार कर अनेक ब्लॉग में लिख रहा था…..बेशक एक ही आलेख हरेक ब्लॉग में होता था….आज अपनी एक ब्लागर मित्र की आज्ञा या यूँ कहूँ कि एक प्यारी-सी राय मान कर अपने को आज से सिर्फ़ एकाध ब्लाग में सीमित किए दे रहा हूँ…ये ब्लॉग कम्युनिटी ब्लोगों में “कबीरा खड़ा बाज़ार में”,”रांची-हल्ला” और मेरा ख़ुद का एक मात्र निजी ब्लॉग “बात पुरानी है” तक ही सीमित रहेंगे….!!
बाकी ब्लॉगों के सम्पादकों से मेरा अनुरोध हैं….कि मेरा यह अनुरोध शीघ्रता-पूर्वक स्वीकारते हुए मुझे तुंरत अपने ब्लॉगों से हटा दें…..इतनी जगहों पर एक आलेख भी चस्पां कर पाने में मैं ख़ुद को असमर्थ पाता हूँ….हाँ,इतने दिनों तक मुझे आदर और प्रेम देने के लिए मैं तमाम सम्पादकों का आभारी हूँ….आगे के लिए मुझे क्षमा किया जाए….भूतनाथ अब ख़ास तौर पर “बात पुरानी है !!” पर ही पाया जाएगा…..वैसे भी भूतों के लिए पुराना होकर “गया-बीता” हो जन ही उचित होता है…..तो दोस्तों आप सबको मेरे प्रेम के साथ ऊपर बताये गए ब्लॉगों से मेरी विदा…..एक स्नेहिल ह्रदय आत्मा……..भूतनाथ
हरकीरत जी आपकी इस प्रेम भरी राय के लिए मैं आपका भी शुक्रिया अदा करता हूँ….दरअसल मैं ख़ुद भी यही करना चाह रहा था….मगर कुछ प्रेमियों के प्रेम के कारण ऐसा कर नहीं पा रहा था….आज आपकी आज्ञा से ये मैं कर रहा हूँ…………………आपको भी धन्यवाद……!!
एक बात आपसे और कहूँ….अभी मुझे भूतनाथ ही रहने दें…..इसके पीछे कोई बात है…..जो मैं बाद में सबको बता पाउँगा…..आज आखिरी बार मैं सभी ब्लॉगों पर दिखायी दूंगा…..!!कल से सिर्फ़ अपने ब्लाग एवं दो कम्युनिटी ब्लॉगों पर ही रहूंगा…..मुझसे कोई गलती हुई हो तो मैं तहे-दिल से खेद प्रकट करता हूँ….और सबसे क्षमा माँगता हूँ…..!!

धन्यवाद……आपका भूतनाथ….!!


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कृपया मुझे इस ब्लॉग से हटा दिया जाए….क्यों कि इस ब्लॉग के लिए उपयुक्त सामग्री मेरे पास नहीं है…. धन्यवाद……आपका भूतनाथ….!!

ऐ भारत !! चल उठ ना मेरे यार !!

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ऐ भारत !! चल उठ ना मेरे यार !!


“ए भारत ! उठ ना यार !! देख मैं तेरा लंगोटिया यार भूत बोल रहा हूँ…..!!यार मैं कब से तुझे पुकार रहा हूँ….तुझे सुनाई नहीं देता क्या….??”
“यार तू आदमी है कि घनचक्कर !! मैं कब से तुझे पुकार रहा हूँ….और तू है कि मेरी बात का जवाब ही नहीं देता…!!”
“अरे यार जवाब नहीं देता, मत दे !! मगर उठ तो जा मेरे यार !! कुछ तो बोल मेरे यार….!!”
“देख यार,हर बात की एक हद होती है…या तो तू सीधी तरह उठ जा,या फिर मैं चलता हूँ….तुझे उठाते-उठाते मैं तो थक गया यार….!!”
“हाँ,देख मेरे चलने का उपक्रम करते ही कैसा करवट लेने लगा है तू….अबे तू सीधी तरह क्यूँ नहीं उठ जाता है मेरे यार….बरसों से मैं तुझे जगा रहा हूँ….सदियों से मेरे और भी दोस्त तुझे उठाते-उठाते खुद ही उठ गए….!!…मगर तू है कि तुझ पर जैसे कोई असर ही नहीं होता…..क्यों बे तूने ये ऐसी-कैसी मगरमच्छ की खाल पायी है….??”
“मेरे दोस्त !! तुझसे बातें करना मुझे बड़ा अच्छा लगता है,इसीलिए तो बार-बार तेरे पास आ जाता हूँ मैं….और तू है कि इतना भाव देता है कि गुस्से से मेरी कनपटी तमतमा जाती हैं..देख मेरे जैसा प्रेमी तुझे कहीं नहीं मिलने वाला,और ज्यादा भाव मारेगा ना तो मुझे भी खो बैठेगा तू….!!”
“अरे…!! ये क्या….!! तेरी तो आखें डबडबा आयीं हैं….!! अरे यार,क्या हुआ तुझे….??अरे कम-से-कम मुझे तो कुछ बता मेरे यार !!”
“ओ…!! तो ये बात है !! यार यह तो कब से ही जानता हूँ….मगर यार मेरा बस ही कहाँ चल पाता है तेरे परिवार पर….तेरी संतानों पर !!…कहने को मैं भी एक तरह से तेरी संतानों में से ही एक हूँ…इतना चाहता है तू मुझे…!! उसके बाद भी तेरे परिवार के विषय में…तेरी पारिवारिक समस्याओं के विषय में कुछ कर ही नहीं पाता मैं…यार मैं क्या भी क्या करूँ, तेरे तमाम बच्चे इतने ज्यादा उच्च-श्रंखल हैं कि मेरा तनिक भी बस उनपर नहीं चल पाता…बल्कि वो मुझसे ऐसे किनाराकसी करते हैं कि जैसे मुझे पहचानते ही नहीं..जैसे मैं उनका कोई नहीं !!”
“क्या कहा,मैं अपनी पूरी ताकत से चेष्टा नहीं करता….??नहीं मेरे यार पूरी कोशिश करता हूँ….अब किसी से लड़-झगड़ थोडी ना सकता हूँ….अगर ऐसा करूँ तो मेरे दिन-रात…और यह सारी जिंदगी लड़ने-झगड़ने में ही ख़त्म हो जाये….मैं क्या करूँ यार…तेरे बच्चे ही बड़े अभिमानी,चालक,धूर्त,मक्कार,लालची और व्यभिचारी है…!!”
“नहीं यार !! मैं तेरे बच्चों को धिक्कार नहीं रहा…तेरा दोस्त हूँ मैं…तुझे वस्तु-स्थिति से मैं ही अवगत नहीं कराउंगा तो भला कौन कराएगा…??”
“देख !! इसमें ऐसा कोई क्रोधित होने की बात भी नहीं है…अपने परिवार के बारे में ऐसा कुछ सुनकर सभी को कष्ट होता है….वैसे यार मैं तेरे गुस्से का तनिक भी बुरा नहीं मानता मेरे यार…!! मैं तो तेरा प्रेमी हूँ और इस जन्म की आखिरी सांस तक तुझ से चिपका रहूंगा…..बल्कि बार-बार तेरे घर में ही जन्म लूँगा….!!
“हाँ एक बात और….वो यह कि मेरा तुझसे यह वादा है कि मैं कभी किसी जन्म में भी असल में तो क्या, सपने में भी तेरा मान-मर्दन करने या तेरी धन-संपत्ति लूटने,या तेरे बच्चों को आपस में लड़ाने,या तेरी बच्चियों के साथ व्यभिचार करने, या किसी भी रूप में तुझे लूटने-खसोटने के व्यापार या उपक्रम में नहीं लगूंगा….!!”
“नहीं यार मैं झूठ नहीं बोलता….और यह बात तू अच्छी तरह जानता भी है….ये अलग बात है कि मैं ऐसा कुछ कर नहीं पा रहा कि तू मुझपर गर्व कर सके….या ऐसा कुछ नहीं पा रहा कि तेरा मनोबल बढे….और तू पहले की तरह सोने-चांदी से लहलहा उठे…तू फिर दूध भरी नदियों से लबालब हो सके….तू फिर ऐसा इक पेड़ हो जाए…जिसकी हर टहनी पर सोने की चिडिया फुर्र-फुर्र करती बोलती-बतिया सके….!!”
“हाँ यार, तू ठीक कह रहा है…..अब तेरी पहली चिंता यह नहीं है, बल्कि यह है कि कैसे तेरी हर संतान को भोजन नसीब हो सके…कैसे तेरा हर बच्चा सुखपूर्वक जीवन-यापन कर सके….यार मेरे मैं जब भी तुझे ऐसा चिंतित देखता हूँ तो मेरी भी आँखें भर-भर आती हैं….मगर धन-बल से मैं इतना समर्थ ही कहाँ कि तेरी समस्त संतानों को यह सब प्रदान कर पाऊं….फिर भी मेरे यार, मुझसे जो भी बन पड़ता है…अवश्य करता हूँ…सच यार….भगवान कसम !!”
“देख हर जगह ऐसा होता है…और तू भी जानता है कि पाँचों उंगलियाँ बराबर तो नहीं ही होती….!!”
“हाँ यार…!! इतना अधिक फर्क कि अरबों बच्चे तो भूखे मरे…और कुछेक बच्चे इतना-इतना डकार जाएँ कि उनको हगने की भी जगह ना मिले….!!…बात तो तेरी एकदम दुरुस्त है… लेकिन कोई इस बारे में क्या कर सकता है….बता ही तो सकता है कि क्या अच्छा है और क्या बुरा…और कोई हजारों-लाखों-करोडों-अरबों बार कहने के बावजूद ना माने तो…तो फिर कैसे क्या हो….कैसे यह सब कुछ बदले…कैसे यह सब ठीक हो….और कैसे तू सही तरह से हंस भी पाए….!!”
“हाँ यार तेरी बात बिलकुल सच्ची है, बल्कि सोलह तो क्या बीस आना खरी है कि ये जो बच्चे हैं…ये इस बात पर तो सदा गर्व करते हैं कि किसी जमाने में तू कितनी बड़ी कद-काठी का था…और उनके माँ-बाप के माँ-बाप….यानि कि उनके समस्त पूर्वज तुझपर अपने जीवन से बहुत-बहुत अधिक फक्र महसूस करते थे….बहुत अभिमान महसूस करते थे…मगर पता नहीं इन्हें यह क्यों नहीं समझ आता कि इनके पूर्वज भी तो अपने माँ-बाप यानि कि तेरे लिए…तेरा भाल ऊपर उठाने के कितना-कितना यत्न करते थे….कितना खटते थे…कितना व्याकुल रहते थे इस बात के लिए कि उनकी किसी गलती से तेरा सर नत-मस्तक ना हो जाए….!!”
“बेशक तू कुछ नहीं कह पाता यह सब मगर मैं तेरी बात समझता हूँ मेरे यार,मगर मैं सब समझता हूँ….तेरी हालत मुझसे कभी छिप नहीं पाती….और मैं तुझे यह वचन देता हूँ….कि आने वाले दिनों में मुझसे जो कुछ भी बन पड़ेगा….अवश्य-अवश्य-अवश्य करूंगा….करता तो मैं अब भी हूँ मेरे यार, भले सार्वजनिक-या सामाजिक रूप से या ढिंढोरा पीट-पीट कर नहीं,मगर ऐसा कभी भी नहीं हुआ कि मैंने तेरे बारे में कुछ भी बुरा सोचा हो…या तुझसे जान-बूझकर बुरा किया हो….या ऐसा कुछ भी करने की चेष्टा की हो जिससे मुझे तो फायदा और तुझे हानि होती हो….!!!!”
अच्छा यार ,अब चलता हूँ मैं !! बच्चों को स्कूल से लेकर आना है ,लेकिन मैंने तुझसे जो वादा किया है ,वो मैं अवश्य निभाउंगा….और हाँ मैं यह भी कोशिश करूँगा कि तेरे इस आँगन में तेरे सारे बच्चों को एक साथ खडा कर दूँ कि तेरी सारी सतानें ना सिर्फ़ बिना लड़े-झगडे एक साथ रह सकेंबल्कि वो एक दूसरे के दुःख दर्द में शामिल भी हो सकें,एक समाज में रहते हुए कोई कहीं भी भूखा ना मर सके !!”
एक काम मगर तो किसी भी तरह तू मेरा भी कर दे ना….वो यह कि तेरी संतानें तुझसे कम-से-कम इतना तो प्रेम करें कि उन्हें तेरी इज्जत अपनी इज्जत लगे….तेरा दर्द अपना दर्द लगे….और तेरी सारी संतानें उन्हें अपने ही सगे भाई-बहन….!! बस इतना भर हो जाए तो मेरा काम आसान हो जाएगा…!!”
बाकि तू और मैं चाहे कुछ कर सके या ना कर सकेमगर मुझे यह उम्मीद है कि आखिरकार ये सारे लोग एक दिन ठोकर खाकर संभल जायेंगे….और सच बताऊँ मेरे यार….ठोकर खाकर भी ना संभले तो किधर जायेंगे….
जाते जाते एक शेर कहीं सुना था उसे तुझे सुना जाता हूँ
मैंने तुझसे चाँद-सितारे कब मांगे….
रौशन दिल बेदाग नज़र दे या अल्लाह !!” अब चलता हूँ मेरे यार मेरे प्यार !!”

अपना रिसुमे पोस्ट karen

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फ़तेह्पुर: सब स्टेशनों की पावर क्षमता बढ़ाने का फ़ैसला

खुशखबरी !! ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था पटरी पर लाने के लिए शासन ने चार सब स्टेशनों की पावर क्षमता बढ़ाने को हरी झंडी दे दी है। जिसके तहत संबंधित विभागीय अधिकारी को धन अवमुक्त करा दिया गया है। इन सब स्टेशनों की आवश्यकतानुसार क्षमता बढ़ाकर जल्द ही बिजली संकट दूर करने की कवायद शुरु कर दी जाएगी। विभागीय जानकारों की माने तो इन क्षेत्रों में बिजली संबंधी कई तरह की समस्याएं उपभो1ताओं के बीच बनी रहती थी। जिसके तहत विभागीय अधिकारियों ने क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था।पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के तहत जिले के चार सब स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने के प्रस्ताव को शासन ने मंजूर कर लिया है। इन सब स्टेशनों में शहर स्थित राधानगर उपकेंद्र प्रथम श्रेणी   में है। इसके बाद सौंरा, बिंदकी और जहानाबाद स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने को हरी झंडी मिली है। सब स्टेशनों की पावर क्षमता बढ़ाने के लिए 1 करोड़ 64 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं। जिसमें 1 करोड़ 20 लाख रुपए की धनराशि विद्युत वितरण खंड अधिशासी अभियंता द्वितीय को अवमुक्त  करा दी गई है।
सब स्टेशनों में आवश्यकतानुसार पांच से 10 एमवीए तक के ट्रांसफारमर लगाए जाएंगे। मालूम हो कि इन सब स्टेशन सर्किलों के उपभोक्ता और बिजली अधिकारी पावर क्षमता बढ़ाने की की मांग शासन से करते आ रहे हैं। शासन ने मांगों पर अमल करते हुए स्वीकृति देकर संबंधित अधिकारी को जल्द कार्य शुरू कराने के लिए निर्देशित किया है।

 

ट्रांसफारमरों की क्षमता बढ़ाई जाएगीtransformer

 

 

  अधिशासी अभियंता पी राम ने बताया कि उपभोक्ताओ द्वारा बिजली की कई समस्याओं को दूर करने की मांग की जा रही है। ऐसे में सब स्टेशनों की झमता बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। जिसमें स्वीकृत मिलने के साथ ही प्रस्तावित धनराशि में 1 करोड़ 20 लाख रुपए धनराशि उपल4ध करा दी गई है। जल्द ही लो वोल्टेज की शिकायती वाले क्षेत्रों के ट्रांसफारमरों की क्षमता बढ़ाने का कार्य शुरू किया जाएगा।

 

 

एक नजर
स्वीकृत सब स्टेशन- राधानगर, सौंरा, बिंदकी, जहानाबाद
प्रस्तावित धनराशि- एक करोड़ 64 लाख रुपए
अवमुक्त  धनराशि- एक करोड़ 20 लाख रुपए
ट्रांसफारमर क्षमता- पांच से 10 एमवीए
समस्या समाप्त होगी- टि्रपिंग, लो वोल्टेज आदि

हाँ,दुनिया इसी की तलाश में है…..!!

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रोज-ब-रोज सूरज उग रहा है,रोज-ब-रोज रात हो रही है.आदमी के सम्मुख अँधेरा और उजाला दोनों ही हर वक्त होते हैं.मगर आदमी अँधेरे को ही पहले तरजीह देता है !!क्योंकि अँधेरे में ही उसकी समस्त वासनाओं का शमन होता है !!आदमी धीरे-धीरे एक ऐसी चीज़ में परिणत होता जा रहा है जो हर वक्त सिर्फ-व्-सिर्फ अपने और अपने स्वार्थ को येन-केन-प्रकारेण पूरा करने के बारे में सोचती रहती है.जीवन को भरा-पूरा बनाने के साधनों का एक ऐसा अंतहीन तिलिस्म आदमी ने अपने चारों तरफ फैला लिया है कि उनको प्राप्त करने की जद्दोजहद में उसकी कमर टूट जा रही है,और उसे अपनी जरूरतों से इतर कुछ भी सच पाने को कोई अवकाश ही नहीं है,और इस बारे में कुछ भी सोचने का प्रयास भी नहीं,तो इस तिलिस्म से बाहर आने के बारे में कुछ अपेक्षा करना भी बेमानी है !!
आदमी अपने-आप को सदा पशुओं से ऊपर बता रहा है,सिर्फ इस बुनियाद पर कि उसमें विवेक नाम की कोई चीज़ है,वो हँसता है,बोलता है,नाचता है और सबसे बढ़कर सोचता है !!और मज़ा यह कि इन्हीं बुनियादों पर वह पशु-जगत को अपने से दीन-हीन बतलाता रहा है और यहाँ तक कि उसने हर वक्त पशुओं को अपनी जरुरत तथा प्रयोगों का साधन बनाया हुआ है !!आदमी के हाथ में एक दुर्दमनीय पीडा से छटपटाते ये पशु कुछ बोल नहीं पाने के कारण आदमी नामक इस स्वनामधन्य विवेकशील जीव द्वारा मार दिए जाते हैं,मानवता की सेवा करने की आड़ में पशु-जगत आदमी के तमाम काले-कारनामों का शिकार बनता रहा है,बन रहा है !!और मज़ा यह कि आदमी विवेकशील है!!
प्रेम-मुहब्बत-भाईचारे की बात बहुत करता है यह आदमी…तुर्रा यह कि इसकी दुनिया में बाबा आदम के जमाने से अब तक भी ये चीज़ें इसे नसीब नहीं हो पायी हैं जबकि आदमी की सिर्फ एक ही जात है और वह है आदमी…!!और जिस जात को वह पशु मानता है वह धरती और गगन में असंख्य किस्म की होने के बावजूद आदमी से असंख्य गुणा प्रेम-मुहब्बत और भाईचारे के संग रहती है….!!आदमी अपनी एक-मात्र जात के बावजूद भी एक-दुसरे से कई-कई गुणा दूर है,यहाँ तक कि एक-दुसरे के विरुद्द एक अंतहीन नफरत से भरा हुआ और तमाम वक्त एक-दुसरे से लड़ता हुआ….लड़ता ही लड़ता हुआ !!और बाकी का पशु-पक्षी जगत अपनी अनगिनत रूपों की विभिन्नता के बावजूद एक-दुसरे के संग लगभग शालीनता से रहता हुआ,यहाँ के आदमी के लिए प्रेरणादायी होने तक !!
फिर भी आदमी जानवरों को लतियाता है,आदमी को भी लतियाता है,अपने बच्चों को लतियाता है,बड़े-बूढों को लतियाता है,स्त्रियों को लतियाता है,कमजोरों को लतियाता है,अपने से तमाम कमतर कहे जाने वाले लोगों को लतियाता है,हालांकि कमतर समझना उसका खुद का ही पैदा किया हुआ एक अनावश्यक विचार होता है….इस बारे में उसमें कई किस्म की बेजोड़ भ्रांतियां है,मज़ा यह कि जिन्हें वह तथ्य समझता हुआ उसी अनुसार आचरण करता है,बिना यह जाने हुए कि यह आचरण उसे अपने ही बनाए हुए आदमी होने के विशेषणों के उसे विलग करता है !!आदमी के साथ सबसे बड़ी तो दिक्कत ही यही है कि अपनी ही गडी हुई तमाम परिभाषाओं को अपने अनुकूल बनाने या साबित करने के लिए यह उन परिभाषाओं का दम खुद ही घोंट देता है,अपने ही गडे हुए शब्दों के अर्थ हजारों-हज़ार निकाल लेता है,यहाँ तक कि उसके शब्द अपनी ही महत्ता खो देते हैं,यहाँ तक कि उनका सही अर्थ भी हम नहीं समझ पाते,यहाँ तक कि आदमी कहना क्या चाहता है,उसे खुद ही नहीं पता होता….फिर भी आदमी,आदमी है,और समस्त पशु-जगत से कहीं ऊपर है…!!….नीचे के स्थान से कि ऊपर के स्थान से यह तय होना बाकी है !!
सच बताऊँ तो आदमी जरुरत से ज्यादा समझदार है,इतना ज्यादा कि इतने ज्यादा की जरुरत ही नहीं,इतना ज्यादा कि हास्यास्पद की हद तक,इतना ज्यादा कि ज्यादा होना आपकी राह में रोड़ा बनने लगे और हर समय एक अंतहीन पीडा देने लगे और दूसरों को ना जाने किन-किन आधारों पर छोटा या बड़ा समझने लगे और तरह-तरह के अनावश्यक विवादों को जन्म देकर और फिर उन्हें सुलझाने के उपक्रमों में अपना और दूसरों का समय खोता करने लगे !!आदमी सच ही ब्रहमांड की सबसे अजूबी चीज़ है,लेता तो है वह खुदा से होड़ और करता है तमाम किस्म के शैतानियत से भरे और रूह को कंपा देने वाले भद्दे-गंदे-गलीच और बिलकुल ही घटिया कर्म….!!अपनी सहूलियत के लिए सब कुछ कर डालने को उत्सुक एक व्यभिचारी आत्मा…!!और अगर आदमी सचमुच ही ऐसा ही है तो खुद को ऊँचा या विवेकमान मानने की जिद्द क्यों ??खुद को पशु से बेहतर बताने की जिद्द क्यों….??आदमी सच कहूँ तो मसीहा भी बन सकता है,भगवान् भी बन सकता है,वह कुछ भी बन सकता है,उसमें इतनी ताब है,उसमें ऐसी रौशनी भी है….खुद को यदि इतना बेहतर समझने का ऐसा ही उसमें जज्बा है तो दिखाए अपना दम…और बन कर दिखा दे सही मायनों में दुनिया का देवता…हाँ दुनिया इसी की तलाश में है….हाँ दुनिया इसी की आस में है…..!!

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